हदीस अल-फ़ेया अल-बाग़िया
| हदीस अल-फ़ेया अल-बाग़िया | |
|---|---|
| विषय | एक विद्रोही समूह द्वारा अम्मार यासिर की हत्या के बारे में पैग़म्बर (स) की भविष्यवाणी |
| किस से नक़्ल हुई | पैग़म्बर (स) |
| दस्तावेज़ की वैधता | मुतवातिर हदीसें |
| शिया स्रोत | सिफ़्फीन की लड़ाई • इमाम हसन अल-अस्करी (अ) की तफ़सीर • अल-मुस्तरिश्द फी अल-इमामा |
| सुन्नी स्रोत | सहीह बुख़ारी • सहीह मुस्लिम • सोनन तिर्मिज़ी |
| प्रसिद्ध हदीसें | |
| हदीस सिलसिला अल ज़हब • हदीस सक़लैन • हदीसे किसा • मक़बूला ए उमर बिन हंज़ला • हदीसे क़ुर्बे नवाफ़िल • हदीसे मेराज • हदीसे वेलायत • हदीसे वेसायत | |
हदीस अल-फ़ेया अल-बाग़िया, पैग़म्बर मुहम्मद (स) से उल्लेख की गई एक प्रसिद्ध हदीस है जिसमें अम्मार यासिर के क़ातिलों को विद्रोही और "बाग़ी" समूह कहा गया है। इस हदीस ने सिफ़्फीन की लड़ाई के दौरान और इमाम अली (अ) की खिलाफ़त को सही साबित करने में विशेष भूमिका निभाई थी, और बहुत से शिया और सुन्नी विद्वानों ने इसका विश्लेषण इस सबूत के तौर पर किया है कि मुआविया और उनकी सेना बाग़ी थी।
यह हदीस शिया और सुन्नी दोनों के कई स्रोत में वर्णित हुई है, और कई हदीस विद्वानों ने इसे मुतवातिर माना है। हालांकि, इब्न तैमिया जैसे कुछ लोगों ने इसकी प्रामाणिकता पर संदेह किया है और हदीस के नस्स के खिलाफ़ मुआविया के इज्तेहाद को संदेह के दायरे में माना है। दूसरी ओर, सैयद मुर्तज़ा, शेख़ तूसी और फ़ख़रे-राज़ी जैसे मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इस हदीस को पैग़म्बर (स) की भविष्यवाणी की निशानी और इमाम अली (अ) की सच्चाई का प्रमाण माना है।
असरी-अल्बानी की किताब हदीस अल-फ़ेया अल-बाग़िया और बद्र अल-दीन अल-हौसी की अल-मजमूआ अल-वाफिया फी अल-फ़ेया अल-बाग़िया जैसी किताबों ने इस हदीस की सनद, इसके दलील होने और इसके ऊपर की गई आलोचनाओं की खास तौर पर जांच की है।
अवधारणा और महत्व
हदीस अल-फ़ेया अल-बाग़िया एक हदीस है जो पैग़म्बर मुहम्मद (स) ने अम्मार इब्न यासिर के बारे में बयान की थी, जो उनके साथियों (सहाबा) में से एक थे। इस हदीस में आया है: “अम्मार को एक बाग़ी समूह क़त्ल करेगा।”[१] “अल-फ़ेया’ अल-बाग़िया” शब्द का मतलब एक ऐसा गिरोह है जो सच्चाई के रास्ते से भटक गया है और सच्चे इमाम की आज्ञा का उल्लंघन करता है।[२]
अम्मार बद्र, ओहोद, खंदक़ और सिफ़्फीन की लड़ाइयों में मौजूद थे, और इस्लाम में मस्जिद (क़ुबा मस्जिद) बनाने वाले पहले व्यक्ति थे। वह सिफ़्फीन की जंग में इमाम अली (अ) की सेना में जंग करते हुए शहीद हुए, हालांकि मौजूद स्रोतों के अनुसार, वह 93 साल के थे।[३]
एक अन्य हदीस में, "विद्रोही समूह द्वारा मारे गए" अभिव्यक्ति का प्रयोग इमाम हुसैन (अ) के बारे में किया गया है।[४]
कहा गया है कि यह रिवायत उन निशानियों में से एक है जिसे पैग़म्बर (स) ने कठिन (फ़ितने) समय में लोगों को रास्ता दिखाने के लिए बताया था।[५] इसलिए, कुछ शिया[६] और सुन्नी[७] धर्मशास्त्रियों ने इमाम अली (अ) की ख़िलाफ़त की वैधता और मुअविया की विद्रोह को साबित करने के लिए इस हदीस का इस्तेमाल किया है।
वक़आ सिफ़्फ़ीन किताब में जो कहा गया है, उसके अनुसार इस हदीस ने सिफ़्फ़ीन की लड़ाई में दोनों पक्षों की वैधता का आकलन करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई; इस तरह से कि मुअविया के कुछ साथी इसे सुनकर संदेह का शिकार हो गये थे।[८] मुस्लिम धर्मशास्त्रियों जैसे सय्यद मुर्तज़ा (वफ़ात 436 हिजरी),[९] शेख़ तूसी (वफ़ात 460 हिजरी),[१०] इब्न हमज़ा तूसी (वफ़ात 600 हिजरी के बाद)[११] और फ़ख़्र-राज़ी (वफ़ात 544 हिजरी)[१२] ने इस कथन को भविष्यवाणी का संकेत और पैग़म्बर (स) का चमत्कार माना है।
प्रामाणिकता परीक्षण
शिया और सुन्नी हदीस के जानकारों ने "अल-फ़ेया अल-बाग़िया" हदीस को मुतवातिर माना है।[१३]
यह हदीस कई शिया स्रोतों में उल्लेख की गई है, जिसमें नस्र इब्न मुज़ाहिम (वफ़ात 212 हिजरी) की वक़आ अल-सिफ़्फ़ीन,[१४] इमाम हसन अल-अस्करी (अ) की तफ़सीर,[१५] तबरी कबीर (वफ़ात 310 हिजरी) की अल-मुस्तरिश्द फी अल-इमामा,[१६] और अली इब्न मुहम्मद खज्ज़ाज़ कुम्मी (वफ़ात लगभग 400 हिजरी) की किफ़ायतुल-असर शामिल हैं।[१७] इसी तरह से क़ाज़ी नोमान-मग़रिबी (वफ़ात 363 हिजरी) ने भी अपनी दो किताबों में इस हदीस का उल्लेख किया है,[१८] और क़ुतुब-रावंदी (वफ़ात 573 हिजरी) ने किताब अल-ख़राइज वल-जरा'येह में इसका उल्लेख किया है।[१९]
मुख्य सुन्नी स्रोतों में से, सहीह-बुख़ारी,[२०] सहीह मुस्लिम,[२१] मुसनद अहमद इब्न हनबल,[२२] और सोनन-तिर्मिज़ी[२३] जैसी किताबों में इस हदीस का वर्णन किया गया है।
अन्य सुन्नी स्रोतों में भी अलग-अलग व्याख्याओं और कथावाचकों के आख्यान के साथ इसका उल्लेख हुआ हैं, जिनमें अल-अज़दी,[२४] इब्न कुतैबा दैनवरी,[२५] इब्न साद,[२६] और बलाज़ोरी[२७] की रचनाएँ शामिल हैं।
हदीस अल-फ़ेया अल-बाग़िया किताब के शोधकर्ता ने इस हदीस की सात अलग-अलग स्रोतों की जांच की है।[२८] इन रिपोर्टों को हदीस के सुन्नी विद्वानों जैसे तिर्मिज़ी,[२९] नासिर अल-दीन अल-अल्बानी,[३०] और शुऐब अल-अर्नऊत,[३१] ने सही माना है।
हालांकि, सुन्नी सलफी विचारक इब्न तैमिया-हर्रानी ने दावा किया है कि हदीस के कुछ विद्वानों ने इस रिवायत को कमज़ोर (ज़ईफ़) माना है।[३२] इस दृष्टि के उत्तर में, यह कहा गया है कि इस हदीस का उल्लेख विभिन्न स्रोतों में किया गया है और बहुत से हदीस के विद्वानों ने इसे मुतवातिर माना है।[३३]
हदीस के पाठ से अंतरदृष्टि
हदीस के जानकारों ने अल-फ़ेया अल-बाग़िया हदीस से जो मतलब निकाला है, उनमें से कुछ यह है:
- वास्तविक इमाम के खिलाफ़ मुआविया और उसके साथियों की बग़ावत
इस हदीस में, इस्लाम के पैग़म्बर (स) ने अम्मार यासिर के क़ातिलों को "बाग़ी समूह" या विद्रोही गिरोह कहा है। क्योंकि अम्मार इमाम अली (अ) के साथ सिफ़्फ़ीन की लड़ाई में शहीद हुए थे, इसलिए हदीस के बहुत से टीकाकारों और जानकारो ने यह नतीजा निकाला है कि मुआविया और उसकी सेना ने सच्चे इमाम के खिलाफ़ बग़ावत की थी।[३४]
- जहन्नम की आग में बुलाना
कुछ हदीसों में, पैग़म्बर (स) ने अम्मार के क़ातिलों को "जहन्नम की आग की बुलाने वाला" (दुआत इला अन-नार) कहा है।[३५] कुछ तफ़सीर करने वालों के अनुसार, यह शब्द मुआविया और उसके साथियों के गुमराह हो जाने और रास्ते से भटक जाने को दिखाता है।[३६]
- विद्रोही समूह के खिलाफ़ जिहाद का दायित्व
इस हदीस के आधार पर, शिया[३७] और सुन्नी[३८] न्यायविदों ने फैसला सुनाया है कि जिहाद उस समूह के खिलाफ़ अनिवार्य है जो वैध इमाम और सच्चे शासक के खिलाफ़ विद्रोह करता है।
सिफ़्फ़ीन की जंग में अम्मार यासिर की शहादत पर प्रतिक्रियाएं
सिफ़्फ़ीन की लड़ाई में अम्मार यासिर की शहादत के बाद, मुआविया के कुछ मानने वालों में शक पैदा हो गया। वे अपनी लड़ाई के सही होने पर शक करने लगे, क्योंकि पैग़म्बर (स) की हदीस में अम्मार के क़ातिलों को "बाग़ी लोग" कहा गया था।[३९]
मुअविया का औचित्य और इमाम अली (अ) का जवाब
इन शकों के उत्तर में, मुआविया ने दावा किया कि इमाम अली (अ.स.) अम्मार की मौत के लिए ज़िम्मेदार थे, क्योंकि वे अम्मार को लड़ाई के मैदान में लाए थे। इस तर्क को कुछ लोगों ने, जैसे कि 10वीं सदी हिजरी के शाफ़ेई न्यायविद जानकार इब्न हजर हैतमी ने, इज्तेहाद का एक रूप माना है; इस प्रकार से अगर मुआविया ने इस इज्तेहाद में कोई ग़लती भी की हो, तो वह इनाम का हक़दार है।[४०] जवाब में, इमाम अली (अ.स.) ने एक उदाहरण देकर इस लॉजिक का खंडन किया और कहा: "अगर ऐसा है, तो फिर पैग़म्बर (स.अ.व.) हमज़ा के कातिल होंगे," क्योंकि उन्होंने हमज़ा को जंग के मैदान में भेजा था।[४१]
इज्तिहाद बनाम नस्स
ऐतिहासिक रिपोर्टों के अनुसार, मुआविया और उसके साथियों को अम्मार के रूतबे के बारे में पता था, और इमाम अली (अ.स.) की सेना में उनकी मौजूदगी ने उनमें से कुछ को शक में डाल दिया था।[४२] अलबानी सहित हदीस के कुछ विद्वानों ने मुअविया के शब्दों को पैग़म्बर (स) की स्पष्ट हदीस होने के कारण नस्स के विरुद्ध इज्तेहाद माना है और इसके ग़लत होने पर ज़ोर दिया है।[४३] यहां तक कि सुन्नी विचारक और शियों के आलोचक इब्ने तैमिया ने भी मुअविया की व्याख्या को ग़लत माना है और इसे खारिज कर दिया है।[४४]
फ़ुटनोट
- ↑ बुख़ारी, सहीह अल-बुख़ारी, 1433 हिजरी, भाग 1, पेज 491; कुशैरी नैशापूरी, सहीह मुस्लिम, 1334 हिजरी, भाग 8, पेज 186।
- ↑ अल्बानी, हदीस अल-फ़ेया अल-बाग़िया, 1435 हिजरी, पेज 10।
- ↑ अल्बानी, हदीस अल-फ़ेया अल-बाग़िया, 1435 हिजरी, पेज 10-11।
- ↑ शेख़ सदूक़, अयून अख़बार अल-रज़ा, नशरे जहान, भाग 2, पेज 26।
- ↑ अल्बानी, हदीस अल-फ़ेया अल-बाग़िया, 1435 हिजरी, पेज 10।
- ↑ इब्न शाज़ान, अल-ईज़ाह, 1363 शम्सी, पेज 521; इब्न अतिया, अबहा अल-मदाद, 1423 हिजरी, भाग 1, पेज 702; फ़ाज़िल मिक़दाद, अल-लवामेअ अल-इलाहिया, 1422 हिजरी, पेज 371; अल्लामा अमीनी, अल-ग़दीर, 1416 हिजरी, भाग 1, पेज 593।
- ↑ बग़दादी, उसूल अल-ईमान, 2003 ई, पेज 229; अल-ग़ज़ाली, मजमूआ रसायल अल-इमाम अल-ग़ज़ाली, 1416 हिजरी, पेज 454; तफ़्तज़ानी, शरह अल-मक़ासिद, 1412 हिजरी, भाग 5, पेज 289।
- ↑ इब्न मोज़ाहिम, वक़आ सिफ़्फ़ीन, 1404 हिजरी, पेज 340-346।
- ↑ सय्यद मुर्तज़ा, अल-ज़खीरा, 1411 हिजरी, पेज 405।
- ↑ शेख़ तूसी, अल-एख़्तेसास, 1406 हिजरी, पेज 291।
- ↑ इब्न हमज़ा, अल-साक़िब फ़ि अल-मनाक़िब, 1412 हिजरी, पेज 105।
- ↑ फ़ख़्र राज़ी, अल-अरबईन फ़ि उसूल अल-दीन, मकतबा अल-कुल्लियात अल-अज़हरिया, भाग 2, पेज 97।
- ↑ इब्न हजर असक़लानी, तहज़ीब अल-तहज़ीब, दार सादिर, भाग 7, पेज 409; सफ़दी, अल-वाफ़ी बिल वफ़यात, 1381 हिजरी, भाग 22, पेज 378; अल्लामा अमीनी, अल-ग़दीर, 1416 हिजरी, भाग 1, पेज 593।
- ↑ इब्न मोज़ाहिम, वक़आ सिफ़्फ़ीन, 1404 हिजरी, पेज 324-326।
- ↑ इमाम हसन अस्करी (अ.स.), अल-तफ़सीर अल-मनसूब इमाम अल-हसन अल-अस्करी, 1409 हिजरी, पेज 85-86।
- ↑ तबरी कबीर, अल-मुस्तरशद फ़ी अल-इमामा, 1415 हिजरी, पेज 658।
- ↑ ख़ज़्ज़ाज़ राज़ी, केफ़ायतुल असर, 1401 हिजरी, पेज 120-124।
- ↑ इब्न हय्युन, शरह अल-अख़बार, अल-नश्र अल-इस्लामी फ़ाउंडेशन, भाग 1, पेज 407 और 412; इब्न हय्युन, दआ'इम अल-इस्लाम, 1385 हिजरी, भाग 1, पेज 392-393।
- ↑ कुतुबुद्दीन रावंदी, अल-ख़रायज वल-जरायेह, 1409 हिजरी, भाग 1, पेज 68।
- ↑ बुख़ारी, सहीह अल-बुख़ारी, 1433 हिजरी, भाग 1, पेज 491।
- ↑ कुशैरी नैशापूरी, सहीह मुस्लिम, 1334 हिजरी, भाग 8, पेज 186।
- ↑ इब्न हनबल, मुसनद अहमद बिन हनबल, 1421 हिजरी, भाग 29, पेज 316।
- ↑ तिर्मिज़ी, सोनन अल-तिर्मिज़ी, 1395 हिजरी, भाग 5, पेज 669।
- ↑ अल-अज़दी, अल-जामेअ, 1403 हिजरी, भाग 11, पेज 240।
- ↑ इब्न कुतैबा, आलाम रसूलुल्लाह, 1441 हिजरी, पेज 239।
- ↑ इब्न साद, तबक़ात अल-कुबरा, 1968 ई, भाग 3, पेज 252।
- ↑ बलाज़ोरी, अंसाब अल-अशराफ़, 1959 ई, पेज 168।
- ↑ अल्बानी, हदीस अल-फ़ेया अल-बाग़िया, 1435 हिजरी, पेज 11-22।
- ↑ तिर्मिज़ी, सोनन अल-तिर्मिज़ी, 1395 शम्सी, भाग 5, पेज 669।
- ↑ नासिर अल-दीन-अलबानी, "हशिया", 1395 हिजरी, भाग 5, पेज 669।
- ↑ अर्नऊत, "हशिया", 1421 हिजरी, भाग 29, पेज 316।
- ↑ इब्न तैमिया, फ़तावा अल-कुबरा, 1408 हिजरी, भाग 3, पेज 456।
- ↑ अल्बानी, हदीस अल-फ़ेया अल-बाग़िया, 1435 हिजरी, पेज 44-47।
- ↑ मनावी, फैज़ अल-क़दीर, 1391 हिजरी, भाग 6, पेज 365।
- ↑ बुख़ारी, सहीह अल-बुख़ारी, 1433 हिजरी, भाग 1, पेज 491।
- ↑ अल्बानी, हदीस अल-फ़ेया अल-बाग़िया, 1435 हिजरी, पेज 27।
- ↑ अल्लामा हिल्ली, तज़किरा अल-फ़ोक़हा, 1414 हिजरी, भाग 9, पेज 408; नजफ़ी, जवाहिर अल-कलाम, 1421 हिजरी, भाग 11, पेज 239।
- ↑ इब्न हज़्म, अल-मुहल्ला, 1408 हिजरी, भाग 11, पेज 333; अल-मौसूआ अल-फ़िक़्हिया, 1410 हिजरी, भाग 20, पेज 205।
- ↑ नेसाई, ख़सायसे अमीरुल मोमिनीन, 1424 हिजरी, पेज 121।
- ↑ इब्न हजर हयतमी, अल-सवायक़ अल-मुहरेक़ा, तेहरान, पेज 331–333।
- ↑ मनावी, फ़ैज़ अल-क़दीर, 1391 हिजरी, भाग 6, पेज 365–366।
- ↑ इब्न ख़लदून, तारीख़े इब्न ख़लदून, 1408 हिजरी, भाग 2, पेज 628।
- ↑ अल्बानी, हदीस अल-फ़ेया अल-बाग़िया, 1435 हिजरी, पेज 43।
- ↑ इब्न तैमिया, मिन्हाज अल-सुन्नह अन-नबविया, 1406 हिजरी, भाग 4, पेज 414।
स्रोत
- इब्न तैमिया हर्रानी, अहमद बिन अब्दुल हलीम, अल फ़तावा अल कुबरा, बैरूत, दार अल कुतुब अल इल्मिया, 1408 हिजरी।
- इब्न तैमिया हर्रानी, अहमद बिन अब्दुल हलीम, मिन्हाज अल-सुन्नह अल-नबविया फी नक़्ज़ अल-कलाम अल-शिया अल-क़द्रिया, रियाज़, इमाम मुहम्मद बिन सऊद इस्लामिक विश्वविद्यालय, 1406 हिजरी।
- इब्न हजर अस्क़लानी, अहमद बिन अली, तहज़ीब अल-तहज़ीब, बेरूत, दार सादिर, अप्रकाशित तिथि।
- इब्न हजर हयतमी, अहमद बिन मुहम्मद, अल-सवायक़ अल-मोहरेक़ा फी रद्द ‘अला अल-बिद’आ वा अल-ज़िंदक़ा, तेहरान, अज्ञात प्रकाशन स्थान, अप्रकाशित तिथि।
- इब्न हज़म, अली बिन अहमद, अल-मुहल्ला बिल-आसार, बेरूत, दार अल-कुतुब अल-इल्मिया, 1408 हिजरी।
- इब्न हमज़ा, मुहम्मद बिन अली, अल-साकिब फी अल-मनाक़िब, क़ुम, अंसारियान, 1412 हिजरी।
- इब्न हनबल, अहमद, मुसनद अल-इमाम अहमद इब्न हनबल, बेरूत, अल-रेसाला संस्थान, 1421 हिजरी।
- इब्न हय्यून, नो'मान बिन मुहम्मद-मग़रबी, दआयम अल-इस्लाम, ज़िक्र अल-हलाल वल-हराम, वल क़ज़ाया वल अहकाम अन अहले-बैते रसूलुल्लाह अलैहि व अलैहिम अफ़ज़ल अस-सलाम, क़ुम, आल-अल-बैत संस्थान, 1385 हिजरी।
- इब्न हय्यून, नोमान बिन मुहम्मद-मग़रबी, शरह अल-अख़बार फी फ़ज़ाइल अल-आइम्मा अल-अतहार (स), क़ुम, क़ुम के इस्लामी धार्मिक शिक्षा केंद्र (हौज़ा ए इल्मिया) के शिक्षक समूह, इस्लामी प्रकाशन संस्थान, अप्रकाशित तिथि।
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- अल-अज़दी, मुअम्मर बिन राशिद, अल-जामेअ, बेरूत, इस्लामी कार्यालय का वितरण, 1403 हिजरी।
- अल-अलबानी, असरी, हदीस अल-फ़ेया अल-बाग़िया, तेहरान, मशअर प्रकाशन, 1435 हिजरी।
- अल-मौसूआ अल-फिक़्हिया, अवक़ाफ़ व इस्लामिक अफेयर्स मंत्रालय के प्रयास से, खंड 20, कुवैत, दार अल-सलासिल, 1410 हिजरी/1990 ई।
- इमाम हसन अस्करी (अ.स.), हसन बिन अली, अल-तफ़सीर अल-मंसूब इलल इमाम अल-हसन अल-अस्करी (अ.स.), क़ुम, इमाम अल-महदी मदरसा, अज्जलल्लाह तआला फ़रजहु अल-शरीफ़, 1409 हिजरी।
- बुख़ारी, मुहम्मद बिन इस्माइल, सहीह अल-बुख़ारी, क़ाहिरा, दार अल-तासिल, 1433 हिजरी।
- बग़दादी, अब्दुल काहिर बिन ताहिर, उसूल अल-ईमान, बेरूत, दार व अल-हिलाल पुस्तकालय, 2003 ई।
- बलाज़री, अहमद बिन यह्या, अंसाब अल-अशरफ़, मिस्र, दार अल-मआरिफ़, 1959 ई।
- तिर्मिज़ी, मुहम्मद बिन ईसा, सोनन अल-तिर्मिज़ी, मिस्र, मुस्तफ़ा अल-बाबी अल-हलबी पुस्तकालय एवं मुद्रणालय कंपनी, 1395 हिजरी।
- तफ़्ताज़ानी, मसऊद इब्न उमर, शरह अल-मक़ासिद, क़ुम, शरीफ़ अल-रज़ी, 1412 हिजरी।
- हुसैनी अश्कवरी, अहमद, मोअल्लेफ़ात अल-ज़ैदिया, क़ुम, आयतुल्लाह मरअशी नजफ़ी का पुस्तकालय, 1413 हिजरी।
- ख़ज़्ज़ाज़-राज़ी, अली इब्न मुहम्मद, किफ़ायतुल असर फ़िन नस्से अलल आइम्मा अल-इसना अशर, क़ुम, बीदार, 1401 हिजरी।
- सैय्यद मुर्तज़ा, अली इब्न हुसैन, अल-ज़ख़ीरा फ़ि ‘इल्म अल-कलाम, क़ुम, क़ुम के इस्लामी धार्मिक शिक्षा केंद्र (हौज़ा ए इल्मिया) के शिक्षक समूह, इस्लामी प्रकाशन संस्थान, 1411 हिजरी।
- शेख़ सदूक़, मुहम्मद इब्न अली, उयून अख़बार अल-रिज़ा (अ), तेहरान, जहान प्रकाशन, अप्रकाशित तिथि।
- शेख़ तूसी, मुहम्मद इब्न हसन, अल-इक़्तेसाद फ़ीमा यतअल्लक़ बिल-एतेक़ाद, बेरूत, दार अल-अज़वा, 1406 हिजरी।
- सफ़दी, ख़लील इब्न ऐबक, अल-वाफी बिल-वफ़यात, बेरूत, फ्रांज स्टेनर प्रकाशन केंद्र, 1381 हिजरी।
- तबरी कबीर, मुहम्मद बिन जरीर बिन रुस्तम, अल-मुस्तर्शद फ़ी इमामते अली बिन अबी तालिब की इमामत (अ), क़ुम, कोशानपुर, 1415 हिजरी।
- अल्लामा अमीनी, अब्दुल हुसैन, अल-ग़दीर फ़िल-किताब वल सुन्नत वल अदब, क़ुम, अल-ग़दीर इस्लामी अध्ययन केंद्र, 1416 हिजरी।
- अल्लामा हिल्ली, हसन बिन यूसुफ, तज़किरा अल-फ़ोकहा, क़ुम, आल-अल-बैत (अ) संस्थान लेएहया अल-तुरास, 1414 हिजरी।
- ग़ज़ाली, मुहम्मद बिन मुहम्मद, मजमूआ रसायल इमाम अल-ग़ज़ाली, बेरूत, दार अल-फ़िक्र, 1416 हिजरी।
- फ़ाज़िल मिक़दाद, मिक़दाद बिन अब्दुल्लाह, अल-लवामेअ अल-इलाहिया फ़िल-मबाहिस अल-कलामिया, क़ुम, क़ुम के धार्मिक शिक्षा केंद्र (हौज़ा ए इल्मिया) का इस्लामी प्रचार कार्यालय, 1422 हिजरी।
- फ़ख़र राज़ी, मुहम्मद बिन उमर, अल-अरबईन फ़ी उसूल अल-दीन, क़ाहिरा, अल-कुल्लियात अल-अज़हरी पुस्तकालय, अप्रकाशित तिथि।
- कुशैरी नैशापूरी, मुस्लिम इब्न अल-हज्जाज, सहीह मुस्लिम, तुर्की, अल-तबाआ अल-आमेेरा प्रकाशन केंद्र, 1334 हिजरी।
- कुतुब अल-दीन रावंदी, सईद इब्न हिबतुल्लाह, अल-ख़रायज वा अल-जरा’येह, क़ुम, इमाम महदी (अ) संस्थान, 1409 हिजरी।
- मनावी, मुहम्मद अब्दुल रऊफ़ इब्न ताज अल-आरिफ़ीन, फ़ैज़ अल-क़दीर: शरह अल-जामेअ अल-सग़ीर, बेरूत, अल-मारेफ़ा प्रकाशन केंद्र, 1391 हिजरी।
- नासिर अल-दीन-अल्बानी, मुहम्मद, “حاشیه (टिप्पणी)” सोनन अल-तिर्मिज़ी, मुहम्मद इब्न ईसा अल-तिर्मिज़ी द्वारा लिखित, मिस्र, मुस्तफ़ा अल-बाबी अल-हलबी पुस्तकालय एवं मुद्रणालय कंपनी, 1395 हिजरी।
- नजफी, मुहम्मद हसन इब्न बाक़िर, जवाहिर अल-कलाम फी शरह शरायेअ अल-इस्लाम, क़ुम, अहले बैत (अ) के मत पर इस्लामी न्यायशास्त्र (फ़िक़्ह) के ज्ञानकोश संस्थान, 1421 हिजरी।
- नेसाई, अहमद इब्न अली, ख़लायसे अमीरल मोमिनीन, अली इब्न अबी तालिब, बेरूत, अल-असरिया प्रकाशन, 1424 हिजरी।