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इमाम अली अलैहिस सलाम के फ़ज़ाइल (अरबीः فضایل امام علی علیه السلام) उन आयात, हदीस, विशेषताओं और ऐतिहासिक घटनाओ का कहा जाता हैं जिनमें शियों के पहले इमाम हज़रत अली (अ) के फ़ज़ाइल का वर्णन होता है। पवित्र पैगंबर (स) ने इस बात का वर्णन किया है कि इमाम अली (अ) के फ़ज़ाइल अगण्नीय है। पैगंबरे अकरम (स) की एक हदीस के अनुसार, हज़रत अली (अ) के फ़ज़ाइलो को पढ़ना, लिखना, देखना और सुनना पापों की क्षमा का कारण है।

इमाम अली (अ) के फ़ज़ाइल दो श्रेणियों में विभाजित हैं: एक श्रेणी उन फ़ज़ाइल की हैं जो केवल इमाम अली (अ) से मख़सूस हैं, जबकि दूसरी श्रेणी उन फ़ज़ाइल की हैं जिनमें दूसरे इमाम और अहले-बैत (अ) सम्मिलित हैं: आय ए विलायत, आय ए शिरा आय ए इन्फ़ाक़, हदीसे ग़दीर, हदीसे तैर, हदीसे मंज़िलत, मौलूदे काबा और ख़ातम बख़्शी (अंगूठी देना) आपके विशेष फ़ज़ाइलो में से हैं। जबकि आय ए तत्हीर, आय ए अहले-ज़िक्र, आय ए मवद्दत और हदीसे सक़लैन आदि में अहले-बैत (अ) के अन्य सदस्य भी आपके साथ शामिल हैं।

बनी उमय्या के काल में आपके गुणों (फ़ज़ाइल) के प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इस अवधि के दौरान आपके गुणों का अनुकरण करने वालों को या तो मार दिया गया या जेल में डाल दिया गया। इसी तरह, मुआविया के आदेश ने इमाम अली (अ) के फ़ज़ाइल के मुक़ाबले में तीन ख़लीफाओं के लिए फ़ज़ीलत घड़ने वालों को प्रोत्साहित किया जाता था। कुछ इतिहासकारों का मत है कि यही कारण है कि अहले-सुन्नत स्रोतों में इमाम अली (अ) के फ़ज़ाइल का बहुत कम वर्णन हुआ है।


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हरम ए इमाम अली अलैहिस सलाम