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ख़ैर अल उमूर औसतोहा

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नस्तलीक़ लीपी मे उस्ताद अकबर साअतची द्वारा लिखी गई रिवाय ख़ैर अल उमूर ओसतोहा

ख़ैर अल उमूर औसतोहा[१] या ख़ैर अल उमूर औसातोहा[२], जिसका अर्थ होता है "मध्यमता में श्रेष्ठता है" यह एक हदीस है जिसे शिया और सुन्नी दोनों स्रोतों में वर्णित किया गया है। यह हदीस पवित्र पैग़म्बर (स),[३] इमाम अली (अ),[४] इमाम काज़िम (अ),[५] से वर्णित की गई है, और इसे बिहार उल अनवार किताब में हदीस क़ुदसी के रूप में प्रस्तुत किया गया है।[६]

कुछ लोगों ने इस रिवायत को कमज़ोर माना है[७] और कुछ का मानना है कि इसका प्रयोग उन मामलों तक सीमित है जहां संदेह या विरोधाभास है।[८]

कुछ विद्वानों ने इस रिवायत में "औसत" शब्द की व्याख्या बीच के बजाय "सबसे बुद्धिमान" के रूप में की है, और वे इस व्याख्या को सूर ए क़लम की आयत 28 और सूर ए बक़रा की 143 से संबंधित मानते हैं।[९] नहजुल बलाग़ा के टीकाकार इब्ने अबिल हदीद का मानना है कि शब्दकोश मे "औसत" का अर्थ सर्वश्रेष्ठ है और क़ुरआन में "उम्मत ए वसत" शब्द सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रों को संदर्भित करता है।[१०]

शिया टीकाकार और न्यायविद नासिर मकारिम शिराज़ी के अनुसार, नैतिक गुणों के लिए हमेशा कोई बीच का रास्ता नहीं होता और कुछ मामलों में, बहुत ज़्यादा चीज़ें भी सही होती हैं, जैसे कि अल्लाह के करीब जाना।[११] शिया फलॉसफर मुहम्मद तक़ी मिस्बाह भी मानते हैं कि अल्लाह के करीब जाना और ज्ञान जैसी अवधारणा के लिए कोई बीच का रास्ता नहीं होता, क्योंकि उनके अनगिनत पहलू होते हैं।[१२]

इस हदीस से मिलती जुलती हदीसों में "खैर अल उमूर" का उदाहरण दिया गया है, जिसमें अल्लाह की खुशी, अच्छा अंत, सच्चाई का ज्ञान, लालच से आज़ादी और इंसानी सुधार जैसी चीज़ें शामिल हैं।[१३]

कुछ लोगों का मानना है कि शिया इमामों का व्यवहार कुछ मामलों में संयम के हिसाब से नहीं है, जैसे कि जब इमाम अली (अ), हज़रत फ़ातिमा (स), और हसनैन (अ) ने तीन दिन तक अपना खाना गरीबों, अनाथों और क़ैदियों को दिया, या जब इमाम हसन (अ) ने अपनी सारी दौलत गरीबों को दे दी।[१४] अब्दुल्लाह जवादी आमोली का मानना है कि आम लोगों के लिए "खैर अल उमूर औसतोहा" का अर्थ अत्यधिकता और न्यूनता से बचना है, लेकिन शिया इमामों के लिए, जो कि एक आदर्श हैं, सबसे अच्छे काम का मतलब कार्रवाई का उच्चतम स्तर है।[१५]

फ़ुटनोट

  1. ↑ अजलूनी, कश्फ़ अल ख़फ़ा, भाग 1, पृष्ठ 391।
  2. ↑ शेख मुफ़ीद, अल इरशाद, भाग 2, पृष्ठ 234।
  3. ↑ साफ़ी, अल जदवल फ़ी ऐराब अल कुरआन, भाग 15, पृष्ठ 49; इब्ने अतीया अंदलूसी, अल मोहर्रिर अल मूजिज़, भाग 1, पृष्ठ 219।
  4. ↑ मजलिसी, बिहार उल अनवार, भाग 75, पृष्ठ 11।
  5. ↑ अर्बेली, कश्फ़ अल ग़ुम्मा, भाग 2, पृष्ठ 229; कुलैनी, अल काफ़ी, भाग 6, पृष्ठ 541।
  6. ↑ मजलिसी, बिहार उल अनवार, भाग 74, पृष्ठ 166।
  7. ↑ देखेः अजलूनी, कश्फ़ अल ख़फ़ा, भाग 1, पृष्ठ 391।
  8. ↑ सरिखसी, अल मब्सूत, भाग 3, पृष्ठ 165; काशानी, बदाए अल सनाए, भाग 1, पृष्ठ 23।
  9. ↑ ज़ारेअयान, «نقلی به نفع یا علیه نظریه حد وسط ارسطوئی», पृष्ठ 66।
  10. ↑ इब्ने अबिल हदीद, शरह नहजुल बलाग़ा, 1377 शम्सी, भाग 17, पृष्ठ 29।
  11. ↑ मकारिम शिराज़ी, अख़लाक़ दर क़ुरआन, भाग 1, पृष्ठ 103।
  12. ↑ मिस्बाह, अख़लाक़ दर कुरआन, पृष्ठ 319।
  13. ↑ लैसी वासती, ओयून अल हुक्म वल मवाईज़, पृष्ठ 237।
  14. ↑ ज़ारेअयान, «نقلی به نفع یا علیه نظریه حد وسط ارسطوئی», पृष्ठ 72।
  15. ↑ जवादी आमोली, «باید در همه اوصاف علمی و عملی از افراط و تفریط پرهیز کرد»।

स्रोत

  • अजलूनी, इस्माईल, कश्फ़ अल ख़फ़ा, बैरूत, दार अल कुतुब अल इल्मिया प्रकाशन, 1408 हिजरी।
  • अर्बेली, अली बिन ईसा, कश्फ़ अल ग़ुम्मा फ़ी मारेफ़त अल आइम्मा, शोध और संशोधनः हाशिम रसूली महल्लाती, तबरेज़, बनी हाशमी प्रकाशन, पहला संस्करण, 1381 हिजरी।
  • इब्ने अतीया अंदलूसी, अब्दुल हक़ बिन ग़ालिब, अल मोहर्रिर अल मूजिज़ फ़ी तफ़सीर अल किताब अल अज़ीज़, शोधः अब्दुस सलाम अब्दुल शाफ़ी मुहम्मद, बैरूत, दार अल किताब अल इल्मिया प्रकाशन, पहला संस्करण 1422 हिजरी।
  • क़ुमी, अली बिन इब्राहीम, तफ़सीर क़ुमी, शोधः सय्यद तय्यब मूसवी जज़ाएरी, क़ुम, दार अल किताब प्रकाशन, 1367 शम्सी।
  • काशानी, अबि बक्र, बदाए अल सनाए, पाकिस्तान, अल हबीबीया प्रकाशन, 1409 हिजरी।
  • कुलैनी, मुहम्मद बिन याक़ूब, अल काफ़ी, तेहरान, दार अल कुतुब अल इस्लामिया प्रकाशन, 1363 शम्सी।
  • जवादी आमोली, अब्दुल्लाह, «باید در همه اوصاف علمی و عملی از افراط و تفریط پرهیز کرد», (हर प्रकार की इल्मी और अमली औसाफ़ मे इफ़रात और तफ़रीत से बचना चाहिए), इस्रा वेबसाइट, प्रविष्ट की तारीख 22 जून 2023 ई, देखे जाने की तारीख 6 अगस्त 2024 ई।
  • जारेअयान, शम्स अली, «نقلی به نفع یا علیه نظریه حد وسط ارسطوئی», (अरस्तू के मध्य सिद्धांत के पक्ष या विपक्ष में नक़ली (पारंपरिक) प्रमाण/दलीलें)) पत्रिका 'नैतिक अनुसंधान', अंक 19, वसंत 2015 ईस्वी।
  • मकारिम शिरज़ी, नासिर व दिगरान, अख़लाक़ दर क़ुरआन, क़ुम, इमाम अली (अ) विद्यालय, 1385 शम्सी।
  • मजलिस, मुहम्मद बाकिर, बिहार उल अनवार, बैरूत, मुद्रण एवं प्रकाशन संस्थान, 1410 हिजरी।
  • मिस्बाह, मुहम्मद तक़ी, अख़लाक़ दर क़ुरआन, मुहम्मद हुसैन असकंदरी के प्रयास से, क़ुम, इमाम ख़ुमैनी संस्थान, 1384 शम्सी।
  • लैसी वास्ती, अली, ओयून अल हुक्म वल मवाईज़, क़ुम, दार अल हदीस प्रकाशन, पहला संस्करण 1376 शम्सी।
  • शेख़ मुफ़ीद, मुहम्मद बिन मुहम्मद, अल इरशाद फ़ी मारफ़त हुजज अल्लाह अला ऐबाद, क़ुम, शेख मुफ़ीद कांफ़्रेंस, 1413 हिजरी।
  • सरिखसी, शम्सुद्दीन, अल मब्सूत, बैरुत, अल-मारेफ़ा मुद्रण, प्रकाशन और वितरण केंद्र, प्रकाशित तारीख उपलब्ध नहीं।
  • साफ़ी, महमूद बिन अब्दुर रहीम, अल जदवल फ़ी ऐराब अल क़ुरआन, दमिश्क-बैरूत, दार अल रशीद, अल ईमान संस्थान, 1418 हिजरी।
  • इब्ने अबिल हदीद, इज़्ज़ुद्दीन अबू हामिद, शरह नहजुल बलाग़ा, क़ुम, आयतुल्लाह मरअशी पुस्तकालय, 1377 शम्सी।