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सहीफ़ा सज्जादिया की पैंतालीसीं दुआ

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सहीफ़ा सज्जादिया की पैंतालीसवी दुआ
शाबान 1102 में अब्दुल्लाह यज़्दी द्वारा लिखित साहिफ़ा सज्जादिया की पांडुलिपि
शाबान 1102 में अब्दुल्लाह यज़्दी द्वारा लिखित साहिफ़ा सज्जादिया की पांडुलिपि
अन्य नामभलाई का आग्रह करने की दुआ
विषयरमज़ान के महीने को अलविदा करते समय पढ़ी जाने वाली दुआ, रमज़ान के महीने की विशेषताएँ, ईश्वर के प्रति आभार
प्रभावी/अप्रभावीप्रभावी
किस से नक़्ल हुईइमाम सज्जाद (अ)
कथावाचकमुतवक्किल बिन हारुन
शिया स्रोतसहीफ़ा सज्जादिया
दुआ-ए-तवस्सुल • दुआ-ए-कुमैल • दुआ-ए-नुदबा • दुआ-ए-समात • दुआ-ए-फरज • दुआ-ए-अबू हमज़ा सोमाली • ज़ियारत-ए-आशूरा • ज़ियारत-ए-जामिया कबीरा • ज़ियारत-ए-वारिस • ज़ियारत-ए-अमीनुल्लाह • ज़ियारत-ए-अर्बईन


सहीफ़ा सज्जादियी की पैंतालीसवीं दुआ (अरबीःالدعاء الخامس والأربعون من الصحيفة السجادية) इमाम सज्जाद (अ) की प्रसिद्ध दुआओ मे से एक है, जिसे आप रमज़ान के महीने को करते समय पढ़ते थे। इस दुआ में इमाम सज्जाद (अ) न केवल मनुष्यों पर ईश्वर के नेमत और सेवकों की आवश्यकता की कमी का उल्लेख करते हैं, बल्कि ईश्वर को उनके उपहारों के लिए धन्यवाद भी देते हैं। इस दुआ में हज़रत ज़ैनुल अबेदीन (अ) रमज़ान के महीने की फ़ज़ीलतो को सूचीबद्ध करते हुए उसे अलविदा कहते हैं और ईश्वर से अगले साल भी रमज़ान को सार्थक बनाने की दुआ करते हैं। ईद-उल-फित्र को पश्चाताप की आवश्यकता और दूसरों के लिए दुआ, साथ ही मुहम्मद (स) और उनके परिवार के लिए दुआ, इस दुआ के अन्य विषय हैं।

इस दुआ की व्याख्या का उल्लेख भी सहीफ़ा सज्जादिया की व्याख्याओ मे किया गया है जैसे फ़ारसी में हुसैन अंसारियान द्वारा लिखित दयारे अशेक़ान और हसन ममदूही किरमानशाही द्वारा लिखित शुहुद व शनाख़्त , और अरबी में सय्यद अली ख़ान मदनी द्वारा लिखित पुस्तक रियाज़ अल-सालेकीन मे किया गया है।

शिक्षाएँ

सहीफ़ा सज्जादिया की पैंतालीसवीं दुआ उन दुआओं में से एक है जिसे इमाम सज्जाद (अ) रमज़ान के महीने को विदा करते समय पढ़ते थे। ममदूही किरमानशाही के अनुसार इस दुआ की व्याख्या में, इमाम सज्जाद (अ) ने पैंतालीसवीं दुआ में भावनात्मक अभिव्यक्तियों के साथ इस महीने को विदा कहा। यह इस महीने के कुछ फ़ज़ीलतो और इसमें आस्तिक के कर्तव्यों का भी वर्णन करते है, ताकि यह अगले वर्ष रमज़ान के एक मार्गदर्शक के रूप में काम कर सके।[१] इस दुआ की शिक्षाएँ इस प्रकार हैं:

  • अपने सेवकों को दिए गए आशीर्वाद के बदले परमेश्वर द्वरा अज्र न लेना
  • अल्लाह को अपने बंदो की कोई आवश्यकता नहीं है
  • अल्लाह को अपने सेवकों को नेअमते देने पर कोई पछतावा नहीं है (अल्लाह के यहा पछतावा नहीं है)
  • ईश्वर की ज़ात, नाम, गुणो का अनंत होना
  • ईश्वर द्वारा बंदों को उनके कर्मों के अनुसार पुरस्कार देना
  • ईश्वर का दण्ड उसके न्याय (न्यायपूर्ण दण्ड) के समान ही है।
  • परमेश्वर की कृपा से सेवकों के पापों की क्षमा
  • परमेश्वर का अपने सेवकों को बिना किसी दायित्व के आशीर्वाद प्रदान करना
  • कृतज्ञ सेवकों के प्रति परमेश्वर की कृपा
  • सेवकों के पापों को ढकना
  • अपने सेवकों के विरोध के प्रति परमेश्वर का धैर्य
  • सेवकों के लिए ईश्वरीय क्षमा हेतु पश्चाताप के द्वार का खुला रहना
  • परमेश्वर का अपने सेवकों को सच्चे पश्चाताप के लिए बुलावा
  • जो व्यक्ति क्षमा के क्षेत्र में प्रवेश करने में लापरवाही बरतता है, उसके लिए कोई बहाना नहीं है।
  • क़यामत के दिन पापियों और ईमान वालों की स्थिति
  • ईश्वर के साथ लाभदायक सौदा (अच्छे कर्मों के लिए दस गुना पुरस्कार और पापों के लिए उतनी ही सजा)
  • विकास और उत्कृष्टता मनुष्य की शक्ति में है।
  • ईश्वरीय योजना का मानव स्वभाव के साथ संरेखण
  • दुआ करना एक प्रकार की इबादत है और दुआ को छोड़ देना अहंकार है।
  • ईश्वरीय आशीर्वाद के लिए सच्चे सेवकों का आभार
  • हमें चुने हुए धर्म की ओर मार्गदर्शन करने के लिए ईश्वर को धन्यवाद
  • अहंकार दुआ से दूर होने का कारण है।
  • क़ुरआन की भाषा लोगों को ईश्वर की ओर आमंत्रित करने का सबसे अच्छा तरीका है।
  • अलौकिक रहस्यों को जानने का एकमात्र साधन रहस्योद्घाटन है।
  • ईश्वरीय कृपा और अनुग्रह ही ईश्वर की स्तुति का कारण है।
  • चुने हुए धर्म और उसे प्रसन्न करने वाले धर्म के लिए ईश्वर का मार्गदर्शन
  • क़ुरआन का नाज़िल होना और ईश्वरीय प्रकाश के आशीर्वाद के कारण रमजान के महीने की वर्ष के अन्य सभी समयों से श्रेष्ठता है।
  • रमज़ान के महीने में मुसलमानों की अन्य देशों पर श्रेष्ठता
  • रमज़ान के पवित्र महीने में दुनिया के लिए सबसे अच्छे लाभ
  • रमज़ान के महीने की कठिन और दुखद विदाई
  • रमज़ान सबसे प्यारा साथी है (रमज़ान के साथ होने का सुखद एहसास)
  • रमजान इच्छाओं और जरूरतों को पूरा करने का महीना है।
  • रमज़ान ईश्वर का सबसे महान महीना और ईश्वर के संतों का पर्व है।
  • रमज़ान एक ऐसा समय है जब दिल एक दूसरे के प्रति नरम हो जाते हैं।
  • पाप के प्रभाव को दूर करने और सामाजिक संबंधों को गहरा करने में रमजान का प्रभाव
  • रमज़ान शैतान से लड़ने में सहायक है (रोज़ा शैतान पर विजय पाने का सर्वोत्तम साधन है)
  • रमज़ान अनेक पापों की क्षमा का महीना है।
  • यात्रा और आचरण में आने वाली बाधाओं को दूर करने में रमजान का प्रभाव
  • ईमानवालों के दिलों में रमज़ान के महीने की महानता
  • रमज़ान के गुज़रने पर मानवीय दुःख
  • शब ए क़द्र हज़ार महीनों से बेहतर है।
  • रमज़ान की खूबियों से लाभ उठाने के लिए दुआ करना
  • रमज़ान के पवित्र महीने की रात में ईश्वरीय सफलता के लिए दुआ करना
  • रमज़ान के दौरान हुई गलतियों और चूकों के लिए ईश्वर से माफ़ी मांगना
  • रमज़ान के बकाया की एक छोटी राशि का भुगतान करने की बात स्वीकार करना
  • अगले वर्ष रमजान के महीने को समझने और ईश्वर के योग्य पूजा और रमजान के महीने के योग्य आज्ञाकारिता करने के लिए प्रार्थना करता हूं।
  • रमज़ान के नुकसान की भरपाई के लिए दुआ करना
  • अच्छे कर्मों का श्रेय ईश्वर को और कमियों का श्रेय मनुष्य को देना
  • परमेश्वर के प्रिय पश्चातापियों में शामिल होने का अनुरोध।
  • रमज़ान में सबसे खुश लोगों में शामिल होने की दुआ करना
  • उच्च मानवीय स्थिति प्राप्त करने के लिए जीवन की पूंजी का उपयोग करने की आवश्यकता
  • रमज़ान के महीने का हक़ पूरा करने वाले के लिए एक अच्छी दुआ।
  • अपराधियों के लिए रमजान का लंबा महीना
  • मोमिनों के दिलों में रमज़ान के महीने का खौफ
  • रमज़ान के महीने के दिनों का कोई मुकाबला नहीं है।
  • रमज़ान के आने से पहले ही इसकी लोकप्रियता और ख़त्म होने से पहले ही इसका दुख
  • रमजान के महीने की बरकतों से बुराई का नाश और अच्छाई का स्वागत
  • इस महीने में रोज़ा रखने वाले और इस महीने की मासिक मजदूरी देने वाले व्यक्ति के समान सवाब की माँग करना।
  • ईश्वर से भय और आशा का स्थान मांगना
  • हमें जो दण्ड दिया जाता है उसके भय से मुक्ति पाने के लिए तथा हमें जो पुरस्कार देने का वादा किया गया है उसकी लालसा से मुक्ति पाने के लिए दुआ करना
  • दुआ यह समझने के लिए है कि हम परमेश्वर से क्या मांगते हैं, उससे हमें क्या खुशी मिलती है, तथा हम उससे क्या शरण मांगते हैं, उससे हमें क्या दुःख होता है।
  • ईद-उल-फ़ित्र को पश्चाताप की आवश्यकता, जिसके बाद पाप की ओर कोई वापसी नहीं होती
  • ईद-उल-फ़ित्र, विश्वासियों के लिए खुशी का दिन
  • भगवान पर विश्वास रखना
  • सभी पिताओं, माताओं और इस्लामी धर्म के लोगों के लिए दुआ करना
  • पैगम्बर (स) पर उसी तरह से दुरूद भेजना जिस तरह से करीबी फ़रिश्तों पर दुरूद भेजा जाता हैं
  • पैगम्बर और उनके परिवार पर आशीर्वाद का आह्वान करना और उनके आशीर्वाद और लाभों से लाभ उठाना
  • पैगम्बर और उनके परिवार पर आशीर्वाद के प्रकाश में दुआओ का उत्तर देने की दुआ करना।
  • सलावत पैग़म्बर (स) के प्रति कृतज्ञता की अभिव्यक्ति और उनकी शिक्षाओं को पुनर्जीवित करने का एक तरीका है।[२]

व्याख्याएँ

सहीफ़ा सज्जादिया की पैंतालीसवीं दुआ की भी व्याख्या दूसरी दुआओ की तरह की गई है। यह दुआ हुसैन अंसारियान की पुस्तक दयारे आशेकान,[३] हसन ममदूही किरमानशाही की शुहुद व शनाख्त,[४] और सय्यद अहमद फ़हरी की किताब शरह व तरजुमा सहीफ़ा सज्जादिया[५] मे फ़ारसी भाषा मे व्याख्या की गई है।

इस दुआ और रमज़ान के महीने की स्वागत वाली दुआ के साथ, अली करीमी जहरमी[६] द्वारा लिखित सीमा ए रमज़ान और सरोशे रमज़ान (रमज़ान की शुरुआत और अंत में इमाम सज्जाद की दुआ की शरह) किताबो में वर्णित है। सय्यद रज़ा बाक़िरयान मुवाहिद और अली बाक़री फ़र ने सरोश रमज़ान नामक किताब मे व्याख्या की है। इन दोनो किताबो मे रमज़ान के महीने के विभिन्न पहलुओं, ईद-उल-फ़ित्र की कुछ खूबियों और उस महीने से बाहर निकलने के तौर-तरीकों की जाँच की गई हैं।[७]

सहीफ़ा सज्जादिया की पैंतालीसवीं दुआ सय्यद अली खान मदनी की किताब रियाज़ अल सालेकीन[८] मुहम्मद जवाद मुग्निया की फी ज़िलाल अल-सहीफ़ा सज्जादिया,[९] मुहम्मद बिन मुहम्मद दाराबी की रियाज़ उल आरेफ़ीन[१०] और सय्यद मुहम्मद हुसैन फ़ज़लुल्लाह की आफ़ाक़ अल रूह[११] मे इसका वर्णन अरबी में किया गया है। इस दुआ के शब्दों को फ़ैज़ काशानी द्वारा तालीक़ा अला अल-सहीफ़ा सज्जादिया[१२] और इज़्ज़ुद्दीन जज़ाएरी द्वारा शरह अल-सहीफ़ा अल-सज्जादिया जैसी शाब्दिक टिप्पणियों में भी उल्लेक किया गया है।[१३]

पैतालीसवीं दुआ का पाठ और अनुवाद

पाठ
पाठ और अनुवाद
अनुवाद

وَ كَانَ مِنْ دُعَائِهِ عَلَيْهِ السَّلَامُ فِی وَدَاعِ شَهْرِ رَمَضَانَ

वा काना मिन दुआऐहि अलैहिस सलामो फ़ी वदाए शहरे रमज़ान

اللَّهُمَّ يَا مَنْ لَا يَرْغَبُ فِي الْجَزَاءِ

अल्लाहुम्मा या मन ला यरग़बो फ़िल जज़ाए

وَ يَا مَنْ لَا يَنْدَمُ عَلَى الْعَطَاءِ

व या मन ला यंदमो अलल अताए

وَ يَا مَنْ لَا يُكَافِئُ عَبْدَهُ عَلَى السَّوَاءِ.

व या मन ला योकाफ़ेओ अब्दहु अलस सवाए

مِنَّتُكَ ابْتِدَاءٌ، وَ عَفْوُكَ تَفَضُّلٌ، وَ عُقُوبَتُكَ عَدْلٌ، وَ قَضَاؤُكَ خِيَرَةٌ

मिन्नतोकब तेदाओ, व अफ़ूका तफ़ज़्ज़ोला, व उक़ूबतोका अदलुन, व क़ज़ाओका ख़ेयारतुन

إِنْ أَعْطَيْتَ لَمْ تَشُبْ عَطَاءَكَ بِمَنٍّ، وَ إِنْ مَنَعْتَ لَمْ يَكُنْ مَنْعُكَ تَعَدِّياً.

इन आतयता लम तशुब अताअका बेमन्ने, व इन मन्अता लम यकुन मनओका तअद्दियन

تَشْكُرُ مَنْ شَكَرَكَ وَ أَنْتَ أَلْهَمْتَهُ شُكْرَكَ

तशकोरो मन शकरका व अंता अलहमतहू शुकरका

وَ تُكَافِئُ مَنْ حَمِدَكَ وَ أَنْتَ عَلَّمْتَهُ حَمْدَكَ.

व तोकाफ़ेओ मन हमेदका व अंता अल्लमतहू हमदका

تَسْتُرُ عَلَى مَنْ لَوْ شِئْتَ فَضَحْتَهُ، وَ تَجُودُ عَلَى مَنْ لَوْ شِئْتَ مَنَعْتَهُ، وَ كِلَاهُمَا أَهْلٌ مِنْكَ لِلْفَضِيحَةِ وَ الْمَنْعِ غَيْرَ أَنَّكَ بَنَيْتَ أَفْعَالَكَ عَلَى التَّفَضُّلِ، وَ أَجْرَيْتَ قُدْرَتَكَ عَلَى التَّجَاوُزِ

तस्तोरो अला मन लो शेअता फ़ज़हतहू, व तजूदो अला मन लौ शेअता मनअतहू, व केलहोमा अहलुन मिन्का लिलफ़ज़ीहते वल नम्ऐ ग़ैरा इन्नका बनयता अफ़आलका अलत तफ़ज़्ज़ोले, व अजरयता क़ुदरतका अलत तजावोजे

وَ تَلَقَّيْتَ مَنْ عَصَاكَ بِالْحِلْمِ، وَ أَمْهَلْتَ مَنْ قَصَدَ لِنَفْسِهِ بِالظُّلْمِ، تَسْتَنْظِرُهُمْ بِأَنَاتِكَ إِلَى الْإِنَابَةِ، وَ تَتْرُكُ مُعَاجَلَتَهُمْ إِلَى التَّوْبَةِ لِكَيْلَا يَهْلِكَ عَلَيْكَ هَالِكُهُمْ، وَ لَا يَشْقَى بِنِعْمَتِكَ شَقِيُّهُمْ إِلَّا عَنْ طُولِ الْإِعْذَارِ إِلَيْهِ، وَ بَعْدَ تَرَادُفِ الْحُجَّةِ عَلَيْهِ، كَرَماً مِنْ عَفْوِكَ يَا كَرِيمُ، وَ عَائِدَةً مِنْ عَطْفِكَ يَا حَلِيمُ.

व तलक़ीता मन असाका बिल लहमे, व अमहलता मन क़सदा लेनफ़सेहि बिज़्जुलमे, तसतंज़ेरो हुम बेअनातेका एलल अनाबते, व ततरोको मोआजलतहुम एलत तौबते लेकैलन यहलेका अलैका हालेकोहुम, व ला यशक़ा बेनअमतेका शक़ीय्योहुम इल्ला अन तूलिल ऐज़ारे इलैहे, व बादा तरादोफ़िल हुज्जते अलैहे, करमन मिन अफ़वेका या करीमो, व आएदतुन मिन अतफ़ेका या हलीम

أَنْتَ الَّذِي فَتَحْتَ لِعِبَادِكَ بَاباً إِلَى عَفْوِكَ، وَ سَمَّيْتَهُ التَّوْبَةَ، وَ جَعَلْتَ عَلَى ذَلِكَ الْبَابِ دَلِيلًا مِنْ وَحْيِكَ لِئَلَّا يَضِلُّوا عَنْهُ، فَقُلْتَ- تَبَارَكَ اسْمُكَ-: «تُوبُوا إِلَى اللَّهِ تَوْبَةً نَصُوحاً عَسى‏ رَبُّكُمْ أَنْ يُكَفِّرَ عَنْكُمْ سَيِّئاتِكُمْ وَ يُدْخِلَكُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِنْ تَحْتِهَا الْأَنْهارُ

अंतल लज़ी फतहता लेएबादेका बाबन एला अफ़वेका, व सम्मयतहुत तौबता, व जअलता अला ज़ालेकाल बाबे दलीलन मिन वहयेका लेअल्ला यज़ेलू अन्हो, फ़कुलता-तबारकस मोका- तूबू एलल्लाहे तौबतन नसूहन असा रब्बकुम अन योकफ़्फ़िरे अन्कुम सय्येआतेकुम व युदखेलकुम जन्नातिन तज़री मिन तहतेहल अन्हारो

يَوْمَ لا يُخْزِي اللَّهُ النَّبِيَّ وَ الَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ، نُورُهُمْ يَسْعى‏ بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَ بِأَيْمانِهِمْ، يَقُولُونَ: رَبَّنا أَتْمِمْ لَنا نُورَنا، وَ اغْفِرْ لَنا، إِنَّكَ عَلى‏ كُلِّ شَيْ‏ءٍ قَدِيرٌ» فَمَا عُذْرُ مَنْ أَغْفَلَ دُخُولَ ذَلِكَ الْمَنْزِلِ بَعْدَ فَتْحِ الْبَابِ وَ إِقَامَةِ الدَّلِيلِ!

यौमा ला युख़ज़ेयल्लाहुन नबीय्या वल लज़ीना आमनू मअहू, नूरोहुम यस्आ बैना अयदीहिम व बेईमानेहिम यक़ूलूनाः रब्बना अत्मिम लना नूरना, वग़फ़िरलना, इन्नका अला कुल्ले शैइन कदीर [14], फ़मा उज़्रा मन आअफ़ला दोख़ूला ज़ालेकल मुनज़ेले बादा फ़त्हिल बाबे व इक़ामतिद दलीले

وَ أَنْتَ الَّذِي زِدْتَ فِي السَّوْمِ عَلَى نَفْسِكَ لِعِبَادِكَ، تُرِيدُ رِبْحَهُمْ فِي مُتَاجَرَتِهِمْ لَكَ، وَ فَوْزَهُمْ بِالْوِفَادَةِ عَلَيْكَ، وَ الزِّيَادَةِ مِنْكَ، فَقُلْتَ- تَبَارَكَ اسْمُكَ وَ تَعَالَيْتَ-: «مَنْ جاءَ بِالْحَسَنَةِ فَلَهُ عَشْرُ أَمْثالِها، وَ مَنْ جاءَ بِالسَّيِّئَةِ فَلا يُجْزى‏ إِلَّا مِثْلَها».

व अंतल लज़ी ज़िदता फ़िस्सौमे अला नफ़सेका लेएबादेका, तोरीजो रिबहहुम फ़ी मुताजारतेहिम लका, व फ़ौज़हुम बिल वफ़ादते अलैका वज़्ज़ियादते मिन्का, फ़क़ुलता-तबारकस मोका व तआलयता- मन जाआ बिल हसनते फ़लहू अशरो अमसालहा, व मन जाआ बिस सय्येअते फ़ला युजज़ा इल्ला मिसलहा [15]

وَ قُلْتَ: «مَثَلُ الَّذِينَ يُنْفِقُونَ أَمْوالَهُمْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ كَمَثَلِ حَبَّةٍ أَنْبَتَتْ سَبْعَ سَنابِلَ فِي كُلِّ سُنْبُلَةٍ مِائَةُ حَبَّةٍ، وَ اللَّهُ يُضاعِفُ لِمَنْ يَشاءُ» وَ قُلْتَ: «مَنْ ذَا الَّذِي يُقْرِضُ اللَّهَ قَرْضاً حَسَناً فَيُضاعِفَهُ لَهُ أَضْعافاً كَثِيرَةً» وَ مَا أَنْزَلْتَ مِنْ نَظَائِرِهِنَّ فِي الْقُرْآنِ مِنْ تَضَاعِيفِ الْحَسَنَاتِ.

व क़ुलताः मसलुल लज़ीना युन्फ़ेकूना अमवालहुम फ़ी सबीलिल्लाहे कमसले हब्बतिन अंबत्ता सब्आ सनाबीला फ़ी कुल्ले सुम्बोलतिन मेअता हब्बतिन, वल्लाहो योज़ाऐफ़ो लेमन यशाओ [16] व क़ुलताः मन ज़ल लज़ी युक़रज़ुल्लाहो क़रज़न हसनन फ़योज़ाऐफ़ोहू लहू अज़आफन कसीरतन [17] व मा अनंज़लता मिन नज़ाएरेहिन्ना फ़ील क़ोलूबे मिन तज़ाऐफ़िल हसनाते

وَ أَنْتَ الَّذِي دَلَلْتَهُمْ بِقَوْلِكَ مِنْ غَيْبِكَ وَ تَرْغِيبِكَ الَّذِي فِيهِ حَظُّهُمْ عَلَى مَا لَوْ سَتَرْتَهُ عَنْهُمْ لَمْ تُدْرِكْهُ‏ أَبْصَارُهُمْ، وَ لَمْ تَعِهِ أَسْمَاعُهُمْ، وَ لَمْ تَلْحَقْهُ أَوْهَامُهُمْ، فَقُلْتَ: «فَاذْكُرُونِي أَذْكُرْكُمْ، وَ اشْكُرُوا لِي وَ لا تَكْفُرُونِ»وَ قُلْتَ: «لَئِنْ شَكَرْتُمْ لَأَزِيدَنَّكُمْ، وَ لَئِنْ كَفَرْتُمْ إِنَّ عَذابِي لَشَدِيدٌ».

व अंतल लज़ी दल्ललतहुम बेक़ुव्वतका मिन ग़ैबे व तरग़ीबकल लज़ी फ़ीहे हज़हुम अला मा लौ सत्तरतहू अन्हुम लम तुदरिकहो अब्सारोहुम व लम तअए अस्माओहुम, व लम तलहख़हू ओहामहुम, फ़क़ुलताः फ़ज़कोरूनी अज़कोरोकुम वशकोरो ली वला तकफ़ोरून [18]। व क़ुलताः लइन शकरतुम लअज़ीदन्नकुम व लइन कफ़रतुम इन्ना अज़ाबी लशदीद [19]

وَ قُلْتَ: «ادْعُونِي أَسْتَجِبْ لَكُمْ، إِنَّ الَّذِينَ يَسْتَكْبِرُونَ عَنْ عِبادَتِي سَيَدْخُلُونَ جَهَنَّمَ داخِرِينَ»، فَسَمَّيْتَ دُعَاءَكَ عِبَادَةً، وَ تَرْكَهُ اسْتِكْبَاراً، وَ تَوَعَّدْتَ عَلَى تَرْكِهِ دُخُولَ جَهَنَّمَ دَاخِرِينَ.

व क़ुल्ताः अदऊनी अस्तजिब लकुम इन्नल लज़ीना यस्तकबेरूना अन ऐबादती सयदख़ोलूना जहन्नम दाखेरीना [20] फ़समय्यता दोआऐका एबादतुन व तरकहू इस्तकबारन, व तवद्दअता अला तबकेहि दोख़ूला जहन्नमो दाख़ेरीना

فَذَكَرُوكَ بِمَنِّكَ، وَ شَكَرُوكَ بِفَضْلِكَ، وَ دَعَوْكَ بِأَمْرِكَ، وَ تَصَدَّقُوا لَكَ طَلَباً لِمَزِيدِكَ، وَ فِيهَا كَانَتْ نَجَاتُهُمْ مِنْ غَضَبِكَ، وَ فَوْزُهُمْ بِرِضَاكَ.

फ़ज़करूका बेमन्नका, व शकरूका बेफ़ज़्लेका, व दऔका बेअम्रेका, व तसद्दक़ू लका तलबन लेमज़ीदेका, व फ़ीहा कानत नजतहुम मिन ग़ज़बेका, व फ़ौजाहुम बेरज़ाका

وَ لَوْ دَلَّ مَخْلُوقٌ مَخْلُوقاً مِنْ نَفْسِهِ عَلَى مِثْلِ الَّذِي دَلَلْتَ عَلَيْهِ عِبَادَكَ مِنْكَ كَانَ مَوْصُوفاً بِالْإِحْسَانِ، وَ مَنْعُوتاً بِالامْتِنَانِ، وَ مَحْمُوداً بِكُلِّ لِسَانٍ، فَلَكَ الْحَمْدُ مَا وُجِدَ فِي حَمْدِكَ مَذْهَبٌ، وَ مَا بَقِيَ لِلْحَمْدِ لَفْظٌ تُحْمَدُ بِهِ، وَ مَعْنًى يَنْصَرِفُ إِلَيْهِ.

व लौ दल्लुन मखलूकन मिन नफ़्सेहि अला मिस्लल लज़ी दल्ललता अलैहे ऐबादेका मिन्का काना मौसूफ़न बिल एहसाने, व मनऊतन बिल इमतेनाने, व महमूदन बेकुल्ले लेसानिन, फ़लकाल हम्दो मा वोजेदा फ़ी हमदेका मजहबुन वमा वक़ेया लिलहमदे लफ़जुन तहमदो बेहि व मअनन यनसरफो इलैहे

يَا مَنْ تَحَمَّدَ إِلَى عِبَادِهِ بِالْإِحْسَانِ وَ الْفَضْلِ، وَ غَمَرَهُمْ بِالْمَنِّ وَ الطَّوْلِ، مَا أَفْشَى فِينَا نِعْمَتَكَ، وَ أَسْبَغَ عَلَيْنَا مِنَّتَكَ، وَ أَخَصَّنَا بِبِرِّكَ!

या मन तहम्मदा इला एबादेहि बिल एहसाने वलफज़ले, व ग़मरहुम बिल मन्ने वत तौले, मा अफ़शा फ़ीना नेअमत्तका व अस्बग़ा अलैना मिन्नतेका, व आख़स्सेना बेबिर्रेका

هَدَيْتَنَا لِدِينِكَ الَّذِي اصْطَفَيْتَ، وَ مِلَّتِكَ الَّتِي ارْتَضَيْتَ، وَ سَبِيلِكَ الَّذِي سَهَّلْتَ، وَ بَصَّرْتَنَا الزُّلْفَةَ لَدَيْكَ، وَ الْوُصُولَ إِلَى كَرَامَتِكَ

हदयतना लेदीनेकल लज़िस तफ़य्ता, व मिल्लतेकल लती इरतज़यता, व सबीलेकल लज़ी सह्हलता, व बस्सिरतनज ज़ुलफ़ता लदैयका, वल वुसूला एला करामतिक

اللَّهُمَّ وَ أَنْتَ جَعَلْتَ مِنْ صَفَايَا تِلْكَ الْوَظَائِفِ، وَ خَصَائِصِ تِلْكَ الْفُرُوضِ شَهْرَ رَمَضَانَ الَّذِي اخْتَصَصْتَهُ مِنْ سَائِرِ الشُّهُورِ، وَ تَخَيَّرْتَهُ مِنْ جَمِيعِ الْأَزْمِنَةِ وَ الدُّهُورِ، وَ آثَرْتَهُ عَلَى كُلِّ أَوْقَاتِ السَّنَةِ بِمَا أَنْزَلْتَ فِيهِ مِنَ الْقُرْآنِ وَ النُّورِ، وَ ضَاعَفْتَ فِيهِ مِنَ الْإِيمَانِ، وَ فَرَضْتَ فِيهِ مِنَ الصِّيَامِ، وَ رَغَّبْتَ فِيهِ مِنَ الْقِيَامِ، وَ أَجْلَلْتَ فِيهِ مِنْ لَيْلَةِ الْقَدْرِ الَّتِي هِيَ خَيْرٌ مِنْ أَلْفِ شَهْرٍ.

अल्लाहुम्मा व अंता जअलता मिन सफ़ाया तिलकल वज़ाएफ़े, व ख़साएसे तिलकल फ़ुरूज़े शहरा रमजानल लज़िख तससतहू मिन साऐरिश शोहूरे, व तखय्यरतहू मिन जमीइल अज़मेनते वदद्हूरे, व असरतहू अला कुल्ले औक़ातिस सनते बेमा अंज़लता फ़ीहे मिनल क़ुरआने वननूरे, व जाअफ़ता फ़ीहे मिनल इमाने, व फ़रजता फ़ीहे मिनस सयामे, व रग़बता फ़ीहे मिनल क़यामे, वजललता फ़ीहे मिन लैलतिल क़द्रिल लती हेया ख़ैरुम मिन अलफ़े शहरिन

ثُمَّ آثَرْتَنَا بِهِ عَلَى سَائِرِ الْأُمَمِ، وَ اصْطَفَيْتَنَا بِفَضْلِهِ دُونَ أَهْلِ الْمِلَلِ، فَصُمْنَا بِأَمْرِكَ نَهَارَهُ، وَ قُمْنَا بِعَوْنِكَ لَيْلَهُ، مُتَعَرِّضِينَ بِصِيَامِهِ وَ قِيَامِهِ لِمَا عَرَّضْتَنَا لَهُ مِنْ رَحْمَتِكَ، وَ تَسَبَّبْنَا إِلَيْهِ مِنْ مَثُوبَتِكَ، وَ أَنْتَ الْمَلِي‏ءُ بِمَا رُغِبَ فِيهِ إِلَيْكَ، الْجَوَادُ بِمَا سُئِلْتَ مِنْ فَضْلِكَ، الْقَرِيبُ إِلَى مَنْ حَاوَلَ قُرْبَكَ.

सुम्मा आसरतना बेहि अला साऐरिल उम्मे, वसतफ़यतना बेफ़जतलेहि दूना अहलिल मिलले, फ़सुमना बेअमरेका नहारहू, व क़ुमना बेऔनेका लैलतू, मुतअर्रेज़ीना बेसेयामेहि व क़ेयामेहि लेमा अर्रज़तना लहू मिन रहमतेका, व तसब्बबना इलैहे मिन मसूबतेका, व अंतल मलेओ बेमा रोग़ेबा फ़ीहे इलैका, अल जवादो बेमा सोइलता मिन फ़ज्लेका, अल क़रीबो इला मन हावला क़ुरबका

وَ قَدْ أَقَامَ فِينَا هَذَا الشَّهْرُ مُقَامَ حَمْدٍ، وَ صَحِبَنَا صُحْبَةَ مَبْرُورٍ، وَ أَرْبَحَنَا أَفْضَلَ أَرْبَاحِ الْعَالَمِينَ، ثُمَّ قَدْ فَارَقَنَا عِنْدَ تَمَامِ وَقْتِهِ، وَ انْقِطَاعِ مُدَّتِهِ، وَ وَفَاءِ عَدَدِهِ.

व क़द अक़ामा फ़ीना हाज़श शहरो मुक़ामा हम्दिन, व सहेबना सोहबता मबरूरिन, व अरबहना अफ़ज़ल अरबाहल आलमीना, सुम्मा क़द फ़ारक़ना इंदा तमामे वक़्तेहि, वन क़ेताआ मुद्दतेही, व वफ़ाए अददेहि

فَنَحْنُ مُوَدِّعُوهُ وِدَاعَ مَنْ عَزَّ فِرَاقُهُ عَلَيْنَا، وَ غَمَّنَا وَ أَوْحَشَنَا انْصِرَافُهُ عَنَّا، وَ لَزِمَنَا لَهُ الذِّمَامُ الْمَحْفُوظُ، وَ الْحُرْمَةُ الْمَرْعِيَّةُ، وَ الْحَقُّ الْمَقْضِيُّ، فَنَحْنُ قَائِلُونَ: السَّلَامُ عَلَيْكَ يَا شَهْرَ اللَّهِ الْأَكْبَرَ، وَ يَا عِيدَ أَوْلِيَائِهِ.

फ़नहनो मुवद्देऊहू वदाआ मन अज़्जा फ़ेराक़ोहू अलैना, व ग़म्मना व ओहश्नन सेराफ़ोहू अन्ना, व लज़ेमना लहूज़ जेमामुल महफ़ूजो, व हुरमतुल मरइय्यतो, वल हक़्क़ुल मक़ज़िय्यो, फ़नहनो क़ाएलूनाः अस्सलामो अलैका या शहरल्लाहिल अकबरा, व या ईदा औलेयाऐही

السَّلَامُ عَلَيْكَ يَا أَكْرَمَ مَصْحُوبٍ مِنَ الْأَوْقَاتِ، وَ يَا خَيْرَ شَهْرٍ فِي الْأَيَّامِ وَ السَّاعَاتِ.

अस्सलामो अलैका या अकरम मसहूबिन मेनल औक़ाते, व या ख़ैयर शहरिन फ़िल अय्यामे व स्साआते

السَّلَامُ عَلَيْكَ مِنْ شَهْرٍ قَرُبَتْ فِيهِ الْآمَالُ، وَ نُشِرَتْ فِيهِ الْأَعْمَالُ.

अस्सलामो अलैका मिन शहरिन क़रोबत फ़ीहिल आमालो, व नोशेरत फ़ीहिल आमालो

السَّلَامُ عَلَيْكَ مِنْ قَرِينٍ جَلَّ قَدْرُهُ مَوْجُوداً، وَ أَفْجَعَ فَقْدُهُ مَفْقُوداً، وَ مَرْجُوٍّ آلَمَ فِرَاقُهُ.

अस सलामो अलैका मिन क़रीनिन जल्ला क़दरोहू मौजूदन, व अफ़जआ फ़क़दहू मफ़क़ूदना, व मरज़ुव्विन अलम फ़ेराक़ोहू

السَّلَامُ عَلَيْكَ مِنْ أَلِيفٍ آنَسَ مُقْبِلًا فَسَرَّ، وَ أَوْحَشَ مُنْقَضِياً فَمَضَّ

अस सलामो अलैका मिन अलीफ़िन आनसा मुक़्बेलन फ़सर्रा, व औहशा मुन्कज़ेयन फ़मज़्ज़ा

السَّلَامُ عَلَيْكَ مِنْ مُجَاوِرٍ رَقَّتْ فِيهِ الْقُلُوبُ، وَ قَلَّتْ فِيهِ الذُّنُوبُ.

अस सलामो अलैका मिन मुजावेरिन रक़्क़त फ़ीहिल क़ुलूबो, व क़ल्लत फ़ीहिज़ ज़ुनूबो

السَّلَامُ عَلَيْكَ مِنْ نَاصِرٍ أَعَانَ عَلَى الشَّيْطَانِ، وَ صَاحِبٍ سَهَّلَ سُبُلَ الْإِحْسَانِ

अस सलामो अलैका मिन नासेरिन आआना अलश शैताने, व साहेबिन सह्हला सोबोलल एहसाने

السَّلَامُ عَلَيْكَ مَا أَكْثَرَ عُتَقَاءَ اللَّهِ فِيكَ، وَ مَا أَسْعَدَ مَنْ رَعَى حُرْمَتَكَ بِكَ!

अस सलामो अलैका मा अकसरा ओतक़ाए ल्लाहे फ़ीके, व मा अस्अदा मन रआ हुरमतका बेका

السَّلَامُ عَلَيْكَ مَا كَانَ أَمْحَاكَ لِلذُّنُوبِ، وَ أَسْتَرَكَ لِأَنْوَاعِ الْعُيُوبِ!

अस्सालमो अलैका मा काना अम्हाक लिज़्ज़ोनूबे, व अस्तरका लेअनवाइल ओयूबे

السَّلَامُ عَلَيْكَ مَا كَانَ أَطْوَلَكَ عَلَى الْمُجْرِمِينَ، وَ أَهْيَبَكَ فِي صُدُورِ الْمُؤْمِنِينَ!

अस सलामो अलैका मा काना अतवलका अलल मुजरेमीना, व अहयबका फ़ी सोदूरिल मोमेनीना

السَّلَامُ عَلَيْكَ مِنْ شَهْرٍ لَا تُنَافِسُهُ الْأَيَّامُ.

अस सलामो अलैका मिन शहरिन ला तुनाफ़ेसोहुल अय्यामो

السَّلَامُ عَلَيْكَ مِنْ شَهْرٍ هُوَ مِنْ كُلِّ أَمْرٍ سَلَامٌ

अस सलामो अलैका मिन शहरिन होवा मिन कुल्ले अमरिन सलामुन

السَّلَامُ عَلَيْكَ غَيْرَ كَرِيهِ الْمُصَاحَبَةِ، وَ لَا ذَمِيمِ الْمُلَابَسَةِ

अस सलामो अलैका ग़ैरा करीहिल मुसाहेबते, वला ज़मीमिल मुलाबसेते

السَّلَامُ عَلَيْكَ كَمَا وَفَدْتَ عَلَيْنَا بِالْبَرَكَاتِ، وَ غَسَلْتَ عَنَّا دَنَسَ الْخَطِيئَاتِ

अस सलामो अलैका कमा वफ़दता अलैना बिल बरकाते, व ग़स्सलता अन्ना दनसल ख़तिआते

السَّلَامُ عَلَيْكَ غَيْرَ مُوَدَّعٍ بَرَماً وَ لَا مَتْرُوكٍ صِيَامُهُ سَأَماً.

अस सलामो अलैका ग़ैरा मोअद्दा बरमन वला मतरूकिन सेयामोह सामन

السَّلَامُ عَلَيْكَ مِنْ مَطْلُوبٍ قَبْلَ وَقْتِهِ، وَ مَحْزُونٍ عَلَيْهِ قَبْلَ فَوْتِهِ.

अस सलामो अलैका मिन मतलूबिन कब्ला वक़्तेहि, व महज़ूनिन अलैहे क़ब्ला फ़ौतेही

السَّلَامُ عَلَيْكَ كَمْ مِنْ سُوءٍ صُرِفَ بِكَ عَنَّا، وَ كَمْ مِنْ خَيْرٍ أُفِيضَ بِكَ عَلَيْنَا

अस सलामो अलैका कम मिन सूइन सोरेफ़ा बेका अन्ना, व कम मिन ख़ैरिन अफ़ीज़ा बेका अलैना

السَّلَامُ عَلَيْكَ وَ عَلَى لَيْلَةِ الْقَدْرِ الَّتِي هِيَ خَيْرٌ مِنْ أَلْفِ شَهْرٍ

अस सलामो अलैका व अलल लैलतिल क़द्रिल लती हेया ख़ैरुम मिन अलफ़े शहरिन

السَّلَامُ عَلَيْكَ مَا كَانَ أَحْرَصَنَا بِالْأَمْسِ عَلَيْكَ، وَ أَشَدَّ شَوْقَنَا غَداً إِلَيْكَ.

अस सलामो अलैका मा काना अहरसना बिल अम्से अलैका व शद्दा शौकना ग़दना इलैका

السَّلَامُ عَلَيْكَ وَ عَلَى فَضْلِكَ الَّذِي حُرِمْنَاهُ، وَ عَلَى مَاضٍ مِنْ بَرَكَاتِكَ سُلِبْنَاهُ.

अस सलामो अलैका व अला फ़ज़लेकल लज़ी होरिमनाहो, व अला माज़िन मिन बरकातेका सोलिबनाहो

اللَّهُمَّ إِنَّا أَهْلُ هَذَا الشَّهْرِ الَّذِي شَرَّفْتَنَا بِهِ، وَ وَفَّقْتَنَا بِمَنِّكَ لَهُ حِينَ جَهِلَ الْأَشْقِيَاءُ وَقْتَهُ، وَ حُرِمُوا لِشَقَائِهِمْ فَضْلَهُ.

अल्लाहुम्मा इन्ना अहलो हाज़श शहरिल लज़ी शर्रफ़तना बेहि, व वफ़्फ़कतना बेमिन्नेका लहू हीना जहलल अशक़ियाओ वक़्तहू, व होरेमू लेशक़ाएहिम फ़ज़्लहू

أَنْتَ وَلِيُّ مَا آثَرْتَنَا بِهِ مِنْ مَعْرِفَتِهِ، وَ هَدَيْتَنَا لَهُ مِنْ سُنَّتِهِ، وَ قَدْ تَوَلَّيْنَا بِتَوْفِيقِكَ صِيَامَهُ وَ قِيَامَهُ عَلَى تَقْصِيرٍ، وَ أَدَّيْنَا فِيهِ قَلِيلًا مِنْ كَثِيرٍ.

अनता वलुय्युन मा आसरतना बेहि मिन माअरेफ़तेहि, व हदयतना लहू मिन सुन्नते, व क़द तवल्लना वेतौफ़ीक़ेका सेयामहू व क़ेयामहू अला तक़सीरिन, व अद्दयना फ़ीहे क़लीलन मिन कसीरिन

اللَّهُمَّ فَلَكَ الْحَمْدُ إِقْرَاراً بِالْإِسَاءَةِ، وَ اعْتِرَافاً بِالْإِضَاعَةِ، وَ لَكَ مِنْ قُلُوبِنَا عَقْدُ النَّدَمِ، وَ مِنْ أَلْسِنَتِنَا صِدْقُ الِاعْتِذَارِ، فَأْجُرْنَا عَلَى مَا أَصَابَنَا فِيهِ مِنَ التَّفْرِيطِ أَجْراً نَسْتَدْرِكُ بِهِ الْفَضْلَ الْمَرْغُوبَ فِيهِ، وَ نَعْتَاضُ بِهِ مِنْ أَنْوَاعِ الذُّخْرِ الْمَحْرُوصِ عَلَيْهِ.

अल्लाहुम्मा फलकल हम्दो इक़रारन बिल इसाअते, व एअतेराफ़न बिल इज़ाआते, व लका मिन क़ोलूबेना अक़्दुन नदमे, व मिन अलसेनतेना सिदक़ुल ऐअतेज़ारे, फ़ाजुरना अला मा असबना फ़ीहे मिनत तफ़रीते अजरन नसतदरेको बेहिल फ़ज़लल मरग़ूबा फ़ीहे, व नअताज़ो बेहि मिन अनवाइज़ ज़ुखरिल महरूसे अलैहे

وَ أَوْجِبْ لَنَا عُذْرَكَ عَلَى مَا قَصَّرْنَا فِيهِ مِنْ حَقِّكَ، وَ ابْلُغْ بِأَعْمَارِنَا مَا بَيْنَ أَيْدِينَا مِنْ شَهْرِ رَمَضَانَ الْمُقْبِلِ، فَإِذَا بَلَّغْتَنَاهُ فَأَعِنِّا عَلَى تَنَاوُلِ مَا أَنْتَ أَهْلُهُ مِنَ الْعِبَادَةِ، وَ أَدِّنَا إِلَى الْقِيَامِ بِمَا يَسْتَحِقُّهُ مِنَ الطَّاعَةِ، وَ أَجْرِ لَنَا مِنْ صَالِحِ الْعَمَلِ مَا يَكُونُ دَرَكاً لِحَقِّكَ فِي الشَّهْرَيْنِ مِنْ شُهُورِ الدَّهْرِ.

व औजिब लना उज़रका अला मा कस्सरना फीहे मिन हक़्केका, वबलग़ वेओमारेना मा बैना अयदीना मिन शहरे रमज़ानल मुक़बिल, फ़इज़ा बल्लग़तनहो फ़आइन्ना अला तनावोले मा अंता अहलोहू मिनल ऐबादते, व अद्देना इलल क़यामे बेमा यसतहिक़्क़हू मिनत ताआते, व उजरिन लना मिन सालेहिल अमले मा यकूनो दरकन लेहक़्क़ेका फ़िश शहरैने मिन शोहूरिद दहरे

اللَّهُمَّ وَ مَا أَلْمَمْنَا بِهِ فِي شَهْرِنَا هَذَا مِنْ لَمَمٍ أَوْ إِثْمٍ، أَوْ وَاقَعْنَا فِيهِ مِنْ ذَنْبٍ، وَ اكْتَسَبْنَا فِيهِ مِنْ خَطِيئَةٍ عَلَى تَعَمُّدٍ مِنَّا، أَوْ عَلَى نِسْيَانٍ ظَلَمْنَا فِيهِ أَنْفُسَنَا، أَوِ انْتَهَكْنَا بِهِ حُرْمَةً مِنْ غَيْرِنَا، فَصَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَ آلِهِ، وَ اسْتُرْنَا بِسِتْرِكَ، وَ اعْفُ عَنَّا بِعَفْوِكَ، وَ لَا تَنْصِبْنَا فِيهِ لِأَعْيُنِ الشَّامِتِينَ، وَ لَا تَبْسُطْ عَلَيْنَا فِيهِ أَلْسُنَ الطَّاعِنِينَ، وَ اسْتَعْمِلْنَا بِمَا يَكُونُ حِطَّةً وَ كَفَّارَةً لِمَا أَنْكَرْتَ مِنَّا فِيهِ بِرَأْفَتِكَ الَّتِي لَا تَنْفَدُ، وَ فَضْلِكَ الَّذِي لَا يَنْقُصُ.

अल्लाहुम्मा व मा अममना बेहि फ़ी शहरेना हाज़ा मिन लममिन औ इस्मिन, ओ वाक़अना फ़ीहे मिन ज़म्बिन, वकतसबना फ़ीहे मिन ख़तीआतिन अला तअम्मोदिन मिन्ना, औ अला निसयानिन ज़लमना फ़ीहे अनफ़ोसना, अविन तहकना बेहि हुरमतन मिन ग़ैरेना, फ़सल्ले अला मुहम्मदिन व आलेहि, वसतुरना बेसितरेका वअफ़ो अन्ना बेअफ़वेका, वला तंसीबना फ़ीहे लेऔअयोनिश शामेतीना, वला तबसोतो अलैना फ़ीहे अलसोनत ताऐईना, वस तअमिल्ना बेमा यकूनो हित्ततन व कफ़्फ़ारतन लेमा अंकरता मिन्ना फ़ीहे बेराफ़तेकल लती ला तंफ़दो, व फ़ज़्लेकल लज़ी ला यनंक़ोसो

اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَ آلِهِ، وَ اجْبُرْ مُصِيبَتَنَا بِشَهْرِنَا، وَ بَارِكْ لَنَا فِي يَوْمِ عِيدِنَا وَ فِطْرِنَا، وَ اجْعَلْهُ مِنْ خَيْرِ يَوْمٍ مَرَّ عَلَيْنَا أَجْلَبِهِ لِعَفْوٍ، وَ أَمْحَاهُ لِذَنْبٍ، وَ اغْفِرْ لَنَا مَا خَفِيَ مِنْ ذُنُوبِنَا وَ مَا عَلَنَ.

अललाहुम्मा सल्ले अला मुहम्मदिन वा आलेही, वज़्बुर मुसीबतना बेशहरेना, व बारिक लना फ़ी यौमे ईदना व फ़त्तिरना, वज्अल लहू मिन खैरे यौमिन मर्रा अलैना अजलबेहि लेअफ़विन, व अमहाहो लेज़ंबिन, व गफ़िर लना मा ख़फ़ेया मिन ज़ोनूबेना व मा अलना

اللَّهُمَّ اسْلَخْنَا بِانْسِلَاخِ هَذَا الشَّهْرِ مِنْ خَطَايَانَا، وَ أَخْرِجْنَا بِخُرُوجِهِ مِنْ سَيِّئَاتِنَا، وَ اجْعَلْنَا مِنْ أَسْعَدِ أَهْلِهِ بِهِ، وَ أَجْزَلِهِمْ قِسْماً فِيهِ، وَ أَوْفَرِهِمْ حَظّاً مِنْهُ.

अल्लाहुम्मस लख़ना बेइनसाफ़े हाज़श शहरे मिन ख़तायाना, व अख़रिजना बेखुरूजेहि मिन सय्येआतेना, वजअल्लना मिन असअदे अहलेहि बेहि, व अज्ज़लेहिम क़िस्मन फ़ीहे व औफ़रेहिम हज़्ज़न मिन्हो

اللَّهُمَّ وَ مَنْ رَعَى هَذَا الشَّهْرَ حَقَّ رِعَايَتِهِ، وَ حَفِظَ حُرْمَتَهُ حَقَّ حِفْظِهَا، وَ قَامَ بِحُدُودِهِ حَقَّ قِيَامِهَا، وَ اتَّقَى ذُنُوبَهُ حَقَّ تُقَاتِهَا، أَوْ تَقَرَّبَ إِلَيْكَ بِقُرْبَةٍ أَوْجَبَتْ رِضَاكَ لَهُ، وَ عَطَفَتْ رَحْمَتَكَ عَلَيْهِ، فَهَبْ لَنَا مِثْلَهُ مِنْ وُجْدِكَ، وَ أَعْطِنَا أَضْعَافَهُ مِنْ فَضْلِكَ، فَإِنَّ فَضْلَكَ لَا يَغِيضُ، وَ إِنَّ خَزَائِنَكَ لَا تَنْقُصُ بَلْ تَفِيضُ، وَ إِنَّ مَعَادِنَ إِحْسَانِكَ لَا تَفْنَى، وَ إِنَّ عَطَاءَكَ لَلْعَطَاءُ الْمُهَنَّا.

अल्लाहुममा व मन रआ हाज़श शहरा हक़्का रेआयतेहि, व हफ़ेज़े हुरमतहू हक़्का हिफ़्जेहा, व क़ामा बेहुदूदेहि हक़्क़ा क़यामेहा, वत्तक़ा ज़ोनूबेहू हक़्का तोक़ातेहा, औ तकर्रबा इलैका बेक़ुरबतिन औजबत रेज़ाका लहू, व अतफ़त रहमतका अलैहे, फहब लना मिस्लहू मिन वुजदेका, वअतेना अज़आफ़ेहू मिन फ़ज़्लेका, फ़इन्ना फ़ज़्लका ला यग़ीज़ो, व इन्ना ख़ज़ाएनका ला तंक़ोजो बल तफ़ीज़ो, व इन्ना मआदेन एहसानेका ला तफ़ना, व इन्ना अताअकल अताउल मुहन्ना

اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَ آلِهِ، وَ اكْتُبْ لَنَا مِثْلَ أُجُورِ مَنْ صَامَهُ، أَوْ تَعَبَّدَ لَكَ فِيهِ إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ.

अल्लाहुम्मा सल्ले अला मुहम्मदिन वा आलेही, वकतुब लना मिसला उजूरे मन सामहू, ओ तबअअदा लका फ़ीहे इला यौमिल क़यामते

اللَّهُمَّ إِنَّا نَتُوبُ إِلَيْكَ فِي يَوْمِ فِطْرِنَا الَّذِي جَعَلْتَهُ لِلْمُؤْمِنِينَ عِيداً وَ سُرُوراً، وَ لِأَهْلِ مِلَّتِكَ مَجْمَعاً وَ مُحْتَشَداً مِنْ كُلِّ ذَنْبٍ أَذْنَبْنَاهُ، أَوْ سُوءٍ أَسْلَفْنَاهُ، أَوْ خَاطِرِ شَرٍّ أَضْمَرْنَاهُ، تَوْبَةَ مَنْ‏ لَا يَنْطَوِي عَلَى رُجُوعٍ إِلَى ذَنْبٍ، وَ لَا يَعُودُ بَعْدَهَا فِي خَطِيئَةٍ، تَوْبَةً نَصُوحاً خَلَصَتْ مِنَ الشَّكِّ وَ الِارْتِيَابِ، فَتَقَبَّلْهَا مِنَّا، وَ ارْضَ عَنَّا، وَ ثَبِّتْنَا عَلَيْهَا.

अल्लाहुम्मा इन्ना नतूबो इलैका फ़ी यौमे फ़ितरेनल लज़ी जअलतहू लिल मोमेनीना ईदन व सोरूरा, व लेअहले मिल्लतेका मज्मआन व मोहतशदन मिन कुल्ले ज़म्बिन अज़नबनाहो, औ सूऐ असलफ़नाहो, ओ खातेरे अला रुजूइ ऐला ज़म्बिन, वला यऊदो बादहा फ़ि ख़तीअतिन, तौबतन नसूहन खलसत मिनश शक्के व इरतियाबे, फ़तक़ब्बला मिन्ना, वरज़ा अन्ना, व सब्बितना अलैहा

اللَّهُمَّ ارْزُقْنَا خَوْفَ عِقَابِ الْوَعِيدِ، وَ شَوْقَ ثَوَابِ الْمَوْعُودِ حَتَّى نَجِدَ لَذَّةَ مَا نَدْعُوكَ بِهِ، وَ كَأْبَةَ مَا نَسْتَجِيرُكَ مِنْهُ.
अल्लाहुम्मा उरज़ुक़ना ख़ौफ़ा ऐक़ाबिल वईदे, व शौक़ा सवाबिल मौऊदे हत्ता नजेदा लज़्ज़ता मा नदऊका बेहि, व कआबता मा नस्तजीरोका मिन्हो

وَ اجْعَلْنَا عِنْدَكَ مِنَ التَّوَّابِينَ الَّذِينَ أَوْجَبْتَ لَهُمْ مَحَبَّتَكَ، وَ قَبِلْتَ مِنْهُمْ مُرَاجَعَةَ طَاعَتِكَ، يَا أَعْدَلَ الْعَادِلِينَ.

वज़्अलना इंदका मित तव्वाबीनल लज़ीना ओजबता लहुम महब्बतका, व क़बिलता मिन्हुम मुराजआता ताआतेका, या आअदलल आदेलीना

اللَّهُمَّ تَجَاوَزْ عَنْ آبَائِنَا وَ أُمَّهَاتِنَا وَ أَهْلِ دِينِنَا جَمِيعاً مَنْ سَلَفَ مِنْهُمْ وَ مَنْ غَبَرَ إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ.

अल्लाहुम्मा तजावज़ अन आबाऐना व उम्मेहातेना व अहले दीनेना जमीअन मन सलफ़ा मिन्हुम म मन ग़बरा एला यौमिल कयामते

اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ نَبِيِّنَا وَ آلِهِ كَمَا صَلَّيْتَ عَلَى مَلَائِكَتِكَ الْمُقَرَّبِينَ، وَ صَلِّ عَلَيْهِ وَ آلِهِ كَمَا صَلَّيْتَ عَلَى أَنْبِيَائِكَ الْمُرْسَلِينَ، وَ صَلِّ عَلَيْهِ وَ آلِهِ كَمَا صَلَّيْتَ عَلَى عِبَادِكَ الصَّالِحِينَ، وَ أَفْضَلَ مِنْ ذَلِكَ يَا رَبَّ الْعَالَمِينَ، صَلَاةً تَبْلُغُنَا بَرَكَتُهَا، وَ يَنَالُنَا نَفْعُهَا، وَ يُسْتَجَابُ لَهَا دُعَاؤُنَا، إِنَّكَ أَكْرَمُ مَنْ رُغِبَ إِلَيْهِ، وَ أَكْفَى مَنْ تُوُكِّلَ عَلَيْهِ، وَ أَعْطَى مَنْ سُئِلَ مِنْ فَضْلِهِ، وَ أَنْتَ عَلَى كُلِّ شَيْ‏ءٍ قَدِيرٌ.

अल्लाहुम्मा सल्ले अला मुहम्मदिन नबीयीना व आलेहि कमा सल्लयता अला मलाएकतेकल मुक़र्रबीना, व सल्ले अलैहे व आलेहि कमा सल्लयता अला अम्बियाएकल मुरसलीन, अला ऐबादेकस सालेहीना, व अफ़ज़ला मिन ज़ालेका या रब्बल आलामीना, सलातन तबलोग़ोना बरकतोहा, व यनालोना नफ़ओहा, व युस्तजाबो लहा दोआओना, इन्नका अकरमो मन रोग़ेबा इलैहे, वकफ़ा मन तोवक्केला अलैहे, व आअता मन सोऐला मिन फ़ज़्लेहि, व अंता अला कुल्ले शैइन कद़ीर

रमज़ान के महीने को अलविदा कहने के लिए हज़रत की दुआ
वा काना मिन दुआऐहि अलैहिस सलामो फ़ी वदाए शहरे रमज़ान
हे परमेश्वर! ऐ वह जो (अपने उपकारों का) अज्र नहीं चाहता;
अल्लाहुम्मा या मन ला यरग़बो फ़िल जज़ाए
हे वह जो देने और क्षमा करने से नहीं पछताता;
व या मन ला यंदमो अलल अताए
ऐ वह जो अपने बन्दों को (उनके कर्मों का) बिना नाप-तोल के बदला नहीं देता; [बल्कि, इनाम सेवक के कार्यों से बड़ा है।]
व या मन ला योकाफ़ेओ अब्दहु अलस सवाए
आपकी नेमतें बिना किसी पूर्व हक़दारी के हैं, और तेरी माफ़ी एक एहसान और दयालुता है, तेरी सज़ा शुद्ध न्याय है, और तेरा फ़ैसला भलाई और कल्याण से भरा है।
मिन्नतोकब तेदाओ, व अफ़ूका तफ़ज़्ज़ोला, व उक़ूबतोका अदलुन, व क़ज़ाओका ख़ेयारतुन
अतः यदि तू देता है, तो वह अपने देने को वचन की पूर्ति से कलंकित नहीं करता, और यदि वह रोक लेता है, तो यह अन्याय या अधिकता के कारण नहीं है।
इन आतयता लम तशुब अताअका बेमन्ने, व इन मन्अता लम यकुन मनओका तअद्दियन
जो कोई तेरा आभार मानता है, तू उसे उसके आभार का प्रतिफल देता है। फिर भी तूने उसके हृदय में कृतज्ञता भर दी है।
तशकोरो मन शकरका व अंता अलहमतहू शुकरका
और जो तेरी प्रशंसा करे उसे बदला दे, जबकि तूने ही उसे प्रशंसा करना सिखाया है।
व तोकाफ़ेओ मन हमेदका व अंता अल्लमतहू हमदका
और वह ऐसे व्यक्ति पर्दा पोशी करता है अगर चाहे तो उसे अपमानित कर दे। और वह उस व्यक्ति को देता है जिसे यदि वह चाहता तो न देता। यद्यपि वे दोनों ही तेरे दरबार में अपमानित और वंचित होने के योग्य थे, फिर भी तूने अपने कार्यों को अनुग्रह और दयालुता पर आधारित किया और अपने अधिकार की अनदेखी के मार्ग पर रखा।
तस्तोरो अला मन लो शेअता फ़ज़हतहू, व तजूदो अला मन लौ शेअता मनअतहू, व केलहोमा अहलुन मिन्का लिलफ़ज़ीहते वल नम्ऐ ग़ैरा इन्नका बनयता अफ़आलका अलत तफ़ज़्ज़ोले, व अजरयता क़ुदरतका अलत तजावोजे
और तूने उन लोगों पर धैर्य दिखाया जिन्होंने तेरी अवज्ञा की। और जो व्यक्ति अपने ऊपर अत्याचार करना चाहे और तू उसे मोहलत दे दे, तो तू उसे अपनी सहनशीलता से मोहलत दे दे यहाँ तक कि वह पलट आए और तू उसे दण्ड देने में जल्दी नहीं करता यहाँ तक कि वह तौबा कर ले, ताकि जो व्यक्ति तेरी इच्छा के विरुद्ध नष्ट हो जाए वह नष्ट न हो जाए और जो व्यक्ति तेरे अनुग्रह से दुःखी हो जाए वह दुःखी न हो, परन्तु जब तक उसके पास पूरा बहाना और प्रमाण न हो। हे दयावान! यह (प्रमाण की पूर्णता) तेरी क्षमा और अनुग्रह है, और हे परम सहनशील! तेरी दया और दया का अनुग्रह है।
व तलक़ीता मन असाका बिल लहमे, व अमहलता मन क़सदा लेनफ़सेहि बिज़्जुलमे, तसतंज़ेरो हुम बेअनातेका एलल अनाबते, व ततरोको मोआजलतहुम एलत तौबते लेकैलन यहलेका अलैका हालेकोहुम, व ला यशक़ा बेनअमतेका शक़ीय्योहुम इल्ला अन तूलिल ऐज़ारे इलैहे, व बादा तरादोफ़िल हुज्जते अलैहे, करमन मिन अफ़वेका या करीमो, व आएदतुन मिन अतफ़ेका या हलीम
तू ही है जिसने अपने बन्दों के लिए क्षमा और मगफिरत का द्वार खोल दिया और उसका नाम तौबा रखा और तूने अपनी आयत को इस द्वार की ओर संकेत करने के लिए मार्गदर्शक बनाया, ताकि वे उससे भटक न जाएं। अतः हे धन्य! तूने फ़रमाया: सच्चे हृदय से अल्लाह की ओर तौबा करो। आशा है कि तुम्हारा रब तुम्हारे पापों को दूर कर देगा और तुम्हें ऐसे बाग़ों में प्रवेश देगा जिनके नीचे नहरें बहती होंगी।
अंतल लज़ी फतहता लेएबादेका बाबन एला अफ़वेका, व सम्मयतहुत तौबता, व जअलता अला ज़ालेकाल बाबे दलीलन मिन वहयेका लेअल्ला यज़ेलू अन्हो, फ़कुलता-तबारकस मोका- तूबू एलल्लाहे तौबतन नसूहन असा रब्बकुम अन योकफ़्फ़िरे अन्कुम सय्येआतेकुम व युदखेलकुम जन्नातिन तज़री मिन तहतेहल अन्हारो
जिस दिन अल्लाह अपने रसूल को और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए हैं, अपमानित न करेगा, परन्तु उनका प्रकाश उनके आगे-आगे और उनके दाहिनी ओर दौड़ता रहेगा और वे कहेंगे, "हमारे रब! हमारे लिये हमारा प्रकाश सिद्ध कर और हमें क्षमा कर। क्योंकि तू सभी चीजों में सक्षम हैं, अब जब दरवाजा खुल गया है और एक मार्गदर्शक नियुक्त किया गया है, तो इस घर में प्रवेश करने की उपेक्षा करने वाले किसी के लिए क्या बहाना हो सकता है?
यौमा ला युख़ज़ेयल्लाहुन नबीय्या वल लज़ीना आमनू मअहू, नूरोहुम यस्आ बैना अयदीहिम व बेईमानेहिम यक़ूलूनाः रब्बना अत्मिम लना नूरना, वग़फ़िरलना, इन्नका अला कुल्ले शैइन कदीर [14], फ़मा उज़्रा मन आअफ़ला दोख़ूला ज़ालेकल मुनज़ेले बादा फ़त्हिल बाबे व इक़ामतिद दलीले
तू ही वह है जिसने अपने बन्दों के लिए उच्च विनिमय दर का दायित्व अपने ऊपर ले लिया है और तूने चाहा है कि वे तेरे साथ जो व्यापार करें उससे लाभ उठाएँ और तेरी ओर बढ़ने में सफल हों और अधिक लाभ कमाएँ। इस प्रकार तूने, हे प्रभु, फ़रमाया है: जो कोई मेरे पास कोई अच्छा काम लेकर आएगा, उसे उसका दस गुना सवाब मिलेगा और जो कोई बुरा काम करेगा, उसे उतना ही सज़ा मिलेगी जितनी पहले थी।
व अंतल लज़ी ज़िदता फ़िस्सौमे अला नफ़सेका लेएबादेका, तोरीजो रिबहहुम फ़ी मुताजारतेहिम लका, व फ़ौज़हुम बिल वफ़ादते अलैका वज़्ज़ियादते मिन्का, फ़क़ुलता-तबारकस मोका व तआलयता- मन जाआ बिल हसनते फ़लहू अशरो अमसालहा, व मन जाआ बिस सय्येअते फ़ला युजज़ा इल्ला मिसलहा [15]
और तेरा कहना है: जो लोग अल्लाह के मार्ग में अपना माल ख़र्च करते हैं, उनकी मिसाल उस बीज के समान है जिसमें से सात बालियाँ निकलती हैं, और प्रत्येक बाली में सौ दाने होते हैं, और अल्लाह जिसके लिए चाहता है उसे बढ़ा देता है। और तेरा कथन है... कौन है जो अल्लाह को अच्छा ऋण दे, कि वह उसे उसके लिए कई गुना बढ़ा दे? और इसी प्रकार की अन्य आयतें भी हैं जो तूने पवित्र क़ुरआन में अवतरित की हैं, जिनमें नेकियों में वृद्धि का वादा है।
व क़ुलताः मसलुल लज़ीना युन्फ़ेकूना अमवालहुम फ़ी सबीलिल्लाहे कमसले हब्बतिन अंबत्ता सब्आ सनाबीला फ़ी कुल्ले सुम्बोलतिन मेअता हब्बतिन, वल्लाहो योज़ाऐफ़ो लेमन यशाओ [16] व क़ुलताः मन ज़ल लज़ी युक़रज़ुल्लाहो क़रज़न हसनन फ़योज़ाऐफ़ोहू लहू अज़आफन कसीरतन [17] व मा अनंज़लता मिन नज़ाएरेहिन्ना फ़ील क़ोलूबे मिन तज़ाऐफ़िल हसनाते
और तू ही है जिसने उन्हें मार्गदर्शन दिया, उस मार्गदर्शन के द्वारा जो उनके लिए लाभदायक था, उन बातों की ओर जिन्हें यदि तूने उनसे छिपा दिया होता तो न उनकी आँखें देख पातीं, न उनके कान सुन पाते, न उनका मन उन तक पहुँच पाता। इस प्रकार तूने कहा, "मेरी याद करो, तो मैं तुमसे असावधान नहीं रहूँगा।" और मेरे प्रति कृतज्ञता दिखाओ और कृतघ्न न बनो। और तू कह दे, "यदि तू मेरा आभार मानेगा तो मैं तुझे और अधिक दूँगा, किन्तु यदि तू कृतघ्न हुआ तो जान ले कि मेरी सज़ा बहुत कठोर है।"
व अंतल लज़ी दल्ललतहुम बेक़ुव्वतका मिन ग़ैबे व तरग़ीबकल लज़ी फ़ीहे हज़हुम अला मा लौ सत्तरतहू अन्हुम लम तुदरिकहो अब्सारोहुम व लम तअए अस्माओहुम, व लम तलहख़हू ओहामहुम, फ़क़ुलताः फ़ज़कोरूनी अज़कोरोकुम वशकोरो ली वला तकफ़ोरून [18]। व क़ुलताः लइन शकरतुम लअज़ीदन्नकुम व लइन कफ़रतुम इन्ना अज़ाबी लशदीद [19]
और तेरा कहना है कि, "मुझसे दुआ मांगो मैं तुम्हें उत्तर दूंगा।" जो लोग घमंड के कारण मेरी इबादत से विमुख हो जाते हैं, वे शीघ्र ही अपमानित होकर नरक में प्रवेश करेंगे। तो तूने दुआ को इबादत कहा, उसका परित्याग करना अहंकार बताया, तथा उसे परित्याग करने पर अपमानित होकर नरक में जाने से डराया!
व क़ुल्ताः अदऊनी अस्तजिब लकुम इन्नल लज़ीना यस्तकबेरूना अन ऐबादती सयदख़ोलूना जहन्नम दाखेरीना [20] फ़समय्यता दोआऐका एबादतुन व तरकहू इस्तकबारन, व तवद्दअता अला तबकेहि दोख़ूला जहन्नमो दाख़ेरीना
अतः उन्होंने तेरी नेमतों के कारण तुझे याद किया। वे तेरे अनुग्रह और दया का धन्यवाद करते थे और तेरे आदेश से तुझे पुकारते थे और तेरे मार्ग में दान देते थे, ताकि अधिक लाभ प्राप्त हो सके। और तेरा यह मार्गदर्शन उनके लिए तेरे प्रकोप से बचने का और तेरी प्रसन्नता प्राप्त करने का मार्ग बन गया।
फ़ज़करूका बेमन्नका, व शकरूका बेफ़ज़्लेका, व दऔका बेअम्रेका, व तसद्दक़ू लका तलबन लेमज़ीदेका, व फ़ीहा कानत नजतहुम मिन ग़ज़बेका, व फ़ौजाहुम बेरज़ाका
और जिन चीज़ों की ओर तूने अपने बन्दों को मार्ग दिखाया है, अगर कोई प्राणी किसी दूसरे प्राणी को उन्हीं चीज़ों की ओर मार्ग दिखाता तो वह प्रशंसनीय होता। फिर प्रशंसा तेरी ही है जब तक तेरी प्रशंसा करने का कोई तरीक़ा है और जब तक प्रशंसा के वे शब्द बचे हैं जिनसे तेरी प्रशंसा की जा सके और प्रशंसा के वे अर्थ बचे हैं जिनसे तेरी प्रशंसा की जा सके। हे वे अर्थ जो तेरी प्रशंसा में बदल सकते हैं, बाक़ी रहें।
व लौ दल्लुन मखलूकन मिन नफ़्सेहि अला मिस्लल लज़ी दल्ललता अलैहे ऐबादेका मिन्का काना मौसूफ़न बिल एहसाने, व मनऊतन बिल इमतेनाने, व महमूदन बेकुल्ले लेसानिन, फ़लकाल हम्दो मा वोजेदा फ़ी हमदेका मजहबुन वमा वक़ेया लिलहमदे लफ़जुन तहमदो बेहि व मअनन यनसरफो इलैहे
ऐ वह जिसने अपने बन्दों की प्रशंसा अपनी कृपा और अनुग्रह से अर्जित की और उन्हें अपनी कृपाओं और क्षमा से आच्छादित कर दिया। तेरी नेमत हम पर कितनी स्पष्ट हैं, तेरे पुरस्कार कितने प्रचुर हैं, और तेरी उदारता और कृपा से हम कितने सौभाग्यशाली हैं!
या मन तहम्मदा इला एबादेहि बिल एहसाने वलफज़ले, व ग़मरहुम बिल मन्ने वत तौले, मा अफ़शा फ़ीना नेअमत्तका व अस्बग़ा अलैना मिन्नतेका, व आख़स्सेना बेबिर्रेका
तूने हमें उस धर्म की ओर मार्गदर्शित किया जिसे तूने चुना है, जिस मार्ग को तूने चुना है, और जिस मार्ग को तूने हमारे लिए सुगम बनाया है, और हमें अपनी निकटता प्राप्त करने, सम्मान और महानता प्राप्त करने की समझ प्रदान की है।
हदयतना लेदीनेकल लज़िस तफ़य्ता, व मिल्लतेकल लती इरतज़यता, व सबीलेकल लज़ी सह्हलता, व बस्सिरतनज ज़ुलफ़ता लदैयका, वल वुसूला एला करामतिक
اहे परमेश्वर! तूने रमज़ान के महीने को उन ख़ास फ़र्ज़ों और ख़ास ज़िम्मेदारियों में से बनाया है, जिसे तूने दूसरे महीनों से अलग किया है और हर दौर और ज़माने से चुना है। तूने उसमें क़ुरआन और नूर नाज़िल किया और ईमान को बढ़ावा दिया और उसे साल के दूसरे वक़्तों से बेहतर बनाया। तूने उसमें रोज़ा फ़र्ज़ किया और नमाज़ को प्राथमिकता दी और उसमें शब ए क़द्र को अज़ीम बनाया, जो हज़ार महीनों से बेहतर है।
अल्लाहुम्मा व अंता जअलता मिन सफ़ाया तिलकल वज़ाएफ़े, व ख़साएसे तिलकल फ़ुरूज़े शहरा रमजानल लज़िख तससतहू मिन साऐरिश शोहूरे, व तखय्यरतहू मिन जमीइल अज़मेनते वदद्हूरे, व असरतहू अला कुल्ले औक़ातिस सनते बेमा अंज़लता फ़ीहे मिनल क़ुरआने वननूरे, व जाअफ़ता फ़ीहे मिनल इमाने, व फ़रजता फ़ीहे मिनस सयामे, व रग़बता फ़ीहे मिनल क़यामे, वजललता फ़ीहे मिन लैलतिल क़द्रिल लती हेया ख़ैरुम मिन अलफ़े शहरिन
फिर इस महीने के कारण तूने हमें अन्य सभी जातियों पर वरीयता दी और इसकी फ़ज़ीलत के कारण हमें अन्य जातियों पर चुना। अतः तेरे आदेश से हमने उसके दिनों में रोज़ा रखा और तेरी सहायता से उसकी रातें इबादत में बिताईं। इस अवस्था में हम इस रोज़े और दुआ के माध्यम से तेरी दया की कामना कर रहे थे, जिसे तूने हमें प्रदान किया है, और इसे अपने पुरस्कार और सवाब का साधन बनाया है। और जो कुछ तुझसे माँगा जाए, उसे देने की सामर्थ्य तू ही रखता है और जो कुछ तेरे अनुग्रह से माँगा जाए, उसे देनेवाला तू ही है। जो कोई तेरे समीप आना चाहे, तू उसके समीप है।
सुम्मा आसरतना बेहि अला साऐरिल उम्मे, वसतफ़यतना बेफ़जतलेहि दूना अहलिल मिलले, फ़सुमना बेअमरेका नहारहू, व क़ुमना बेऔनेका लैलतू, मुतअर्रेज़ीना बेसेयामेहि व क़ेयामेहि लेमा अर्रज़तना लहू मिन रहमतेका, व तसब्बबना इलैहे मिन मसूबतेका, व अंतल मलेओ बेमा रोग़ेबा फ़ीहे इलैका, अल जवादो बेमा सोइलता मिन फ़ज्लेका, अल क़रीबो इला मन हावला क़ुरबका
इस महीने ने हमारे बीच बहुत अच्छे दिन गुज़ारे, संगति का अधिकार अच्छी तरह पूरा किया और हमें दुनिया की बेहतरीन नेमतों से समृद्ध किया। फिर, जब उसका समय पूरा हो गया, अवधि बीत गई, और गिनती पूरी हो गई, तो वह हमें छोड़कर चला गया।
व क़द अक़ामा फ़ीना हाज़श शहरो मुक़ामा हम्दिन, व सहेबना सोहबता मबरूरिन, व अरबहना अफ़ज़ल अरबाहल आलमीना, सुम्मा क़द फ़ारक़ना इंदा तमामे वक़्तेहि, वन क़ेताआ मुद्दतेही, व वफ़ाए अददेहि
अब हम उसे उसी तरह विदा करते हैं जैसे हम उस व्यक्ति को विदा करते हैं जिसका वियोग हमारे लिए कष्टकर है, जिसका जाना हमारे लिए दुख और भय का कारण है, और जिसका अहद और वादा, सम्मान और पवित्रता और उसके हक़ से मुक्ति अत्यंत आवश्यक है। अतः हम कहते हैं: सलामती हो तुम पर, ऐ अल्लाह के सबसे महान महीने, ऐ अल्लाह के दोस्तों के त्योहार।
फ़नहनो मुवद्देऊहू वदाआ मन अज़्जा फ़ेराक़ोहू अलैना, व ग़म्मना व ओहश्नन सेराफ़ोहू अन्ना, व लज़ेमना लहूज़ जेमामुल महफ़ूजो, व हुरमतुल मरइय्यतो, वल हक़्क़ुल मक़ज़िय्यो, फ़नहनो क़ाएलूनाः अस्सलामो अलैका या शहरल्लाहिल अकबरा, व या ईदा औलेयाऐही
सलाम हो तुझ पर, हे समय के सर्वोत्तम साथी और दिनों और घंटों के सर्वोत्तम महीने!
अस्सलामो अलैका या अकरम मसहूबिन मेनल औक़ाते, व या ख़ैयर शहरिन फ़िल अय्यामे व स्साआते
सलाम हो तुझ पर! ऐ महीने जिसमें उम्मीदें पूरी होती हैं और आमाल बहुत होते हैं।
अस्सलामो अलैका मिन शहरिन क़रोबत फ़ीहिल आमालो, व नोशेरत फ़ीहिल आमालो
तुझ पर सलाम । हे वह साथी जिसकी उपस्थिति महान मूल्य और गरिमा की है, और जिसका अभाव महान दुःख का कारण है, और हे वह आशा और इच्छा का स्रोत, जिसका वियोग दुःखदायी है।
अस सलामो अलैका मिन क़रीनिन जल्ला क़दरोहू मौजूदन, व अफ़जआ फ़क़दहू मफ़क़ूदना, व मरज़ुव्विन अलम फ़ेराक़ोहू
तुझ पर सलाम। हे वह साथी जो स्नेह और वात्सल्य का सामान लेकर आया था, तू हर्ष का कारण बना और जब वह लौट गया तो तू भय को बढ़ाकर दुःखी बना गयायीं।
अस सलामो अलैका मिन अलीफ़िन आनसा मुक़्बेलन फ़सर्रा, व औहशा मुन्कज़ेयन फ़मज़्ज़ा
तुझ पर सलामती हो। हे पड़ोसी, जिसके हृदय में कोमलता आ गई है और जिसके कारण उसके पाप कम हो गए हैं!
अस सलामो अलैका मिन मुजावेरिन रक़्क़त फ़ीहिल क़ुलूबो, व क़ल्लत फ़ीहिज़ ज़ुनूबो
सलाम हो तुझ पर, ऐ मददगार, तूने शैतान के मुक़ाबले में मदद की और सहारा दिया, ऐ साथी, तूने अच्छे कामों का रास्ता तैयार किया।
अस सलामो अलैका मिन नासेरिन आआना अलश शैताने, व साहेबिन सह्हला सोबोलल एहसाने
सलाम हो तुझ पर! (ऐ रमज़ान के महीने) तुझ में अल्लाह के कितने ही बन्दे आज़ाद हुए और कितने ख़ुशक़िस्मत हैं वो लोग जिन्होंने तेरी पवित्रता और सम्मान का सम्मान किया।
अस सलामो अलैका मा अकसरा ओतक़ाए ल्लाहे फ़ीके, व मा अस्अदा मन रआ हुरमतका बेका
सलाम है तुझ पर, कि तू गुनाहों को मिटा देता है और हर तरह की बुराई को छिपा लेता है।
अस्सालमो अलैका मा काना अम्हाक लिज़्ज़ोनूबे, व अस्तरका लेअनवाइल ओयूबे
सलाम हो तुझ पर। तू फिर पापियों के लिए यह कितना लम्बा समय है और विश्वासियों के हृदय में कितना भय है।
अस सलामो अलैका मा काना अतवलका अलल मुजरेमीना, व अहयबका फ़ी सोदूरिल मोमेनीना
सलाम हो तुझ पर, ऐ महीने, जिसके बराबर कोई दिन नहीं आ सकता।
अस सलामो अलैका मिन शहरिन ला तुनाफ़ेसोहुल अय्यामो
सलामती हो तुझ पर! ऐ महीने, जो हर मामले से शान्ति प्रदान करता है।
अस सलामो अलैका मिन शहरिन होवा मिन कुल्ले अमरिन सलामुन
सलाम हो तुझ पर! ऐ वह व्यक्ति जिसका संग न तो अच्छा है और न ही बुरा।
अस सलामो अलैका ग़ैरा करीहिल मुसाहेबते, वला ज़मीमिल मुलाबसेते
सलाम हो तुझ पर, क्योंकि तू हमारे पास बरकत लेकर आया और गुनाहों के दाग धो डाले।
अस सलामो अलैका कमा वफ़दता अलैना बिल बरकाते, व ग़स्सलता अन्ना दनसल ख़तिआते
सलाम हो तुझ पर! जिसे, दिल की तकलीफ़ के विदा नहीं किया। और ना ही थकान के कारण रोज़ो को छोड़ा।
अस सलामो अलैका ग़ैरा मोअद्दा बरमन वला मतरूकिन सेयामोह सामन
सलाम हो तुझ पर। हे वह जिसके आगमन की प्रतीक्षा थी और जिसके अंत से हृदय पहले ही दुःखी हो गया है।
अस सलामो अलैका मिन मतलूबिन कब्ला वक़्तेहि, व महज़ूनिन अलैहे क़ब्ला फ़ौतेही
सलाम हो तुझ पर, तुरे कारण हमसे कितनी ही बुराइयाँ दूर हो गई और हमारे लिए कितनी ही भलाई के स्रोत बह निकले।
अस सलामो अलैका कम मिन सूइन सोरेफ़ा बेका अन्ना, व कम मिन ख़ैरिन अफ़ीज़ा बेका अलैना
सलाम हो तुझ पर। ऐ रमज़ान के महीने! तुझ पर और शब ए क़द्र जो हज़ार महीनों से बेहतर है।
अस सलामो अलैका व अलल लैलतिल क़द्रिल लती हेया ख़ैरुम मिन अलफ़े शहरिन
सलाम हो तुझ पर। कल तक हम तेरे प्रति कितने समर्पित थे, और आने वाले कल में हमारा जुनून कितना बढ़ गया है।
अस सलामो अलैका मा काना अहरसना बिल अम्से अलैका व शद्दा शौकना ग़दना इलैका
सलाम हो तुझ पर। ऐ मुबारक महीने, तुझ पर और तेरी नेकियों पर शांति हो जिनसे हम वंचित रह गए हैं और तेरी पिछली नेमतों पर भी जो हमारे हाथों से निकल गईं।
अस सलामो अलैका व अला फ़ज़लेकल लज़ी होरिमनाहो, व अला माज़िन मिन बरकातेका सोलिबनाहो
ऐ अल्लाह! हम इस महीने के प्रति समर्पित हैं, जिसके कारण तूने हमें सम्मानित किया और अपनी कृपा और अनुग्रह से हमें इसकी वास्तविक प्रकृति को पहचानने में सक्षम बनाया, जबकि बदकिस्मत लोग इसके समय (और इसके मूल्य) से अनजान थे और अपने दुर्भाग्य के कारण इसकी कृपा से वंचित थे।
अल्लाहुम्मा इन्ना अहलो हाज़श शहरिल लज़ी शर्रफ़तना बेहि, व वफ़्फ़कतना बेमिन्नेका लहू हीना जहलल अशक़ियाओ वक़्तहू, व होरेमू लेशक़ाएहिम फ़ज़्लहू
और तू ही वली, प्रभुत्वशाली है, जिसने हमें अपने सत्य का ज्ञान प्राप्त करने के लिए चुन लिया और अपने आदेशों की ओर हमारा मार्गदर्शन किया। निस्संदेह, तेरे अनुग्रह से हमने तुझे आदेशों की ओर मार्ग दिखाया है। वास्तव में, तेरी कृपा से, हमने इस महीने में रोजे रखे और दुआ की है। लेकिन वे इसे किसी कमी के साथ और कुछ गलतियों के साथ अंजाम नहीं दे सके।
अनता वलुय्युन मा आसरतना बेहि मिन माअरेफ़तेहि, व हदयतना लहू मिन सुन्नते, व क़द तवल्लना वेतौफ़ीक़ेका सेयामहू व क़ेयामहू अला तक़सीरिन, व अद्दयना फ़ीहे क़लीलन मिन कसीरिन
ऐ अल्लाह! हम अपने बुरे कर्मों और अपनी लापरवाही को स्वीकार करते हुए तेरी स्तुति करते हैं। अब, यदि तेरे लिए कुछ है, तो वह हमारे दिलों की सच्ची शर्म और हमारी ज़बानों की सच्ची माफ़ी है। इसलिए, हमारे इस अभाव और कमी के बावजूद जो हमारे साथ हुआ है, हमें ऐसा पुरस्कार प्रदान कर कि हम इसके माध्यम से वांछित उत्कृष्टता और खुशी प्राप्त कर सकें और बदले में वे विभिन्न पुरस्कार प्राप्त कर सकें जिनकी हमने इच्छा की है।
अल्लाहुम्मा फलकल हम्दो इक़रारन बिल इसाअते, व एअतेराफ़न बिल इज़ाआते, व लका मिन क़ोलूबेना अक़्दुन नदमे, व मिन अलसेनतेना सिदक़ुल ऐअतेज़ारे, फ़ाजुरना अला मा असबना फ़ीहे मिनत तफ़रीते अजरन नसतदरेको बेहिल फ़ज़लल मरग़ूबा फ़ीहे, व नअताज़ो बेहि मिन अनवाइज़ ज़ुखरिल महरूसे अलैहे
और हमने तेरे प्रति जो कमियाँ की हैं, उनके लिए हमारा बहाना स्वीकार कर ले और हमारे भावी जीवन को आने वाले रमज़ान के महीने से जोड़ दे, फिर जब तू उस तक पहुँच जाए, तो हमें अपनी योग्य इबादत करने में सहायता कर और हमें उस आज्ञाकारिता पर चलने की शक्ति दे जो उस महीने के योग्य है, और हमारे लिए ऐसे अच्छे कर्म जारी रख जो जीवन के महीनों में, एक के बाद एक, रमज़ान के महीने में तेरे हक़ को पूरा करने का साधन बन जाएँ।
व औजिब लना उज़रका अला मा कस्सरना फीहे मिन हक़्केका, वबलग़ वेओमारेना मा बैना अयदीना मिन शहरे रमज़ानल मुक़बिल, फ़इज़ा बल्लग़तनहो फ़आइन्ना अला तनावोले मा अंता अहलोहू मिनल ऐबादते, व अद्देना इलल क़यामे बेमा यसतहिक़्क़हू मिनत ताआते, व उजरिन लना मिन सालेहिल अमले मा यकूनो दरकन लेहक़्क़ेका फ़िश शहरैने मिन शोहूरिद दहरे
ऐ अल्लाह! हमने इस महीने में कोई छोटा या बड़ा पाप किया हो, या किसी पाप से कलंकित होकर कोई गलती की हो, जानबूझकर या अनजाने में अपने साथ गलत किया हो या किसी दूसरे की पवित्रता का उल्लंघन किया हो। अतः मुहम्मद और उनके परिवार पर दुरूद भेज और हमें अपने परदे से ढाँप दे और हमें अपनी क्षमा से क्षमा कर दे और इस पाप के कारण उपहास करने वालों की आँखें हम पर न पड़ने दे और निंदा करने वालों की ज़बानें हम पर न खुलने दे और अपनी असीम दया और निरन्तर बढ़ती हुई दया से हमें ऐसे कर्म करने की शक्ति दे जो इस महीने में हमारे लिए तेरी नापसंदगी को दूर कर दें और उसकी भरपाई कर दें।
अल्लाहुम्मा व मा अममना बेहि फ़ी शहरेना हाज़ा मिन लममिन औ इस्मिन, ओ वाक़अना फ़ीहे मिन ज़म्बिन, वकतसबना फ़ीहे मिन ख़तीआतिन अला तअम्मोदिन मिन्ना, औ अला निसयानिन ज़लमना फ़ीहे अनफ़ोसना, अविन तहकना बेहि हुरमतन मिन ग़ैरेना, फ़सल्ले अला मुहम्मदिन व आलेहि, वसतुरना बेसितरेका वअफ़ो अन्ना बेअफ़वेका, वला तंसीबना फ़ीहे लेऔअयोनिश शामेतीना, वला तबसोतो अलैना फ़ीहे अलसोनत ताऐईना, वस तअमिल्ना बेमा यकूनो हित्ततन व कफ़्फ़ारतन लेमा अंकरता मिन्ना फ़ीहे बेराफ़तेकल लती ला तंफ़दो, व फ़ज़्लेकल लज़ी ला यनंक़ोसो
ऐ अल्लाह! मुहम्मद और उनके परिवार पर दुरूद भेज और इस महीने के चले जाने पर जो चिंता हम पर आई है उसे दूर कर दे और ईद के दिन और रोज़ा खोलने के दिन को हमारे लिए बरकत वाला बना दे और इसे हमारे पिछले दिनों में सबसे बेहतरीन दिन बना दे, एक ऐसा दिन जो क्षमा को समाहित करता है और पापों को मिटा देता है और हमारे प्रकट और छिपे हुए पापों को क्षमा कर दे।
अललाहुम्मा सल्ले अला मुहम्मदिन वा आलेही, वज़्बुर मुसीबतना बेशहरेना, व बारिक लना फ़ी यौमे ईदना व फ़त्तिरना, वज्अल लहू मिन खैरे यौमिन मर्रा अलैना अजलबेहि लेअफ़विन, व अमहाहो लेज़ंबिन, व गफ़िर लना मा ख़फ़ेया मिन ज़ोनूबेना व मा अलना
ऐ अल्लाह! इस महीने के विदा होने पर हमें गुनाहों से अलग कर दे और इसके विदा होने पर हमें बुराइयों से मुक्त कर दे और हमें इस महीने को बिताने वालों में सबसे अधिक भाग्यशाली, सौभाग्यशाली और लाभदायक बना दे।
अल्लाहुम्मस लख़ना बेइनसाफ़े हाज़श शहरे मिन ख़तायाना, व अख़रिजना बेखुरूजेहि मिन सय्येआतेना, वजअल्लना मिन असअदे अहलेहि बेहि, व अज्ज़लेहिम क़िस्मन फ़ीहे व औफ़रेहिम हज़्ज़न मिन्हो
हे परमेश्वर! जिसने इस महीने को वैसे ही मनाया जैसा इसे मनाया जाना चाहिए, उसने इसका उचित सम्मान किया तथा इसके आदेशों का पूर्णतः पालन किया। उसने पापों से परहेज किया है जैसा कि उसे उनसे बचना चाहिए था, और तेरे समीप आने की नीयत से एक अच्छा कर्म किया है, जिससे तेरी प्रसन्नता उसके लिए आवश्यक हो गई है और तेरी दया उस पर आ गई है। अतः जैसा कि तूने उसे प्रदान किया है, वैसे ही हमें भी अपनी असीम सम्पदा प्रदान करें, तथा अपनी कृपा और उदारता को कई गुना अधिक प्रदान करें। क्योंकि तेरे भण्डार घटते नहीं, वरन बढ़ते ही जाते हैं, और तेरे उपकारों के भण्डार नाश नहीं होते, और तेरा क्षमा करना और देना सब प्रकार से आनन्ददायक है।
अल्लाहुममा व मन रआ हाज़श शहरा हक़्का रेआयतेहि, व हफ़ेज़े हुरमतहू हक़्का हिफ़्जेहा, व क़ामा बेहुदूदेहि हक़्क़ा क़यामेहा, वत्तक़ा ज़ोनूबेहू हक़्का तोक़ातेहा, औ तकर्रबा इलैका बेक़ुरबतिन औजबत रेज़ाका लहू, व अतफ़त रहमतका अलैहे, फहब लना मिस्लहू मिन वुजदेका, वअतेना अज़आफ़ेहू मिन फ़ज़्लेका, फ़इन्ना फ़ज़्लका ला यग़ीज़ो, व इन्ना ख़ज़ाएनका ला तंक़ोजो बल तफ़ीज़ो, व इन्ना मआदेन एहसानेका ला तफ़ना, व इन्ना अताअकल अताउल मुहन्ना
हे परमात्मा! मुहम्मद और उनके परिवार पर दुरूद भेज और हमें उन लोगों के समान सवाब प्रदान कर जो इस महीने में रोज़ा रखते हैं या क़यामत के दिन तक तेरी इबादत करते हैं।
अल्लाहुम्मा सल्ले अला मुहम्मदिन वा आलेही, वकतुब लना मिसला उजूरे मन सामहू, ओ तबअअदा लका फ़ीहे इला यौमिल क़यामते
ऐ अल्लाह! इस फ़ित्र के दिन, जिसे तूने ईमान वालों के लिए जश्न और खुशी का दिन और इस्लाम के लोगों के लिए जमावड़े और सहयोग का दिन बनाया है, हम अपने हर गुनाह से, हर बुराई से जो हमने पहले की है और हर उस बुरी नीयत से तौबा करते हैं जो हमने अपने दिलों में पाल रखी है, जैसे कोई इंसान फिर से गुनाहों की तरफ़ लौटने का इरादा नहीं रखता और न ही तौबा करने के बाद कोई गलती करता है। ऐसी सच्ची तौबा हर तरह के शक और संदेह से मुक्त होती है, इसलिए हमारी तौबा को क़बूल कर, हम से राज़ी हो जा और हमें उसमें मज़बूत बना।
अल्लाहुम्मा इन्ना नतूबो इलैका फ़ी यौमे फ़ितरेनल लज़ी जअलतहू लिल मोमेनीना ईदन व सोरूरा, व लेअहले मिल्लतेका मज्मआन व मोहतशदन मिन कुल्ले ज़म्बिन अज़नबनाहो, औ सूऐ असलफ़नाहो, ओ खातेरे अला रुजूइ ऐला ज़म्बिन, वला यऊदो बादहा फ़ि ख़तीअतिन, तौबतन नसूहन खलसत मिनश शक्के व इरतियाबे, फ़तक़ब्बला मिन्ना, वरज़ा अन्ना, व सब्बितना अलैहा
हे परमेश्वर! हमें हमारे पापों के दण्ड का भय और उस प्रतिफल की इच्छा प्रदान कर जिसका वादा तूने हमसे किया है, ताकि हम उस प्रतिफल की खुशी को पूरी तरह जान सकें जिसे हम तुझे चाहते हैं और उस दण्ड की पीड़ा और वेदना को जिससे हम शरण चाहते हैं।
अल्लाहुम्मा उरज़ुक़ना ख़ौफ़ा ऐक़ाबिल वईदे, व शौक़ा सवाबिल मौऊदे हत्ता नजेदा लज़्ज़ता मा नदऊका बेहि, व कआबता मा नस्तजीरोका मिन्हो
और हमें उन लोगों में शामिल कर जो तेरी ओर तौबा कर लें, जिनपर तूने अपनी मुहब्बत अनिवार्य कर दी और जिनसे आज्ञाकारिता की वापसी स्वीकार कर ली। हे धर्मियों में सबसे अधिक धर्मी!
वज़्अलना इंदका मित तव्वाबीनल लज़ीना ओजबता लहुम महब्बतका, व क़बिलता मिन्हुम मुराजआता ताआतेका, या आअदलल आदेलीना!
ऐ अल्लाह! हमारे माता-पिता और हमारे सभी धार्मिक और जातीय लोगों को क्षमा कर, चाहे वे मर चुके हों या न्याय के दिन तक आने वाले हों।
अल्लाहुम्मा तजावज़ अन आबाऐना व उम्मेहातेना व अहले दीनेना जमीअन मन सलफ़ा मिन्हुम म मन ग़बरा एला यौमिल कयामते
ऐ अल्लाह! हमारे पैगम्बर मुहम्मद और उनके परिवार पर दुरूद भेज जिस तरह तूने अपने करीबी फ़रिश्तों पर दुरूद भेजा है, और उन पर और उनके परिवार पर दुरूद भेज जिस तरह तूने अपने रसूलों पर दुरूद भेजा है, और उन पर और उनके परिवार पर दुरूद भेज जिस तरह तूने अपने नेक बंदों पर दुरूद भेजा है, और उससे भी बढ़कर, ऐ सारे जहानों के पालनहार! ऐसा दुरूद भेज जो हम तक पहुंचे, हमें लाभ पहुंचाए, और हमारी दुआओं में स्वीकार की जाए। क्योंकि तू उन लोगों से अधिक उदार है जिनकी ओर हम रुख करते हैं, और उन लोगों से अधिक आत्मनिर्भर है जिन पर भरोसा किया जाता है, और उन लोगों से अधिक उदार है जिनसे तेरा अनुग्रह मांगा जाता है, और तू हर चीज़ पर सक्षम और शक्तिशाली है।
अल्लाहुम्मा सल्ले अला मुहम्मदिन नबीयीना व आलेहि कमा सल्लयता अला मलाएकतेकल मुक़र्रबीना, व सल्ले अलैहे व आलेहि कमा सल्लयता अला अम्बियाएकल मुरसलीन, अला ऐबादेकस सालेहीना, व अफ़ज़ला मिन ज़ालेका या रब्बल आलामीना, सलातन तबलोग़ोना बरकतोहा, व यनालोना नफ़ओहा, व युस्तजाबो लहा दोआओना, इन्नका अकरमो मन रोग़ेबा इलैहे, वकफ़ा मन तोवक्केला अलैहे, व आअता मन सोऐला मिन फ़ज़्लेहि, व अंता अला कुल्ले शैइन कद़ीर

रमज़ान के महीने को अलविदा कहने के लिए हज़रत की दुआ

हे परमेश्वर! ऐ वह जो (अपने उपकारों का) अज्र नहीं चाहता;

हे वह जो देने और क्षमा करने से नहीं पछताता;

ऐ वह जो अपने बन्दों को (उनके कर्मों का) बिना नाप-तोल के बदला नहीं देता; [बल्कि, इनाम सेवक के कार्यों से बड़ा है।]

आपकी नेमतें बिना किसी पूर्व हक़दारी के हैं, और तेरी माफ़ी एक एहसान और दयालुता है, तेरी सज़ा शुद्ध न्याय है, और तेरा फ़ैसला भलाई और कल्याण से भरा है।

अतः यदि तू देता है, तो वह अपने देने को वचन की पूर्ति से कलंकित नहीं करता, और यदि वह रोक लेता है, तो यह अन्याय या अधिकता के कारण नहीं है।

जो कोई तेरा आभार मानता है, तू उसे उसके आभार का प्रतिफल देता है। फिर भी तूने उसके हृदय में कृतज्ञता भर दी है।

और जो तेरी प्रशंसा करे उसे बदला दे, जबकि तूने ही उसे प्रशंसा करना सिखाया है।

और वह ऐसे व्यक्ति पर्दा पोशी करता है अगर चाहे तो उसे अपमानित कर दे। और वह उस व्यक्ति को देता है जिसे यदि वह चाहता तो न देता। यद्यपि वे दोनों ही तेरे दरबार में अपमानित और वंचित होने के योग्य थे, फिर भी तूने अपने कार्यों को अनुग्रह और दयालुता पर आधारित किया और अपने अधिकार की अनदेखी के मार्ग पर रखा।

और तूने उन लोगों पर धैर्य दिखाया जिन्होंने तेरी अवज्ञा की। और जो व्यक्ति अपने ऊपर अत्याचार करना चाहे और तू उसे मोहलत दे दे, तो तू उसे अपनी सहनशीलता से मोहलत दे दे यहाँ तक कि वह पलट आए और तू उसे दण्ड देने में जल्दी नहीं करता यहाँ तक कि वह तौबा कर ले, ताकि जो व्यक्ति तेरी इच्छा के विरुद्ध नष्ट हो जाए वह नष्ट न हो जाए और जो व्यक्ति तेरे अनुग्रह से दुःखी हो जाए वह दुःखी न हो, परन्तु जब तक उसके पास पूरा बहाना और प्रमाण न हो। हे दयावान! यह (प्रमाण की पूर्णता) तेरी क्षमा और अनुग्रह है, और हे परम सहनशील! तेरी दया और दया का अनुग्रह है।

तू ही है जिसने अपने बन्दों के लिए क्षमा और मगफिरत का द्वार खोल दिया और उसका नाम तौबा रखा और तूने अपनी आयत को इस द्वार की ओर संकेत करने के लिए मार्गदर्शक बनाया, ताकि वे उससे भटक न जाएं। अतः हे धन्य! तूने फ़रमाया: सच्चे हृदय से अल्लाह की ओर तौबा करो। आशा है कि तुम्हारा रब तुम्हारे पापों को दूर कर देगा और तुम्हें ऐसे बाग़ों में प्रवेश देगा जिनके नीचे नहरें बहती होंगी।

जिस दिन अल्लाह अपने रसूल को और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए हैं, अपमानित न करेगा, परन्तु उनका प्रकाश उनके आगे-आगे और उनके दाहिनी ओर दौड़ता रहेगा और वे कहेंगे, "हमारे रब! हमारे लिये हमारा प्रकाश सिद्ध कर और हमें क्षमा कर। क्योंकि तू सभी चीजों में सक्षम हैं, अब जब दरवाजा खुल गया है और एक मार्गदर्शक नियुक्त किया गया है, तो इस घर में प्रवेश करने की उपेक्षा करने वाले किसी के लिए क्या बहाना हो सकता है?

तू ही वह है जिसने अपने बन्दों के लिए उच्च विनिमय दर का दायित्व अपने ऊपर ले लिया है और तूने चाहा है कि वे तेरे साथ जो व्यापार करें उससे लाभ उठाएँ और तेरी ओर बढ़ने में सफल हों और अधिक लाभ कमाएँ। इस प्रकार तूने, हे प्रभु, फ़रमाया है: जो कोई मेरे पास कोई अच्छा काम लेकर आएगा, उसे उसका दस गुना सवाब मिलेगा और जो कोई बुरा काम करेगा, उसे उतना ही सज़ा मिलेगी जितनी पहले थी।

और तेरा कहना है: जो लोग अल्लाह के मार्ग में अपना माल ख़र्च करते हैं, उनकी मिसाल उस बीज के समान है जिसमें से सात बालियाँ निकलती हैं, और प्रत्येक बाली में सौ दाने होते हैं, और अल्लाह जिसके लिए चाहता है उसे बढ़ा देता है। और तेरा कथन है... कौन है जो अल्लाह को अच्छा ऋण दे, कि वह उसे उसके लिए कई गुना बढ़ा दे? और इसी प्रकार की अन्य आयतें भी हैं जो तूने पवित्र क़ुरआन में अवतरित की हैं, जिनमें नेकियों में वृद्धि का वादा है।

और तू ही है जिसने उन्हें मार्गदर्शन दिया, उस मार्गदर्शन के द्वारा जो उनके लिए लाभदायक था, उन बातों की ओर जिन्हें यदि तूने उनसे छिपा दिया होता तो न उनकी आँखें देख पातीं, न उनके कान सुन पाते, न उनका मन उन तक पहुँच पाता। इस प्रकार तूने कहा, "मेरी याद करो, तो मैं तुमसे असावधान नहीं रहूँगा।" और मेरे प्रति कृतज्ञता दिखाओ और कृतघ्न न बनो। और तू कह दे, "यदि तू मेरा आभार मानेगा तो मैं तुझे और अधिक दूँगा, किन्तु यदि तू कृतघ्न हुआ तो जान ले कि मेरी सज़ा बहुत कठोर है।"

और तेरा कहना है कि, "मुझसे दुआ मांगो मैं तुम्हें उत्तर दूंगा।" जो लोग घमंड के कारण मेरी इबादत से विमुख हो जाते हैं, वे शीघ्र ही अपमानित होकर नरक में प्रवेश करेंगे। तो तूने दुआ को इबादत कहा, उसका परित्याग करना अहंकार बताया, तथा उसे परित्याग करने पर अपमानित होकर नरक में जाने से डराया!

अतः उन्होंने तेरी नेमतों के कारण तुझे याद किया। वे तेरे अनुग्रह और दया का धन्यवाद करते थे और तेरे आदेश से तुझे पुकारते थे और तेरे मार्ग में दान देते थे, ताकि अधिक लाभ प्राप्त हो सके। और तेरा यह मार्गदर्शन उनके लिए तेरे प्रकोप से बचने का और तेरी प्रसन्नता प्राप्त करने का मार्ग बन गया।

और जिन चीज़ों की ओर तूने अपने बन्दों को मार्ग दिखाया है, अगर कोई प्राणी किसी दूसरे प्राणी को उन्हीं चीज़ों की ओर मार्ग दिखाता तो वह प्रशंसनीय होता। फिर प्रशंसा तेरी ही है जब तक तेरी प्रशंसा करने का कोई तरीक़ा है और जब तक प्रशंसा के वे शब्द बचे हैं जिनसे तेरी प्रशंसा की जा सके और प्रशंसा के वे अर्थ बचे हैं जिनसे तेरी प्रशंसा की जा सके। हे वे अर्थ जो तेरी प्रशंसा में बदल सकते हैं, बाक़ी रहें।

ऐ वह जिसने अपने बन्दों की प्रशंसा अपनी कृपा और अनुग्रह से अर्जित की और उन्हें अपनी कृपाओं और क्षमा से आच्छादित कर दिया। तेरी नेमत हम पर कितनी स्पष्ट हैं, तेरे पुरस्कार कितने प्रचुर हैं, और तेरी उदारता और कृपा से हम कितने सौभाग्यशाली हैं!

तूने हमें उस धर्म की ओर मार्गदर्शित किया जिसे तूने चुना है, जिस मार्ग को तूने चुना है, और जिस मार्ग को तूने हमारे लिए सुगम बनाया है, और हमें अपनी निकटता प्राप्त करने, सम्मान और महानता प्राप्त करने की समझ प्रदान की है।

हे परमेश्वर! तूने रमज़ान के महीने को उन ख़ास फ़र्ज़ों और ख़ास ज़िम्मेदारियों में से बनाया है, जिसे तूने दूसरे महीनों से अलग किया है और हर दौर और ज़माने से चुना है। तूने उसमें क़ुरआन और नूर नाज़िल किया और ईमान को बढ़ावा दिया और उसे साल के दूसरे वक़्तों से बेहतर बनाया। तूने उसमें रोज़ा फ़र्ज़ किया और नमाज़ को प्राथमिकता दी और उसमें शब ए क़द्र को अज़ीम बनाया, जो हज़ार महीनों से बेहतर है।

फिर इस महीने के कारण तूने हमें अन्य सभी जातियों पर वरीयता दी और इसकी फ़ज़ीलत के कारण हमें अन्य जातियों पर चुना। अतः तेरे आदेश से हमने उसके दिनों में रोज़ा रखा और तेरी सहायता से उसकी रातें इबादत में बिताईं। इस अवस्था में हम इस रोज़े और दुआ के माध्यम से तेरी दया की कामना कर रहे थे, जिसे तूने हमें प्रदान किया है, और इसे अपने पुरस्कार और सवाब का साधन बनाया है। और जो कुछ तुझसे माँगा जाए, उसे देने की सामर्थ्य तू ही रखता है और जो कुछ तेरे अनुग्रह से माँगा जाए, उसे देनेवाला तू ही है। जो कोई तेरे समीप आना चाहे, तू उसके समीप है।

इस महीने ने हमारे बीच बहुत अच्छे दिन गुज़ारे, संगति का अधिकार अच्छी तरह पूरा किया और हमें दुनिया की बेहतरीन नेमतों से समृद्ध किया। फिर, जब उसका समय पूरा हो गया, अवधि बीत गई, और गिनती पूरी हो गई, तो वह हमें छोड़कर चला गया।

अब हम उसे उसी तरह विदा करते हैं जैसे हम उस व्यक्ति को विदा करते हैं जिसका वियोग हमारे लिए कष्टकर है, जिसका जाना हमारे लिए दुख और भय का कारण है, और जिसका अहद और वादा, सम्मान और पवित्रता और उसके हक़ से मुक्ति अत्यंत आवश्यक है। अतः हम कहते हैं: सलामती हो तुम पर, ऐ अल्लाह के सबसे महान महीने, ऐ अल्लाह के दोस्तों के त्योहार।

सलाम हो तुझ पर, हे समय के सर्वोत्तम साथी और दिनों और घंटों के सर्वोत्तम महीने!

सलाम हो तुझ पर! ऐ महीने जिसमें उम्मीदें पूरी होती हैं और आमाल बहुत होते हैं।

तुझ पर सलाम । हे वह साथी जिसकी उपस्थिति महान मूल्य और गरिमा की है, और जिसका अभाव महान दुःख का कारण है, और हे वह आशा और इच्छा का स्रोत, जिसका वियोग दुःखदायी है।

तुझ पर सलाम। हे वह साथी जो स्नेह और वात्सल्य का सामान लेकर आया था, तू हर्ष का कारण बना और जब वह लौट गया तो तू भय को बढ़ाकर दुःखी बना गयायीं।

तुझ पर सलामती हो। हे पड़ोसी, जिसके हृदय में कोमलता आ गई है और जिसके कारण उसके पाप कम हो गए हैं!

सलाम हो तुझ पर, ऐ मददगार, तूने शैतान के मुक़ाबले में मदद की और सहारा दिया, ऐ साथी, तूने अच्छे कामों का रास्ता तैयार किया।

सलाम हो तुझ पर! (ऐ रमज़ान के महीने) तुझ में अल्लाह के कितने ही बन्दे आज़ाद हुए और कितने ख़ुशक़िस्मत हैं वो लोग जिन्होंने तेरी पवित्रता और सम्मान का सम्मान किया।

सलाम है तुझ पर, कि तू गुनाहों को मिटा देता है और हर तरह की बुराई को छिपा लेता है।

सलाम हो तुझ पर। तू फिर पापियों के लिए यह कितना लम्बा समय है और विश्वासियों के हृदय में कितना भय है।

सलाम हो तुझ पर, ऐ महीने, जिसके बराबर कोई दिन नहीं आ सकता।

सलामती हो तुझ पर! ऐ महीने, जो हर मामले से शान्ति प्रदान करता है।

सलाम हो तुझ पर! ऐ वह व्यक्ति जिसका संग न तो अच्छा है और न ही बुरा।

सलाम हो तुझ पर, क्योंकि तू हमारे पास बरकत लेकर आया और गुनाहों के दाग धो डाले।

सलाम हो तुझ पर! जिसे, दिल की तकलीफ़ के विदा नहीं किया। और ना ही थकान के कारण रोज़ो को छोड़ा।

सलाम हो तुझ पर। हे वह जिसके आगमन की प्रतीक्षा थी और जिसके अंत से हृदय पहले ही दुःखी हो गया है।

सलाम हो तुझ पर, तुरे कारण हमसे कितनी ही बुराइयाँ दूर हो गई और हमारे लिए कितनी ही भलाई के स्रोत बह निकले।

सलाम हो तुझ पर। ऐ रमज़ान के महीने! तुझ पर और शब ए क़द्र जो हज़ार महीनों से बेहतर है।

सलाम हो तुझ पर। कल तक हम तेरे प्रति कितने समर्पित थे, और आने वाले कल में हमारा जुनून कितना बढ़ गया है।

सलाम हो तुझ पर। ऐ मुबारक महीने, तुझ पर और तेरी नेकियों पर शांति हो जिनसे हम वंचित रह गए हैं और तेरी पिछली नेमतों पर भी जो हमारे हाथों से निकल गईं।

ऐ अल्लाह! हम इस महीने के प्रति समर्पित हैं, जिसके कारण तूने हमें सम्मानित किया और अपनी कृपा और अनुग्रह से हमें इसकी वास्तविक प्रकृति को पहचानने में सक्षम बनाया, जबकि बदकिस्मत लोग इसके समय (और इसके मूल्य) से अनजान थे और अपने दुर्भाग्य के कारण इसकी कृपा से वंचित थे।

और तू ही वली, प्रभुत्वशाली है, जिसने हमें अपने सत्य का ज्ञान प्राप्त करने के लिए चुन लिया और अपने आदेशों की ओर हमारा मार्गदर्शन किया। निस्संदेह, तेरे अनुग्रह से हमने तुझे आदेशों की ओर मार्ग दिखाया है। वास्तव में, तेरी कृपा से, हमने इस महीने में रोजे रखे और दुआ की है। लेकिन वे इसे किसी कमी के साथ और कुछ गलतियों के साथ अंजाम नहीं दे सके।

ऐ अल्लाह! हम अपने बुरे कर्मों और अपनी लापरवाही को स्वीकार करते हुए तेरी स्तुति करते हैं। अब, यदि तेरे लिए कुछ है, तो वह हमारे दिलों की सच्ची शर्म और हमारी ज़बानों की सच्ची माफ़ी है। इसलिए, हमारे इस अभाव और कमी के बावजूद जो हमारे साथ हुआ है, हमें ऐसा पुरस्कार प्रदान कर कि हम इसके माध्यम से वांछित उत्कृष्टता और खुशी प्राप्त कर सकें और बदले में वे विभिन्न पुरस्कार प्राप्त कर सकें जिनकी हमने इच्छा की है।

और हमने तेरे प्रति जो कमियाँ की हैं, उनके लिए हमारा बहाना स्वीकार कर ले और हमारे भावी जीवन को आने वाले रमज़ान के महीने से जोड़ दे, फिर जब तू उस तक पहुँच जाए, तो हमें अपनी योग्य इबादत करने में सहायता कर और हमें उस आज्ञाकारिता पर चलने की शक्ति दे जो उस महीने के योग्य है, और हमारे लिए ऐसे अच्छे कर्म जारी रख जो जीवन के महीनों में, एक के बाद एक, रमज़ान के महीने में तेरे हक़ को पूरा करने का साधन बन जाएँ।

ऐ अल्लाह! हमने इस महीने में कोई छोटा या बड़ा पाप किया हो, या किसी पाप से कलंकित होकर कोई गलती की हो, जानबूझकर या अनजाने में अपने साथ गलत किया हो या किसी दूसरे की पवित्रता का उल्लंघन किया हो। अतः मुहम्मद और उनके परिवार पर दुरूद भेज और हमें अपने परदे से ढाँप दे और हमें अपनी क्षमा से क्षमा कर दे और इस पाप के कारण उपहास करने वालों की आँखें हम पर न पड़ने दे और निंदा करने वालों की ज़बानें हम पर न खुलने दे और अपनी असीम दया और निरन्तर बढ़ती हुई दया से हमें ऐसे कर्म करने की शक्ति दे जो इस महीने में हमारे लिए तेरी नापसंदगी को दूर कर दें और उसकी भरपाई कर दें।

ऐ अल्लाह! मुहम्मद और उनके परिवार पर दुरूद भेज और इस महीने के चले जाने पर जो चिंता हम पर आई है उसे दूर कर दे और ईद के दिन और रोज़ा खोलने के दिन को हमारे लिए बरकत वाला बना दे और इसे हमारे पिछले दिनों में सबसे बेहतरीन दिन बना दे, एक ऐसा दिन जो क्षमा को समाहित करता है और पापों को मिटा देता है और हमारे प्रकट और छिपे हुए पापों को क्षमा कर दे।

ऐ अल्लाह! इस महीने के विदा होने पर हमें गुनाहों से अलग कर दे और इसके विदा होने पर हमें बुराइयों से मुक्त कर दे और हमें इस महीने को बिताने वालों में सबसे अधिक भाग्यशाली, सौभाग्यशाली और लाभदायक बना दे।

हे परमेश्वर! जिसने इस महीने को वैसे ही मनाया जैसा इसे मनाया जाना चाहिए, उसने इसका उचित सम्मान किया तथा इसके आदेशों का पूर्णतः पालन किया। उसने पापों से परहेज किया है जैसा कि उसे उनसे बचना चाहिए था, और तेरे समीप आने की नीयत से एक अच्छा कर्म किया है, जिससे तेरी प्रसन्नता उसके लिए आवश्यक हो गई है और तेरी दया उस पर आ गई है। अतः जैसा कि तूने उसे प्रदान किया है, वैसे ही हमें भी अपनी असीम सम्पदा प्रदान करें, तथा अपनी कृपा और उदारता को कई गुना अधिक प्रदान करें। क्योंकि तेरे भण्डार घटते नहीं, वरन बढ़ते ही जाते हैं, और तेरे उपकारों के भण्डार नाश नहीं होते, और तेरा क्षमा करना और देना सब प्रकार से आनन्ददायक है।

हे परमात्मा! मुहम्मद और उनके परिवार पर दुरूद भेज और हमें उन लोगों के समान सवाब प्रदान कर जो इस महीने में रोज़ा रखते हैं या क़यामत के दिन तक तेरी इबादत करते हैं।

ऐ अल्लाह! इस फ़ित्र के दिन, जिसे तूने ईमान वालों के लिए जश्न और खुशी का दिन और इस्लाम के लोगों के लिए जमावड़े और सहयोग का दिन बनाया है, हम अपने हर गुनाह से, हर बुराई से जो हमने पहले की है और हर उस बुरी नीयत से तौबा करते हैं जो हमने अपने दिलों में पाल रखी है, जैसे कोई इंसान फिर से गुनाहों की तरफ़ लौटने का इरादा नहीं रखता और न ही तौबा करने के बाद कोई गलती करता है। ऐसी सच्ची तौबा हर तरह के शक और संदेह से मुक्त होती है, इसलिए हमारी तौबा को क़बूल कर, हम से राज़ी हो जा और हमें उसमें मज़बूत बना।

हे परमेश्वर! हमें हमारे पापों के दण्ड का भय और उस प्रतिफल की इच्छा प्रदान कर जिसका वादा तूने हमसे किया है, ताकि हम उस प्रतिफल की खुशी को पूरी तरह जान सकें जिसे हम तुझे चाहते हैं और उस दण्ड की पीड़ा और वेदना को जिससे हम शरण चाहते हैं।

और हमें उन लोगों में शामिल कर जो तेरी ओर तौबा कर लें, जिनपर तूने अपनी मुहब्बत अनिवार्य कर दी और जिनसे आज्ञाकारिता की वापसी स्वीकार कर ली। हे धर्मियों में सबसे अधिक धर्मी!

ऐ अल्लाह! हमारे माता-पिता और हमारे सभी धार्मिक और जातीय लोगों को क्षमा कर, चाहे वे मर चुके हों या न्याय के दिन तक आने वाले हों।

ऐ अल्लाह! हमारे पैगम्बर मुहम्मद और उनके परिवार पर दुरूद भेज जिस तरह तूने अपने करीबी फ़रिश्तों पर दुरूद भेजा है, और उन पर और उनके परिवार पर दुरूद भेज जिस तरह तूने अपने रसूलों पर दुरूद भेजा है, और उन पर और उनके परिवार पर दुरूद भेज जिस तरह तूने अपने नेक बंदों पर दुरूद भेजा है, और उससे भी बढ़कर, ऐ सारे जहानों के पालनहार! ऐसा दुरूद भेज जो हम तक पहुंचे, हमें लाभ पहुंचाए, और हमारी दुआओं में स्वीकार की जाए। क्योंकि तू उन लोगों से अधिक उदार है जिनकी ओर हम रुख करते हैं, और उन लोगों से अधिक आत्मनिर्भर है जिन पर भरोसा किया जाता है, और उन लोगों से अधिक उदार है जिनसे तेरा अनुग्रह मांगा जाता है, और तू हर चीज़ पर सक्षम और शक्तिशाली है।

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फ़ुटनोट

  1. ↑ ममदूही, शुहूद व शनाख़त, 1388 शम्सी, भाग 3, पेज 435
  2. ↑ अंसारियान, दयारे आशेक़ान, 1373 शम्सी, भाग 7, पेज 482-496 ममदूही, शुहूद व शनाख़त, 1388 शम्सी, भाग 3, पेज 435-535 तरजुमा व शरह दुआ ए चहलो पंजुम सहीफ़ा सज्जादिया, साइट इरफ़ान
  3. ↑ अंसारीयान, दयारे आशेक़ान, 1373 शम्सी, भाग 7, पेज 472-496
  4. ↑ ममदूही, किताब शुहूद व शनाख़्त, 1388 शम्सी, भाग 3, पेज 425-535
  5. ↑ फ़हरि, शरह व तफसीर सहीफ़ा सज्जादिया, 1388 शम्सी, भाग 3, पेज 301-336
  6. ↑ मोअर्रफ़ी किताब सीमा ए रमज़ान
  7. ↑ मोअर्रफ़ी किताब सीमा ए रमज़ान
  8. ↑ मदनी शिराज़ी, रियाज़ उस सालेकीन, 1435 हिजरी, भाग 6, पेज 95-198
  9. ↑ मुग़्निया, फ़ी ज़िलाल अल सहीफ़ा, 1428 हिजरी , पेज 515-538
  10. ↑ दाराबी, रियाज़ उल आरेफ़ीन, 1379 शम्सी, पेज 555-574
  11. ↑ फ़ज़्लुल्लाह, आफ़ाक़ अल रूह, 1420 शम्सी, भाग 2, पेज 389-432
  12. ↑ फ़ैज़ काशानी, तालीक़ात अलस सहीफ़ा अल-सज्जादिया, 1407 हिजरी, पेज 89-91
  13. ↑ जज़ाएरी, शरह अल-सहीफ़ा अल-सज्जादिया, 1402 हिजरी, पेज 223-234

स्रोत

  • असांरियान, हुसैन, दयारे आशेक़ान, तफ़सीर जामेअ सहीफ़ा सज्जादिया, तेहरान, पयाम आज़ादी, 1372 शम्सी
  • जज़ाएरी, इज़्ज़ुद्दीन, शरह अल-सहीफ़ा अल-सज्जादिया, बैरूत, दार उत तआरुफ लिलमतबूआत, 1402 हिजरी
  • दाराबी, मुहम्मद बिन मुहम्मद, रियाज़ अल आरेफ़ीन फ़ी शरह अल सहीफ़ा सज्जादिया, शोधः हुसैन दरगाही, तेहरान, नशर उस्वा, 1379 शम्सी
  • फ़ज़्लुल्लाह, सय्यद मुहम्मद हुसैन, आफ़ाक़ अल-रूह, बैरूत, दार उल मालिक, 1420 हिजरी
  • फ़हरि, सय्यद अहमद, शरह व तरजुमा सहीफ़ा सज्जादिया, तेहरान, उस्वा, 1388 शम्सी
  • फ़ैज़ काशानी, मुहम्मद बिन मुर्तज़ा, तालीक़ात अलस सहीफ़ा अल-सज्जादिया, तेहरान, मोअस्सेसा अल बुहूस वत तहक़ीक़ात अल सक़ाफ़ीया, 1407 हिजरी
  • मदनी शिराज़ी, सय्यद अली ख़ान, रियाज उस-सालेकीन फ़ी शरह सहीफ़ा तुस साजेदीन, क़ुम, मोअस्सेसा अल-नश्र उल-इस्लामी, 1435 हिजरी
  • मुग़्निया, मुहम्मद जवाद, फ़ी ज़िलाल अल-सहीफ़ा सज्जादिया, क़ुम, दार उल किताब उल इस्लामी, 1428 हिजरी
  • ममदूही किरमानशाही, हसन, शुहूद व शनाख़्त, तरजुमा व शरह सहीफ़ा सज्जादिया, मुकद्मा आयतुल्लाह जवादी आमोली, क़ुम, बूस्तान किताब, 1388 शम्सी