गर्म लोहे की घटना
हदीदा मोहमात (गर्म लोहा) की घटना, अक़ील बिन अबी तालिब द्वारा अपने भाई इमाम अली (अ.स.) से अनुग्रह की याचना करने और उनके हाथ को एक गर्म चिमटे से जला देने की कहानी को संदर्भित करती है। यह कहानी शिया नैतिक और शैक्षिक चर्चाओं में न्याय और भेदभाव से लड़ने के एक आदर्श के रूप में प्रस्तुत की जाती है।[१] यह घटना इमाम अली (अ.स.) श्रृंखला के कुछ दृश्यों में दर्शाई गई है।
यह कहानी नहजुल-उल-बलाग़ा के उपदेश 224[२] और शेख़ सदूक़ की अमाली[३] में वर्णित है। इस कहानी के अनुसार, अक़ील ने ग़रीबी के कारण और अपने बच्चों का पालन-पोषण करने के लिए इमाम अली (अ.स.) से ख़जाने से गेहूँ का एक हिस्सा आवंटित करने के लिए कहा। जवाब में, इमाम अली ने जलता हुआ लोहा अक़ील के शरीर के पास किया और उसे छूने के बाद उनकी प्रतिक्रिया देखकर कहा: "तुम इस दुनिया की आग को बर्दाश्त नही कर पाये और चिल्ला रहे हो तो मुझे नर्क की आग की ओर कैसे बुला सकते हो?"[४]
शिया धर्मगुरु (मराज ए तक़लीद) नासिर मकारिम शीराज़ी के अनुसार, इमाम अली का यह कदम अक़ील के लिए सिर्फ़ एक चेतावनी नहीं थी, बल्कि उस समय के समाज में व्याप्त अलगाव (पार्टी बाज़ी) की संस्कृति का सामना करने का एक सामान्य संदेश था।[५] अक़ील से यह कहानी सुनने के बाद, मुआविया बिन अबी सुफ़ियान भी इमाम अली के भेदभाव के प्रति प्रतिरोध से प्रभावित हुए बिना रह सका और उसने इमाम (अ) की प्रशंसा की।[६]
फ़ुटनोट
- ↑ काफ़ी, माजराए जनाबे अक़ील बेरादरे हज़रत अली अलैहिस्सलाम दरबार ए बैतुल माल (ऑडियो) अपारात; क़दिरियान, अक़ील व आहने सुर्ख़, ईरान सदा।
- ↑ नहजुल अल-बलाग़ा, सुबही सालेह द्वारा संशोधित, उपदेश 224, पृष्ठ, 346।
- ↑ शेख़ सदूक़, अल-अमाली, 1376 शम्सी/1997, पृ 621।
- ↑ शेख़ सदूक़, अल-अमाली, 1376 शम्सी/1997, पृ 621; क़ुरैशी, मुफ़रेदात नहजुल अल-बलाग़ा, 1377/1997, खंड 1, पृ 257।
- ↑ मकारेम शिराज़ी, पयामे इमाम अमीर अल-मोमिनीन (अ), 1386 शम्सी/1997, खंड 8, पृ 410-411।
- ↑ मजलिसी, बेहार अल-अनवार, 1403/1997, खंड 42, पृ 117-118।
स्रोत
- क़दिरियान, महमूद रज़ा, अक़ील व आहने सुर्ख़, ईरान रेडियो टी वी वेबसाइट, विज़िट की तारीख: 19 शहरिवर, 1403 हिजरी।
- काफ़ी, अहमद, माजराए जनाबे अक़ील बेरादरे हज़रत अली अलैहिस्सलाम दरबार ए बैतुल माल (ऑडियो), अपारात वेबसाइट, विज़िट की तारीख: 19 शहरिवर, 1403 हिजरी।
- मकारेम शिराज़ी, नासिर, इमाम अमीर अल-मोमिनीन (अ) का संदेश, तेहरान, दार अल-कुतुब अल-इस्लामिया, 1386 शम्सी।
- मजलिसी, मुहम्मद बाक़िर, बेहार अल-अनवार, बेरूत, दार इह्या अल-तोरास अल-अरबी, 1403 हिजरी।
- शेख़ सदूक़, मुहम्मद इब्न अली, अल-अमाली, तेहरान, केताबची, 1376 शम्सी।
- सय्यद रज़ी, मुहम्मद इब्न हुसैन, नहज अल-बलाग़ा, सुबही सालेह द्वारा संपादन, क़ुम, दार अल-हिजरा, 1414 हिजरी।