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नमाज़ का सलाम

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यह लेख नमाज़ के सलाम के बारे में है। सामान्य शिष्टाचार में सलाम से परिचित होने के लिए सलाम शीर्षक देखें।

नमाज़ का सलाम, नमाज़ के ग़ैर-रुक्नी वाजिबात में से है[१] और इसे आख़िरी तशह्हुद के बाद पढ़ा जाता है।[२] शिया न्यायशास्त्र में नमाज़ के सलाम के लिए तीन वाक्य वर्णित हैं:

  • «اَلسَّلامُ عَلَیک اَیُهَا النَّبِیُّ وَ رَحْمَةُ اللَّهِ وَ بَرَکاتُهُ» (अस्सलामो अलैका अय्युहन-नबिय्यो व रहमतुल्लाहे व बरकातुह); ऐ पैग़म्बर (स), आप पर सलाम हो तथा अल्लाह की रहमत और उसकी बरकतें हों।
  • «اَلسَّلامُ عَلَینا وَ عَلی عِبادِ اللَّهِ الصّالِحینَ» (अस्सलामो अलैना व अला इबादिल्लाहिस-सालिहीन); हम पर और अल्लाह के नेक बंदों पर सलाम हो।
  • «اَلسَّلامُ عَلَیکمْ وَ رَحْمَةُ اللَّه وَ بَرَکاتُهُ» (अस्सलामो अलैकुम व रहमतुल्लाहे व बरकातुह); आप सभी पर सलाम हो तथा अल्लाह की रहमत और उसकी बरकतें हों।

शिया न्यायशास्त्र के अनुसार पहला और दूसरा सलाम मुस्तहब, जबकि तीसरा सलाम वाजिब है। इसलिए नमाज़ी केवल तीसरा सलाम पढ़कर भी नमाज़ पूरी कर सकता है।[३] कुछ रिवायतों में नमाज़ के सलाम को अल्लाह के अज़ाब से सुरक्षा और नमाज़ के समापन का संकेत बताया गया है।[४] यदि नमाज़ी नमाज़ का सलाम पढ़ना भूल जाए और नमाज़ को बातिल करने वाले किसी कार्य, जैसे क़िबले से पीठ फेरने, से पहले उसे याद आ जाए, तो उसे सलाम पढ़ना चाहिए और उसकी नमाज़ सही होगी।[५]

सलाम पढ़ते समय नमाज़ी के शरीर की अवस्था

«السَّلامُ عَلَیکُم وَ رَحْمَةُ اللهِ وَ بَرَکاتُهُ» (अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुह) के संबोधन के बारे में विभिन्न मत प्रस्तुत किए गए हैं। इनमें मनुष्य पर नियुक्त फ़रिश्ते, सभी फ़रिश्ते और अम्बिया शामिल हैं।[६] यह भी कहा गया है कि यह सलाम सामान्य रूप से पैग़म्बरों, मोमिनों और फ़रिश्तों को संबोधित है।[७] मेराज से संबंधित एक हदीस में भी वर्णित है कि अल्लाह ने पैग़म्बर (स) को आदेश दिया कि पहले वे स्वयं और अपने अहले-बैत पर सलवात भेजें, फिर फ़रिश्तों, नबियों और रसूलों को सलाम करें। इसके बाद पैग़म्बर (स) ने «السَّلامُ عَلَیکُم وَ رَحْمَةُ اللهِ وَ بَرَکاتُهُ» (अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुह) कहा।[८]

इमाम रज़ा (अ) से वर्णित एक रिवायत में नमाज़ का सलाम के साथ समाप्त होना, नमाज़ी के नमाज़ की अवस्था से बाहर निकलने और दोबारा दूसरों से बात करना जायज़ होने से संबंधित बताया गया है। इस रिवायत के अनुसार, नमाज़ी तकबीरतुल-इहराम के द्वारा दूसरों से बात करना अपने लिए हराम कर लेता है और सलाम के द्वारा इस अवस्था से बाहर निकल जाता है।[९]

फ़ुटनोट

  1. ↑ इमाम ख़ुमैनी, तौज़ीहुल-मसाइल (मुहश्शा), खंड 1, पृष्ठ 530।
  2. ↑ इमाम ख़ुमैनी, तौज़ीहुल-मसाइल (मुहश्शा), नमाज़ के वाजिबात का भाग, मसला 1105।
  3. ↑ शहीद सानी, अर-रौज़तुल-बहिय्या, खंड 1, पृष्ठ 624।
  4. ↑ हुर्रे आमिली, वसाइलुश शिया, खंड 6, पृष्ठ 417।
  5. ↑ «واجبات نماز - ذکر؛ تشهد؛ سلام؛ ترتیب؛ موالات؛ قنوت و تعقیب», आयतुल्लाह ख़ामेनेई की वेबसाइट।
  6. ↑ मजलिसी, बिहारुल-अनवार, खंड 82, पृष्ठ 306।
  7. ↑ «در نماز مي‌خوانيم «السلام عليكم و رحمة الله و بركاته» مورد خطاب سلام، کيانند؟», मुतालिआत व पासुख़गोई बे शुब्हात केंद्र की वेबसाइट।
  8. ↑ कुलैनी, अल-काफ़ी, खंड 3, पृष्ठ 486।
  9. ↑ मजलिसी, बिहारुल-अनवार, खंड 82, पृष्ठ 306; हुर्रे आमिली, वसाइलुश शिया, बाब-ए-तस्लीम, अध्याय 1, हदीस 11।

स्रोत

  • «واجبات نماز - ذکر؛ تشهد؛ سلام؛ ترتیب؛ موالات؛ قنوت و تعقیب», (नमाज़ के वाजिबात—ज़िक्र; तशह्हुद; सलाम; तरतीब; मुवालात; क़ुनूत और तअक़ीब), आयतुल्लाह ख़ामेनेई के विचारों के संरक्षण एवं प्रकाशन का कार्यालय, प्रविष्टि की तारीख़: 21 अगस्त 2014 ईस्वी, देखने की तारीख़: 5 सितम्बर 2026 ईस्वी।
  • «در نماز مي‌خوانيم «السلام عليكم و رحمة الله و بركاته» مورد خطاب سلام، کيانند؟», (हम नमाज़ में “अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहे व बरकातुह” पढ़ते हैं, सलाम किसे संबोधित है?), मुतालिआत व पासुख़गोई बे शुब्हात केंद्र की वेबसाइट, देखे जाने की तारीख़: 5 सितम्बर 2026 ईस्वी।
  • इमाम ख़ुमैनी, तौज़ीहुल-मसाइल (मुहश्शा), क़ुम, इस्लामी प्रकाशन संस्थान, आठवाँ संस्करण, 1424 हिजरी।
  • कुलैनी, मुहम्मद बिन याक़ूब, अल-काफ़ी, तेहरान, दारुल-कुतुबिल-इस्लामिय्या प्रकाशन, 1407 हिजरी।
  • मजलिसी, मुहम्मद बाक़िर, बिहारुल-अनवार, बेरूत, दार इहयाइत-तुरासिल-अरबी प्रकाशन, दूसरा संस्करण, 1403 हि।
  • शहीद सानी, ज़ैनुद्दीन बिन अली, अर-रौज़तुल-बहिय्या, क़ुम, दावरी प्रकाशन, 1410 हिजरी।
  • हुर्रे आमिली, मुहम्मद बिन हसन, वसाइलुश शिया इला तहसीले मसाइलिश शरीआ, क़ुम, आले-बैत अलैहिमुस्सलाम ले-इहयाइत-तुरास संस्थान, 1409 हिजरी।