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अल्लाह

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यह लेख अल्लाह के विशेष नाम से संबंधित है। ख़ुदा और ख़ुदा की पहचान से संबंधित विषयों की जानकारी के लिए "ख़ुदा और ख़ुदा का परिचय" शीर्षक वाला लेख देखा जा सकता है।

अल्लाह इस्लाम धर्म में परमेश्वर का विशिष्ट और सर्वाधिक प्रसिद्ध नाम माना जाता है। मुस्लिम धर्मशास्त्रियों के अनुसार, अल्लाह ऐसा महान नाम है जिसमें ईश्वर के सभी पूर्ण गुण और श्रेष्ठ नाम समाहित माने जाते हैं। इसी कारण इसे अल्लाह के “महानतम नाम” के रूप में भी वर्णित किया गया है। इस्लामी मान्यता के अनुसार, क़ुरआन, दुआओं और धार्मिक अभिव्यक्तियों में इस नाम को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। तौहीद, कलमा-ए-शहादतैन और क़ुरआन की अनेक आयतों का मूल आधार यही नाम है। अल्लाह शब्द का प्रयोग विशेष रूप से परमेश्वर के लिए किया जाता है और इस्लामी दृष्टिकोण में इसे किसी अन्य व्यक्ति के लिए प्रयुक्त नहीं किया जाता। क़ुरआन में “अल्लाह” शब्द का उल्लेख दो हज़ार से अधिक बार हुआ है।

प्रसिद्ध क़ुरआनी व्याख्याकार जाफ़र सुब्हानी के अनुसार, अधिकांश हदीस विशेषज्ञों और क़ुरआन के टीकाकारों का मत है कि “अल्लाह” शब्द की व्युत्पत्ति अरबी मूल “अलह” (أَلَهَ) से हुई है, जिसका अर्थ है “वह जो उपासना के योग्य हो।” हालांकि, इस शब्द के कुछ अन्य अर्थ भी प्रस्तुत किए गए हैं। इनमें आश्चर्य और विस्मय की भावना, भय तथा किसी पर विश्वास करके मन की शांति प्राप्त करने जैसे अर्थ सम्मिलित हैं।

इस्लामी रहस्यवाद में इसे ईश्वरीय नामों की श्रृंखला में सर्वोच्च स्थान दिया गया है और यह माना जाता है कि अन्य सभी ईश्वरीय नाम इसी मूल नाम से संबंधित हैं। इस्लामी सभ्यता और संस्कृति में “अल्लाह” शब्द का प्रयोग अनेक रूपो में हुआ है। उदाहरण के लिए इस्लामी काल के सिक्कों, मस्जिदों, पवित्र स्थलों और धार्मिक स्थापत्य में इस नाम का अंकन मिलता है। इसके अतिरिक्त, कुछ मुस्लिम बहुल देशों जैसे ईरान, आज़रबाईजान गणराज्य और इराक़ के ध्वजों और राष्ट्रीय प्रतीको में भी इस शब्द का प्रयोग किया गया है।

इस्लामी संस्कृति में अल्लाह नाम का स्थान

इमाम हुसैन (अ) के पवित्र मक़बरे (हरम) में सुलेखित/उत्कीर्ण कलाकृतियों में से

“अल्लाह” इस्लाम धर्म में ईश्वर का विशिष्ट[] और सर्वाधिक प्रसिद्ध नाम है।[] मुस्लिम विद्वानों के इसे तौहीद और निष्ठापूर्ण आस्था की मूल भावना का केंद्र तथा क़ुरआन और दुआओं में इसे सर्वोच्च स्थान प्राप्त मानते है।[] और कहते है कि “अल्लाह” ऐसा अद्वितीय नाम है जिसका केवल एक ही संदर्भ और अर्थ है और यह नाम अल्लाह के समस्त पूर्ण और श्रेष्ठ गुणों को अपने भीतर समाहित करता है और इसका प्रयोग किसी दूसरे के लिए नहीं किया जाता।[] इसी कारण अल्लाह को क़ुरआन और नहज अल-बलाग़ा में अल्लाह से संबंधित चर्चाओं का केंद्रीय विषय माना गया है। यह भी कहा गया है कि क़ुरआन में अल्लाह के समस्त पूर्ण गुणों को अल्लाह के लिए सिद्ध किया गया है।[]

अल्लाह शब्द इस्लाम के दो प्रमुख आस्था-वाक्यों, अर्थात् शहादतैन का भी केंद्रीय भाग है। पहली शहादत में अल्लाह के अतिरिक्त किसी अन्य पूज्य सत्ता का निषेध किया जाता है। दूसरी शहादत में हज़रत मुहम्मद (स) को अल्लाह का संदेशवाहक के रूप मे परिचित किया जाता है।[]

क़ुरआन में अल्लाह शब्द, «रब» और «इलाह» जैसे नामों के साथ, ईश्वर के लिए प्रयुक्त होने वाले सबसे अधिक प्रचलित नामों में से एक है।[] क़ुरआन में अल्लाह शब्द की पुनरावृत्ति की संख्या 2699,[] 2702[] और 2807[१०] बार आया है।

बहुत से मुस्लिम विद्वान अल्लाह को श्रेष्ठ नाम (ईश्वर का महानतम नाम) मानते हैं।[११] इसके पीछे उनका तर्क यह है कि अल्लाह की अवधारणा इस्लामी एकेश्वरवाद का मूल आधार है। उनके अनुसार कोई काफ़िर व्यक्ति यदि इस शब्द को स्वीकार करता है तो वह कुफ़्र की स्थिति से आस्था की स्थिति की ओर प्रवेश करता है। इसके विपरीत, यदि कोई व्यक्ति «ला इलाहा इल्लल्लाह» के स्थान पर «ला इलाहा इल्ला अल रहमान» कहे, तो वह इस्लामी दृष्टिकोण से कुफ़्र की अवस्था से बाहर नहीं आता और इस्लाम की मान्य सीमा में प्रवेश नहीं करता।[१२]

फ़ारसी भाषा में «ख़ुदा» शब्द सामान्यतः «अल्लाह» का पर्याय माना जाता है।[१३] यह भी उल्लेखनीय है कि यहूदी, ईसाई और ज़रतुश्त धर्मग्रंथों के आधुनिक फ़ारसी अनुवादों में अल्लाह के लिए प्रयुक्त शब्दों जैसे यहवा, थियोस और अहुरेमाज़्दा का अनुवाद «अल्लाह» के रूप में किया गया है।[१४] अल्लाह शब्द का प्रयोग इस्लाम के आगमन से पहले भी होता था। क़ुरआन के सूर ए ज़ुख़रुफ़ की आयत न 87 और सूर ए लुक़मान की आयत न 25 में इस बात की ओर संकेत मिलता है कि अरब समाज में यह शब्द क़ुरआन के अवतरण से पहले भी प्रचलित था।[१५]

व्युत्पत्ति और अर्थ-विज्ञान

इमाम अली (अ) के पवित्र मकबरे (हरम) की मीनारों पर 'अल्लाह' शब्द

कुछ विद्वान अल्लाह शब्द को मूल रूप से अरबी भाषा का शब्द मानते हैं,[१६] जबकि कुछ अन्य विद्वानों का मत है कि इसकी जड़ हिब्रू या सिरियाई भाषा में मिलती है।[१७] कुछ विद्वानों के अनुसार अल्लाह शब्द का मूल रूप «अल-इलाह» था। अधिक प्रयोग के कारण इसमें उपस्थित दूसरे हमज़ा का लोप हो गया और यह धीरे-धीरे «अल्लाह» के रूप में प्रचलित हो गया।[१८] कुछ अन्य विद्वानों का विचार है कि अल्लाह शब्द की उत्पत्ति लाह से हुई है।[१९] इस विषय में विद्वानों के बीच मतभेद पाया जाता है कि «अल्लाह» शब्द किसी अन्य शब्द से मुश्तक़ है या नही।[२०] फ़ख़्रे राज़ी के अनुसार, अधिकांश न्यायविदों और उसूल के विद्वानों ने इसे ग़ैर-मुश्तक़ शब्द माना है।[२१] जो विद्वान अल्लाह को मुशतक़ शब्द मानते हैं, उन्होंने इसकी उत्पत्ति और मूल स्रोत के संबंध में कई संभावनाएँ प्रस्तुत की हैं।[२२] इनमें से कुछ प्रमुख मत निम्नलिखित हैं:

  • अल्लाह शब्द अलह (أَلَهَ) से बना है, जिसका अर्थ है वह जो उपासना के योग्य हो।[२३] क़ुरआन के प्रसिद्ध व्याख्याकार जाफ़र सुब्हानी के अनुसार अनेक हदीस के विद्वानों और क़ुरआन के व्याख्याताओं ने इस मत को स्वीकार किया है।[२४] कुछ धार्मिक परंपराओं और कथनों में भी इस अर्थ का उल्लेख मिलता है।[२५]
  • अल्लाह शब्द अलेह (أَلِهَ) या «वलेह» (وله) से निकला है, जिसका अर्थ है आश्चर्यचकित या विस्मित होना।[२६]
  • एक अन्य मत के अनुसार यह शब्द «इलाह» से संबंधित है, जिसका एक अर्थ भय और आश्रय ग्रहण करना भी है। इस दृष्टि से मनुष्य कठिन परिस्थितियों में ईश्वर की ओर आश्रय के लिए लौटता है[२७] और उसी पर भरोसा करता है।[२८]
  • इलाह से मुश्तक़ मानते हैं, जिसका अर्थ मन की शांति और संतोष से भी जोड़ा गया है। इस मत के अनुसार अल्लाह का स्मरण मनुष्य के हृदय को शांति प्रदान करता है।[२९]
  • लाह (لاهَ) से निकला है, जिसका अर्थ है छिपा हुआ या दृष्टि से ओझल होना। इस मत के अनुसार ईश्वर मानव बुद्धि, कल्पना और मानसिक धारणाओं की सीमाओं से परे और अदृश्य है।[३०]

इस्लामी रहस्यवाद में अल्लाह

इस्लामी रहस्यवाद में अल्लाह के नामों की एक विशेष क्रमबद्ध व्यवस्था मानी जाती है। जहा अल्लाह नाम को समग्र और सर्वव्यापक नाम माना गया है और यह सभी दिव्य नामों की श्रृंखला का मूल आधार और प्रारंभिक बिंदु है। इसके बाद चार प्रमुख नाम आते है प्रथम, अंतिम, प्रकट और अप्रकट का उल्लेख किया जाता है। इनके पश्चात सात अन्य प्रमुख नाम आते हैं, जो «अल्लाह» नाम से प्रकट होते हैं। इसी क्रम में यह क्रम आगे बढ़ते हुए विशिष्ट और आंशिक नामों तक पहुँचता है। इस प्रकार इरफ़ानी दृष्टिकोण में ईश्वर के सभी नामों का अंतिम संबंध अल्लाह नाम से माना जाता है।[३१]

अल्लाह शब्द के प्रयोग

अल्लाह शब्द का प्रयोग विभिन्न देशों के राष्ट्रीय प्रतीकों और धार्मिक स्थलों में भी देखने को मिलता है। यह शब्द ईरान के राष्ट्रीय ध्वज और राजचिह्न में प्रयुक्त हुआ है।[३२] इसी प्रकार आज़रबाईजान के राष्ट्रीय प्रतीक में भी इसका प्रयोग मिलता है।[३३] इराक़ के राष्ट्रीय ध्वज और प्रतीक में यह «अल्लाहो अकबर» के रूप में अंकित है।[३४] इस्लामी इतिहास में अल्लाह शब्द अकेले रूप में या अन्य शब्दों के साथ संयोजन में इस्लामी काल के सिक्कों पर अंकित किए जाने वाले प्रमुख शब्दों में शामिल रहा है।[३५] इसके अलावा, विभिन्न पवित्र स्थलों जैसे मस्जिदों और धार्मिक तीर्थस्थलों में भी इस शब्द का अनेक कलात्मक रूपों में प्रयोग किया गया है। अनेक प्रसिद्ध सुलेखकों ने अल्लाह शब्द को विभिन्न लिपियों और कलात्मक शैलियों में लिखने तथा सुलेख कला के माध्यम से प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान दिया है।

फ़ुटनोट

  1. फ़ख़्रे राज़ी, अल-तफ़सीर अल-कबीर, खंड 1, पृष्ठ 143; तबातबाई, अल-मीज़ान फ़ी तफ़सीर अल-क़ुरआन, खंड 1, पृष्ठ 18; सुब्हानी, मन्शूर-ए-जावेद, खंड 2, पृष्ठ 119।
  2. कफ़्अमी, अल-मक़ाम अल-अस्ना, पृष्ठ 25।
  3. कफ़्अमी, अल-मक़ाम अल-अस्ना, पृष्ठ 25-26।
  4. साफ़ी गुलपायगानी, इलाहियात दर नहज-उल-बलाग़ा, पृष्ठ 36।
  5. साफ़ी गुलपायगानी, इलाहियात दर नहज-उल-बलाग़ा, पृष्ठ 33-36।
  6. पाकेतची, «الله», पृष्ठ 73।
  7. मिस्बाह यज़्दी, ख़ुदाशिनासी, पृष्ठ 58।
  8. रूहानी, अल-मोअजम अल-इहसाई ले-अल्फ़ाज़ अल-क़ुरआन अल-करीम, खंड 2, पृष्ठ 244-262।
  9. साफ़ी गुलपायगानी, इलाहियात दर नहज-उल-बलाग़ा, पृष्ठ 34।
  10. काशेफ़ी, जवाहिर अल-तफ़सीर, पृष्ठ 357; आश्तियानी, तफ़सीर-ए-सूर-ए-फ़ातिहा-अल-किताब, पृष्ठ 63।
  11. काशेफ़ी, जवाहिर अल-तफ़सीर, पृष्ठ 357-361; कफ़्अमी, अल-मक़ाम अल-असना, पृष्ठ 26; खुमैनी, मिस्बाह अल-हिदाया, पृष्ठ 12-13; आश्तियानी, तफ़सीर-ए-सूरा-ए-फ़ातिहा-अल-किताब, पृष्ठ 64।
  12. काशेफ़ी, जवाहिर अल-तफ़सीर, पृष्ठ 361; आश्तियानी, तफ़सीर-ए-सूरा-ए-फ़ातिहा-अल-किताब, पृष्ठ 64।
  13. जवादी आमोली, तौहीद दर क़ुरआन, पृष्ठ 228।
  14. पाकेतची, «الله», पृष्ठ 73।
  15. तबातबाई, अल-मीज़ान फ़ी तफ़सीर अल-क़ुरआन, खंड 1, पृष्ठ 18; सुब्हानी, मन्शूर-ए-जावेद, खंड 2, पृष्ठ 116-117।
  16. फ़ख़्रे राज़ी, अल-तफ़सीर अल-कबीर, खंड 1, पृष्ठ 148; सुब्हानी, मन्शूर-ए-जावेद, खंड 2, पृष्ठ 116।
  17. फ़ख़्रे राज़ी, अल-तफ़सीर अल-कबीर, खंड 1, पृष्ठ 148; सुब्हानी, मन्शूर-ए-जावेद, खंड 2, पृष्ठ 116।
  18. शेख़ सदूक़, अल-तौहीद, पृष्ठ 195-196; शेख़ तूसी, अल-तिब्यान फ़ी तफ़सीर अल-क़ुरआन, खंड 1, पृष्ठ 27; तबातबाई, अल-मीज़ान फ़ी तफ़सीर अल-क़ुरआन, खंड 1, पृष्ठ 18; सुब्हानी, मन्शूर-ए-जावेद, खंड 2, पृष्ठ 118।
  19. शेख़ तूसी, अल-तिब्यान फ़ी तफ़सीर अल-क़ुरआन, खंड 1, पृष्ठ 27; तबरसी, मजमा-उल-बयान, खंड 1, पृष्ठ 91।
  20. सुब्हानी, मन्शूर-ए-जावेद, खंड 2, पृष्ठ 117।
  21. फ़ख़्रे राज़ी, अल-तफ़सीर अल-कबीर, खंड 1, पृष्ठ 143।
  22. अबुल-फ़ुतूह राज़ी, रौज़ा-अल-जिनान, खंड 1, पृष्ठ 55-57।
  23. शेख़ सदूक़, अल-तौहीद, पृष्ठ 195; शेख़ तूसी, अल-तिब्यान फ़ी तफ़सीर अल-क़ुरआन, खंड 1, पृष्ठ 27; तबरसी, मजमा-उल-बयान, खंड 1, पृष्ठ 91; अबुल-फ़ुतूह राज़ी, रौज़ा-अल-जिनान, खंड 1, पृष्ठ 57; तबातबाई, अल-मीज़ान फ़ी तफ़सीर अल-क़ुरआन, खंड 1, पृष्ठ 18।
  24. सुब्हानी, मन्शूर-ए-जावेद, खंड 2, पृष्ठ 117।
  25. कुलैनी, अल-काफ़ी, खंड 1, पृष्ठ 87; शेख़ सदूक़, अल-तौहीद, पृष्ठ 221।
  26. तबरसी, मजमा-उल-बयान, खंड 1, पृष्ठ 91; तबातबाई, अल-मीज़ान फ़ी तफ़सीर अल-क़ुरआन, खंड 1, पृष्ठ 18।
  27. तबरसी, मजमा-उल-बयान, खंड 1, पृष्ठ 91; सुब्हानी, मन्शूर-ए-जावेद, खंड 2, पृष्ठ 118।
  28. अबुल-फ़ुतूह राज़ी, रौज़ा-अल-जिनान, खंड 1, पृष्ठ 55-56।
  29. तबरसी, मजमा-उल-बयान, खंड 1, पृष्ठ 91; सुब्हानी, मन्शूर-ए-जावेद, खंड 2, पृष्ठ 118।
  30. तबरसी, मजमा-उल-बयान, खंड 1, पृष्ठ 91; अबुल-फ़ुतूह राज़ी, रौज़ा-अल-जिनान, खंड 1, पृष्ठ 56; सुब्हानी, मन्शूर-ए-जावेद, खंड 2, पृष्ठ 118।
  31. यज़्दान-पनाह, मबानी व उसूल-ए-इरफ़ान-ए-नज़री, पृष्ठ 455-460; अमीनी-नेजाद और अन्य, मबानी व फ़लसफ़ा-ए-इरफ़ान-ए-नज़री, पृष्ठ 237-240।
  32. «طرح پرچم ایران؛ بازتاب گفتمان انقلابی و اسلامی», जम्हूरी इस्लामी समाचार एजेंसी।
  33. «لفظ مقدس الله در مرکز آرم حکومتی جمهوری آذربایجان», आरान समाचार एजेंसी।
  34. «پرچم عراق و سیر تحول آن», इराक़-यार वेबसाइट।
  35. सराफ़राज़ी, «شعائر شیعی بر سکه‌های اسلامی تا شکل‌گیری حکومت صفویان», पृष्ठ 9-11, 19, 22 और 23।

स्रोत

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  • «لفظ مقدس الله در مرکز آرم حکومتی جمهوری آذربایجان», (आज़रबाईजान गणराज्य के राज्य-चिह्न के केंद्र में पवित्र शब्द 'अल्लाह'), आरान समाचार एजेंसी, प्रविष्टि की तिथि: 20 अगस्त 2017 ईस्वी, देखे जाने की तिथि: 18 मई 2025 ईस्वी।
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  • यज़्दान-पनाह, सय्यद यदुल्लाह, मबानी व उसूल-ए-इरफ़ान-ए-नज़री, लेखक: सय्यद अता अंज़ली, क़ुम, इमाम खुमैनी शैक्षिक एवं अनुसंधान संस्थान, दूसरा संस्करण, 1389 शम्सी।
  • यज़्दी, मुहम्मद काज़िम, अल-उर्वा-अल-वुस्क़ा मआ-अल-तालीक़ात, क़ुम, अली बिन अबी तालिब (अ) विद्यालय, 1428 हिजरी/1326 शम्सी।