जमाख़ोरी
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कुछ अमली व फ़िक़ही अहकाम |
फ़ुरू ए दीन |
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जमाख़ोरी (अरबीःالاحتكار)किसी आवश्यक वस्तु की बाजार में कमी होने की स्थिति में उसे ऊंची कीमत पर बेचने के उद्देश्य से जमाखोरी करना कहलाता है। प्रसिद्ध शिया न्यायविदों ने जमाखोरी को हराम और आवश्यक वस्तुओं, विशेषकर भोजन से संबंधित वस्तुओं की जमाख़ोरी माना है। जबकि कुछ न्यायविदों ने जमाखोरी के दायरे का विस्तार किया है और उनका मानना है कि जमाखोरी में समाज के लिए आवश्यक सभी वस्तुएं शामिल हैं।
जमाखोरी की हुरमत, व्यवस्था में व्यवधान तथा लोगों में अशांति उत्पन्न करने की रोकथाम के दर्शन का उल्लेख किया गया है।
परिभाषा
बाज़ार मे किसी दुर्लभ वस्तु और जनता की ज़रूरत की चीज़ो को उनका मूल्य बढ़ जाने की आशा से भंडारण करने को जमाखोरी कहा जाता है।[१] कुछ लोगो ने जमाखोरी की परिभाषा मे खरीद की क़ैद को भी जोड़ा है अर्थात चीज़ को खरीद ले फ़िर उसे बाज़ार मे ना बेचे, यदि यह दुर्लभ हो जाए और लोगो को इसकी ज़रूरत हो तो यह जमाखोरी है। लेकिन कुछ अन्य लोग माल की ज़ब्ती को पूर्ण रूप से (चाहे वह किसी भी माध्यम से हो, जैसे कृषि और व्यापार) जमाखोरी मानते हैं।[२] जो जमाखोरी करता है उसे मोहतकिर (जमाख़ोर) कहते है।[३]
जमाखोरी का स्थान
जमाखोरी और संबंधित फैसलों की चर्चा न्यायशास्त्र (बिक्री के अध्याय),[४] कानून और अर्थशास्त्र में की जाती है। शेख अंसारी ने इसे खाद्य जमाखोरी के मुद्दे के रूप में उठाया है।[५] इसके अलावा, शिया जवामे रेवाई में, एक अध्याय जमाखोरी की रिवायतो के लिए समर्पित है।[६] पैगंबर (स) की एक हदीस मे जमाखोर को शापित (मलऊन) कहा गया है।[७]
फ़िक़्ही नियम
जमाखोरी को हराम या घृणित (मकरूह) मानने को लेकर न्यायविदों में मतभेद है।[८] प्रसिद्ध शिया न्यायविदों के अनुसार, यदि कोई उत्पाद बाजार में पर्याप्त नहीं है और उसके भंडारण से मुस्लिम बाजार को नुकसान होता है, तो जमाखोरी हराम है।[९]
शहीद अव्वल ने भोजन की जमाखोरी को एक घृणित व्यवसाय (मकरूह तेजारत) के अंर्तगत बताया है;[१०] लेकिन शहीद सानी ने शरह लुम्आ में इसकी हुरमत को मजबूत माना, अगर लोगों को इसकी आवश्यकता है, और शहीद अव्वल को जिम्मेदार ठहराया कि किताब दुरूस में, वह जमाखोरी को हराम मानते है।[११] कुछ न्यायविदों ने कहा है कि यदि जमा किया हुआ माल लोगों की जरूरत हो और बाजार में नहीं हो, तो शासक जमाखोर को अपना माल बेचने के लिए मजबूर कर सकता है;[१२] लेकिन वह माल की कीमत नहीं लगा सकता है।[१३]
जमाखोरी के हराम होने से व्यवस्था में व्यवधान की रोकथाम और लोगों के लिए जबरन वसूली के निर्माण के दर्शन का उल्लेख किया गया है।[१४]
जमाखोरी के हराम या मकरूह होने के लिए शिया न्यायविद पैगंबर (स) और इमाम सादिक (अ) की रिवायतो का उल्लेख करते हैं,[१५] और जमाखोरी को रोकने, के लिए मालिक अश्तर को इमाम अली (अ) के आदेश[१६] का उल्लेख करते हैं।[१७] एक रिवायत मे मकरूह शब्द का प्रयोग किया गया है,[१८] कुछ न्यायशास्त्रियों ने इस शब्द से हराम होने[१९] और कुछ ने मकरूह होने का अनुमान लगाया है।[२०]
जमाखोरी में क्या शामिल है?
हदीसों में, गेहूं, जौ, खजूर, किशमिश और तेल की जमाखोरी का उल्लेख किया गया है।[२१] इसलिए प्रसिद्ध शिया न्यायविद् अल्लामा मजलिसी के अनुसार, न्यायविदो ने खुद को उल्लिखित मामलों में जमाखोरी के हराम होने को सीमित रखा और इसे दूसरे मामलो मे मुक्त रखा है।[२२] कुछ ने इस में नमक को भी शामिल किया है।[२३] हालांकि कुछ हदीसों में, भोजन की जमाखोरी आम तौर पर निषिद्ध है[२४] और कुछ इमामिया न्यायविदों ने भी भोजन के सभी आवशयक मामलों में इस आदेश को असंभव नहीं पाया है।[२५] और अन्य लोगों ने इसे भोजन, कपड़ा और आवास जैसी सभी सामान्य जरूरतों तक विस्तार किया है। एक दूसरे समूह के दस्तावेज़ कुछ न्यायशास्त्रीय नियम हैं, जैसे हानिरहितता का नियम (कायदा ला ज़रर) और कोई नुकसान न करने का नियम (क़ायदा ला हरज), साथ ही जमाखोरी के हराम होने का कारण, जिसका उल्लेख कुछ हदीसों में किया गया है।[२६]
गंभीरता से जमाखोरी से बचें; चूँकि अल्लाह के रसूल (स) ने इससे मना किया है और लेन-देन आसान शर्तों के साथ उचित मानकों और दरों के साथ किया जाना चाहिए; जोकि न तो विक्रेता को नुकसान पहुंचाते हो और न ही खरीदार को, और यदि आपके जमाखोरी से मना करने के बाद भी कोई ऐसा काम करता है, तो उसे दंडित करें; लेकिन (कभी भी) सज़ा को ज़्यादा मत करो।
दण्ड एवं कानूनी नियम
आयतों और हदीसों में जमाखोर को सज़ा देने से संबंधि कोई उल्लेख नही है। इसलिए, कुछ लोगों ने इमाम अली (अ) द्वारा मालिक अश्तर को लिखे पत्र का हवाला देते हुए जमाखोर की सज़ा को ताज़ीर माना है, जिसकी मात्रा और गुणवत्ता हाकिम शरीया द्वारा निर्धारित की जाती है।[२७] हालांकि अधिकार की दृष्टिकोण से जमाख़ोरी को अपराध माना जाता है। कुछ देशो मे जैसे ईरान के कानूनी कानूनो मे जमाखोरो के लिए दंड का प्रावधान है।[२८]
फ़ुटनोट
- ↑ इब्ने मंज़ूर, लेसान अल अरब, 1414 हिजरी, हकर शब्द के अंतर्गत
- ↑ इमाम ख़ुमैनी, किताब अल बैय, 1421 हिजरी, भाग 3, पेज 611
- ↑ इब्ने मंज़ूर, लेसान अल अरब, 1414 हिजरी, भाग 4, पेज 208
- ↑ शेख अंसारी, अल मकासिब अल मोहर्रेमा, 1411 हिजरी, पेज 294; इमाम ख़ुमैनी, किताब अल बैय, 1421 हिजरी, भाग 3, पेज 611
- ↑ शेख अंसारी, अल मकासिब अल मोहर्रेमा, 1411 हिजरी, पेज 294
- ↑ देखेः कुलैनी, अल काफ़ी, 1407 हिजरी, भाग 5, पेज 14-64-165; तूसी, तहज़ीब अल अहकाम, भाग 7, पेज 158-163
- ↑ कुलैनी, अल काफ़ी, 1407 हिजरी, भाग 5, पेज 165
- ↑ मजलिसी, मिरात अल उक़ूल, 1404 हिजरी, भाग 19, पेज 154
- ↑ मजलिसी, मिरात अल उक़ूल, 1404 हिजरी, भाग 19, पेज 154-155
- ↑ शहीद अव्वल, अल लुम्आ अल दमिश्कीया, 1410 हिजरी, पेज 104
- ↑ शहीद सानी, अल रौज़ा अल बहइया, 1410 हिजरी, भाग 3, पेज 218
- ↑ इब्ने फ़हद हिल्ली, अल मोहज़्ज़ब, 1407 हिजरी, भाग 2, पेज 370
- ↑ कुत्ब रावंदी, फ़िक़्ह अल क़ुरआन, 1405 हिजरी, भाग 2, पेज 52
- ↑ मोहक़्क़िक़ दामाद, एहतेकार, पेज 642
- ↑ कुलैनी, अल काफ़ी, 1407 हिजरी, भाग 5, पेज 164
- ↑ नहज अल बलाग़ा, नामा 53
- ↑ हुसैनी आमोली, मफ़ातीह अल किरामा, दार एहया अल तुरास अल अरबी, भाग 4, पेज 107
- ↑ हुर्रे आमोली, वसाइल अल शिया, अल नाशिर मोअस्सेसा आले अल-बैत (अ) लेएहया अल तुरास, भाग 17, पेज 424
- ↑ बहरानी, अल हदाइक अल नाज़ेरा, 1405 हिजरी, भाग 17, पेज 61; शेख अंसारी, अल मकासिब अल मोहर्रेमा, भाग 2, 1411 हिजरी, पेज 295
- ↑ देखेः हुसैनी आमोली, मफातीह अल किरामा, दार एहया अल तुरास अल अरबी, भाग 4, पेज 107
- ↑ कुलैनी, अल काफ़ी, 1407 हिजरी, भाग 5, पेज 164
- ↑ मजलीसी, मिरात अल उक़ूल, 1404 हिजरी, भाग 19, पेज 154-155
- ↑ क़ुत्ब रावंदी, फ़िक़्ह अल क़ुरआन, 1405 हिजरी, भाग 2, पेज 52
- ↑ तूसी, तहज़ीब अल अहकाम, भाग 7, पेज 159-162
- ↑ इस्फ़हानी, वसाइल अल नेजात, 1422 हिजरी, पेज 328-329
- ↑ मोहक़्क़िक़ दामाद, तहलील व बर रसी एहतेकार अज़ नज़रगाहे फ़िक्ह इस्लाम, 1362 शम्सी, पेज 55
- ↑ मोहक़्क़िक दामाद, एहतेकार, पेज 643-644
- ↑ देखेः मोहक़्क़िक दामाद, एहतेकार, पेज 643
स्रोत
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- इब्ने मंज़ूर, मुहम्मद बिन मुकर्रम, लेसान अल अरब, संशोधनः अहमद फारस, बैरुत, दार अल फ़िक्र, दार सादिर, 1414 हिजरी
- इस्फ़हानी, अबुल हसन, वसीला अल नेजात, शरह इमाम ख़ुमैनी, क़ुम, मोअस्सेसा तंज़ीम व नशर आसारे इमाम खुमैनी, 1422 हिजरी
- इमाम ख़ुमैनी, सय्यद रुह अल्लाह, किताब अल बैय, तेहरान, मोअस्सेसा तंज़ीम व नशर आसारे इमाम खुमैनी, 1421 हिजरी
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- हुर्रे आमोली, वसाइल अल शिया, अल नाशिर मोअस्सेसा आले अल-बेत (अ) ले एहया अल तुरास, कुम, अल मतबआ, सितारा
- हुसैनी आमोली, सय्यद जवाद बिन मुहम्मद, मफ़ातीह अल किरामा फ़ी शरह अल कवाइद अल अल्लामा, संशोधनः मुहम्मद बाक़िर हुसैनी शहीदी, बैरत, दार एहया अल तुरास अल अरबी
- शहीद अव्वल, मुहम्मद बिन मक्की, अल लुम्अ अल दमिश्क़ीया फ़ी फ़िक़्ह अल इमामीया, संशोधनः मुहम्मद तक़ी मुरवारीद व अली असग़र मुरवारीद, बैरुत, दार अल तुरास, 1410 हिजरी
- शहीद सानी, ज़ैनुद्दीन बिन अली, अल रोज़ा अल बहइया फ़ी शरह अल लुम्आ अल दमिश्क़ीया, शरह सय्यद मुहम्मद कलांतर, क़ुम, किताब फ़रोशी दावरी, 1410 हिजरी
- शेख अंसारी, मुर्तज़ा, अल मकासिब अल मोहर्रेमा वल बैय वल ख़यारात, संशोधनः मुहम्मद जवाद रहमती व सय्यद अहमद हुसैनी, क़ुम, मंशूरात दार अल ज़खाइर, 1411 हिजरी
- तूसी, मुहम्मद बिन हसन, तहज़ीब अल अहकाम, शोधः हसन मूसवी खोरासानी, तेहरान, दार अल कुतुब अल इस्लामीया, 1407 हिजरी
- कुत्ब रावंदी, सईद बिन अब्दुल्लाह, फ़िक़्ह अल क़ुरआ, संशोधनः सय्यद अहमद हुसैनी, क़ुम, इंतेशारात किताब खाना आयतुल्लाह मरअशी, 1405 हिजरी
- कुलैनी, मुहम्मद बिन याक़ूब, अल काफ़ी, संशोधनः अली अकबर ग़फ़्फ़ारी व मुहम्मद आख़ूंदी, तेहरान, दार अल कुतुब अल इस्लामीया, 1407 हिजरी
- मजलीसी, मुहम्मद बाक़िर, मिरात अल उक़ूल फ़ी शरह अखबार अल रसूल, संशोधनः सय्यद हाशिम रसूली महल्लाती, तेहरान, दार अल कुतुब अल इस्लामीया 1404 हिजरी
- मोहक़्क़िक़ दामाद, एहतेकार, दाएरातुल मआरिफ़ बुजुर्ग इस्लामी, तेहारन, भाग 6, मरकज़ दाएरतुल मआरिफ़ बुजुर्ग इस्लामी, 1373 शम्सी
- मोहक़्क़िक़ दामाद, मुस्तफ़ा, तहलील ब बर रसी एहतेकार अज़ नज़रगाह फ़िक्ह इस्लाम, तेहरान, 1362 शम्सी