इमाम हुसैन (अ) के सर का क़ुरआन पढ़ना
इमाम हुसैन (अ) के सर का क़ुरआन पढ़ना, कर्बला की घटना के बाद की घटनाओं में से है, जिसका उल्लेख शिया और अहले-सुन्नत के स्रोतों में हुआ है। इन रिपोर्टों के अनुसार, इमाम हुसैन (अ) के सर ने कूफ़ा और शाम में क़ुरआन की कुछ आयतों, विशेष रूप से सूर ए कहफ़ की आयतों की तिलावत की। यह घटना कुछ अक़ीदती रचनाओं में, जैसे रजअत की चर्चा में, प्रमाण के रूप में पेश की गई है और शिया शोध संस्कृति में भी इसका प्रभाव दिखाई देता है।
अक़ीदती स्थान
इमाम हुसैन (अ) के सर का क़ुरआन पढ़ना, कर्बला की घटना के बाद सन् 61 हिजरी में, उन चमत्कारिक घटनाओं[१] में से माना गया है जो आशूरा के आध्यात्मिक पहलुओं से संबंधित हैं।[२] कुछ लोगों ने इसे हुज्जत पूरी करने[३] और आशूरा के आंदोलन की सच्चाई को इतिहास में दर्ज करने का माध्यम भी माना है।[४] इस आधार पर, इमाम हुसैन (अ) के सर से असहाबे कहफ़ से संबंधित आयत की तिलावत को उनकी शहादत के बाद उनकी याद के बाक़ी रहने और उन लोगों के हाथों उनकी शहादत की हैरतअंगेज़ घटना का संकेत माना गया है, जो स्वयं को पैग़म्बर (स) का अनुयायी मानते थे।[५]
इस घटना को कलामी चर्चाओं में भी प्रमाण के रूप में पेश किया गया है। शेख़ हुर्रे आमिली (निधन 1104 हिजरी) ने रजअत के प्रमाण में इसका हवाला दिया है।[६] कुछ लोगों ने इसे अल्लाह की शक्ति और इमामों (अ) की विशेष क्षमताओं का परिणाम माना है, जो अल्लाह की अनुमति से होती हैं और मूल इल्लीअत के सिद्धांत के विरुद्ध नहीं हैं।[७]
पढ़ी गई आयतें और सूरहें
इमाम हुसैन (अ) का सिर से क़ुरआन की तिलावत किए जाने की बात शिया[८] और अहले-सुन्नत[९] के स्रोतों में वर्णित हुई है। शेख़ मुफ़ीद की रिवायत के अनुसार, जब इमाम हुसैन का सर कूफ़ा में घुमाया जा रहा था, तो पैग़म्बर (स) के सहाबी ज़ैद बिन अरक़म ने इमाम के सर से सूर ए कहफ़ की आयत 9 की तिलावत सुनी।[१०] मिन्हाल बिन अम्र ने भी इसी आयत की तिलावत[११] और एक दूसरी रिवायत में सूर ए कहफ़ की आयत 9 तक की तिलावत का उल्लेख किया है।[१२] सहल बिन हबीब शहरज़ूरी ने भी सूर ए कहफ़ की आयत 9 तक की तिलावत सुनने की सूचना दी है।[१३] एक अन्य रिवायत में सर्राफ़ान के स्थान पर इमाम के सर से सूर ए कहफ़ की आयत 13 तक की तिलावत किए जाने का उल्लेख है।[१४]
मुहम्मद बिन जरीर तबरी आमुली ने हारिस बिन वकीदा से रिवायत की है कि उन्होंने इमाम के सिर से सूर ए कहफ़ और सूर ए ग़ाफ़िर की आयत 70 और 71 की तिलावत सुनी।[१५]
इसी तरह, एक रिवायत में बताया गया है कि जब इमाम का सर एक पेड़ पर रखा गया, तो उससे यह आयत وَ سَیَعْلَمُ الَّذِینَ ظَلَمُوا أَیَّ مُنقَلَبٍ یَنقَلِبُونَ (वसयअलमुल्लज़ीना ज़लमू अय्या मुन्क़लबिन यन्क़लिबून)[१६] सुनाई दी।[१७] ख़ौली बिन यज़ीद के घर में इमाम का सर मौजूद होने से संबंधित रिवायत में भी[१८] सुबह तक क़ुरआन की तिलावत और सूर ए शोअरा की आयत 227 के एक भाग को आख़िरी सुनी गई आयत के रूप में बयान किया गया है।[१९]
सलमा बिन कुहैल ने दमिश्क़ के बाबुल-फ़रादीस में इमाम का सर देखा और बताया कि वह فَسَیَکْفِیکَهُمُ اللهُ وَ هُوَ السَّمِیعُ الْعَلِیمُ (फ़सयक़फ़ीकहुमुल्लाहो वहुवस्समीउल-अलीम)[२०] आयत की तिलावत कर रहा था।[२१]
बातें और ज़िक्र
कुछ रिवायतों में इमाम हुसैन (अ) के सर से बात करने और ज़िक्र करने का भी उल्लेख हुआ है। जब यज़ीद ने रोम के बादशाह के दूत को क़त्ल करने का आदेश दिया, तो इमाम हुसैन (अ) के सिर ने ऊँची आवाज़ में कहा: لا حول و لا قوة إلا بالله (ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह।)[२२] हिलाल बिन मुआविया ने भी बताया है कि इमाम के सर ने उस व्यक्ति से बात की जो उसे भाले पर उठाए हुए था और शरीर से सर अलग करने के कारण उस पर लानत की तथा अल्लाह से दुआ की कि उसके मांस और हड्डियों के बीच जुदाई कर दे और उसे दुनिया वालों के लिए इबरत बना दे।[२३]
इब्ने हमज़ा तूसी के अनुसार, जब इमाम हुसैन (अ) का सर दमिश्क़ में घुमाया जा रहा था, तो एक व्यक्ति उसके सामने सूर ए कहफ़ की आयत 9 तक तिलावत कर रहा था। इमाम के सर ने उसके जवाब में कहा: «मेरी घटना असहाबे कहफ़ की कहानी से भी अधिक आश्चर्यजनक है।»[२४]
फ़ुटनोट
- ↑ रज़ाई इस्फ़हानी, क़ुरआन व इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम, पृष्ठ 108।
- ↑ जवादी आमुली, «تفسیر سوره کهف، جلسه ۷», इसरा वेबसाइट।
- ↑ मुक़र्रम, मक़्तलुल हुसैन (अ), पृष्ठ 400-401।
- ↑ मुहम्मदी, «قرآن خواندن سر بریده امام حسین(ع) حادثهای ملکوتی است», जवान पत्रकार क्लब।
- ↑ अज्लाल, «چرا سر امام حسین(ع) بر نیزه این آیه را می خواند؟», तिब्यान वेबसाइट।
- ↑ हुर्रे आमिली, किताब अल-ईक़ाज़ मिन अल-हजअह, पृष्ठ 224।
- ↑ सेहती सरदरूदी, तहरीफ़ शनासी-ए-आशूरा व तारीख़-ए-इमाम हुसैन (अ), पृष्ठ 334।
- ↑ शेख़ मुफ़ीद, अल-इरशाद, खंड 2, पृष्ठ 117; इब्ने-हमज़ा, अस्साक़िब फ़िल-मनाक़िब, पृष्ठ 333; तबरी आमुली, नवादिरुल-मोजिज़ात, पृष्ठ 246।
- ↑ इब्ने-असाकिर, तारीख़ मदीना दमिश्क़, खंड 60, पृष्ठ 370; सियूती, शरहुस-सुदूर, पृष्ठ 212।
- ↑ शेख़ मुफ़ीद, अल-इरशाद, खंड 2, पृष्ठ 117।
- ↑ कूफ़ी, मनाक़िबुल-इमाम अमीरुल-मोमिनीन, खंड 2, पृष्ठ 267।
- ↑ इब्ने-हमज़ा, अस्साक़िब फ़िल-मनाक़िब, पृष्ठ 333।
- ↑ बहरानी, मदीनतुल-मआजिज़, खंड 4, पृष्ठ 122-123।
- ↑ इब्ने-शहरआशूब, मनाक़िब, खंड 10, पृष्ठ 52।
- ↑ तबरी आमुली, नवादिरुल-मोजिज़ात, पृष्ठ 246।
- ↑ सूर ए शोअरा, आयत 227।
- ↑ इब्ने-शहर आशूब, मनाक़िब, खंड 10, पृष्ठ 52।
- ↑ ख़्वारज़मी, मक़्तलुल हुसैन (अ), खंड 2, पृष्ठ 114।
- ↑ बहरानी, मदीनतुल-मआजिज़, खंड 4, पृष्ठ 124-125।
- ↑ सूर ए बक़रा, आयत 137।
- ↑ इब्ने-राज़ी, जामेअ उल-अहादीस, पृष्ठ 252।
- ↑ मुक़र्रम, मक़्तलुल हुसैन (अ), पृष्ठ 403-404।
- ↑ मुक़र्रम, मक़्तलुल हुसैन (अ), पृष्ठ 402-403।
- ↑ इब्ने-हमज़ा, अस्साक़िब फ़िल-मनाक़िब, पृष्ठ 333।
स्रोत
- अज्लाल, ज़हरा, «چرا سر امام حسین(ع) بر نیزه این آیه را می خواند؟» (इमाम हुसैन (अ) का सर भाले पर यह आयत क्यों पढ़ता था?), तिब्यान वेबसाइट, प्रविष्टि की तारीख़: 24 नवम्बर 2014 ईस्वी, लेख देखने की तारीख़: 8 अक्टूबर 2026 ईस्वी।
- इब्ने-असाकिर, अली बिन हसन, तारीख़ मदीना-ए-दिमश्क़ व ज़िक्र फ़ज़्लिहा व तस्मियति मराहिलिहा मिन अल-अमासिल औ अजताज़ा बनवाहिया मिन वारिदीहा अहलुहा, बेरूत, दारुल-फ़िक्र प्रकाशन, 1415 हिजरी।
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- मुहम्मदी, रज़ा, «قرآن خواندن سر بریده امام حسین(ع) حادثهای ملکوتی است» (इमाम हुसैन (अ) के कटे हुए सर का क़ुरआन पढ़ना एक मलाकूती घटना है), जवान पत्रकार क्लब, लेख प्रविष्टि की तारीख़: 26 सितम्बर 2021 ईस्वी, लेख देखने की तारीख़: 8 अक्टूबर 2026 ईस्वी।
- रज़ाई इस्फ़हानी, मुहम्मद अली, क़ुरआन व इमाम हुसैन(अ), इमाम हुसैन(अ) व क़ुरआन, क़ुम, तफ़्सीर व उलूम-ए-क़ुरआन शोध संस्था, 1393 शम्सी।
- शेख़ मुफ़ीद, मुहम्मद बिन मुहम्मद, अल-इरशाद फ़ी मअरिफ़ति हुजजिल्लाह अलल-इबाद, शोध: आले अल बैत (अ) संस्थान, क़ुम, कांग्रेस-ए-शेख़ मुफ़ीद, पहला संस्करण, 1413 हिजरी।
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