शहरबानो

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शहरबानो
इमाम सज्जाद (अ) की माँ
रय शहर में बीबी शहरबानो के मक़बरे का चित्र
रय शहर में बीबी शहरबानो के मक़बरे का चित्र
उपनामशाह ज़नान
वंशअंतिम सासानी बादशाह यज़्दगर्द की पुत्री
प्रसिद्ध रिश्तेदारइमाम हुसैन (अ) (पति), इमाम सज्जाद (अ) (पुत्र)


शहर बानो (अरबी: شھر بانو) इमाम सज्जाद (अ) की माँ इतिहासकारों और मोहद्देसीन के अनुसार अंतिम सासानी राजा यज़्दगुर्द की बेटी थी, जो ईरान में इस्लाम आने के बाद इमाम हुसैन (अ) की पत्नी बनी और इमाम सज्जाद (अ) को जन्म दिया। हालांकि उनके नाम, वंश, देहांत, मदीना में उनके आगमन के समय और इमाम हुसैन (अ) से शादी कैसे हुई इस बारे में मतभेद हैं। तीसरी चंद्र शताब्दी मे लिखी गई किताब दलाइल अल-इमामा की रिवायत के अनुसार, उन्हे (शहर बानो) उमर बिन खत्ताब की विजय के दौरान गिरफ्तार कर मदीना लाया गया, जहाँ उनकी रिहाई के बाद उन्होने इमाम हुसैन (अ) से विवाह किया।

ऐतिहासिक स्रोतो के अनुसार इमाम सज्जाद (अ) के जन्म के दौरान शहर बानो का देहांत हो गया था। हालांकि कहा जाता है कि वह कर्बला की घटना में मौजूद थी और इमाम हुसैन (अ) की शहादत के बाद रैय आकर वहां एक पहाड़ में लुप्त हो गई। इसलिए रैय के पास स्थित बीबी शहर बानो का मक़बरा उनसे मंसूब है। कर्बला से रय तक की उनकी यात्रा की कहानी को आशूरा की विकृतियों (तहरीफ़ाते आशूरा) में से माना जाता है। कुछ शोधकर्ताओं ने रैय में उनके लिए धर्मस्थल के आरोपण को खारिज कर दिया है।

वंशावली

शहर बानो इमाम सज्जाद (अ) की मां हैं। 1327 हिजरी में पैदा हुए मुहम्मद हादी युसुफ़ ग़रवी के अनुसार, इतिहासकार[१] इमाम सज्जाद (अ) की मां को तीसरे यज़्दगुर्द की बेटी मानते हैं, लेकिन वे उसके नाम के बारे में असहमत हैं।[२] इसी प्रकार इब्ने शहर आशोब (मृत्यु 588 हिजरी) के अनुसार इमाम सज्जाद (अ) की माता का नाम शहरबानुइया जो कि यज़्दगर्द की बेटी है। हालाँकि उनके नाम को शाहे ज़नान, जहान, सुलाफा, हौला, बर्रा, मरियम और फातिमा भी कहा जाता है।[३] स्रोतो मे उनका नाम सलामा,[४] शहरनाज़,[५] हर्रार और ग़ज़्ज़ाला[६] भी उल्लेखित है। इसी तरह उनके पिता का नाम सुबहान[७] और नौशजान[८] भी बताया गया है। इमाम सज्जाद (अ) की माँ का परिचय काबुल की एक दासी के रूप में कराया गया है।[९]

सुन्नी विद्वान जारुल्लाह ज़मख़शरी (मृत्यु 538 हिजरी) के अनुसार इमाम सज्जाद (अ) को "इब्न अल-खैयारातैन" कहा जाता था, क्योंकि उनकी मां यज़्दगुर्द से थीं।[१०]

मदीना में प्रवेश और इमाम हुसैन (अ) से विवाह

शहर बानो का मदीना आगमन और इमाम हुसैन (अ) से उनके विवाह के संबंध मे कई मत हैं:

  • हज़रत अली (अ) के शासन के दौरान: अल-इरशाद,[११] एलाम अल-वरा,[१२] रौज़ातुल वाएज़ीन,[१३] ताज अल-मवालीद[१४] और कश़्फ़ अल-ग़ुम्मा[१५] में बयान की गई रिवायत के आधार पर दमिश्क़ मे इमाम अली (अ) के प्रतिनिधि ने यज़्दगुर्द की दो लड़कियों को उनके पास भेजा। इमाम अली (अ) ने शहर बानो को इमाम हुसैन (अ) और दूसरी को मुहम्मद बिन अबी बक्र को दे दिया।
  • उमर बिन ख़त्ताब के शासन के दौरान:[१६] तीसरी चंद्र शताब्दी मे लिखी गई किताब दलाइल अल-इमामा की रिवायत के अनुसार, शाहरबानो एक दासी थी। उमर बिन खत्ताब यज़्दगुर्द की बेटी को बेचना चाहता था; लेकिन इमाम अली (अ) ने पैगंबर (स) की रिवायत "हर राष्ट्र के महान लोगों का सम्मान करें, भले ही वे आपका विरोध करें" का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया। फिर ख़ुदा की राह में उस से अपना हिस्सा आज़ाद कर दिया फ़िर उनके बाद बनी हाशिम और दूसरे मुसलमानों ने भी ऐसा ही किया। इसलिए उन्होंने उन्हें (शहर बानो को) अपने पति के रूप में किसी को चुनने की स्वतंत्रता दी तो उन्होंने इमाम हुसैन (अ) को चुना और उनसे विवाह कर लिया।[१७] काफ़ी की रिवायत के अनुसार उमर बिन ख़त्ताब ने चाहा कि शहर बानो को अपने लिए चुने लेकिन इमाम अली (अ) ने विरोध किया।[१८] हालांकि शिया सिद्धांतकार मुर्तज़ा मुताहरी (मृत्यु 1358) ने अल-काफी के कथन को वैध नहीं माना; क्योंकि इसके दो कथावाचक (रावी) रेजाली विद्वानो की दृष्टि से भरोसेमंद नहीं हैं।[१९]
  • उस्मान की खिलाफत में: ओयून अखबार अल-रज़ा की रिवायत के अनुसार, यह घटना उस्मान की खिलाफत के दौरान हुई और उस्मान बिन अफ़्फ़ान ने उन्हे (शहर बानो को) इमाम हुसैन (अ) को दे दिया।[२०] मुहम्मद हादी युसुफ़ ग़रवी (जन्म 1327 शम्सी) ने अल-मोसूआ अल-तारीख अल-इस्लामी नामक किताब मे इसी बात को स्वीकार किया है।[२१]

संदेह

ख़िदमते मुताक़ाबिले इस्लाम वा ईरान नामक पुस्तक में मुर्तज़ा मुताहरी के अनुसार, शहरबानो का इमाम हुसैन (अ) के साथ विवाह ऐतिहासिक साक्ष्यों के संदर्भ में संदिग्ध है, और कुछ शोधकर्ता इस पर संदेह करते हुए विवाह को मनगढ़ंत मानते हैं।[२२] सय्यद जाफ़र शहीदी (मृत्यु 1386 शम्सी) जिंदगानी अली बिन हुसैन (अ) नामक पुस्तक में ने इस तथ्य का उल्लेख किया कि इस संदेह के प्रमाण के रूप में बनी हाशिम के बीच दूसरी शताब्दी में शहरबानो अज्ञात थी। इस दावे को साबित करने के लिए उन्होंने एक ऐतिहासिक साक्ष्य का हवाला दिया है। इस साक्ष्य के अनुसार अब्बासी ख़लीफ़ाओं में से मंसूर दवानीकी (शासनकाल: 136-158 हिजरी) ने नफ़्से ज़किया के नाम से प्रसिद्ध मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह को जवाब में इमाम सज्जाद (अ) की माँ का उल्लेख उम्मुल वलद (दासी) के रूप में किया था।[२३] सय्यद जाफ़र शहीदी के अनुसार, मंसूर दवानीकी ने उम्मुल वलद का शब्द नफ़्से ज़किया को अपमानित करने के लिए इस्तेमाल किया है, और अगर शहरबानो की कहानी सत्य होती, तो मंसूर इस शब्द का इस्तेमाल नहीं करता, और अगर उसने झूठ लिखा था तो नफ़्से ज़किया उसे जवाब देते कि इमाम सज्जाद (अ) की माँ दासी (कनीज़) नहीं थी।[२४]

देहांत

कुछ इतिहासकारों के अनुसार इमाम सज्जाद (अ) की माँ का निधन इमाम सज्जाद (अ) के जन्म के समय ही हो गया था।[२५] उनकी (शहरबानो की) मृत्यु के बाद वशीका इमाम सज्जाद (अ) की दाया बन गईं, इसलिए इमाम (अ) उनको माँ कहकर संबोधित करते थे।[२६] इतिहासकार अली इब्ने हुसैन मसउदी (मृत्यु 346 हिजरी) के अनुसार, जब इमाम बड़े हुए तो इमाम (अ) ने वशीका का विवाह अपने ग़ुलाम (दास) के साथ कर दिया। इस आधार पर बनी उमय्या इमाम (अ) को दोषी ठहराते हुए कहते थे: अली बिन हुसैन (अ) ने अपने ग़ुलाम (दास) के साथ अपनी मां का विवाह कर दिया।[२७] तीसरी चंद्र शताब्दी मे लिखी जाने वाली किताब तबक़ात अल-कुबरा में उल्लेख किया गया है कि शहरबानो ने इमाम हुसैन (अ) के बाद इमाम के ज़ुबैद नामक ग़ुलाम से विवाह कर अब्दुल्लाह नाम के बेटे को जन्म दिया।[२८] यह भी कहा जाता है कि कर्बला की घटना के बाद शहरबानो कर्बला से ईरान चली आई थी और रैय के पास एक पहाड़ में गायब हो गई।[२९] शिया मुहद्दिस, मोहद्दिस नूरी (मृत्यु 1320 हिजरी) इसे अशूरा की विकृतियों (तहरीफ़ाते आशूरा) में से मानते हैं।[३०] इसके अलावा ग्रंथसूचीकार आक़ा बुजुर्ग तेहरानी(मृत्यु 1389 हिजरी) के अनुसार यह एक काल्पनिक कहानी है जिसका उल्लेख मंशूरे मुबारक नामक किताब (तबरिस्तान के राजाओं द्वारा इमाम अली (अ) के वंश के बारे में एक काल्पनिक ग्रंथ) में किया गया है।[३१]

बीबी शहरबानो का मक़बरा रैय के पास शहरबानो से मंसूब है।[३२] हालाकि इस मक़बरे का उनके नाम से मंसूब होने को कुछ लेखकों द्वारा खारिज कर दिया गया है।[३३]

संबंधित लेख

फ़ुटनोट

  1. देखेः याक़ूबी, तारीख अल-याक़ूबी, दार सादिर, भाग 2, पेज 247; क़ुमी, तारीखे क़ुम, 1361 शम्सी, पेज 196; बग़दादी, तारीख़े अहले अल-बैत, 1410 हिजरी, पेज 121; तारीख़े ख़लीफ़ा, पेज 240
  2. युसूफ़ी ग़रवी, हौला अल-सय्यदा शहरबानो, पेज 7
  3. इब्ने शहर आशोब, अल-मनाक़िब, 1379 हिजरी, भाग 4, पेज 176
  4. कुलैनी, अल-काफ़ी, 1407 हिजरी, भाग 1, पेज 467; इब्ने कसीर, अल-बिदाया वन निहाया, 1407 हिजरी, भाग 9, पेज 104; क़ुमी, तारीख़े क़ुम, 1361 शम्सी, पेज 197
  5. मुजमल अल-तारीख वल क़ेसस, तेहरान, पेज 456
  6. याक़ूबी, तारीख अल-याक़ूबी, दारे सादिर, भाग 2, पेज 247
  7. मुजमल अल-तारीख वल क़ेसस, तेहरान, पेज 456
  8. अरबेली, कश्फ़ुल ग़ुम्मा, 1381 हिजरी, भाग 2, पेज 105
  9. देखेः याक़ूबी, तारीख़ अल-याक़ूबी, दारे सादिर, भाग 2, पेज 303
  10. ज़मख़शरी, रबीअ अल-अबरार, मोअस्सेसा अल-आलमी लिलमतबूआत, भाग 1, पेज 334
  11. शेख़ मुफ़ीद, अल-इरशाद, 1413 हिजरी, भाग 1, पेज 137
  12. तबरसी, आलाम अल-वरा, 1390 हिजरी, भाग 1, पेज 480
  13. फ़ेताल नेशाबूरी, रौज़ातुल वाएज़ीन, 1375 शम्सी, भाग 1, पेज 201
  14. तबरसी, तारीख़ अल-मवालीद, 1422 हिजरी, पेज 89
  15. अरबेली, कश्फ़ुल ग़ुम्मा, 1381 हिजरी, भाग 2, पेज 83
  16. मसऊदी, इस्बात अल-वसीया, 1426 हिजरी, पेज 170; याक़ूबी, तारीख़ अल-याक़ूबी, दारे सादिर, भाग 2, पेज 303
  17. तबरी, दलाइल अल-इमामा, 1413 हिजरी, पेज 194-196
  18. कुलैनी, अल-काफ़ी, 1407 हिजरी, भाग 1, पेज 467
  19. मुताहरी, ख़िदमाते मुताक़ाबिले इस्लाम वा ईरान, सदरा, पेज 117
  20. सुदूक़, ओयून अख़बार अल-रज़ा, 1378 हिजरी, भाग 2, पेज 128, हदीस 6
  21. युसूफ़ी ग़रवी, अल-मौसूआ अल-तारीख़ अल-इस्लामी, 1417 हिजरी, भाग 6, पेज 357 और 652
  22. मुताहरी, ख़िदमाते मुताक़ाबिले इस्लाम वा ईरान, सदरा, पेज 116-117
  23. बलाज़ुरी, अंसाब अल-अशराफ़, 1397 हिजरी, भाग 3, पेज 101
  24. शहीदी, जिंदगानी अली इब्ने अल-हुसैन, 1365 शम्सी, पेज 24
  25. मसऊदी, इस्बात अल-वसीया, 1426 हिजरी, पेज 170
  26. इब्ने दाऊद हिल्ली, अल-रेजाल, 1342 शम्सी, पेज 372
  27. मसऊदी, इस्बात अल-वसीया, 1426 हिजरी, पेज 170
  28. इब्ने साद, अल-तबक़ात अल-कुबरा, 1410 हिजरी, भाग 5, पेज 163
  29. शहीदी, जिंदगानी अली इब्ने हुसैन, पेज 27
  30. मोहद्दिस नूरी, लूलू वल मरजान, 1388 शम्सी, पेज 253
  31. आक़ा बुज़ुर्ग तेहरानी, अल-ज़रीआ, 1408 हिजरी, भाग 23, पेज 46
  32. देखेः करीमान, तेहरान दर गुज़श्ते वा हाल, इंतेशारात दानिश गाहे मिल्ली ईरान, पेज 25
  33. करीमान, तेहरान दर गुज़श्ते वा हाल, इंतेशारात दानिश गाहे मिल्ली ईरान, पेज 27

स्रोत

  • आक़ा बुज़ुर्ग तेहरानी, मुहम्मद मोहसिन, अल-ज़रीआ इला तसानीफ अल-शिया, क़ुम, इस्माईलीयान, तेहारन, किताब खाना इस्लामीया, 1408 हिजरी
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  • क़ुमी, हसन बिन मुहम्मद बिन हसन, तारीख़े क़ुम, अनुवादः हसन बिन अली बिन हसन अब्दुल मलिक क़ुमी, शोधः सय्यद जलालुद्दीन तेहरानी, तेहारन, इंतेशारात तूस, 1361 शम्सी
  • करीमान, हुसैन, तेहरान दर गुज़श्ते वा हाल, इंतेशारात दानिशगाह मिल्ली ईरान
  • कुलैनी, मुहम्मद बिन याक़ूब, अल-काफ़ी, तेहरान, दार अल-कुतुब अल-इस्लामीया, चौथा संस्करण, 1407 हिजरी
  • मत्ने ताज़ीया नामा शहरबानो, आरश, क्रमांक 3, उरदीबहिश्त 1341 शम्सी
  • मुजमल अल-तवारीख़ वल क़ेसस, शोधः मलक अल-शोरा बहार, तेहरान, कलाले ख़ावर
  • मसऊदी, अली बिन हुसैन, इस्बात अल-वसीया लिल इमाम अली बिन अबी तालीब, क़ुम, अंसारीयान, तीसरा संस्करण, 1426 हिजरी
  • मुताहरी, मुर्तज़ा, खिदमाते मुताक़ाबिले इस्लाम व ईरान, मुर्तज़ा मुताहरी, तेहरान, नश् सदरा, आठंवा संस्करण
  • मुफ़ीद, मुहम्मद बिन मुहम्मद, अल-इरशाद फ़ी मारफ़ते हुजाजिल्लाह अला अल-इबाद, क़ुम, कुंगरा ए शेख मुफ़ीद, 1413 हिजरी
  • नूरी, मीर्ज़ा हुसैन, लूलू वल मरजान दर शरते पिल्ले अव्वल वा दोव्वुम रोज़ा ख़ानान, आफ़ाक़, तेहरान, 1388 शम्सी
  • याक़ूबी, अहमद बिन अबी याक़ूब, तारीख अल-याक़ूबी, बैरुत, दारे सादिर
  • युसूफ़ी ग़रवी, मुहम्मद हादी, हौला अल-सय्यदा शहरबानो, रिसालातुल हुसैन (अ), साले अव्वल, क्रमांक 2, रबी अल-अव्वल 1412 हिजरी
  • युसूफ़ ग़रवी, मुहम्मद हादी, मोसूआ अल-तारीख अल-इस्लामी, मजमा अंदेशा इस्लामी, क़ुम, 1417 हिजरी