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शरई ज़ोहर

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(ज़वाल से अनुप्रेषित)

ज़ोहरे शरई या ज़वाल जब संकेतक की छाया (एक लकड़ी या कुछ और जो दोपहर (ज़ोहर की नमाज़ का समय) का निर्धारण करने के लिए जमीन में गाड़ी जाती है) दिन में अपने सबसे कम सीमा तक पहुंचती है। ज़ोहरे शरई से, दोपहर की प्रार्थना (ज़ोहर की नमाज़) के समय की शुरुआत होती है।

न्यायविदों के अनुसार, यदि सूचकांक को जमीन पर लंबवत रखा जाता है, तो वह समय जब इसकी छाया अपने निम्नतम मूल्य पर पहुंचती है, उसे ज़वाल या ज़ोहरे शरई कहा जाता है। [१]

न्यायशास्त्र की पुस्तकों में प्रार्थना के समय (नमाज़ का समय) [२] और यात्री का व्रत (मुसाफ़िर का रोज़ा) के अध्याय में चर्चा है। इससे संबंधित कुछ अहकाम इस प्रकार हैं:

  • शरई दोपहर (ज़ोहरे शरई) भौगोलिक क्षेत्रों और वर्ष के दिनों के अनुसार बदलती रहती है। [३]
  • न्यायविदों का फ़तवा यह है कि शरई दोपहर ज़ोहर की नमाज़ का शुरुवाती समय है। [४]
  • विधिवेत्ताओं (फ़ोक़हा) के अनुसार यदि कोई रोज़ेदार, दोपहर (ज़ोहरे शरई या ज़वाल) से पहले यात्रा करता है तो उसका रोज़ा अमान्य हो जाता है। [५]
  • यदि कोई मुसाफिर दोपहर से पहले अपने वतन या ऐसी जगह पहुंच जाए जहां वह दस दिन रहने का इरादा रखता है, तो यदि उसने कोई ऐसा काम नहीं किया है जिससे रोज़ा अमान्य हो जाता है, तो उसे उस दिन का रोज़ा रखना होगा और यदि उसने ऐसा कोई काम किया है जिससे रोज़ा टूट जाता है, तो उस दिन का रोज़ा रखना होगा। उस के लिये अनिवार्य नहीं था। [६]

फ़ुटनोट

  1. ↑ तबतबाई यज़दी, अल-उरवा अल-वुसक़ा, 1421 हिजरी, खंड 2, पृष्ठ 252; इमाम खुमैनी, तौज़ीह अल-मसायल, 1391, अंक 729, पृष्ठ 116; मकारेम शिराज़ी, तौज़ीह अल-मसायल, 1429 हिजरी, नमाज़ अनुभाग, अंक 672।
  2. ↑ तबतबाई यज़दी, अल-उरवा अल-वुसक़ा, 1421 हिजरी, खंड 2, पृष्ठ 673।
  3. ↑ तबतबाई यज़दी, अल-उरवा अल-वुसक़ा, 1421 हिजरी, खंड 2, पृष्ठ 252; "चेरा अवक़ाते शरई दर दो उफ़ुक़े नज़दीक बेहम इख़्तेलाफ़े मशहूर दारद??", हौज़ा सूचना आधार।
  4. ↑ तबतबाई यज़दी, अल-उरवा अल-वुसक़ा, 1421 हिजरी, खंड 2, पृष्ठ 250; इमाम खुमैनी, तौज़ीह अल-मसायल, 1391, अंक 731, पृष्ठ 117; मकारेम शिराज़ी, तौज़ीह अल-मसायल, 1429 हिजरी, प्रार्थना अनुभाग, अंक 673।
  5. ↑ बनी हाशमी खुमैनी, तौज़ीहुल मसायले मराजेअ, 1381, खंड 1, पृष्ठ 953।
  6. ↑ बनी हाशमी खुमैनी, तौज़ीहुल मसायले मराजेअ, 1381, खंड 1, पृष्ठ 994।

स्रोत

  • इमाम खुमैनी, सैय्यद रूहोल्लाह, तौज़ीहुल मसायल, क़ुम, इमाम खुमैनी संपादन और प्रकाशन संस्थान, 1391 शम्सी।
  • बनी हशमी खुमैनी, सैय्यद मोहम्मद हसन, तौज़ीहुल मसायले मराजेअ, क़ुम, क़ुम थियोलॉजिकल सेमिनरी सोसाइटी का इस्लामी प्रकाशन कार्यालय, 1381 शम्सी।
  • तबातबाई यज़दी, सैय्यद मोहम्मद काज़िम, अल-उरवा अल-वुसक़ा, क़ुम, मुद्रासिन सोसाइटी से संबद्ध इस्लामिक पब्लिशिंग हाउस, 1421 हिजरी।
  • मकारिम शिराज़ी, नासिर, तौज़ीहुल मसायल, क़ुम, इमाम अली बिन अबी तालिब स्कूल का प्रकाशन, 1429 हिजरी।
  • "चेरा अवक़ाते शरई दर दो उफ़ुक़े नज़दीक बेहम इख़्तेलाफ़े मशहूर दारद?", हौज़ा सूचना डेटाबेस, प्रवेश की तारीख: 18 शहरिवर 1393, पहुंच की तारीख: 21 मुरदाद

1402।