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वुज़ू के अंग

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(आज़ा ए वुज़ू से अनुप्रेषित)


वुज़ू के अंग, सूर ए मायदा की आयत 6 में हाथों को कोहनियों तक धोना, सिर का मसह करना और पैरों को टखनों (पैर के ऊपर की उभरी हुई हड्डी) तक शामिल किया गया है।[] शिया रिवायतों के आधार पर वुज़ू करने की विधि को वही मानते हैं, जो जिब्राईल (अ) ने पैग़म्बर (स) को सिखाई थी; इस आधार पर हाथों को कोहनियों से उँगलियों की ओर धोया जाता है और सिर तथा पैरों का मसह किया जाता है।[] इसके विपरीत, अहले सुन्नत उँगलियों के सिरों से कोहनियों तक हाथ धोते हैं और कोहनियों से उँगलियों की ओर धोने को जायज़ नहीं मानते[] तथा वुज़ू में पैरों का मसह करने के बजाय उन्हें धोते हैं।[] इसी तरह अहले सुन्नत के मज़ाहिब में भी सिर के मसह के मूल सिद्धांत को स्वीकार किया गया है, यद्यपि इसकी मात्रा और विवरण के बारे में मतभेद है।[]

कुछ स्रोतों ने वुज़ू करने की विधि में इस मतभेद की शुरुआत को उस्मान के ख़िलाफ़त काल से संबंधित बताया है[] और कहा है कि पैग़म्बर (स) के समय तथा पहले और दूसरे ख़लीफ़ा और उमर के दौर में इस संबंध में कोई मतभेद नहीं था।[] यह भी कहा गया है कि उस्मान अपनी ख़िलाफ़त के आरंभ में पहले के लोगों की तरह ही वुज़ू किया करते थे।[]

शिया मराजे-ए-तक़लीद वुज़ू के अंगों को धोते और मसह करते समय उनका पाक होना वुज़ू की सहीह होने की शर्त मानते हैं। हालांकि, यदि किसी अंग को धोने या उसका मसह करने के बाद वुज़ू पूरा होने से पहले वह अंग नजिस हो जाए, तो वुज़ू सहीह है।[]

वुज़ू के अंगों पर किसी भी प्रकार की रुकावट, जैसे चिपकने वाली पट्टी या रंग, मौजूद हो तो उसे दूर करना आवश्यक है। यदि रुकावट को दूर करना संभव न हो और उसने अंग के केवल एक हिस्से को ढका हो, तो वुज़ू-ए-जबीरा किया जाता है। लेकिन यदि रुकावट ने पूरे अंग को ढक लिया हो, तो कुछ मराजेअ तयम्मुम को आवश्यक मानते हैं, जबकि कुछ अन्य वुज़ू-ए-जबीरा को पर्याप्त मानते हुए एहतियात के तौर पर तयम्मुम करने की सिफ़ारिश करते हैं।[१०]

फ़ुटनोट

  1. मकारिम शीराज़ी, तफ़्सीर-ए-नमूना, खंड 4, पृष्ठ 285।
  2. हुर्रे आमिली, वसाइलुश-शिया, खंड 1, पृष्ठ 399, हदीस 24; कुलैनी, अल-काफ़ी, खंड 3, पृष्ठ 25-26, हदीस 4 और 5; तबातबाई, अल-मीज़ान, खंड 5, पृष्ठ 219-220।
  3. फ़ख़्रे राज़ी, तफ़्सीरुल-कबीर, खंड 11-12, पृष्ठ 160।
  4. शाफ़ेई, अल-उम्म, खंड 1, पृष्ठ 23; क़ुर्तुबी, अल-जामेअ ले अहकामिल-क़ुरआन, खंड 6, पृष्ठ 99।
  5. क़ुम्मी, «چگونگی انجام وضو نزد فریقین (3) (مسح)», पृष्ठ 45।
  6. मुत्तक़ी हिन्दी, कंज़ुल-उम्माल, खंड 9, पृष्ठ 193, हदीस 26890।
  7. शहरिस्तानी, लिमाज़ल-इख़्तिलाफ़ु फ़िल-वुज़ू, पृष्ठ 31।
  8. मुस्लिम बिन हज्जाज, सहीह मुस्लिम, खंड 1, पृष्ठ 206, हदीस 229।
  9. बनी-हाशिमी ख़ुमैनी, तौज़ीहुल-मसाइल चहारदेह मराजेअ, खंड 1, पृष्ठ 213।
  10. तबातबाई यज़्दी, अल-उरवतुल-वुस्का, खंड 1, पृष्ठ 442-443; हकीम, मुस्तम्सिकुल-उरवतुल-वुस्का, खंड 2, पृष्ठ 540; बनी-हाशिमी ख़ुमैनी, तौज़ीहुल-मसाइल चहारदेह मराजेअ, खंड 1, पृष्ठ 247।

स्रोत

  • क़ुम्मी, अली, «چگونگی انجام وضو نزد فریقین (3) (مسح)», (फ़रीक़ैन के निकट वुज़ू करने की विधि (3) (मसह)), मीक़ात-ए-हज पत्रिका में, अंक 90, शीत ऋतु 1393 शम्सी।
  • क़ुर्तुबी, मुहम्मद बिन अहमद, अल-जामेअ ले अहकामिल-क़ुरआन, तेहरान, नासिर ख़ुसरो प्रकाशन, 1364 शम्सी।
  • कुलैनी, मुहम्मद बिन याक़ूब, अल-काफ़ी, तेहरान, दारुल-कुतुबिल-इस्लामिय्या प्रकाशन, 1407 हिजरी।
  • तबातबाई यज़्दी, सय्यद मुहम्मद काज़िम, अल-उरवतुल-वुस्का, क़ुम, इस्लामी प्रकाशन संस्थान, 1420 हिजरी।
  • तबातबाई, सय्यद मुहम्मद हुसैन, अल-मीज़ान फ़ी तफ़्सीरिल-क़ुरआन, बेरूत, अल-आलमी प्रकाशन संस्थान, 1390 हिजरी।
  • फ़ख़्रे राज़ी, मुहम्मद बिन उमर, अत-तफ़्सीरुल-कबीर (मफ़ातीहुल-ग़ैब), बेरूत, दारु इहयाइत-तोरासिल-अरबी प्रकाशन, 1420 हिजरी।
  • बनी-हाशिमी ख़ुमैनी, मुहम्मद हसन, तौज़ीहुल-मसाइल-ए-मराजेअ, क़ुम, इस्लामी प्रकाशन संस्थान, 1393 शम्सी।
  • मकारिम शीराज़ी, नासिर, तफ़्सीर-ए-नमूना, तेहरान, दारुल-कुतुबिल-इस्लामिय्या प्रकाशन, 32वाँ संस्करण, 1374 शम्सी।
  • मुत्तक़ी हिन्दी, अली बिन होसाम, कंज़ुल-उम्माल फ़ी सुननिल-अक़वालि वल-अफ़आल, बेरूत, दारुल-इल्मिय्या प्रकाशन, 1419 हिजरी।
  • मुस्लिम बिन हज्जाज, सहीह मुस्लिम, शोध: मुहम्मद फ़ोआद अब्दुल-बाक़ी, बेरूत, दारु इहयाइत-तुरासिल-अरबी प्रकाशन, 1415 हिजरी।
  • शहरिस्तानी, सय्यद अली, लिमाज़ल-इख़्तिलाफ़ु फ़िल-वुज़ू, संक्षेपकर्ता: फ़ैस अत्तार, तेहरान, मशअर प्रकाशन, 1426 हिजरी।
  • शाफ़ेई, मुहम्मद बिन इदरीस, अल-उम्म, बेरूत, दारुल-मआरिफ़ा प्रकाशन, प्रकाशन तारीख़ उपलब्ध नहीं।
  • हकीम, सय्यद मोहसिन, मुस्तम्सिकुल-उरवतुल-वुस्का, क़ुम, आयतुल्लाह मरअशी नजफ़ी पुस्तकालय, 1391 हिजरी।
  • हुर्रे आमिली, मुहम्मद बिन हसन, वसाइलुश-शिया, क़ुम, आलुल-बैत अलैहिमुस्सलाम प्रकाशन, 1409 क़मरी।