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युद्धविराम

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युद्धविराम या तुष्टीकरण लड़ाई रोकने के लिए एक अस्थाई समझौता है। इस्लामिक न्यायशास्त्र के अनुसार, युद्धविराम तभी जायज़ है यदि कोई हित हो, जैसे कि मुसलमानों की सैन्य कमज़ोरी या दुश्मन के इस्लाम स्वीकार करने की आशा हो, और इसका समय भी निर्धारित किया जाना चाहिए।

युद्धविराम के उदाहरणों में बनू कुरैज़ा की लड़ाई, सिफ़्फ़ीन की लड़ाई, इराक़-ईरान युद्ध और इज़राइल और ईरान के बीच 12-दिव्सीय युद्ध सम्मिलित हैं। युद्धविराम और शांति के बीच अंतर यह है कि युद्धविराम अस्थाई होता है और शांति स्थाई होती है, यानी युद्धविराम तोड़ा जा सकता है, लेकिन शांति से झगड़े खत्म हो जाते हैं।

विशेष समय के लिए युद्ध रोकना

युद्धविराम एक समझौता है जो युद्ध को रोकने के उद्देश्य से, एक निश्चित अवधि के लिए, चाहे कोई लाभ लेकर या उसके बिना, संपन्न किया जाता है, चाहे इसमें रियायतें दी जाएं या नहीं।[] महादेना[] शीर्षक के नाम से जेहाद[] के अध्याय में न्यायशास्त्रीय अध्यायों में इसकी चर्चा होती है और इसके विशेष नियम हैं।[] इस पर अंतर्राष्ट्रीय चर्चाओं में भी चर्चा होती है।[]

युद्धविराम और शांति में अंतर

युद्धविराम, दुश्मनी खत्म करने और शांति से अलग होता है; दुश्मनी खत्म करने का अर्थ है दुश्मनी का औपचारिक अंत, जो आमतौर पर लंबे समय के लिए होता है;[] जबकि युद्धविराम कुछ समय के लिए होता है और इसे तोड़ा जा सकता है।[] शांति का अर्थ है युद्ध का हमेशा के लिए खत्म होना, जिसमें नुक़सान की भरपाई और सीमाओं का सीमांकन जैसी आखिरी शर्तें तय होती हैं।[]

युद्धविराम की कानूनी मान्यता और इसके नियम

शिया न्यायविद युद्धविराम को सिर्फ़ तभी सही मानते हैं जब कोई हित हो, जैसे कि मुसलमानों की कमज़ोरी और दुश्मन का इस्लाम स्वीकार करने की आशा हो।[] अगर मुसलमानों में दुश्मन का सामना करने की क्षमता है, तो युद्धविराम वैध नहीं है।[१०] शिया न्यायविद आयतुल्लाह ख़ामेनेई के अनुसार, मुस्लिम न्याविद युद्धविराम के अनुमय पर एकमत हैं।[११]

युद्धविराम की वैधता पर क़ुरआन की आयतें जैसे सूर ए अनफ़ाल की आयत 61,[१२] बहुदेववादी और अहले किताब के साथ पैग़म्बर (स) का शांति समझौते करने का तरीका,[१३] और इमाम अली (अ) के मालिक अश्तर को लिखे शब्द, जिनमें हित के मामलों में शांति अपनाने की सलाह देने का हवाल दिया गया है।[१४] इमाम अली (अ) ने मलिक अश्तर को एक खत में सलाह दी: “दुश्मन जिस शांति की दावत दे रहा है और जो अल्लाह को पसंद हो, उसे मत ठुकराओ।”[१५]

न्यायविदों का यह भी मानना हैं कि युद्धविराम का समय निर्धारित किया जाना चाहिए, अन्यथा संधि अमान्य है।[१६] मशहूर न्यायविद मानते है कि कि युद्धविराम चार महीने तक चल सकता है और एक वर्ष से अधिक नहीं होना चाहिए।[१७] युद्धविराम को चार महीने से आगे बढ़ाने की संभावना के बारे में न्यायविदों में असहमति है।[१८] न्यायविदों के अनुसार, युद्ध विराम को तोड़ना उस स्थिति मे वैध है जब यह मुसलमानों के लिए हानिकारक हो या दुश्मन इसे तोड़ता है।[१९]

इस्लामी जगत में युद्ध विराम के उदाहरण

संबंधित लेख

फ़ुटनोट

  1. नजफ़ी, जवाहिर अल कलाम, 1362 शम्सी, भाग 21, पेज 291-293; फ़ज़्लुल्लाह, किताब अल जेहाद, 1418 हिजरी, पेज 349।
  2. नजफ़ी, जवाहिर अल कलाम, 1362 शम्सी, भाग 21, पेज 292; ख़ामेनई (मुहादना (क़रारदात तर्के मुख़ासमा व आशित बस्त), पेज 5।
  3. देखेः नजफ़ी, जवाहिर अल कलाम, 1362 शम्सी, भाग 21, पेज 291।
  4. मुताहरी, सैरी दर सीर ए आइम्मा ए अत्हार (अ), 1390 शम्सी, पेज 68-69; लेखको का समूह, फ़रहंग फ़िक़्ह अनुसार मज़हब अहले बैत, 1382 शम्सी।
  5. काज़मी, मफ़हूम आतिश बस्त, तर्के मुखासेमा व मुतारका जंग अज़ दीदगाह हुक़ूक बैनुल मिलल, पेज 132-133।
  6. नौरोज़ी, मफ़हूम आतिश बस्त व आसार हुक़ूक़ आन, शर्रक नेटवर्क।
  7. नौरोज़ी, मफ़हूम आतिश बस्त व आसार हुक़ूक़ आन, शर्रक नेटवर्क।
  8. नौरोज़ी, मफ़हूम आतिश बस्त व आसार हुक़ूक़ आन, शर्रक नेटवर्क।
  9. नजफ़ी, जवाहिर अल कलाम, 1362 शम्सी, भाग 21, पेज 293।
  10. नजफ़ी, जवाहिर अल कलाम, 1362 शम्सी, भाग 21, पेज 312; फ़ज़्लुल्लाह, किताब अल जेहाद, 1418 हिजरी, पेज 351; रूहानी, फ़िक़्ह अल सादिक़, 1392 शम्सी, भाग 19, पेज 114-115।
  11. खामेनई, अलमुहादेना, 1418 हिजरी, पेज 2।
  12. रूहानी, फ़िक़्ह अल सादिक़, 1392 शम्सी, भाग 19, पेज 113।
  13. रूहानी, फ़िक़्ह अल सादिक़, 1392 शम्सी, भाग 19, पेज 114; ख़ामेनई, मुहादेना (क़रारदाद तर्के मुखासेमा व आतिश बस्त), पेज 8।
  14. मुहादेना (क़रारदाद तर्के मुखासेमा व आतिश बस्त), पेज 8।
  15. सय्यद रज़ी, नहजुल बलागा (सुब्ही सालेह), 1414 हिजरी, पत्र 53, पेज 442।
  16. नजफ़ी, जवाहिर अल कलाम, 1362 शम्सी, भाग 21, पेज 299।
  17. मोहक़्क़िक़ हिल्ली, शरा ए अल इस्लाम, 1408 हिजरी, भाग 1, पेज 304; शहीद सानी, मसालिक अल अफ़हाम, 1413 हिजरी, भाग 3, पेज 83; रूहानी, फ़िक़्ह अल सादिक़, 1392 शम्सी, भाग 19, पेज 118।
  18. मोहक़्क़िक़ हिल्ली, शरा ए अल इस्लाम, 1408 हिजरी, भाग 1, पेज 304; शहीद सानी, मसालिक अल अफ़हाम, 1413 हिजरी, भाग 3, पेज 84।
  19. काशिफ़ अल ग़ेता, कश्फ अल ग़ेता, 1422 हिजरी, भाग 4, पेज 352; नजफ़ी, जवाहिर अल कलाम, 1362 शम्सी, भाग 21, पेज 312।
  20. देखेः शेख मुफ़ीद, अल इरशाद, 1413 हिजरी, भाग 1, पेज 110-111।
  21. मंक़री, वक़्अत सिफ़्फ़ीन, 1404 हिजरी, पेज 478।
  22. मंक़री, वक़्अत सिफ़्फ़ीन, 1404 हिजरी, पेज 478 -279।
  23. इस्लामिक क्रांति रक्षक सेना के पवित्र रक्षा अभिलेखागार एवं अनुसंधान केंद्र, अतलुस जंग ईरान व इराक़, 1392 शम्सी, पेज 111।
  24. अबू ग़ज़ाला, जंग इराक़ व ईरान, 1380 शम्सी, पेज 273 और 308।
  25. ट्रंप की मध्यस्थता से लेकर क़ुद्स (यरुशलम) शहर पर हमला करने से इनकार करने तक, अस्रे ईरान समाचार और विश्लेषण वेबसाइट।
  26. अमेरिका ईरान की 10-सूत्रीय योजना को स्वीकार करने के लिए मजबूर हो गया।, ईरान सरकार की सूचना वेबसाइट

स्रोत

  • " ویژگی جنگ ۱۲ روزه اسرائیل-ایران/ از میانجیگری ترامپ تا خودداری از حمله به شهر قدس-اورشلیم (ईरान इज़रायल के 12 दिव्सीय युद्ध की विशेषताएँ ट्रम्प की मध्यस्थता से लेकर कुद़स-यरूशलेम शहर पर हमले न करने तक)", अस्रे ईरान समाचार और विश्लेषण वेबसाइट, देखे जाने की तारीख 26 जुलाई 2025 ई।
  • अबू ग़ज़ाला, अब्दुल हलीम, जंग इराक़ व ईरान, अनुवादकः नादिर नौरूजशाद, युद्ध अध्ययन एवं अनुसंधान केंद्र, 1380 शम्सी।
  • काज़मी, अली असगर, मफ़हूम आतिश बस्त, तर्क मुखासेमा व मुतारेका जंग अज़ दीदगाह हुक़ूक़ बैनुल मिलल, हुक़ूक़ी बैनुल मिलल प्रकाशन, क्रमांक 11, 190 ई।
  • काशिफ़ अल ग़ेता, शेख जाफ़र, कश्फ़ अल ग़ेता अन मुबहिम्मात शरीया अल ग़र्रा, क़ुम, क़ुम के धार्मिक शिक्षा केंद्र (हौज़ा इल्मिया) का इस्लामी प्रचार कार्यालय, 1422 हिजरी।
  • ख़ामेनई, सय्यद अली, अलमुहादेना, क़ुम, इस्लामी फ़िक़्ह का इंसाक्लोपीडिया संस्थान, 1418 हिजरी।
  • ख़ामेनई, सय्यद अली, मुहादेना (क़रारदाद तर्के मुखासेमा व आतिश बस्त), फ़िक्ह अहले बैत (अ), क्रमांक 11 और 12, शरद ऋतु और शीत ऋतु, 1376 शम्सी।
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  • नौरोज़ी, कुदरतुल्लाह, " مفهوم آتش‌بس و آثار حقوقی آن (युद्धविराम की अवधारणा और उसके अधिकारिक प्रभाव)", शरक़ नेटवर्क की साइट, प्रविष्ट की तारीख 25 जून 2025 ई, देखे जाने की तारीख 4 जुलाई 2025 ई।
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  • मोहक़्क़िक़ हिल्ली, जाफ़र बिन हसन, शरा ए अल इस्लाम, क़ुम, इस्माईलीयान प्रकाशन, 1408 हिजरी।
  • रूहानी, सय्यद मुहम्मद सादिक़, फ़िक़्ह अल सादिक़, क़ुम, आईन दानिश, 1392 हिजरी।
  • लेखको का समूह, फ़रहंग फ़िक़्ह मुताबिक मज़हब अहले बैत, क़ुम, इस्लामी फ़िक़्ह का इंसाक्लोपीडिया संस्सथान, 1382 शम्सी।
  • शहीद सानी, ज़ैनुद्दीन बिन अली, मसालिक अल अफ़हाम, क़ुम, बुनियादे मआरिफ़ इस्लामी, 1413 हिजरी।
  • آمریکا مجبور به پذیرش طرح 10 ماده‌ای ایران شد (अमेरिका ईरान की 10-सूत्रीय योजना को स्वीकार करने के लिए मजबूर हो गया), ईरान सरकार की सूचना वेबसाइट, प्रविष्टि तिथि: 8 अप्रैल 2026, देखे जाने की तिथि 8 अप्रैल 2026।