तौक़ीअ

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यह लेख तौक़ीअ की अवधारणा के बारे में है। बारहवें इमाम की तौक़ीअ के बारे में जानने के लिए इमाम महदी (अ) की तौक़ीअ वाले लेख का अध्ययन करे।

तौक़ीअ (अरबीःالتوقيع) का तात्पर्य शियो के इमाम द्वरा लिखे गए पत्रों और लेखों से है। तौक़ीअ इमामों की लिखावट या वर्तनी (इमला) में होते थे और आमतौर पर शियो के सवालों और अनुरोधों के जवाब में जारी की जाती थी और वकालत नेटवर्क के माध्यम से शियो के हाथों तक पहुंचती थी।

न्यायशास्त्र (फ़िक्ही), विश्वास (ऐतेक़ादी), वकीलों की बर्खास्तगी और नियुक्ति, शरिया धन (शरई धन जैसे ख़ुम्स, ज़कात, कफ्फारा इत्यादि) के संग्रह की घोषणा, उत्तराधिकारी के झूठे दावेदारों का खंडन आदि के मामलों के विषय में तौक़ीअ होती थी। सूत्रों में, लगभग 100 श्रेय तौक़ीअ इमाम महदी (अ) को दिया जाता है, जो लघुप्तकाल (ग़ैबते सुग़रा) से संबंधित हैं।

कुछ मामलों में, शिया न्यायविदों ने शरई अहकाम प्राप्त करने के लिए तौक़ीअ पर भरोसा किया है। उनके अनुसार इमामों द्वारा जारी की गई तौक़ीअ मान्य हैं।

परिभाषा

शिया संस्कृति मे तौक़ीअ का तात्पर्य शिया इमामों के लेखों, पत्रों और कुछ मामलों में मौखिक संदेशों से है।[१] तौक़ीअ मूल रूप से ख़लीफ़ा या सुल्तान या कुछ शासकों को शिकायतों के संबंध मे लिखे जाने वाले पत्र के पीछे हाशिये पर लिखे जाने वाले उस लेखन को तौक़ीअ कहा जाता है जिसे वो शिकायतों का निपटारा करने के लिए लिखते थे।[२]

तौक़ीअ का एतिहासिक क्रम

जैसा कि इमाम महदी (अ) विश्वकोश में उल्लेख किया गया है, शिया इमामों का पहला लेखन, जिसे तौक़ीअ कहा गया, इमाम काज़िम (अ) ने अपने मामा हसन बिन अली वश्शा के पिता बनने के लिए दुआ करने के जवाब में लिखा था।[३] इस उल्लेखित तौक़ीअ का पाठ क़ुर्ब अल-इस्नाद किताब मे मौजूद है।[४] उसके बाद तौक़ीअ शब्द का इस्तेमाल इमाम रज़ा (अ) के कुछ लेखों के लिए भी किया गया है।[५] इमाम हादी (अ) और इमाम अस्करी (अ) के इमामत काल मे शिया समुदाय के विस्तार और इमाम हादी और इमाम अस्करी (अ) की क़ैद के साथ इन दोनों इमामों से तौक़ीअ जारी करने का सिलसिला पिछले इमामों की तुलना में अधिक बढ़ गया।[६]

इमामों की उपस्थिति के समय तौक़ीअ केवल उन लिखित उत्तरों के लिए कही जाती थी जो इमाम शियो के जवाब में जारी करते थे। लेकिन हज़रत महदी (अ) के बारे में उनके सभी लेखन तौक़ीअ मे शामिल हैं, भले ही वह किसी अनुरोध या प्रश्न के जवाब में न हों। इसके अलावा हज़रत महदी की अलिखित हदीसों को भी तौक़ीअ कहा जाता है।[७]

तौक़ीअ के लेख

चौथे नुव्वाब को इमाम महदी (अ) की आखिरी तौक़ीअ:

"तुम छह दिन में मर जाओगे। इसलिए अपने आप को तैयार करो और किसी को अपना उत्तराधिकारी न बनाओ; क्योंकि दूसरी ग़ैबत (पूर्ण) शुरू हो गई है और ईश्वर की अनुमति के बिना मेरा प्रकटन (ज़हूर) नहीं होगा। ज़ोहूर बहुत दिनों के बाद और हृदयो के कठोर होने और पृथ्वी के अन्याय भर जाने के बाद होगा। जल्द ही मेरे कुछ शिया आएंगे और मुझसे मिलने का दावा करेंगे। ध्यान रखें कि जो कोई भी सुफ़ियानी और सैहा के ज़ाहिर होने से पहले मुझे देखने का दावा करता है वह झूठा और निंदक है।"

तारीख बाएगानी, सदूक़, कमालुद्दीन, 1395 हिजरी, भाग 2, पेज 516

तौक़ीअ या तो इमामों की अपनी लिखावट में होती थी या इमाम किसी को इमला लिखवाते थे।[८] कुछ मामलों मे तौक़ीअ का अपने लेख मे होने का विस्तार किया है।[९] इमाम महदी के लेख मे तौक़ीअ का लेखन[१०] उन झूठी तौक़ीअ की पहचान करना था जिनके लेखन की निसबत इमाम महदी (अ) की ओर दी जाती थी।[११] इस बात के गवाह अहमद बिन इस्हाक़ कुमी है जिन्होने इमाम अस्करी (अ) से मुलाक़ात करते समय इमाम (अ) से अपने लिए एक लेख देने का अनुरोध किया ताकि वह इसके माध्यम से इमाम के पत्रों की पहचान कर सकें, और इमाम ने उनका अनुरोध स्वीकार कर लिया।[१२] इमामो के सहाबी इमामो के लेख से परिचित थे और वो इमाम के लेख को दूसरो लेखो से पहचानते थे।[१३]

वकालत नेटवर्क के माध्यम से तौक़ीअ भेजना

तौक़ीअ का आदान-प्रदान इमामों के वकीलों के माध्यम से किया जाता था, जिसे वकालत नेटवर्क कहा जाता था। विभिन्न क्षेत्रों से शियो ने इमामों के वकीलों के माध्यम से वुजुहाते शरई (ख़ुम्स व ज़कात इत्यादि), अपने अनुरोध और प्रश्न इमामों को भेजे, और इन्ही माध्यम से उन्हें तौक़ीअ और उत्तर मिलते थे।[१४] लघुप्तकाल (ग़ैबते सुग़रा) मे यह ज़िम्मेदारी नुव्वाबे अरबआ की थी[१५] वे अपने वकीलों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के शियो के संपर्क में थे।[१६] हालांकि ऐसी कथात्मक रिपोर्टें हैं जिनके आधार पर वकीलों की मध्यस्थता के बिना दूसरे मार्गो से शियो ने इमामों तक अपने अनुरोध पहुंचाए या उनसे तौक़ीअ प्राप्त करते थे। उदाहरण के लिए क़ुत्बे रावंदी के अनुसार मुहम्मद बिन यूसुफ शाशी ने -एक महिला जो इमाम महदी (अ) के घर अक्सर आती थी- के माध्यम से इमाम महदी (अ) को अपना पत्र भेजा और तौक़ीअ हासिल की।[१७]

तौक़ीअ जारी होने के बाद एक विशेष माध्यम से भेजी जाती थी।[१८] रिपोर्ट में तौक़ीअ ले जाने वाली की पहचान का उल्लेख नहीं किया गया है और उन्हें "इम्रआ" (महिला), गुलाम (युवा), ग़ुलामे असवद (काला युवा), अल रसूल मिन इन्दिल हुसैन बिन रूह (हुसैन बिन रूह का दूत), और रसूल अल ख़ल्फ़ (उत्तराधिकारी का दूत) जैसी परिभाषाओं के साथ संदर्भित किया गया है।[१९] इस बात का प्रमाण तक़य्या बता गया है।[२०]

विषय

तौक़ीअ किसी विशिष्ट विषय तक सीमित नहीं थीं; क्योंकि उनमें से अधिकांश न्यायशास्त्रीय और धार्मिक प्रश्नों (ऐतेकादी) के साथ-साथ शियो के अनुरोधों के जवाब में जारी की गई हैं। इसलिए इनमें विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई है। वकीलों को बर्खास्त करना और नियुक्त करना, वकीलों के कर्तव्यों को बताना, शरिया धन के संग्रह की घोषणा करना, उत्तराधिकारी के झूठे दावेदारों को नकारना और शियो के व्यक्तिगत अनुरोधों का जवाब देना तौक़ीअ के विषयों में से एक रहा है।[२१]

तौक़ीअ की वैधता

न्यायविदों के दृष्टिकोण से, इमामों द्वारा जारी की जाने वाली कोई भी विश्वासनीय तौक़ीअ वैध है।[२२] इसलिए, कुछ शिया न्यायविदों ने शरिया फैसले प्राप्त करने के लिए कुछ मामलों में तौक़ीअ पर भरोसा किया है।[२३] हालांकि, कुछ न्यायविदों ने पत्राचार की वैधता के बारे में (तौक़ीअ आमतौर पर पत्राचार के रूप में होती थी) मतभेद किया है[२४] और उन्होंने उन्हें मौखिक हदीसों के बराबर नहीं माना;[२५] लेकिन न्यायशास्त्र की पुस्तकों में इसकी अमान्यता और वैधता मौखिक हदीसों के बराबर न होने पर किसी प्रमाण का उल्लेख नही है।[२६]

साथ ही इस बयान के ख़िलाफ़ उन्होंने कहा है कि किताबत शिया इमामों का तरीक़ा होने के साथ-साथ विभिन्न कबीलों की आम प्रथा है।[२७] और इस पर अमल करने के लिए पत्राचार जारी किया गया था।[२८]

इमाम ज़मान (अ) की तौक़ीअ

मुख्य लेख: इमाम महदी (अ) की तौक़ीअ

शियों के बारहवें इमाम के वह पत्र और लेख हैं, जो ग़ैबते सुग़रा की अवधि के दौरान शियों के सवालों के जवाब में जारी किए गए थे। हदीस के स्रोतों में, न्यायशास्त्र, विश्वास (अक़ायद) आदि जैसे विषयों पर लगभग 100 तौक़ीअ की निस्बत इमाम महदी (अ) की ओर दी गई है।[२९]

सोर्सिंग

शिया रिवायत के स्रोतों में तौक़ीअ का उल्लेख किया गया है। रेजाल कश्शी किताब में शिया इमामों की कई तौक़ीअ का वर्णन किया गया है।[३०] शेख़ सदूक़ की किताब कमाल अल-दीन और शेख़ तूसी की किताब अल-ग़ैबा में इमाम महदी (अ) की तौक़ीअ को अलग खंड मे एकत्रित किया गया है।[३१]

तीसरी चंद्र शताब्दी और उसके बाद स्वतंत्र रूप से तौक़ीअ से संबंधित रचनाएँ भी हैं। रेजाल नज्जाशी मे "मसाइले अबी मुहम्मद वा तौक़ीआत", "क़ुरब अल-इस्नाद एला साहिब अल-अम्र अलैहिस सलाम" और "मसाइल अल-रेजाल वा मुकातेबातोहुम अबल हसन अस सालिस अलैहिस सलाम" तीसरी शताब्दी के शिया मुहद्दिस अब्दुल्लाह बिन जाफ़र हिमयरी[३२] और इमाम जवाद (अ) के सहाबी मुहम्मद बिन ईसा बिन उबैद की रचना अल-तौक़ीआत का उल्लेख किया गया है।[३३]

इमाम रज़ा (अ) के साथियों (सहाबीयो) में अब्दुल्लाह बिन सल्त द्वारा लिखित अल-तवाकी इस क्षेत्र में अन्य कार्यों में से एक है।[३४]

फ़ुटनोट

  1. मुहम्मदी रय शहरी, दानिशनामा इमाम महदी, भाग 4, पेज 115
  2. ज़बैदी, ताज अल उरूस, 1414 हिजरी, भाग 11, पेज 525, वक़ाआ के अंतर्गत
  3. मुहम्मदी रय शहरी, दानिशनामा इमाम महदी, भाग 4, पेज 115-116
  4. हुमैरी, क़ुरब अल असनाद, 1413 हिजरी, पेज 332
  5. देखेः कुलैनी, अल काफ़ी, 1407 हिजरी, भाग 3, पेज 5
  6. मुहम्मदी रय शहरी, दानिशनामा इमाम महदी, भाग 4, पेज 116
  7. शुबैरी, तौक़ीअ, पेज 577
  8. देखेः कुलैनी, अल काफ़ी, 1407 हिजरी, भाग 1, पेज 96, 102-103, 107, 510
  9. देखेः कशी, रेजाल अल कशी, 1409 हिजरी, पेज 513, 551
  10. देखेः तूसी, अल ग़ैयबा, 1411 हिजरी, पेज 290
  11. शुबैरी, तौक़ीअ, पेज 579-580
  12. कुलैनी, अल काफी, 1407 हिजरी, भाग 1, पेज 513
  13. शुबैरी ज़ंजानी, किताबे निकाह, भाग 9, दरस 329, पेज 3 बे नक़ल अज़ शुबैरी (तौक़ीअ), पेज 584
  14. देखेः तूसी, अल गैयबा, 1411 हिजरी, पेज 354
  15. देखेः तूसी, अल गैयबा, 1411 हिजरी, पेज 356
  16. जाफ़रयान, हयाते फ़िकरी वा सियासी इमामाने शिया, 1381 शम्सी, पेज 588
  17. देखेः कुत्बे रावंदी, अल खराज वल जराहे, 1409 हिजरी, भाग 2, पेज 695
  18. शुबैरी, तौक़ीअ, पेज 581
  19. सदूक़, कमाल अल दीन, 1395 हिजरी, भाग 2, पेज 478, 491, 495, 497, 505
  20. शुबैरी, तौक़ीअ, पेज 581
  21. शुबैरी, तौक़ीअ, पेज 581
  22. मुहम्मदी रय शहरी, दानिशनामा इमाम महदी, भाग 4, पेज 121
  23. देखेः आमोली, मिफ़्ताह उल करामा, 1419 हिजरी, भाग 6, पेज 212-214 इमाम ख़ुमैनी, किताब अल बैय, 1421 हिजरी, भाग 2, पेज 635 देखे मुहम्मदी रय शहरी, दानिशनामा इमाम महदी, 1393 शम्सी, भाग 4, पेज 255-320
  24. देखेः अल्लामा हिल्ली, मुखतलफ अल शिया, 1413 हिजरी, भाग 7, पेज 248 तूसी, अल इस्तिबसार, 1390 हिजरी, भाग 1, पेज 171
  25. देखेः मोहक़्क़िक़ हिल्ली, अल मौतबर, 1407 हिजरी, भाग 2, पेज 659
  26. शुबैरी, तौक़ीअ, पेज 584
  27. मुहम्मदी रय शहरी, दानिशनामा इमाम महदी, 1393 शम्सी, भाग 4, पेज 121
  28. कुन्ना, तौज़ीह अल मसाइल, 1421 हिजरी, पेज 260
  29. मुहम्मदी रय शहरी, दानिशनामा इमाम महदी, 1393 शम्सी, भाग 4, पेज 117
  30. मुहम्मदी रय शहरी, दानिशनामा इमाम महदी, 1393 शम्सी, भाग 4, पेज 117
  31. देखेः सदूक़, कमाल अल दीन, 1395 हिजरी, भाग 2, पेज 482-532 तूसी, अल गैयबा, 1411 हिजरी, पेज 281 के बाद
  32. नज्जाशी, रेजाल अल नज्जाशी, 1365 शम्सी, पेज 220
  33. नज्जाशी, रेजाल अल नज्जाशी, 1365 शम्सी, पेज 334
  34. मुहम्मदी रय शहरी, दानिश नामा इमाम महदी, 1393 शम्सी, भाग 4, पेज 117


स्रोत

  • इमाम ख़ुमैनी, सय्यद रूहुल्लाह, किताब अल बैय, क़ुम, इंतेशारात इस्माईलीयान, 1363 शम्सी
  • जाफ़रयान, रसूल, हयाते फ़िकरी वा सियासी इमामाने शिया, क़ुम, अंसारीयान, 1381 शम्सी
  • हारेसी, हुसैन बिन अब्दुस समद, वसूल अल अखबार एला उसूल अल अखबार, अब्दुल लतीफ़ हुसैनी कूहकमरी, मजमा उल ज़खाइर अल इस्लामीया, 1041 हिजरी
  • हुमैरी, अब्दुल्लाह बिन जाफ़र, क़ुर अल असनाद, मोअस्सेसा आले अल-बैत (अ), 1413 हिजरी
  • ख़ूई, सय्यद अबुल क़ासिम, मोअजम रिजाले अल हदीस, क़ुम, मरकज़ नश्र अल सकाफा अल इस्लामीया फ़ी अल आलम, 1372
  • ज़बैदी, मुर्तज़ा, ताज उल उरूस मिन जवाहिर अल क़ामूस, संशोधनः अली शीरी, बैरूत, दार उल फ़िक्र, 1414 हिजरी
  • शुबैरी, मुहम्मद जवाद, तौक़ीअ, दानिशनामा जहान इसलाम (भाग 8, तेहरान, 1383 शम्सी
  • शेख सदूक़, मुहम्मद बिन अली, कमाल अल दीन वा तमाम अल नेमा, संशोधनः अली अकबर ग़फ़्फ़ारी, तेहरान, इसलामीया 1395 हिजरी
  • तबरसी, अहमद बिन अली, अल एहतेजाज अला अहले अललुजाज, संशोधनः मुहम्मद बाक़िर ख़िरसान, मशहद, नशरे मुर्तजवी, 1403 हिजरी
  • तूसी, मुहम्मद बिन हसन, अल इस्तिबसार फ़ीमा इखतलफ़ मिन अल अखबार, संशोधनः हसन मूसवी खिरसान, तेहरान, दार उल कुतुब अल इस्लामीया 1390 हिजरी
  • तूसी, मुहम्मद बिन हसन, किताब अल गैयबा, क़ुम, संशोधनः एबादुल्लाह तेहरानी वा अली अहमद नासेह, क़ुम, दार अल मआरिफ़ अल इस्लामीया, 1411 हिजरी
  • आमोली, सय्यद जवाद बिन मुहम्मद, मिफ़ताह उल करामा फ़ी शरह अल क़वाइद अल अल्लामा, संशोधनः मुहम्मद बाक़िर ख़ालेसी, क़ुम, दफ्तरे इंतेशारत इस्लामी वा बस्ता बेह जामे मुदर्रेसीन हौज़ा ए इल्मीया क़ुम, 1419 हिजरी
  • अल्लामा हिल्ली, हसन बिन युसूफ़, मखतलफ़ अल शिया फ़ी अहकाम अल शरीया, क़ुम, दफ्तरे इंतेशारात इस्लामी बा बस्ता बेह जामे मुदर्रेसीन हौज़ा ए इल्मीया क़ुम, 1413 हिजरी
  • क़ुत्ब रावंदी, सईद बिन हैब्तुल्लाह, अल ख़राइज़ वल जराहे, क़ुम, मोअस्सेसा अल इमाम अल महदी अलैहिस सलाम, 1409 हिजरी
  • कशी, मुहम्मद बिन उमर, रेजाल अल कशी-इख्तियार मारफत अल रेजाल, संशोधनः मुहम्मद बिन हसन तूसी, संशोधनः हसन मुसतफवी, मशहद, मोअस्सेसा नशर दानिशगाह मशहद, 1409 हिजरी
  • कुलैनी, मुहम्मद बिन याक़ूब, अल काफ़ी, शोधः अली अकबर ग़फ़्फ़ारी, तेहरान, दार अल कुत्ब अल इस्लामीया, 1407 हिजरी
  • कुन्ना तेहरानी, अली, तौज़ीह अल मक़ाल फ़ी इल्म अल रेजाल, शोधः मुहम्मद हुसैन मौलवी, क़ुम, मोअस्सेसा इल्मी वा फ़रहंगी दार अल हदीस, 1421 हिजरी
  • मोहक़्क़िक़ हिल्ली, जाफर बिन हसन, अल मोतबर फ़ी शरह अल मुखतसर, संशोधनः मुहम्मद अली हैदरी, सय्यद महदी शम्सुद्दीन, सय्यद अबू मुहम्मद मुर्रजवी वा सय्यद अली मूसवी, क़ुम, मोअस्सेसा सय्यद अल शोहदा, 1407 हिजरी
  • मुहम्मदी रय शहरी, मुहम्मद, दानिशनामा इमाम महदी (अ), क़ुम, दार अल हदीस, 1393 शम्सी
  • नज्जाशी, अहमद बिन अली, रेजाल नज्जाशी, क़ुम, मोअस्सेसा नशर इस्लामी, 1365 शम्सी