प्रारूप:यौमुत तलाक़
यौमुत-तलाक़, जिसका अर्थ «मुलाक़ात का दिन» है, क़यामत के दिनों के नामों में से एक है, जिसका उल्लेख सूरह ग़ाफ़िर की आयत 15 में हुआ है। «तलाक़» शब्द का अर्थ मुलाक़ात और आमना-सामना है।[१] टीकाकारों ने इस मुलाक़ात से क्या मुराद है, इसके बारे में अलग-अलग संभावनाएँ बताई हैं; जैसे आसमान और ज़मीन वालों की मुलाक़ात,[२] रूह और शरीर की मुलाक़ात,[३] इतिहास के आरम्भ से अन्त तक सभी इंसानों का एक जगह जमा होना,[४] अल्लाह से मुलाक़ात,[५] और इंसान का अपने कर्मों के साथ आमना-सामना।[६]
इमाम सादिक़ (अ) से वर्णित एक रिवायत में «यौमुत-तलाक़» उस दिन को कहा गया है, जिसमें आसमान और ज़मीन वाले एक-दूसरे से मुलाक़ात करेंगे।[७] इसी तरह अल्लामा तबातबाई ने अपनी तफ़्सीर अल-मिज़ान में इस दिन को वह समय बताया है जब दुनिया की हक़ीक़तें और वास्तविकताएँ सामने आ जाएँगी और इंसान तथा ग़ैब की दुनिया के बीच का पर्दा हट जाएगा; इस तरह इंसान अपने कर्मों के प्रभाव और परिणामों को पूरी तरह देख सकेगा।[८]
फ़ुटनोट
- ↑ राग़िब इस्फ़हानी, मुफ़रदात, पृष्ठ 745।
- ↑ शेख़ सदूक़, मआनी अल-अख़बार, पृष्ठ 156।
- ↑ शेख़ मुफ़ीद, अल-मसाइल अल-अकबरिय्या, पृष्ठ 42।
- ↑ शेख़ बहाई, मिफ़्ताहुल-फ़लाह, पृष्ठ 161।
- ↑ शेख़ बहाई, मिफ़्ताहुल-फ़लाह, पृष्ठ 161।
- ↑ शेख़ बहाई, मिफ़्ताहुल-फ़लाह, पृष्ठ 161।
- ↑ शेख़ सदूक़, मआनी अल-अख़बार, पृष्ठ 156।
- ↑ तबातबाई, अल-मिज़ान, खंड 17, पृष्ठ 318।
स्रोत
- तबातबाई, सय्यिद मुहम्मद हुसैन, अल-मिज़ान, इस्माईलियान प्रकाशन, इस्माईलियान मुद्रणालय, प्रकाशित तिथि उपलब्ध नही, प्रकाशन स्थान उपलब्ध नहीं।
- राग़िब इस्फ़हानी, हुसैन बिन मुहम्मद, मुफ़रदात अल्फ़ाज़िल-क़ुरआन, बेरूत, दारुश-शामिय्या प्रकाशन, 1412 हिजरी।
- शेख़ बहाई, मुहम्मद बिन हुसैन, मिफ़्ताहुल-फ़लाह फ़ी अमलिल-यौमि वल-लैला मिनल-वाजिबाति वल-मुस्तहब्बात, बेरूत, दारुल-अज़वा प्रकाशन, 1405 हिजरी।
- शेख़ मुफ़ीद, मुहम्मद बिन मुहम्मद, अल-मसाइल अल-अकबरिय्या, क़ुम, शेख़ मुफ़ीद की सहस्राब्दी का विश्व सम्मेलन, 1413 हिजरी।
- शेख़ सदूक़, मुहम्मद बिन अली, मआनी अल-अख़बार, क़ुम, क़ुम के मदरसा-ए-मुदर्रिसीन का इस्लामी प्रकाशन कार्यालय, 1403 हिजरी।