कर्मो की स्वीकृति
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कर्मो की स्वीकृति का मतलब है कि अल्लाह के समीप कर्मो का स्वीकार होना या उनका सही स्तर पर पहुँचना है। रिवायतों में, किसी काम की स्वीकृति उस कर्म से ज़्यादा ज़रूरी मानी जाती है, क्योंकि केवल स्वीकृत कर्म ही इंसान की मुक्ति का कारण होता है।
धार्मिक किताबों में, किसी काम के सही होने और स्वीकृत होने में अंतर किया गया है। मंज़ूर होने के लिए किसी काम का न्यायशास्त्रीय रुप से सही होना ज़रूरी है, लेकिन ज़रूरी नही है कि हर सही स्वीकृत हो। कहा गया है कि सही काम केवल तकलीफ़ पूरी करता है, लेकिन पूरा इनाम मंज़ूर किए गए काम से जुड़ा होता है, कुछ लोग इस बात को मानते है कि सही काम सवाब रखता है, लेकिन स्वीकृत कर्म को उसी कर्ण का उच्च स्तर माना जाता है।
ईमान, विलायत, तक़वा, ईमानदारी और अच्छा व्यवहार को कर्मों की स्वीकृति की शर्तें माना जाता है, जबकि बहुदेववाद, पाखंड, दिखावा और सच्चाई से इनकार को कर्मों की अस्वीकृति या निरथर्कता की वजह माना जाता है। कर्मों के खत्म होने का मतलब है कुछ पापों की कारण से अच्छे कर्मों का फल खोना।
महत्व और स्थान
कर्मो की स्वीकृति का मतलब है कि अल्लाह के समीप कर्मो का स्वीकार होना[१] या उनका सर्वोच्च स्तर पर पहुँचना है।[२] रिवायात के अनुसार[३] कर्म की स्वीकृति स्वंय उस कर्म से महत्वपूर्ण है।[४] क्योकि स्वीकृत कर्म मुक्ति का कारण होता है।[५] कर्मो की स्वीकृति का आग्रह नबियों की दुआओं में से एक है[६] और इसे मोमेनीन की इच्छा के तौर पर परिचित कराया गया है।[७]
सही और स्वीकृत कर्म के बीच अंतर
हालांकि एक ऐसा कर्म जो न्यायशास्त्र के सिद्धांत से सही हो और उसमें सभी चीज़ें और शर्तें हो, वह स्वीकार योग्य है, लेकिन हर सही कर्म ज़रूरी नहीं कि स्वीकार हो और उसकी स्वीकृति के लिए दूसरी शर्तें भी होती हैं।[८] सही और स्वीकृत कर्म के बीच का अंतर समझाने के लिए कई नज़रिए बताए गए हैं:
- सही कर्म का पालन करने से कर्तव्य खत्म हो जाता है; हालांकि, इनाम पाने का अधिकार मात्र स्वीकृत कर्म के लिए है।[९]
- सही कर्म पर इनाम मिलता है, और स्वीकृत कर्म का स्तर उसी कर्म से बेहतर होता है।[१०]
- अगर कोई कर्म सही नहीं है, तो वह व्यक्ति सज़ा का हकदार है; लेकिन, अगर सही हो और स्वीकृत न हो, भले ही कोई सज़ा नही रखता, लेकिन ऐसा कर्म व्यक्ति को ईश्वर के करीब नहीं करता, और इस नज़दीकी से वंचित होना सज़ा का एक रूप माना जाता है।[११]
कर्मो की स्वीकृति की शर्तें
आयतों और रिवायतों के आधार पर, कुछ विश्वासों और व्यवहारों[१२] को स्वीकृति की शर्तें माना गया है;[१३] जिसमें ईमान,[१४] अहले-बैत (अ) की विलायत,[१५] तक़वा,[१६] ईमानदारी,[१७] नमाज़े शब,[१८] हलाल खाना[१९] और परिवार के साथ अच्छा व्यवहार शामिल है।[२०]
दूसरी ओर, धर्मत्याग,[२१] बहुदेववाद,[२२] अच्छाई की दावत देने वालो की हत्या,[२३] पुनरुत्थान और ईश्वरीय आयतों को नकारना,[२४] पाखंड,[२५] इमाम अली (अ) की विलायत का नकारना,[२६] विपत्ति में अधीरता,[२७] व्यभिचार का आरोप लगाना,[२८] बुरा ख्याल करना,[२९] दिखावा[३०] और बहस[३१] जैसे मामलों को कार्यों के विनाश या अस्वीकृति के कारकों के रूप में पहचाना गया है।[३२]
कार्यों की अस्वीकृति और निरर्थकता के बीच अंतर
कार्यों की निरर्थकता का अर्थ है कार्यों के प्रभाव और पुरस्कारों का नुकसान[३३] अर्थात, कुछ पाप अच्छे कार्यों को अप्रभावी बना देते हैं।[३४] उदाहरण के लिए, चूंकि मृत्यु के समय ईमान को कर्मों की स्वीकृति के लिए एक बुनियादी शर्त माना जाता है, इसलिए अविश्वास या बहुदेववाद के साथ मरने वाले व्यक्ति के कर्मों का कोई मूल्य नहीं होगा।[३५]
अल्लामा मजलिसी कई रिवायतों में निरर्थकता का अर्थ वास्तव में सवाब का नुकसान नहीं मानते; बल्कि, वे इसे मंज़ूरी के लिए हालात की कमी की निशानी के तौर पर देखते हैं; मतलब बाद मे किसा पाप का करना दर्शाता है कि नेक काम शुरू से ही सही हालात के साथ नहीं किया गया था और वह व्यक्ति शुरू में सवाब का हक़दार नहीं था।[३६] इस नज़रिए को शियों के प्रसिद्ध नज़रिए के तौर पर पेश किया गया है।[३७]
फ़ुटनोट
- ↑ सूर ए फ़ातिर, आयत 10; हुवैज़ी, तफ़सीर नूर अल सक़लैन, 1415 हिजरी, भाग 4, पेज 353।
- ↑ मकारिम शिराज़ी, तफ़सीर नमूना, 1374 शम्सी, भाग 10, पेज 343।
- ↑ सदूक़, खेसाल, 1362 शम्सी, भाग 1, पेज 14।
- ↑ क़ाज़ियात, इबादत, नमाज़ व दुआ, 1399 शम्सी, पेज 67।
- ↑ यगाने व हुज्जत, मवानेअ क़ुबूली अमल अज़ मंज़र क़ुरआन व रिवायात, किताब व सुन्नत पत्रिका।
- ↑ सूर ए बक़रा, आयत 127।
- ↑ मलकी तबरेज़ी, असरार अल सलात, 1420 हिजरी, पेज 168।
- ↑ शहीद सानी, रौज़ा अल जिनान, 1402 हिजरी, पेज 95; रफ़ीई, शुरूत क़ुबूली आमाल चीस्त? हौज़ा सूचना केंद्र।
- ↑ शहीद सानी, रौज़ा अल जिनान, 1402 हिजरी, पेज 95।
- ↑ मकारिम शिराज़ी, तफ़सीर नमूना, 1374 शम्सी, भाग 10, पेज 343।
- ↑ फ़र्क़ क़ुबूल शुदन आमाल व सहीह नबूदन आन चीस्त? हुसैन अंसारियान की सूचना वेबसाइट।
- ↑ यगाने व हुज्जत, मवानेअ क़ुबूली अमल अज़ मंज़र क़ुरआन व रिवायात, किताब व सुन्नत पत्रिका।
- ↑ रफ़ीई, शुरूत क़ुबूली आमाल चीस्त? हौज़ा सूचना केंद्र क़ाज़ान, इबादत, नमाज़ व दुआ, 1399 शम्सी, पेज 67-68।
- ↑ सूर ए माएदा, आयत 5 सूर ए नहल, आयत 97; उस्तराबादी, आयात अल अहकाम, 1394 हिजरी, पेज 178।
- ↑ कुलैनी, अल काफ़ी, 1407 हिजरी, भाग 1, पेज 130; हुर्रे आमोली, वसाइल उश शिया, 1409 हिजरी, भाग 1, पेज 123; इश्तेहारदी, मदारिक अल उरवा, 1417 हिजरी, भाग 22, पेज 474।
- ↑ सूर ए माएदा, आयत 27; तमीमी, ग़िरर अल हिकम, 1410 हिजरी, पेज 423।
- ↑ सूर ए इंआम, आयत 136; तमीमी, ग़िरर अल हिकम, 1410 हिजरी, पेज 423।
- ↑ मलकी तबरेज़ी, असरार अल सलात, 1420 हिजरी, पेज 454।
- ↑ हुर्रे आमोली, वसाइल उश शिया, 1409 हिजरी, भाग 9, पेज 25।
- ↑ हुर्रे आमोली, वसाइल उश शिया, 1409 हिजरी, भाग 20, पेज 163।
- ↑ सूर ए बक़रा, आयत 217।
- ↑ सूर ए ज़ुमर, आयत 65।
- ↑ सूर ए आले इमरान, आयत 21-22।
- ↑ सूर ए आराफ़, आयत 147।
- ↑ सूर ए अहज़ाब, आयत 19।
- ↑ सफ़्फ़ार, बसाइर अल दरजात, 1404 हिजरी, भाग 3, पेज 224।
- ↑ कुलैनी, अल काफ़ी, 1407 हिजरी, भाग 3, पेज 224।
- ↑ सदूक़, सवाब अल आमाल व अक़ाब अल आमाल, 1406 हिजरी, पेज 285।
- ↑ इब्ने हय्यून, दआइम अल इस्लाम, 1385 हिजरी, भाग 2, पेज 352।
- ↑ सदूक़, अल आमाली, 1376 शम्सी, पेज 582।
- ↑ इब्ने शैयबा हर्रानी, तोहफ उल उक़ूल, 1404 हिजरी, पेज 309।
- ↑ सुब्हानी, मंशूर जावेद, 1390 शम्सी, भाग 8, पेज 519-523; यगाने व हुज्जत, मवानेअ क़ुबूली अमल अज़ मंज़र क़ुरआन व रिवायात, किताब व सुन्नत पत्रिका।
- ↑ मकारिम शिराज़ी, तफ़सीर नमूना, 1374 शम्सी, भाग 19, पेज 550।
- ↑ हिल्ली, कश्फ़ अल मुराद, 1382 शम्सी, पेज 272।
- ↑ मकारिम शिराज़ी, तफ़सीर नमूना, 1374 शम्सी, भाग 3, पेज 299; और भाग 22, पेज 219।
- ↑ देखेः मजलिसी, बिहार उल अनवार, 1403 हिजरी, भाग 5, पेज 332-334।
- ↑ मजलिसी, बिहार उल अनवार, 1403 हिजरी, भाग 5, पेज 332।
स्रोत
- इब्ने शैयबा हर्रानी, हसन बिन अली, तोहफ़ उल उक़ूल, क़ुम, इस्लामी प्रकाशन कार्यालय, 1404 हिजरी।
- इब्ने हय्यून, नौमान बिन मुहम्मद, दआएमुल इस्लाम व ज़िक्र अल हलाल वल हराम वल क़ज़ाया वल अहकाम, क़ुम, आले अल बैत (अ) संस्थान, 1385 हिजरी।
- इश्तेहारदी, अली पनाह, मदारिक अल उर्वा, तेहरान, दार अल उस्वा प्रकाशन, 1417 हिजरी।
- उस्तराबादी, मुहम्मद बिन अली बिन इब्राहीम, आयात अल अहकाम फ़ी तफ़सीर कलाम अल मलिक अल अल्लाम, तेहरान, मेराजी किताब की दुकान, 1394 हिजरी।
- क़ाज़ियान, रहमतुल्लाह, ऐबादात, नमाज़ व दुआ, तेहरान, अफ़रोग़ प्रकाशन, 1399 शम्सी।
- कुलैनी, मुहम्मद बिन याक़ूब, अल काफ़ी, तेहरान, दार अल कुतुब अल इस्लामीया, 1407 हिजरी।
- तमीमी, अब्दुल वाहिद बिन मुहम्मद, ग़ेरर अल हिकम व दुरर अल कलिम, क़ुम, दार अल किताब अल इस्लामी, 1410 हिजरी।
- मकारिम शिराज़ी, नासिर, तफ़सीर नमूना, तेहरान, दार अल कुतुब अल इस्लामिया, 1374 शम्सी।
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- मलकी तबरेज़ी, मीर्ज़ा जवाद, असरार अल सलात, तेहरान, पयामे आज़ादी, 1420 हिजरी।
- यगानेह, फ़ातेमा व हुज्जत, हादी, मवानेअ क़ुबूली अमल अज़ मंज़र क़ुरआन व रिवायात, किताब व सुन्नत पत्रिका, क्रमांक 9, बहार व ताबिस्तान 1395 शम्सी।
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- सदूक़, मुहम्मद बिन अली बिन बाबवैह, अल ख़ेसाल, क़ुम, जामेअ मुदर्रेसान हौज़ा ए इल्मिया से संबंधित इस्लामी प्रकाशन का कार्यालय, 1362 शम्सी।
- सदूक़, मुहम्मद बिन अली बिन बाबवैह, सवाब अल आमाल व ऐक़ाब अल आमाल, क़ुम, दार अल शरीफ़ अल रज़ी, 1406 हिजरी।
- सफ़्फ़ार, महुम्मद बिन हसन, बसाइर अल दरजात फ़ी फ़ज़ाइल आले मुहम्मद (स), क़ुम, आयतुल्लाह मरअशी नजफ़ी (र) पुस्तकालय, 1404 हिजरी।
- सुब्हानी, जाफ़र, मंशूर जावेद, क़ुम, इमाम सादिक़ (अ) संस्थान, 1390 शम्सी।
- हिल्ली, हसन बिन युसूफ़, कश्फ़ अल मुराद फ़ी शरह तजरीद अल ऐतेक़ाद, क़ुम, इमाम सादिक़ (अ) संस्थान, 1382 शम्सी।
- हुर्रे आमोली, मुहम्मद बिन हसन, वसाइल उश शिया, क़ुम, आले अल बैत (अ) संस्थान, 1409 हिजरी।
- हुवैज़ी, अब्द अली बिन जुम्आ, तफ़सीर नूर अल सक़लैन, क़ुम, इस्माईलीयान प्रकाशन, 1415 हिजरी।
- “فرق قبول شدن اعمال و صحیح نبودن آن چیست؟ (कर्मो की स्वीकृति और उनके सही न होने मे क्या अंतर है?)” उस्ताद हुसैन अंसारियान की सूचना नेटवर्क, देखे जाने की तारीख 9 फ़रवरी 2026 ई।