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प्रारूप:यौमुल हसरत

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यौमुल-हसरत, क़यामत के दिनों के नामों में से एक है[१] और इसका अर्थ दुःख, अफ़सोस और पछतावे का दिन है।[२] यह नाम सूरह मरियम की आयत 39 में आया है।

टीकाकारों का मानना है कि क़यामत को यौमुल-हसरत कहने का कारण यह है कि उस दिन इंसान अपने कर्मों का परिणाम सामने आने के बाद दुनिया की ज़िंदगी में अपनी कमियों और लापरवाहियों को समझेगा।[३] नेक काम करने और अल्लाह के पुरस्कार प्राप्त करने के अवसर हाथ से निकल जाना भी उनके पछतावे और अफ़सोस का एक कारण होगा।[४] फ़ज़्ल बिन हसन तबरसी के अनुसार मजमा उल-बयान में, क़यामत के दिन पछतावा केवल गुनाहगारों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि नेक लोग भी इस बात पर पछताएँगे कि उन्होंने और अधिक नेक काम क्यों नहीं किए।[५]

क़ुरआन में घमंड, उपहास,[६] धर्म के विरुद्ध रास्ते में धन खर्च करना,[७] मआद का इनकार करना या उससे ग़ाफ़िल रहना[८] तथा ईमान और नेक काम को छोड़ देना[९] क़यामत के दिन पछतावे के कारणों में बताए गए हैं। इसी तरह कुछ रिवायतों में ऐसी सभाओं में बैठना, जहाँ अल्लाह या अहले-बैत (अ) का ज़िक्र न किया जाता हो,[१०] अल्लाह की आज्ञा का पालन किए बिना धन कमाना,[११] न्याय पर अमल किए बिना उसकी प्रशंसा करना,[१२] तथा अपनी आख़िरत की कामयाबी के बजाय दूसरों के दुनियावी फ़ायदों को प्राथमिकता देना[१३] क़यामत के दिन पछतावे और दुःख के कारणों में गिना गया है।

फ़ुटनोट

  1. ↑ मकारिम शीराज़ी, तफ़्सीर-ए-नमूना, खंड 13, पृष्ठ 86।
  2. ↑ राग़िब इस्फ़हानी, मुफ़रदात, «हसरत» शब्द के अंतर्गत।
  3. ↑ शेख़ तूसी, अत-तिबयान, खंड 7, पृष्ठ 127; अल्लामा तबातबाई, अल-मिज़ान, खंड 14, पृष्ठ 51।
  4. ↑ काशानी, मन्हजुस-सादिक़ीन, खंड 5, पृष्ठ 408।
  5. ↑ तबरसी, मजमा उल-बयान, खंड 6, पृष्ठ 795।
  6. ↑ सूरह ज़ुमर, आयत 56 से 59।
  7. ↑ सूरह अंफ़ाल, आयत 36।
  8. ↑ सूरह अनआम, आयत 29 से 31; सूरह अम्बिया, आयत 97।
  9. ↑ सूरह अनआम, आयत 27; सूरह अहज़ाब, आयत 66।
  10. ↑ मजलिसी, बिहारुल-अनवार, खंड 75, पृष्ठ 468।
  11. ↑ हुवैज़ी, नूरुस्सक़लैन, खंड 1, पृष्ठ 152।
  12. ↑ फ़ैज़ काशानी, अत-तफ़्सीरुस-साफ़ी, खंड 1, पृष्ठ 430।
  13. ↑ मजलिसी, बिहारुल-अनवार, खंड 27, पृष्ठ 186।

स्रोत

  • काशानी, मुल्ला फ़त्हुल्लाह, मन्हजुस-सादिक़ीन फ़ी इल्ज़ामिल-मुख़ालिफ़ीन, तेहरान, इस्लामिया पुस्तक-विक्रय केंद्र, 1336 शम्सी।
  • तबरसी, फ़ज़्ल बिन हसन, मजमा उल-बयान फ़ी तफ़्सीरिल-क़ुरआन, बेरूत, दारुल-मआरिफ़ा प्रकाशन, 1406 हिजरी।
  • तबातबाई, सय्यद मुहम्मद हुसैन, अल-मिज़ान फ़ी तफ़्सीरिल-क़ुरआन, बेरूत, अल-आलमी प्रकाशन संस्था, 1390 हिजरी।
  • फ़ैज़ काशानी, मुहसिन, अत-तफ़्सीरुस-साफ़ी, क़ुम, अल-हादी प्रकाशन संस्था, 1416 हिजरी।
  • मकारिम शीराज़ी, नासिर, तफ़्सीर-ए-नमूना, तेहरान, इस्लामी पुस्तकों का प्रकाशन, 1374 शम्सी।
  • मजलिसी, मुहम्मद बाक़िर, बिहारुल-अनवारिल-जामिआ लिदुररि अख़बारिल-अइम्मतिल-अत्हार, बेरूत, दारुल एहया अल तोरासिल अरबी प्रकाशन, द्वितीय संस्करण, 1403 हिजरी।
  • राग़िब इस्फ़हानी, हुसैन बिन मुहम्मद, मुफ़रदात अल्फ़ाज़िल-क़ुरआन, बेरूत, दारुश-शामिय्या प्रकाशन, 1412 हिजरी।
  • शेख़ तूसी, मुहम्मद बिन हसन, अत-तिबयान फ़ी तफ़्सीरिल-क़ुरआन, शोध: अहमद क़सीर आमिली, बेरूत, दारुल एहया अल तोरासिल अरबी प्रकाशन, प्रकाशित वर्ष उपलब्ध नहीं।
  • हुवैज़ी, अब्दुल अली बिन जुमा, तफ़्सीर-ए-नूरुस्सक़लैन, क़ुम, अल-इल्मिय्या मुद्रणालय, 1383 हिजरी।