दुआ ए वहदत
ईरान-इराक युद्ध में ईरानी मुजाहेदीन नमाज़ के बाद हाथ पकड़कर दुआ ए वहदत पढ़ते हुए | |
| विषय | तौहीद |
|---|---|
| प्रभावी/अप्रभावी | प्रभावी |
| किस से नक़्ल हुई | हज़रत मुहम्मद (स) |
| कथावाचक | मुतवक्किल बिन हारुन |
| शिया स्रोत | एलल अल शराए, तहज़ीब, अल मुक़्नेआ |
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दुआ ए वहदत, उस ज़िक्र को संदर्भित करती है जिसे पैग़म्बर (स) ने वाजिब नमाज़ो के बाद पढ़ने की सिफारिश की थी और इसे एकता के प्रतीक के रूप में पढ़ा जाता है।[१] शेख़ सदूक़ (मृत्यु 381 हिजरी) द्वारा इमाम सादिक़ (अ) से बयान रिवायत के अनुसार, मक्का की विजय और हजरे असवद द्वारा ज़ोहर की नमाज़ के बाद, पैग़म्बर (स) ने अपने हाथ उठाए और तीन बार तकबीर कही। फिर उन्होंने यह दुआ पढ़ी और सलाह दी: तीन तकबीर कहें और हर वाजिब नमाज़ के बाद यह दुआ पढ़ें। जो कोई भी नमाज़ के सलाम के बाद ऐसा करता है, उसने इस्लाम और उसकी सेनाओं को मज़बूत करने के लिए अल्लाह के प्रति कृतज्ञता का अपना कर्तव्य पूरा कर लिया है।[२] शेख सदूक़ ने अल-मुक़्नेआ पुस्तक में इस दुआ का वर्णन इस प्रकार किया है:
لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ إِلَهاً وَاحِداً وَ نَحْنُ لَهُ مُسْلِمُونَ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَ لاَ نَعْبُدُ إِلاَّ إِيَّاهُ ला इलाहा इल लल्लाहो एलाहन वाहेदन व नहनो लहू मुस्लेमूना ला लाहा इल लल्लाहो वला नअबोदो इल्ला इय्याहो (अल्लाह के सिवा कोई इलाह नहीं, केवल एक अल्लाह है, और हम उसके हुक्म को तस्लीम करते हैं। हम उसके सिवा किसी और की इबादत नहीं करते।)
مُخْلِصِينَ لَهُ اَلدِّينَ وَ لَوْ كَرِهَ الْمُشْرِكُونَ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ رَبُّنَا وَ رَبُّ آبَائِنَا الْأَوَّلِينَ मुखलेसीना लहुद दीना वलो करेहल मुशरेकून ला इलाहा इल लल्लाहो रब्बोना व रब्बो आबाएना (हम केवल उसी के लिए दीन को खालिस रखते है, हालाकि मुशरिको को यह बात पसंद नही है अल्लाह के सिवा कोई माबूद नही है, वही हमारा और हमारे पूर्वजो का परवरदिगार है।)
لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ وَحْدَهُ أَنْجَزَ وَعْدَهُ وَ نَصَرَ عَبْدَهُ وَ أَعَزَّ جُنْدَهُ ला इलाहा इल लल्लाहो वहदहू वहदहू अंजज़ा वअदहू वनसरा अब्दहू व आअज़्ज़ा जुंदहू (अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वही अकेला है, वही अपना वादा पूरा करता है, वही अपने बन्दों की मदद करता है, और वही अपनी सेना का सम्मान करता है।)
وَ غَلَبَ الْأَحْزَابَ وَحْدَهُ فَلَهُ الْمُلْكُ وَ لَهُ الْحَمْدُ يُحْيِي وَ يُمِيتُ وَ يُمِيتُ وَ يُحْيِي और उसी ने विरोधी ताकतों को हराया, इसलिए राज्य उसी का है और प्रशंसा उसी की है। वही जीवन देता है और मृत्यु देता है, और वही मृत्यु देता है और जीवन देता है। जो जीवन देता है और मृत्यु देता है और मृत्यु देता है और फिर से जीवन देता है।)
وَ هُوَ حَيٌّ لاَ يَمُوتُ بِيَدِهِ الْخَيْرُ وَ هُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ व होवा हय्युन ला यमूतो, बेयदेहिल ख़ैरो, व होवा अला कुल्ले शैइन कदीर (और वह स्वयं जीवित है, वह कभी नहीं मरता। उसके हाथ में सारी भलाई है, और वह हर काम करने में सक्षम है)।[३]
मिस्बाह अल-मुतहज्जिद[४] और तहज़ीब[५] में शेख तूसी और दआइम अल-इस्लाम[६] में काज़ी नोअमान मग़रिबी ने भी थोड़े-बहुत बदलाव के साथ इस दुआ का वर्णन किया है।
रिपोर्टों के अनुसार, 1960 के दशक में, ईरानी लोग नमाज़े जमाअत और जुमा की नमाज़ के बाद एकता और एकेश्वरवाद के प्रतीक के रूप में हाथ पकड़कर यह दुआ पढ़ते थे।[७] ऐसा कहा जाता है कि अगस्त 1979 में इस्लामी क्रांति के बाद तेहरान में पहली जुमा की नमाज़ में यह दुआ पढ़ी गई और फिर यह लोकप्रिय हो गई।[८] इराक-ईरान युद्ध के दौरान, नमाज़े जमाअत के बाद और ऑपरेशन से पहले यह दुआ ईरानी मुजाहेदीन की दिनचर्या का भी हिस्सा थी।[९]
फ़ुटनोट
- ↑ कुमैली खुरासानी, मज़ामीन दुआ ए वहदत, वहदती व तौहीदी अस्त, पाएगाह इत्तेलारसानी आयतुल्लाह कुमैली खुरासानी; इमाम (र) बा खुशहाली फ़रमूद अजब नमाज़ जुमा ई शुद, रोजनामा समाचार पत्र की साइट
- ↑ शेख सदूक़, एलल अल शराए, 1385 हिजरी, भाग 2, पेज 360
- ↑ शेख सदूक़, अल मुक़्नेआ, 1415 हिजरी, पेज 97
- ↑ शेख तूसी, अल मिस्बाह अल मुतहज्जिद, 1411 हिजरी, भाग 1, पेज 50
- ↑ शेख तूसी, तहज़ीब अल अहकाम, 1365 शम्सी, भाग 2, पेज 106
- ↑ इब्न हय्यून, दआइम अल इस्लाम, 1385 हिजरी, भाग 1, पेज 170
- ↑ कुमैली खुरासानी, मज़ामीन दुआ ए वहदत, वहदती व तौहीदी अस्त, पाएगाह इत्तेलारसानी आयतुल्लाह कुमैली खुरासानी
- ↑ इमाम (र) बा खुशहाली फ़रमूद अजब नमाज़ जुमा ई शुद, रोजनामा समाचार पत्र की साइट
- ↑ नमाज़े जमाअत रज़मंदेगान दिफ़ा मुक़द्दस बे इमामत फऱमांदेह सिपाह, तस्नीम समाचार एजेंसी; फ़ील्म क़राअत दुआ ए वहदत तवस्सुत फ़रमादेहान क़ब्ल अज़ अमलयात तरीक अल कुद्स, दिफ़ा ए मुक़द्दस समाचार एजेंसी
स्रोत
- इब्ने हय्यून, नौमान बिन मुहम्मद मगरिबी, दआ इम अल इस्लाम, क़ुम, मोअस्सेसा आले अल-बैत (अ) 1385 हिजरी
- इमाम (र) बा ख़ुशहाली फ़रमूद अजब नमाज़ जुमअई शुद, रोज़नामा जवान समाचार पत्र की साइट, प्रविष्ट की तारीख 8 मेहेर 1402 शम्सी, वीज़ि की तारीख 20 दय 1403 शम्सी
- शेख सदूक़, मुहम्मद बिन अली, एलल अल शराए, क़ुम, मकतब अल दावरी, 1385 शम्सी
- शेख सदूक़, मुहम्मद बिन अली, अल मुक़्नेआ, क़ुम, मोअस्सेसा इमाम महदी (अ), 1415 हिजरी
- शेख तूसी, मुहम्मद बिन हसन, तहज़ीब अल अहकाम, तेहरान, दार अल कुतुब अल इस्लामीया, 1365 शम्सी
- शेख तूसी, मुहम्मब बिन हसन, मिस्बाह अल मुताहज्जिद व सेलाह अल मुताअब्बिद, बैरूत, मोअस्सेसा फ़िक़्ह अल इस्लामी, 1411 हिजरी
- फ़ीलम कराअत दुआ ए वहदत तवस्सुत फ़रमानदेहान क़ब्ल अज़ अमलयात तरीक अल क़ुद्स, दिफ़ाए मुक़द्दस समाचार एजेंसी, प्रविष्ट की तारीख 12 आज़र 1403 शम्सी, वीजिट की तारीख 20 दय 1403 हिजरी
- कुमैली ख़ुरासानी, मुहम्मद सालेह, मज़ामीन दुआ ए वहदत, वहदती व तौहीद अस्त, पाएगाह इत्तेलारसानी आयतुल्लाह कुमैली खुरासानी, प्रविष्ट की तारीख 5 तीर 1401 शम्सी, वीजिट की तारीख 20 दय 1403 हिजरी
- नमाज़ जमाअत रज़मंदेगान दिफ़ा ए मुक़द्दस बे इमामत फ़रमांदेह सिपाह, प्रविष्ट की तारीख 3 मेहेर 1396 शम्सी, वीज़िट की तारीख 20 दय 1403 हिजरी