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प्रारूप:धूम्रपान का सेवन

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धूम्रपान का सेवन या तंबाकू का सेवन का अर्थ है सिगरेट, हुक्का, पाइप जैसे उपकरण से जलते हुए तंबाकू के धुएँ को साँस के माध्यम से अंदर लेना। मुस्लिम न्यायविद इसके शरई नियम को लेकर सहमत नहीं हैं। कुछ, जैसे शेख हुर्रे आमोली और नासिर मकारिम शिराज़ी, ने नुकसानदायक होने के कारण धूम्रपान को हराम जाना है, जबकि दूसरों न्यायविदों ने अस्ल-ए-बराअत (निर्दोषता के मूल सिद्धांत) और क़ायदा-ए-हिल्लियत (वैधता के सिद्धांत) के आधार पर इसे वैध स्वीकार किया है।

न्यायविदों के फ़तवो के अनुसार, एहतियात ए वाज़िब के तौर पर, रोज़ा रखने वाले को धूम्रपान के सेवन से बचना चाहिए। सय्यद मूसा शुब्बैरी ज़ंजानी जैसे न्यायविद रमज़ान मे धूम्रपान को तब तक वैध नहीं मानते जब तक इसे रोज़े का अपमान न माना जाए। सय्यद अली सीस्तानी सार्वजनिक स्थानों पर या दूसरे लोगों की सम्पत्ति पर उनकी मर्ज़ी के बिना धूम्रपान करना वार्जित मानते हैं।

परिभाषा और चर्चा का स्थान

धूम्रपान का सेवन या तंबाकू के सेवन का अर्थ है सिगरेट, हुक्का, पाइप जैसे उपकरण से जलते हुए तंबाकू के धुएँ को साँस के माध्यम से अंदर लेना।[१] किसी भी तरह का तंबाकू इस्तेमाल, चाहे सिगरेट के रूप में हो या किसी और तरह से हो धूम्रपान कहलाता है।[२]

धूम्रपान के सेवन का विषय न्यायशास्त्र के अध्यायों जैसे नमाज़ और रोज़े तथा आधुनिक मुद्दो मे भी उठाया गया है।[३] और न्यायविदों ने इसके शरई नियम और इसकी खरीदी-बिक्री पर भी चर्चा की है।[४] अस्ल-ए-बराअत (निर्दोषता के सिद्धांत) के लिए जो एक उदाहरण प्रस्तुत किए जाते है, उनमे धूम्रपान या तंबाकू पीना भी सम्मिलित है।[५]

इस्लामिक देशों में धूम्रपान के प्रारम्भ होने का इतिहास

कहा जाता है कि धूम्रपान सबसे पहले दसवीं शताब्दी हिजरी के अंत में पश्चिमी देशों से इस्लामिक देशों में आया था।[६] सिगरेट और तंबाकू क्रमशः पहले तुर्की (1605 हिजरी), फिर दमिश्क़ (1606 हिजरी), और फिर हिजाज़ और मिस्र (1601 हिजरी) में आया था।[७] 11वीं शताब्दी हिजरी के प्रारम्भ से ईरान में भी इसके होने की सूचना है।[८] जैसे-जैसे मुसलमानों में धूम्रपान का उपयोग व्यापक होता गया, न्यायविदों ने इसके शरई नियमों की जाँच शुरू कर दी।[९]

तंबाकू और सिगरेट के सेवन पर रोक लगाने वाला फ़तवा

मिर्ज़ा शिराज़ी का फ़तवा 1309 हिजरी में ब्रिटिश कंपनी रेगी को तंबाकू पर मोनोपॉली देने और अनुबंध समाप्त करने के जवाब में जारी किया गया था।[१०] फ़तवे का पाठ इस तरह था: "आज, किसी भी तरह से तंबाकू का इस्तेमाल करना मुहारेबा का हुक्म रखता है और इमाम ज़माना (अ) के साथ युद्ध करने जैसा है।"[११]

धूम्रपान का सेवन करने का नियम

धूम्रपान के सेवन करने से संबंधित न्यायविदों मतभेद रखते हैं:

धूम्रपान के सेवन पर रोक

न्यायविदों का एक समूह इसे हराम मानता है; उदाहरण के लिए, सय्यद अली सीस्तानी के फ़तवे के अनुसार, ड्रग्स, सिगरेट और हुक्का का इस्तेमाल अगर गंभीर नुक़सान पहुंचाता है तो हराम है।[१२] कुछ दूसरे शिया न्यायविदों जैसे हुर्रे आमोली और नासिर मकारिम शिराज़ी ने इसकी हुरमत को पूरी तरह से मना किया है।[१३] हुर्रे आमोली ने अपनी किताब अल फ़वाइद अल तुसीया में निषेध के 12 कारण बताए हैं,[१४] जिसमें इमाम सादिक़ (अ) का एक कथन भी शामिल है[१५] जो किसी चीज़ के नुक़सान को उसके निषेध के कारण के रूप में प्रस्तुत करते हैं।[१६] मकारिम शिराज़ी भी सिगरेट और तम्बाकू को उनके नुक़सान के कारण क़ाएदा ए ला ज़रर और हराम के अधीन मानते हैं।[१७] हनफ़ी, मालिकी, शाफ़ेई, हंबली न्यायविदों और सऊदी अरब के वहाबी मुफ़्ती के एक समूह ने भी इसके निषिधता के लिए फ़तवे जारी किए हैं।[१८]

कुछ न्यायविदों का यह भी मानना है कि «يُحِلُّ لَهُمُ الطَّيِّبَاتِ وَيُحَرِّمُ عَلَيْهِمُ الْخَبَائِثَ» आयत के अनुसार: "उनके लिए सभी अच्छी चीज़ें हलाल हैं और उनके लिए हराम हैं।"[१९] ईश्वर ने अपवित्र चीज़ों को हराम किया है, और धूम्रपान उनमें से एक है।[२०] यह भी कहा गया है कि धूम्रपान, इस तथ्य के कारण कि यह कई बीमारियों का कारण बनता है, खुद को विनाश में फेंकने का एक रूप है, जिसे ईश्वर ने आय ए तहलोका में मना किया है।[२१]

धूम्रपान की अनुमति

कुछ न्यायविदों ने धूम्रपान का सेवन करना वैध माना है और इसके लिए कई तर्क बयान किए हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि धुम्रपान का नुक़सान पूरी तरह से नहीं होता है और यह हर इंसान, उसके स्वभाव और समय के हिसाब से अलग-अलग होता है, और इसलिए इसे सभी मामलों में हराम नहीं माना जा सकता।[२२] साथ ही, क़ुरआन की आयत जैसे «كُلُوا مِمَّا فِي الْأَرْضِ حَلَالًا طَيِّبًا» “जो कुछ भी धरती पर हलाल और अच्छा है, उसे खाओ”[२३] का हवाला देते हुए, उनका मानना है कि धरती से उगने वाली हर चीज़ हलाल और साफ है, जब तक कि इसकी निषिधता को साबित करने के लिए कोई खास दस्तावेज़ या कारण शामिल न की गई हो। इसलिए, सिगरेट और तंबाकू को हलाल माना जाता है।[२४] इसके अलावा, तंबाकू के इस्तेमाल पर रोक लगाने वाली कोई दस्तावेज़ नहीं है, और न्यायविद इस बात पर सहमत हैं कि जो कुछ भी किसी दस्तावेज़ में मना नहीं है, वह हलाल है, और वे क़ाएदा ए हिल्लियत का हवाला देते हैं।[२५] ज़ैदी विद्वान मुहम्मद इब्न अली शौकानी और कुछ सुन्नी न्यायविदों ने भी धूम्रपान की वैधता को साबित करने के लिए इस सिद्धांत का हवाला दिया है।[२६] कुछ सुन्नी न्यायविदों ने भी इसकी कराहत पर फ़तवा जारी किया है।[२७]

रोज़ा रखने वालों के लिए धूम्रपान का हुक्म

न्यायविद इसे एहतियात ए वाज़िब मानते हैं कि रोज़ा रखने वाले लोग हर तरह के तंबाकू और ड्रग्स के धुएं से बचें, जिन्हें नाक से या जीभ के नीचे से अंदर लिया जाता है।[२८] सय्यद मूसा शुबैरी ज़ंजानी के फ़तवे के अनुसार, रमज़ान के दौरान रोज़े का अनादर करते हुए खुलेआम धूम्रपान करना जायज़ नहीं है, और अगर ऐसा होता है, तो रोज़े की क़ज़ा करनी होगी।[२९]

सार्वजिनक स्थलो पर धूम्रपान

कुछ न्यायविद जैसे सय्यद अली हुसैनी सीस्तानी के अनुसार, मालिक की मर्ज़ी के बिना सार्वजनिक स्थलो पर या दूसरे लोगों की सम्पत्ति पर सिगरेट या हुक्का इस्तेमाल करना जायज़ नहीं है, खासकर अगर इससे दूसरों को नुक़सान होता हो।[३०]

भारत में हर तीन वयस्कों में से एक व्यक्ति सिगरेट का सेवन करता है। इनमें से अधिकतर तंबाकू स्थानीय होता है और हाथ से बनाया जाता है, जिससे यह खरीदारों के लिए सस्ता पड़ता है। लेकिन जब से भारत विश्व स्वास्थ्य संगठन के तंबाकू नियंत्रण कन्वेंशन का सदस्य बना है, तब से उसने अपने देश में तंबाकू के सेवन को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं।

इस देश के अधिकारियों ने सबसे पहले सिगरेट के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाया। इसके बाद ऐसे अन्य कानून बनाए गए, जिनसे सिगरेट का सेवन करने वालों के लिए यह काम मुश्किल हो गया:

  • धूम्रपान करने वालों को सार्वजनिक स्थानों या कार्यस्थल पर सिगरेट पीने का अधिकार नहीं था। उन्हें धूम्रपान के लिए विशेष रूप से निर्धारित स्थानों पर जाना पड़ता था।
  • तंबाकू के उत्पादन के लिए बिक्री और आर्थिक सहायता पर कुछ प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसके अलावा, सभी सिगरेट के पैकेटों पर धूम्रपान करने वालों को यह चेतावनी देने वाली तस्वीरें और संदेश होना अनिवार्य है कि इससे उनका स्वास्थ्य खराब हो सकता है और उनकी समय से पहले मृत्यु हो सकती है।[३१]

फ़ुटनोट

  1. ↑ अल तय्यार और अन्य, अल फ़िक़्ह अल मयस्सर, भाग 13, पृष्ठ 44; अक़ीक़, अल अहकाम अल फ़िक़्हीया अल मुतअल्लेकतो बित तदख़ीन, पृष्ठ 19।
  2. ↑ इस्लामी न्यायशास्त्र विश्वकोश संस्थान, फ़रहंगे फ़िक़्ह, भाग 3, पृष्ठ 586।
  3. ↑ इस्लामी न्यायशास्त्र विश्वकोश संस्थान, फ़रहंगे फ़िक़्ह, भाग 3, पृष्ठ 586।
  4. ↑ हुर्रे आमोली, अल फ़वाइद अल तूसीया, पृष्ठ 224; अल तय्यार और अन्य, अल फ़िक़्ह अल मयस्सर, भाग 13, पृष्ठ 44; अक़ीक़, अल अहकाम अल फ़िक़्हीया अल मुतअल्लेकतो बित तदख़ीन, पृष्ठ 19; लेखकों का समूह, अल मौसूआ अल फ़िक़्हीया अल कुवैतीया, भाग 10, पृष्ठ 109-110।
  5. ↑ शेख अंसारी, फ़राइद अल उसूल, भाग 2, पृष्ठ 11-12; सुब्हानी, अल मूजिज़ फ़ी उसूल अल फ़िक़्ह, पृष्ठ 180।
  6. ↑ अब्दुस्सलाम अल तुवैला, फ़िक़्ह अल अशरेबा व हद्देहा, पृष्ठ 436।
  7. ↑ अतीक़, अल अहकाम अल फ़िक़्हीया अल मुताअल्लेक़तो बित तदख़ीन, पृष्ठ 24-25।
  8. ↑ फ़त्हुल्लाह पुर, «دخانیات؛ گیاه‌شناسی، تاریخ و کاربرد», पृष्ठ 389।
  9. ↑ रहीमी, «بررسی آیات فقهی در حلیت یا حرمت استعمال دخانیات در نگاه فریقین»,, पृष्ठ 70।
  10. ↑ इस्फ़हानी कर्बलाई, तारीख दुखानीया, पृष्ठ 117-118।
  11. ↑ इस्फ़हानी कर्बलाई, तारीख दुखानीया, पृष्ठ 118।
  12. ↑ सीस्तानी, «توضیح المسائل جامع», आयतुल्लाह सय्यद अली हुसैनी के कार्यालय की अधिकारिक साइट।
  13. ↑ हुर्रे आमोली, अल फ़वाइद अल तूसीया, पृष्ठ 224; अलयान नेज़ादी, सीगार पदीदे मरगबार अस्र मा, पृष्ठ 6।
  14. ↑ हुर्रे आमोली, फ़वाइद अल तूसीया, पृष्ठ 224-226।
  15. ↑ कुलैनी, अल काफ़ी, भाग 6, पृष्ठ 242।
  16. ↑ हुर्रे आमोली, अल फ़वाइद अल तूसीया, पृष्ठ 224।
  17. ↑ अलयान नेज़ादी, सीगार पदीदे मर्गबार अस्र मा, पृष्ठ 13।
  18. ↑ लेखको का समूह, अल मौसूआ अल फ़िक़्हीया अल कुवैतीया, भाग 10, पृष्ठ 102; अल मौसूआ अल फ़िक़्हीया, «حكمُ شرب التبغِ (الدخان)», अल दुरर अल सुन्नीया साइट।
  19. ↑ सूर ए आराफ़, आयत 157।
  20. ↑ हुर्रे आमोली, अल फ़वाइद अल तूसीया, पृष्ठ 224; अल तय्यार और अन्य, अल फ़िक़्ह अल मयस्सर, भाग 13, पृष्ठ 44; अतीक़, अल अहकाम अल फ़िक़्हीया अल मुतअल्लक़तो बित तदख़ीन, पृष्ठ 55।
  21. ↑ अल तय्यार और अन्य, अल फ़िक़्ह अल मयस्सर, भाग 13, पृष्ठ 44; अतीक़, अल अहकाम अल फ़िक़्हीया अल मुतअल्लक़तो बित तदख़ीन, पृष्ठ 54।
  22. ↑ जज़ाएरी, अल अनवार अल नौमानीया, भाग 4, पृष्ठ 44; लेखको का समूह, अल मौसूआ अल फ़िक़्हीया अल कुवैतीया, भाग 10, पृष्ठ 106।
  23. ↑ सूर ए बक़रा, आयत 168।
  24. ↑ शौकानी, इरशाद अल साइल, पृष्ठ 51; जज़ाएरी, अल अनवार अल नौमानीया, भाग 4, पृष्ठ 44।
  25. ↑ जज़ाएरी, अल अनवार अल नौमानीया, भाग 4, पृष्ठ 44।
  26. ↑ शौकानी, इरशाद अल साइल, पृष्ठ 50 – 51; करमी हंबली, तहक़ीक़ अर बुरहान फ़ी शान अल दुखान, पृष्ठ 59।
  27. ↑ लेखको का समूह, अल मौसूआ अल फ़िक़्हीया अल कुवैतीया, भाग 10, पृष्ठ 107।
  28. ↑ खूई, तौज़ीह अल मसाइल, पृष्ठ 276; सीस्तानी, तौज़ीह अल मसाइल, पृष्ठ 335; उसूली व बनी हाशमी ख़ुमैनी, रेसाला तौज़ीह अल मसाइल (मराजेअ), भाग 1, पृष्ठ 974।
  29. ↑ शुबैरी ज़ंजानी, तौज़ीह अल मसाइल, पृष्ठ 334।
  30. ↑ सीस्तानी, «توضیح المسائل جامع», आयतुल्लाह सय्यद अली हुसैन सीस्तानी के कार्यालय की अधिकारिक साइट।
  31. ↑ «از هند تا ونزوئلا؛ کشورها برای کنترل مصرف دخانیات چه کردند؟», ऑनलाइन समाचार।

स्रोत

  • «از هند تا ونزوئلا؛ کشورها برای کنترل مصرف دخانیات چه کردند؟», (भारत से वेनेज़ुएला तक; तंबाकू के सेवन को नियंत्रित करने के लिए देशों ने क्या किया?), ऑनलाइन समाचार, प्रविष्टि की तारीख़ 31 मई, 2021 ईस्वी, देखे जाने की तारीख़ 7 अक्टूबर 2026 ईस्वी।
  • अक़ीक़, अहमद बिन मुहम्मद, अल अहकाम अल फ़िक़्हीया अल मुताअल्लकतो बित तदख़ीन, रियाज़, दार अल मैमान प्रकाशन, प्रकाशित तिथि उपलब्ध नहीं।
  • अब्द अल सलाम अल तुवैला, अब्दुल वहाब, फ़िक़्ह अल अशरेबा व हद्दोहा, क़ाहिरा, दार अल सलाम प्रकाशन, 1406 हिजरी।
  • अल मौसूआ अल फ़िक़हीया, «حكمُ شرب التبغِ (الدخان)», (तम्बाकू (सिगरेट) पीने का हुक्म), अल दुरर अल सुन्ना की साइट, देखे जाने की तारीख 18 अक्टूबर 2024 ई।
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  • उसूली, अहसान व मुहम्मद हसन नबी हाशमी ख़ुमैनी, रेसाला तौज़ीह अल मसाइल (मराजेअ), क़ुम, इस्लामिक प्रचार कार्यालय, प्रकाशित तिथि उपलब्ध नहीं।
  • करमी हंबली, मरई बिन यूसुफ़, तहक़ीक़ अल बुरहान फ़ी शान अल दुखान अल लज़ी यशरेबोहुन्नास अल आन, बैरूत, दार इब्ने हज़्म प्रकाशन, 1421 हिजरी।
  • कुलैनी, मुहम्मद बिन याक़ूब, अल काफ़ी, संशोधनः मुहम्मद आख़ूंदी व अली अकबर ग़फ़्फ़ारी, तेहरान, दार अल कुतुब अल इस्लामिया प्रकाशन, 1407 हिजरी।
  • जज़ाएरी, सय्यद नेअमतुल्लाह, अल अनवार अल नौमानिया, बैरुत, दार अल कारी प्रकाशन, 1429 हिजरी।
  • तय्यार, अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद व अन्य, अल फ़िक़्ह अल मयस्सर, रियाज़, प्रकाशन उपलब्ध नहींं , 1433 हिजरी।
  • दाएरातुल मआरिफ़ फ़िक़्ह इस्लामी संस्थान, फ़रहंगे फ़िक़्ह मुताबिक मज़हब अहले बैत (अ), सय्यद महमूद हाशमी शाहरूदी की देख रेख मे, क़ुम, इस्लामी न्याशास्त्र विश्वकोष संस्थान, 1387 शम्सी।
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  • रहीमी, मुर्तज़ा, «بررسی آیات فقهی در حلیت یا حرمت استعمال دخانیات در نگاه فریقین», (शिया और सुन्नी के दृष्टिकोण से तम्बाकू के सेवन की वैधता या निषेध के संबंध में न्यायशास्त्रीय आयतों का अध्ययन), हलाल शोध पत्रिका, क्रमांक 1, मार्च 2019 ई।
  • लेखको का समूह, अल मौसूआ अल फ़िक़्हिया अल कुवैतिया, औक़ाफ़ और इस्लामी मामलो का मंत्रालय, 1414 ई।
  • शेख अंसारी, मुर्तज़ा, फ़राइद अल उसूल, क़ुम, अल फ़िक्र अल इस्लामी परिषद, पहला संस्करण, 1419 हिजरी।
  • शौकानी, मुहम्मद, इरशाद अल साइल इला दलाइल अल मसाइल, प्रकाशित स्थान और प्रकाशन उपलब्ध नहीं, 1348 हिजरी।
  • सिस्तानी, सय्य्द अली, «توضیح المسائل جامع», (जामेअ तौज़ीह अल मसाइल), सय्यद अली हुसैनी सिस्तानी के कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट, देखे जाने की तारीख 19 अक्टूबर 2024 ई।
  • हुर्रे आमोली, मुहम्मद बिन हसन, अल फ़वाइद अल तूसीया, क़ुम, महल्लाती प्रकाशन, 1423 हिजरी।