सय्यद अली हुसैनी सीस्तानी
| मरज-ए तक़लीद | |
| पूरा नाम | सय्यद अली हुसैनी सीस्तानी |
|---|---|
| जन्म तिथि | 4 अगस्त 1930 ईस्वी (9 रबीअ अल अव्वल 1349 क़मरी) |
| जन्म स्थान | नजफ़ |
| प्रसिद्ध रिश्तेदार | मुहम्मद रज़ा और मुहम्मद बाक़िर (बेटे) सय्यद जवाद शहरिस्तानी (दामाद) |
| गुरू | सय्यद मुहम्मद हुज्जत कोह-कमरई • सय्यद हुसैन तबातबाई बुरुजर्दी • सय्यद अबुल क़ासिम ख़ूई • हुसैन हिल्ली |
| इज्तिहाद की इजाज़त | सय्यद अबुल क़ासिम ख़ूई • हुसैन हिल्ली |
| सामाजिक | शिया मरज-ए तक़लीद |
| वेबसाइट | The Official Website of the Office of His Eminence Al-Sayyid Ali Al-Husseini Al-Sistani. |
सय्यद अली हुसैनी सीस्तानी (4 अगस्त 1930 ई.) 15वीं सदी के शिया मराजेए तक़लीद में से एक हैं। बअस पार्टी के शासन के दौरान नजफ़ सेमिनरी (हौज़ा इल्मिया नजफ़) को बनाए रखना, सद्दाम हुसैन के पतन के बाद अलग-अलग इराक़ी क़बीलों की एकता बनाए रखना, और आज के समय के इराकी संविधान के ड्राफ़्ट पर प्रभाव छोड़ना, साथ ही इराक़ की राष्ट्रीय पहचान को बनाए रखना, उनके सबसे अहम योगदानों में से एक माना जाता है।
सीस्तानी ने 1941 ई. में मशहद में अपनी धार्मिक शिक्षा शुरू की। फिर, क़ुम में, उन्होंने सय्यद हुसैन तबातबाई बुरुजर्दी और सय्यद मुहम्मद हुज्जत कोह-कमरई के ख़ारिज के कोर्स में हिस्सा लिया, और आखिर में 1952 ई. में नजफ़ चले गए। उन्हें 31 साल की उम्र में सय्यद अबुल-क़ासिम ख़ूई और सय्यद हुसैन हिल्ली से इज्तेहाद की इजाज़त की सनद प्राप्त की। सीस्तानी ने 1962 ई. में ख़ारिज कोर्स को पढ़ाना शुरू कर दिया। 1992 ई. में सय्यद अबुल क़ासिम ख़ूई की वफ़ात के बाद, नजफ़ के विद्वानों की सलाह से, वह धीरे-धीरे एक आम शिया अथॉरिटी (मरजए तक़लीद) बन गए, और उनके अनुयाईयों का सिलसिला इराक़ और ईरान से भारत, पाकिस्तान, यूरोप और अमेरिका तक फैल गया।
कहा जाता है कि सय्यद अली सीस्तानी ने इराक़ी राष्ट्रवाद पर ज़ोर देते हुए, शिया और सुन्नी एकता बनाए रखी, और और सत्ता में सभी समूहों की भागीदारी को शामिल करके सद्दाम के पतन के बाद नई इराकी सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई। लोकतांत्रिक प्रक्रिया का समर्थन, (अमेरिकी) कब्ज़े का विरोध, दाइश से मुक़ाबले का आह्वान, और पोप फ्रांसिस के साथ एक ऐतिहासिक मुलाक़ात उनके सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से माने जाते है।
उनका कार्यलय ईरान, इराक़, तुर्की और इंग्लैंड समेत कई देशों में शिक्षा, संस्कृति, शोध और सेवाओं पर आधारित संस्थानों का एक नेटवर्क चलाता है। सीस्तानी ने न्यायशास्त्र, न्यायशास्त्र के सिद्धांतों, हदीस और रेजाल के क्षेत्र में भी काम किया है और किताबें और लेखनियाँ लिखी हैं।
परिचय, जीवनी और पद
सय्यद अली हुसैनी सीस्तानी का जन्म 9 रबीअ अल अव्वल, 1349 हिजरी (4 अगस्त 1930 ई.) को मशहद में हुआ था। उनके पिता सय्यद मुहम्मद बाक़िर, एक शिया विद्वान थे, और उनकी माँ सय्यदा रज़ा मेहरबानी सराबी की बेटी थीं।[१] उनके दादा, सय्यद अली सीस्तानी, नजफ़ में मिर्ज़ा शिराज़ी के छात्र थे, जो 1318 हिजरी में मशहद चले गए थे और वहाँ उन्होने लोगों के धार्मिक मामलों को संभाल लिया था।[२]
ऐसा कहा जाता है कि सैय्यद अली सीस्तानी की प्रसिद्धि सद्दाम हुसैन के समय में उनके व्यवहार से उपजी है, जिसमें सय्यद अबुल क़ासिम ख़ूई के बाद हौज़ा इल्मिया नजफ़[३] के अस्तित्व को बनाए रखना, साथ ही सद्दाम के पतन के बाद उनके राजनीतिक कार्य और इराक़ की राजनीतिक घटनाओं में लोगों के राजनीतिक विचारों का मार्गदर्शन करना शामिल है; इस प्रकार से कि उनके व्यवहार को विभिन्न इराक़ी जातीय समूहों की एकता बनाए रखने,[४] राष्ट्रीय पहचान और राज्य विकसित करने,[५] और नए इराकी संविधान के प्रारूपण को प्रभावित करने में एक महत्वपूर्ण कारक माना जाता है।[६]
शिक्षा
सय्यद अली सीस्तानी ने 1941 ई. में मशहद में अपनी मदरसा की पढ़ाई शुरू की। उन्होंने मुहम्मद तकी अदीब नैशापूरी, सय्यद अहमद मोदर्रिस यज़्दी, मिर्ज़ा हाशिम कज़विनी जैसे विद्वानों से हौज़े के शुरुआती और स्तर के कोर्स और मुज्तबा कज़वीनी से दर्शनशास्त्र की पढ़ाई की। इसी तरह से उन्होने मिर्ज़ा महदी इस्फ़हानी और मिर्ज़ा महदी आश्तियानी से भी शिक्षा प्राप्त की। 1948 ई में, वे क़ुम चले गए और सय्यद हुसैन तबातबाई बुरुजर्दी और सय्यद मुहम्मद हुज्जत कोह कमरेई की क्लासों में उपस्थित हुए।[७]


नजफ़ की ओर प्रवास
सीस्तानी 1952 ई. में नजफ़ चले गए और मदरसा बुख़ाराई में प्रवेश किया। नजफ़ में, उन्होंने सय्यद अबुल-क़ासिम ख़ूई और हुसैन हिल्ली के न्यायशास्त्र और न्यायशास्त्र के सिद्धांतों के कोर्स में हिस्सा लिया, और इसी तरह से उन्होने सय्यद मोहसिन तबातबाई हकीम और सय्यद महमूद हुसैनी शाहरूदी से भी शिक्षा प्राप्त की।[८]
शिक्षण और छात्र
सय्यद अली सीस्तानी ने 1962 ई. में उच्च न्यायशास्त्रीय पाठ्यक्रम शुरू किया और 1992 ई. तक यह सिलसिला जारी रहा। उनके पाठ्यक्रमों में भाग लेने वाले लोगों में यह लोग शामिल थे:
- सय्यद मुहम्मद रज़ा सीस्तानी
- सय्यद मुहम्मद बाक़िर सीस्तानी
- सय्यद मुर्तज़ा मेहरी
- सय्यद मुहम्मद अली रब्बानी
- सय्यद हाशिम हाशेमी
- सय्यद मुनीर सैय्यद अदनान अल-क़तीफ़ी
- शेख़ महदी मुरवारीद
- सय्यद अहमद मददी
- शेख मुस्तफ़ा हरंदी।[९]
इज्तेहाद
सय्यद अली सीस्तानी को 31 साल की उम्र में 1961 ई. में सय्यद अबुल-क़ासिम ख़ूई और हुसैन हिल्ली से इज्तेहाद की इजाज़त मिली थी। वह शेख़ हुसैन हिल्ली से पूरी तरह इज्तेहाद (इजाज़ए इज्तेहादे मुतलक़) की इजाज़त पाने वाले अकेले व्यक्ति थे।[१०] आग़ा बुज़ुर्ग तेहरानी ने भी 1961 ई. में एक लेख में रेजाल और हदीस के विज्ञान में उनकी महारत की गवाही दी थी।[११]
मरजईयत

सय्यद अली सीस्तानी के कार्यलय की वेबसाइट पर छपी जानकारी के मुताबिक, 1992 में सय्यद अबुल क़ासिम ख़ूई की वफ़ात के बाद, नजफ़ के कुछ विद्वानों, जिनमें सय्यद अली बहिश्ती और मुर्तज़ा बुरूजर्दी शामिल थे, ने लोगों को आयतुल्लह सीस्तानी की तक़लीद करने की सलाह दी, जिसके बाद इराक़, ईरान, भारत, पाकिस्तान और फार्स की खाड़ी के देशों में लोग उनकी तक़लीद की ओर आकर्षित हो गये। सय्यद अब्द अल-अली सब्ज़ेवारी (1414 हिजरी), सय्यद मोहम्मद रजा गुलपायगानी (1414 हिजरी), मोहम्मद अली अराकी और सय्यद मोहम्मद रूहानी की वफ़ात के साथ इस सिलसिले ने और तेज़ी पकड़ी, और सय्यद सीस्तानी के फॉलोअर्स का दायरा यूरोप और अमेरिका के शिया समुदायों तक बढ़ गया।[१२]
1990 ई. में शिया न्यायविद सय्यद अबू अल-क़ासिम-ख़ूई की बीमारी के बाद, सीस्तानी ने 1994 ई. तक नजफ़ में ख़ज़रा मस्जिद में जमाअत की नमाज़ का नेतृत्व किया। ख़ूई की वफ़ात के बाद, उन्होंने उनके लिए अंतिम संस्कार की प्रार्थना का नेतृत्व किया, जिसे ख़ूई के उत्तराधिकार का संकेत माना जाता है।[१३]
वैज्ञानिक विशेषताएं
सय्यद अली सीस्तानी के दामाद, सय्यद जवाद शहरिस्तानी, उन्हें एक ऐसे फ़क़ीह के के तौर पर पेश करते हैं जिनका अध्धयन के मामले में तक़लीद के अधिकारियों में से किसी से कोई मुकाबला नहीं है।[१४] आयतुल्लाह सीस्तानी के एक शिष्य, सय्यद मुनीर खब्बाज़ ने भी उनकी पढ़ाई और शोध की कई विशेषताओं का उल्लेख किया है, जो निम्नलिखित हैं:
- मशहद, क़ुम और नजफ़ के तीन अलग-अलग हौज़ए इल्मिया के पाठ्यकम्र को मिलाना;
- दूसरे इस्लामिक स्कूलों के न्यायशास्त्र]] और हदीस की किताबों में महारत और उन किताबों का इस्तेमाल अहले-बैत (अ) की हदीसों को समझने के लिए करना;
- गैर-धार्मिक विज्ञानों में मौजूदा थ्योरीज़ का इस्तेमाल करके धार्मिक विज्ञानों को और गहरा करना।[१५]
सय्यद अली सीस्तानी ने न्यायशास्त्र, न्यायशास्त्र के सिद्धांतों, हदीस और रेजाल के क्षेत्र में कई किताबें लिखी हैं। उनके छात्रों ने भी उनके कई लेकचर लिखे हैं, जो तक़रीरात डाट नेट की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
बौद्धिक नींव और राजनीतिक विचार
सय्यद अली सीस्तानी के सामाजिक-राजनितिक चरित्र को एक तरफ़ सय्यद अबुल क़ासिम ख़ूई और दूसरी तरफ इमाम ख़ुमैनी और सय्यद मुहम्मद बाक़िर-सद्र के बीच के रुख़ की तरह बताया गया है; दूसरे शब्दों में, हालाँकि वह राज्य के गठन में न्यायविद की भूमिका में विश्वास नहीं करते हैं और धार्मिक राज्य की बजाय नागरिक राज्य की ओर मुड़ने के क़ायल हैं, लेकिन वह राजनीतिक मामलों में न्यायविदों की उदासीनता को स्वीकार नहीं करते हैं और उनका मानना है कि एक मरज ए तक़लीद के लिये पर्यवेक्षी और मार्गदर्शक की भूमिका है।[१६] राजनीतिक न्यायशास्त्र में शोधकर्ता अब्दुल वहाब फ़ुराती, सीस्तानी की राजनीति को मिर्ज़ा नायनी के विचार की ओर वापसी के रूप में देखते हैं, जो एक लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत लोगों और शासक के बीच एक नागरिक अनुबंध का समर्थन करते हैं।[१७]
न्यायविद के आम अधिकार का खंडन
सीस्तानी फ़ोक़हा की आम विलायत को स्वीकार नहीं करते हैं, उनके अनुसार, सरकार से जुड़े मामलों पर फ़क़ीह का कोई अधिकार नहीं होता है;[१८] लेकिन, पब्लिक मामलों पर न्यायविदों के अधिकार को नकारने का मतलब उमूरे हिसबिया और न्याय जैसे मामलों पर फ़क़ीह के अधिकार को नज़रअंदाज़ करना नहीं है; क्योंकि इन मामलों का अधिकार हदीसों में मुजतहिद के लिए ज़रूरी माना गया है।[१९]
नस्स न होने पर के लोगों को कंट्रोल करने का अधिकार
सय्यद अली सीस्तानी के अनुसार, जहाँ कानून बनाने वाले (शारेअ) ने कोई हुक्म नहीं सुनाया है और जिसे आम तौर पर बिना नस्स का दायरा या आज़ादी का इलाका (मंतक़तुल फ़राग़) कहा जाता है, वहाँ लोग फ़ैसले लेने वाले होंगे और वह क्षेत्र फ़क़ीह के कंट्रोल के दायरे से बाहर होंगा।[२०] इस नज़रिए को समझाते हुए कहा गया है कि मंतक़तुल फ़राग़ पब्लिक दायरे का एक बड़ा हिस्सा है जिसमें लोगों के अधिकारों को मान्यता दी जाती है और लोगों को इसमें कानून बनाने का अधिकार है, बशर्ते कि यह शरिया के खिलाफ़ न हो। इस दायरे में, किसी भी इंसान का दूसरे पर अधिकार नहीं होता है, और सिर्फ़ लोग ही इस क्षेत्र में अपना अधिकार दूसरों को दे सकते हैं।[२१]
सरकार जनता की मर्ज़ी के अधीन
अब्दुल वहाब फ़ुराती के अनुसार, सैय्यद अली सीस्तानी, अपने बौद्धिक सिद्धांतों के आधार पर, एक ऐसी सरकार का समर्थन करते हैं जिसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में ज़्यादातर लोग स्वीकार करते हैं।[२२] उनके नज़रिए से, ज़्यादातर लोग कोई सांप्रदायिक या जातीय बहुमत नहीं हैं, बल्कि इराक़ी नागरिकों का बहुमत है जिन्होंने चुनावों में हिस्सा लिया है। ऐसी सोच का नतीजा यह हुआ है कि इराक़ में एक मज़बूत नागरिक समाज का उदय हुआ, जो जब संस्थागत हो जाता है, तो राजनीतिक समूहों द्वारा राजनीतिक भागीदारी की इच्छा कम हो जाती है।[२३] इसलिए, यह भी कहा गया है कि संविधान इराकी लोगों की मर्ज़ी के अधीन होना चाहिए, और चूँकि ज़्यादातर लोग मुसलमान हैं, इसलिए यह कानून इस्लामी धार्मिक मानकों के खिलाफ़ नहीं हो सकता।[२४]
इराक़ी राष्ट्रवाद पर ज़ोर देकर एकता की रक्षा
शोधकर्ताओं के मुताबिक़, इराक़ में राजनीतिक, जातीय और धार्मिक झगड़ों को रोकने के लिए, सैयद अली सीस्तानी ने हमेशा अपने बयानों में इस बात पर ज़ोर दिया है कि इराक़ सभी इराकियों के लिए है, किसी ख़ास ग्रुप या धर्म के लिए नहीं। हालांकि वह एक शिया विद्वान हैं, लेकिन, उन्होने अभी तक शियों के पक्ष में पक्षपातपूर्ण रवैया नहीं अपनाया है, अन्य जातीय समूहों और अन्य धर्मों के अनुयायियों पर हमलों को स्वीकार्य नहीं माना है, और अंततः संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया है।[२५] सीस्तानी के इस तरह के रुख को सहयोगी लोकतंत्र के क़रीब माना जाता है, जिसके आधार पर सभी इराकी जातीय और धार्मिक समूहों को सत्ता में भाग लेना चाहिए, स्वशासन का अधिकार होना चाहिए, और अंततः नई इराकी प्रणाली के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए।[२६]
सामाजिक-राजनीतिक नज़रिए
सय्यद अली सीस्तानी के राजनीतिक और सामाजिक नज़रिए, खासकर सद्दाम के पतन के बाद, उनके बौद्धिक आधार के हिसाब से व्यवहार के तौर पर देखे गए हैं, जिससे इराक़ की एकता बनी रही, आधुनिक राजनीतिक व्यवस्था के गठन से क़ब्जे को अस्वीकार करने और चरमपंथी समूहों द्वारा इराक़ के विघटन को रोकने में मदद मिली है।[२७]
मैंने कई बार कहा है और मैं फिर कहूंगा कि यह मत कहो कि सुन्नी हमारे भाई हैं, बल्कि वे हमारी आत्मा और हमारी जान हैं।[२८]
- शिया और सुन्नी एकता बनाए रखने का प्रयास
सय्यद अली सीस्तानी, इराकी लोगों की अकसरियत की धार्मिक एकता पर ज़ोर देते हुए, मुसलमानों (शिया और सुन्नी दोनों) और यहां तक कि दूसरे धर्मों की जान, संपत्ति, सम्मान और विश्वासों पर हमला करना हराम मानते हैं; इसी वजह से, उनका मानना है कि कुछ सहाबा पर लानत करना हराम है।[२९] 2007 ई. के धार्मिक तनाव के दौरान, सीस्तानी ने इस्लामी एकता और सभी इराकियों के लिये क़ानूनी बराबरी की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और शियों से सुन्नियों के अधिकारों की रक्षा के लिये आगे आने को कहा।[३०]
- इराक़ी शासन और क़ानूनों को बदलने में भागीदारी
अमेरिकी सेना के इराक़ पर हमला करने और सद्दाम हुसैन की सरकार गिरने के बाद, सीस्तानी ने संविधान बनाने की अमेरिकी योजना का विरोध किया, और इस अधिकार को सिर्फ़ इराकी लोगों के लिए सही माना, और उनका मानना था कि इराकी लेजिस्लेटिव असेंबली के सदस्यो को चुनावों के ज़रिए तय होने चाहिए।[३१]
- दाइश के ख़िलाफ़ जिहाद पर फ़तवा
इराक में मूसल पर कब्ज़ा करने और दाइश ग्रुप के इराक़ के सेंटर और दक्षिण की ओर बढ़ने के बाद, सीस्तानी ने देश, राष्ट्र और पवित्र जगहों की रक्षा को [[वाजिब केफ़ाई |ज़रूरी फ़र्ज़]] बताया और उन नागरिकों से जो हथियार उठाने और आतंकवादियों से लड़ने में क़ाबिल हैं, सिक्योरिटी फ़ोर्स में शामिल होने को कहा।[३२] सैयद अली सीस्तानी की इस मांग का अब्दुल महदी कर्बलाई जो कर्बला के इमाम जुमा हैं, द्वारा ऐलान किया गया। हालांकि यह एक फ़तवा नहीं था,[३३] विश्लेषण के अनुसार, इसने एक फ़तवे का काम किया और इसने बहुत से लोगों को दाइश के खिलाफ़ लड़ाई में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।[३४]

- पोप फ्रांसिस से मुलाकात
कैथोलिक चर्च के लीडर पोप फ्रांसिस ने 6 मार्च, 2020 को इराक़ के अपने दौरे के दौरान नजफ़ में सय्यद अली सीस्तानी से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान, सीस्तानी ने इलाक़े की बड़ी चुनौतियों पर चर्चा की, जिसमें युद्ध, ग़रीबी, आज़ादी का उल्लंघन, ग़लत पाबंदियां और फ़िलिस्तीनियों का विस्थापन, शामिल हैं।[३५]
सहबद्ध संस्थाएँ
सय्यद अली सीस्तानी के कार्यालय ने ईरान, इराक़, तुर्की और इंग्लैंड सहित विभिन्न देशों में वैज्ञानिक, सांस्कृतिक, अनुसंधान और सेवा संस्थानों का एक नेटवर्क स्थापित किया है। इन संस्थानों में क़ुम में इमाम अली (अ) संस्थान, इस्तांबुल में आलुल-बैत (अ) सांस्कृतिक संस्थान, मुस्तफ़ा इस्लामिक शोध केंन्द्र, क़ुम धार्मिक शोध अनुसंधान केंद्र, इस्लामी धरोहर पुनरुद्धार केंद्र (मरकज़े एहयाए मीरासे इस्लामी), खगोलीय अनुसंधान केंद्र और विशिष्ट पुस्तकालयों का उल्लेख किया गया है।[३६]
फ़ुटनोट
- ↑ «زندگینامه حضرت آیتالله سید علی حسینی سیستانی», आयतुल्लाह सीस्तानी के कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट।
- ↑ आग़ा बुज़ुर्ग तेहरानी, तबक़ात आलाम अल-शिया, भाग 16, पृष्ठ 1435।
- ↑ फ़तही, «فقیهی برای همه اعصار», दीन ऑनलाइन वेबसाइट।
- ↑ काज़ेमी, «رفتار سیاسی آیتالله سیستانی (با تأکید بر وحدت و نفی اشغالگری)», पृष्ठ 76-79।
- ↑ निगहबान व सहयोगी, «راهبردهای سیاسی آیتالله سیستانی جهت تکوین هویت و دولت ملی در عراق», पृष्ठ 124-134।
- ↑ अहमदियान, «دیدگاهها و مواضع آیتالله سیستانی در روند تدوین قانون اساسی عراق نوین», पृष्ठ 123-125।
- ↑ «زندگینامه حضرت آیتالله سید علی حسینی سیستانی», आयतुल्लाह सीस्तानी के कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट।
- ↑ «زندگینامه حضرت آیتالله سید علی حسینی سیستانی», आयतुल्लाह सीस्तानी के कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट।
- ↑ «زندگینامه حضرت آیتالله سید علی حسینی سیستانی», आयतुल्लाह सीस्तानी के ऑफ़िस की ऑफ़िशियल वेबसाइट।
- ↑ «زندگینامه حضرت آیتالله سید علی حسینی سیستانی», आयतुल्लाह सीस्तानी के कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट।
- ↑ «زندگینامه حضرت آیتالله سید علی حسینی سیستانی», आयतुल्लाह सीस्तानी के कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट।
- ↑ «زندگینامه حضرت آیتالله سید علی حسینی سیستانی», आयतुल्लाह सीस्तानी के कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट।
- ↑ फ़तही, «فقیهی برای همه اعصار», दीन ऑनलाइन वेबसाइट।
- ↑ शहरिस्तानी, «سبک زندگی حضرت آیتالله سیستانی», हौज़ा वेबसाइट।
- ↑ खब्बाज़, «ویژگیهای شخصیتی و سیره سیاسی آیتالله سیستانی», शिया न्यूज़ वेबसाइट।
- ↑ हकीम, अन-नजफ़ व हौज़ातोहु (किताब 5), पृष्ठ 157 और 179, हाजी युसूफ़ी व आरिफ़ नेजाद, «نشانهشناسی گفتمان در اسلام سیاسی و مردمسالار آیتالله سیستانی», पृष्ठ 58-63।
- ↑ फ़ुराती, «آیتالله سیستانی و نظریه ارادة الامة», पृष्ठ 86-87।
- ↑ हुसैनी सीस्तानी, अल-इज्तिहाद, वत-तक़लीद, वल-इहतियात, पृष्ठ 105-128।
- ↑ हुसैनी सीस्तानी, अल-इज्तिहाद, वत-तक़लीद, वल-इहतियात, पृष्ठ 86।
- ↑ हुसैनी सीस्तानी, अल-इज्तिहाद, वत-तक़लीद, वल-इहतियात, पृष्ठ 86।
- ↑ हकीम, अन-नजफ़ व हौज़ातोहु (किताब 5), पृष्ठ 159।
- ↑ फ़ुराती, «آیتالله سیستانی و نظریه ارادة الامة», पृष्ठ 88-89।
- ↑ खफ़ाफ़, अन-नुसूस अस-सादेरा अन समाहत सैय्यद सीस्तानी फ़िल मसअतिल इराक़िया, पृष्ठ 13, 28, 31, और 142।
- ↑ अहमदियान, «دیدگاهها و مواضع آیتالله سیستانی در روند تدوین قانون اساسی عراق نوین», पृष्ठ 123-125।
- ↑ रब्बानी व सहयोगी, «نقش آیتالله سیستانی در مهار منازعه میان شیعیان و سنیهای عراق پس از ۲۰۰۳م», पृष्ठ 273-274।
- ↑ फ़ुराती, «آیتالله سیستانی و نظریه ارادة الامة», पृष्ठ 89-89।
- ↑ निगहबान व सहयोगी, «راهبردهای سیاسی آیتالله سیستانی جهت تکوین هویت و دولت ملی در عراق», पृष्ठ 134-135।
- ↑ «Sunnis not only our brethren, but our souls: Ayatollah Sistani», मेहर समाचार एजेंसी।
- ↑ रब्बानी व सहयोगी, «نقش آیتالله سیستانی در مهار منازعه میان شیعیان و سنیهای عراق پس از ۲۰۰۳م», पृष्ठ 275-276।
- ↑ रब्बानी व सहयोगी, «نقش آیتالله سیستانی در مهار منازعه میان شیعیان و سنیهای عراق پس از ۲۰۰۳م», पृष्ठ 276।
- ↑ खफ़ाफ़, अन-नुसूस अस-सादेरा अन समाहत सैय्यद सीस्तानी फ़िल मसअतिल इराक़िया, पृष्ठ 18-19।
- ↑ हत्ताब, «توظیف الحشد الشعبی فی المدرک السیاسی العراقی», पृष्ठ 108; «نقش فتوای جهادی آیتالله سیستانی در جلوگیری از تجریه عراق», मेहर समाचार एजेंसी।
- ↑ मा’मूरी, «نقش آیتالله سیستانی در افزایش مسئولیت اخلاقی در جنگ با داعش», BBC वेबसाइट।
- ↑ «آیت الله سیستانی فتوای جهاد صادر کرد», हौज़ा समाचार एजेंसी।
- ↑ «بیانیه دفتر آیتالله العظمی سیستانی از دیدار پاپ», IRNA समाचार एजेंसी।
- ↑ «مراکز و مؤسسات», आयतुल्लाह सिस्तानी के कार्यालय की वेबसाइट।
स्रोत
- आग़ा बुज़ुर्ग तेहरानी, मोहम्मद मोहसिन, तबक़ात आलाम अल-शिया, बेरूत, दार इह्या अल-तुरास, 1430 हिजरी।
- «آیت الله سیستانی فتوای جهاد صادر کرد»,(आयतुल्लाह सिस्तानी ने जिहाद का फतवा जारी किया), हौज़ा समाचार एजेंसी, प्रविष्टि की तारीख: 13 जून 2014, देखे जाने की तारीख: 15 फरवरी 2026।
- अहमदियान, कुदरत, «و مواضع آیتالله سستانی در روند تدوین قانون اساسی عراق نوین», (नए इराकी संविधान का ड्राफ़्ट बनाने की प्रक्रिया में अयातुल्लाह सिस्तानी के विचार और स्थिति), त्रैमासिक पत्रिका अंदिश ए सियासी दर इस्लाम, नंबर 17, 2020 ई.।
- हाजी यूसुफ़ी, अमीर मोहम्मद, व अबुल क़ासिम आरिफ़ नेजाद, «نشانهشناسی گفتمان در اسلام سیاسی و مردمسالار آیتالله سیستانی», (आयतुल्लाह सिस्तानी के राजनीतिक इस्लाम और लोकतांत्रिक प्रवचन का संकेत-विज्ञान (सेमियोटिक्स)), त्रैमासिक पत्रिका पिजोहिश नामा उलूमें सियासी, साल 6, नंबर 4, 2011।
- हुसैनी सीस्तानी, सैय्यद अली, इज्तिहाद, वत-तक़लीद, वल-इहतियात, मोहम्मद अली रब्बानी द्वारा, तक़रीरात की साइट, 1437 हिजरी।
- हत्ताब, जवाद काज़िम, «توظیف الحشد الشعبی فی المدرک السیاسی العراقی», (इराकी पॉलिटिकल कॉन्टेक्स्ट में पॉपुलर मोबिलाइज़ेशन फ़ोर्सेज़ की भूमिका), हम्मुराबी पत्रिका, साल 7, अंक 29, शीत ऋतु 2019 ई.।
- हकीम, अब्दुल हादी, अन-नजफ़ व हौज़ातुहा, कर्बला, दार अल-कफ़ील, 2018 ई।
- खब्बाज़, सैय्यद मुनीर, «ویژگیهای شخصیتی و سیاسی آیتالله سیستانی», (आयतुल्लाह सिस्तानी की पर्सनल और राजनितिक विशेषताएं), शिया समाचार वेबसाइट, प्रविष्टि की तारीख: 7 ِअप्रैल 2018, देखे जाने की तारीख: 9 नवम्बर 2025।
- «بیانیه دفتر آیتالله العظمی سیستانی از دیدار پاپ», (पोप के विज़िट पर ग्रैंड आयतुल्लाह सीस्तानी के ऑफ़िस का बयान)», इस्लामिक रिपब्लिक ईरान समाचार एजेंसी, प्रविष्टि की तारीख: 6 मार्च 2021, देखे जाने की तारीख: 22 नवम्बर 2025।
- «نقش فتوای جهادی آیتالله سیستانی در جلوگیری از تجزیه عراق», (इराक के टूटने को रोकने में आयतुल्लाह सिस्तानी के जिहादी फ़तवे की भूमिका), मेहर समाचार एजेंसी, प्रविष्टि की तारीख: 6 जून 2015, देखे जाने की तारीख: 22 नवम्बर 2025।
- खफ़ाफ़, हामिद, अन-नुसूस अस-सादेरा अन साहत सय्यद सीस्तानी फ़िल मसअलतिल इराक़िया, बेरूत, दार अल-मोवर्रिख़ अल-अरबी, 2007।
- «زندگینامه حضرت آیتالله سید علی حسینی سیستانی», (आयतुल्लाह सैय्यद अली हुसैनी सिस्तानी की जीवनी), आयतुल्लाह सिस्तानी के ऑफिस की ऑफिशियल वेबसाइट, देखे जाने की तारीख: 22 नवम्बर 2025।
- «مراکز و موسسات», (सेंटर और केन्द्र), आयतुल्लाह सिस्तानी के ऑफिस की वेबसाइट, देखे जाने की तारीख: 4 जून 2018।
- रब्बानी, सैय्यद इब्राहिम, और अली शीरखानी और दाऊद कियानी, «نقش آیتالله سیستانی در مهار منازعه میان شیعیان و سنیهای عراق پس از ۲۰۰۳م», (2003 के बाद इराक में शिया और सुन्नियों के बीच झगड़े को रोकने में आयतुल्लाह सिस्तानी की भूमिका), सियासते मुतआलिया क्वार्टरली पत्रिता, नंबर 33, 2021।
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- निगहबान, मोहम्मद अमीन, और अबुल फ़ज़्ल शकूरी और सैय्यद मोहसेन आले-गफ़ूर, «راهبردهای سیاسی آیتالله سیستانی جهت تکوین هویت و دولت ملی در عراق», (इराक़ में पहचान और राष्ट्रीय राज्य बनाने के लिए अयातुल्लाह सिस्तानी की राजनीतिक अध्यन), राजनीति विज्ञान त्रैमासिक, नंबर 105, 2016>
- «Sunnis not only our brethren, but our souls: Ayatollah Sistani», (सुन्नी सिर्फ़ हमारे भाई नहीं, बल्कि हमारी आत्मा हैं: आयतुल्लाह सीस्तानी), मेहर समाचार एजेंसी, प्रविष्टि की तारीख: 26 जनवरी, 2013, देखे जाने की तारीख: 15 फरवरी, 2026।
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- नजफ़ में रहने वाले मराजे ए तक़लीद
- 14वीं शताब्दी (शम्सी) के मराजे ए तक़लीद
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