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इस्लामी गणराज्य ईरान के सर्वोच्च नेता

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सय्यद मुज्तबा ख़ामेनई, इस्लामी गणराज्य ईरान के तीसरे सर्वोच्च नेता

ईरान के इस्लामी गणराज्य के सर्वोच्च नेता (रहबर) इस्लामी गणराज्य ईरान की शासन-व्यवस्था में सर्वोच्च आधिकारिक पदाधिकारी हैं। ईरान के संविधान के अनुसार, वे तीनों शासन शाखाओं (विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका) की निगरानी तथा राज्य व्यवस्था के समग्र मार्गदर्शन का दायित्व निभाते हैं। यह पद शिया इमामिया न्यायशास्त्र की "विलायत-ए-फ़क़ीह" (इस्लामी न्यायविद् का नेतृत्व) की अवधारणा पर आधारित है। इस सिद्धांत के अनुसार, मासूम इमाम के ग़ैबत (अनुपस्थिति) के काल में इस्लामी समाज के सार्वजनिक एवं सामूहिक मामलों का संचालन एक योग्य, न्यायप्रिय और सभी आवश्यक शर्तों से युक्त फ़क़ीह (धर्मविद्) के हाथों में सौंपा जाता है।

ईरान के संविधान के अनुच्छेद 5, 107, 110 और 177 में नेतृत्व के सिद्धांत, आवश्यक योग्यताएँ, चयन की प्रक्रिया, अधिकार तथा उसकी संवैधानिक स्थिति को निर्धारित किया गया है। नेतृत्व के लिए आवश्यक शर्तों में इज्तिहाद, न्यायप्रियता, तक़वा, राजनीतिक एवं सामाजिक दूरदृष्टि, प्रशासनिक क्षमता तथा नेतृत्व के लिए आवश्यक योग्यता शामिल हैं। नेता का चयन, उस पर निगरानी तथा आवश्यकता पड़ने पर उसे पद से हटाने का अधिकार नेतृत्व के विश्षज्ञो की परिषद को प्राप्त है। 1368 शम्सी/1989 ईस्वी में संविधान के पुनरीक्षण के दौरान नेता के लिए मरजेइयत की शर्त तथा नेतृत्व परिषद की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया और विलायत-ए-मुतलक़ा-ए-फ़क़ीह की अवधारणा पर विशेष बल दिया गया।

संविधान के अनुच्छेद 110 के अनुसार, नेता के कर्तव्यों और अधिकारों में राज्य की सामान्य नीतियों का निर्धारण, सशस्त्र बलों का सर्वोच्च नेतृत्व, कुछ उच्च पदस्थ अधिकारियों की नियुक्ति एवं पदच्युति, शासन की विभिन्न शाखाओं के बीच उत्पन्न विवादों का समाधान तथा चुनाव के बाद राष्ट्रपति के पद की पुष्टि करना शामिल है।

इस्लामी गणराज्य ईरान की स्थापना से लेकर अब तक इमाम ख़ुमैनी, सय्यद अली ख़ामेनेई और सय्यद मुज्तबा ख़ामेनेई क्रमशः इस्लामी गणराज्य के प्रथम, द्वितीय और तृतीय नेता रहे हैं।।

महत्व

ईरान इस्लामी गणराज्य के संविधान के अनुच्छेद पाँच के अनुसार, इमाम महदी (अ) की ग़ैबत के दौरान, राज्य के नेतृत्व और उम्मत की इमामत जामेअ शराइत मुज्तहिद को सौंपी जाती है।[१] नेतृत्व को ईरान की इस्लामी गणराज्य व्यवस्था में सर्वोच्च राजनीतिक और आध्यात्मिक पद माना जाता है [२] और वह तीनों शक्तियों (कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका) के शीर्ष पर स्थित होता है।[३] इस पद का महत्व उसकी जिम्मेदारियों और अधिकारों के कारण है, जिनमें राज्य की समग्र नीतियों का निर्धारण और सरकारी संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करना शामिल है।[४]

इस्लामी गणराज्य ईरान के पहले और दूसरे नेता इमाम ख़ुमैनी और सय्यद अली ख़ामेनेई

कुछ संवैधानिक कानूनी स्रोतों में, “विलायत-ए-फ़क़ीह” को इस्लामी गणराज्य ईरान की व्यवस्था की मूलभूत संरचनाओं में से एक स्तंभ और उसकी पहचान का प्रमुख तत्व बताया गया है। इस दृष्टिकोण में, शिया बारह इमामो को मानने वाले संप्रदाय में मौजूद इमामत की अवधारणा को राजनीतिक व्यवस्था में विलायत-ए-फ़क़ीह के रूप में संस्थागत रूप दिया जाता है।[५]इसके अलावा, देश के प्रशासनिक कार्यों के संचालन के साथ-साथ, समाज का आध्यात्मिक मार्गदर्शन करना और सरकारी संस्थाओं की गतिविधियों का इस्लामी कानूनों के अनुरूप होने की निगरानी करना भी सर्वोच्च नेता के कर्तव्यों में शामिल माना जाता है।[६]

ईरान के नेता

इमाम ख़ुमैनी[७] 4 जून 1989 ई. तक, और उनके बाद सय्यद अली ख़ामेनेई 28 फ़रवरी वर्ष 2026 ई तक ईरान इस्लामी गणराज्य के नेता रहे हैं।[८] सय्यद अली ख़ामेनेई की हत्या के बाद, विशेषज्ञों की सभा ने 9 मार्च 2026 ई. को सय्यद मुज्तबा ख़ामेनेई को इस्लामी गणराज्य ईरान के तीसरे नेता के रूप में चुना।[९]

न्यायशास्त्रीय और कानूनी आधार

ईरान इस्लामी गणराज्य में नेतृत्व का आधार विलायत ए फ़क़ीह के सिद्धांत पर है।[१०]यह सिद्धांत इमामीया न्यायशास्त्र में, तर्कसंगत और धार्मिक आधारों के अनुसार प्रमाणित माना जाता है।[११] इस सिद्धांत के अनुसार, इमाम महदी (अ) की ग़ैबत में, इस्लामी समाज की सरकार और प्रशासन की ज़िम्मेदारी जामेअ शराइत मुज्तहिद यानी “वली ए फ़क़ीह” के पास होती है।[१२]

इस्लामी गणराज्य ईरान के संविधान के अनुच्छेद 177 के अनुसार, नेतृत्व की इमामत और विलायत को संविधान के अपरिवर्तनीय सिद्धांतों में शामिल किया गया है, जिन्हें संविधान संशोधन के दौरान भी बदला नहीं जा सकता।[१३] कुछ लोग संविधान में इस बात की बार-बार पुष्टि को नेतृत्व की इमामत और विलायत के महत्व पर जोर मानते हैं।[१४] इसके अलावा, अनुच्छेद 57 में जिसे शक्तियों के पॉवर्स का सिद्धांत कहा जाता है[१५]यह भी स्पष्ट किया गया है कि त्रिसत्तात्मक शक्ति (कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका) अपने अधिकारों का प्रयोग नेता की निगरानी के तहत करती हैं।[१६]

नेतृत्व की शर्ते

मूल क़ानून के अनुसार नेतृत्व के लिए निम्नलिखित शर्ते हैः

मूल क़ानून की धारा 5 और 107 मे आया है।[१८] राष्ट्रपति के खिलाफ़ मूल क़ानून मे सर्वोच्च नेता के लिए ईरानी नागरिक होने की शर्त का उल्लेख नही है, लेकिन कुछ विधिवेत्ता यह मानते हैं कि राष्ट्रपति जैसे पद के लिए राष्ट्रीयता की अनिवार्यता के आधार पर, यह शर्त सर्वोच्च नेता के लिए भी अधिक बलपूर्वक आवश्यक मानी जानी चाहिए।[१९]

संविधान का पुनरीक्षण

वर्ष 1990 ईस्वी मे संविधान का पुनरीक्षण करके संशोधन किया गया। सर्वोच्च नेता से संबंधित मूल धारा मे 2 परिवर्तन हुए।

  • नेतृत्व के लिए मरजईयत की शर्त का हटाया जानाः वर्ष 1980 ईस्वी मे पारित मूल क़ानून मे फ़तवा देने की योग्यता के अलावा मरजेईयत भी सर्वोच्च नेता की शर्त थी जोकि संशोधन मे मरजेइयत की शर्त हटा दी गई।[२०] इस्लामी गणतंत्र ईरान के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी ने 29 अप्रैल 1989 ई मे क़ानून संशोधन परिषद के अध्यक्ष के नाम लिखे पत्र मे बल दिया कि मै आरम्भ से ही मरजेईयत की शर्त का समर्थक नही था, न्यायप्रिय मुज्तहिद व्यवस्था के नेतृत्व के लिए पर्याप्त है।[२१] ऐसा कहा जाता है कि मरजेईयत की शर्त का समाप्त करना फ़क़ाहत और इज्तेहाद के स्थान को कम करना नही है बल्कि समाज के प्रबंधन की आवश्यकता के कारण, प्राथमिकता मरजईयत से बदलकर “राजनीतिक मामलों और देश के प्रशासन में अधिक ज्ञान और योग्यता” पर रखी गई, ताकि नेतृत्व के चयन का दायरा केवल मराजेअ तक़लीद तक सीमित न रहे।।[२२]
  • नेतृत्व परिषद का समाप्त करके “पूर्ण विलायत ए फ़क़ीह” की व्यवस्था को स्थापित किया जानाः संविधान के पुनरीक्षण में नेतृत्व परिषद का प्रावधान हटा कर “पूर्ण विलायत-ए-फ़क़ीह” का शीर्षक नेतृत्व के कर्तव्यों और अधिकारों में जोड़ दिया गया।[२३]

कर्तव्य और अधिकार

मूल क़ानून की धारा 110 के अनुसार सर्वोच्च नेता के कर्तव्य और अधिकार इस प्रकार हैः

  1. प्रणाली की हित निर्धारण परिषद से परामर्श करने के बाद पूर्ण सियासत का निर्धारण करना
  2. सियासत के सही रूप से लागू होने पर नज़र रखना
  3. सभी प्रकार के आदेश देना
  4. सश्स्त्र बलो
  5. युध्द और शांति समझौते की घोषणा
  6. नियुक्ति और पदमुक्त करना तथा संविधान संरक्षण परिषद के न्यायविदो, सर्वोच्च न्यायधीश, रेडियो और टेलीवीजन के अध्यक्ष, साझा संगठनो के प्रमुख, सिपाह के प्रमुख, सेना के अधिकारीयो के त्यागपत्रो को स्वीकार करना
  7. त्रिसत्तात्मक शक्ति के बीच मतभेद का समाधान और उनके बीच संबंधो को बनाए रखना
  8. निर्धारण परिषद के माध्यम से प्रणाली की समस्याओ का समाधान
  9. जनता के माध्यम से राष्ट्रपति चुनने के बाद राष्ट्रपति के जनादेश पर हस्ताक्षर करना
  10. देश के हित को ध्यान मे रखते हुए राष्ट्रपति को पद से हटाना
  11. अपराधीयो की सज़ा मे कमी या क्षमा करना[२४]
  12. प्रणाली के हित निर्धारण परिषद के सचिव, अध्यक्ष और सदस्यो की नियुक्ति[२५]

संविधान के अनुच्छेद 57 के अनुसार, त्रिसत्तात्मक शक्तियो को चाहिए कि अपने-अपने कार्यों का निर्वहन सर्वोच्च नेता की निगरानी में करे।[२६] संविधान के अनुच्छेद 5, 107 और 110 भी नेतृत्व की शर्तों और अधिकारों का उल्लेख करती हैं।[२७] अनुच्छेद 110 के अनुसार, नेता अपने कुछ कर्तव्यों और अधिकारों को किसी अन्य व्यक्ति को सौंप सकता है।[२८]

चयन और निलंबन का तरीक़ा

मूल क़ानून के अनुसार, चयन, अदपस्थ और नेतृत्व पर नज़र रखना नेतृत्व के विशेषज्ञो की परिषद का काम है।[२९]

चयन

कहा गया है कि जनता द्वारा सर्वोच्च नेता की शर्तो को पहचानना कठिन है, सर्वोच्च नेता का चयन सीधे जनता की राय से नही होता, बल्कि योग्य और विशेषज्ञो (नेतृत्व के विशेषज्ञो की परिषद के प्रतिनिधियो) इंडायरेक्ट रूप से होता है।[३०] यह बात मूल क़ानून मे वर्णित है और उसके अनुसार सर्वोच्च नेता का चयन जनता के माध्य से चुने हुए विशेषज्ञो के माध्यम से होता है।[३१] मूल क़ानून की धारा 5 और 109 मे वर्णित शर्तो की नेतृत्व के विशेषज्ञ सभी शर्तो पर पूरे उतरने वाले न्यायविदो के संबंध मे परामर्श करती है और उनमे से किसी एक जोकि अहकाम, न्यायशास्त्र के विषयो अथवा सियासी और इज्तेमाई या सार्वजनिक प्रसिद्धी रखना या उपरोक्त वर्णित चीज़ो मे से किसी एक चीज़ मे विशेष योग्यता रखने वाले को धारा 109 के अंतर्गत पहचान कर उसको सर्वोच्च नेता चयनित करते है। अन्यथा उनमे से किसी एक को सर्वोच्च नेता के रूप मे परिचित कराते है। विशेषज्ञो के माध्यम सेचयनित सर्वोच्च नेता, विलायत और उसके सभी पहलूओ का भार उसके कांधो पर होता है।[३२]

निलंबन और पदमुक्त करना

अगर नेता सौंपे गए कर्तव्यों को निभाने में असमर्थ हो जाए या नेतृत्व की किसी शर्त को खो दे, तो विशेषज्ञों की सभा उसके बारे में निर्णय लेने और उसे पद से हटाने की जिम्मेदार होती है। इसके अलावा, नेता के स्वर्गवास, त्यागपत्र या पद से हटाए जाने की स्थिति में, यह सभा नए नेता के चयन और उसका परिचय कराने के लिए भी जिम्मेदार होती है।[३३]

अस्थायी नेतृत्व परिषद

ईरान की पहली अस्थायी नेतृत्व परिषद, सय्यद अली ख़ामेनेई की हत्या के बाद, मार्च 2026 ई में।

इस्लामी गणराज्य ईरान के संविधान के अनुच्छेद 111 के अनुसार, नेता की मृत्यु, त्यागपत्र या पद से हटाए जाने की स्थिति में, एक अस्थायी नेतृत्व परिषद गठित की जाती है, जिसमें राष्ट्रपति, न्यायपालिका के प्रमुख और हितों की निर्धारण परिषद द्वारा चुने गए संविधान परिषद का एक न्यायविद शामिल होता हैं। यह परिषद अस्थायी रूप से नेतृत्व के कार्यों का संचालन करती है।[३४] यह परिषद उस स्थिति में भी नेता के कार्यों की ज़िम्मेदारी संभालती है जब वह अस्थायी रूप से अपने कर्तव्यों को निभाने में असमर्थ हो। पहली बार, सय्यद अली ख़ामेनेई की शहादत (28 फ़रवरी 2026 ई) के बाद यह परिषद गठित हुई और 9 मार्च 2026 ई को सय्यद मुज्तबा ख़ामेनेई के चयन तक इसने नेतृत्व के कार्यों को संभाला। इस परिषद के सदस्य तत्कालीन राष्ट्रपति मसऊद पिज़िश्कियान, तत्कालीन न्यायपालिका प्रमुख ग़ुलाम हुसैन मोहसनी एजेई और संविधान परिषद के प्रतिनिधि अली रज़ा आराफ़ी थे।

प्रतिनिधित्व

इमाम ख़ुमैनी की शारीरिक स्थिति को ध्यान मे रखते हुए नेतृत्व के विशेषज्ञो की परिषद ने 9 नवम्बर वर्ष 1985 ईस्वी को हुसैन अली मुंतज़री को इमाम ख़ुमैनी का प्रतिनिधि नियुक्त किया।[३५] इमाम ख़ुमैनी मुंतज़री[३६] को चाहने के बावजूद उन्हे नेतृत्व के लिए उपयुक्त नही मानते थे, लेकिन मुंतज़री के परिचय के बाद विशेषज्ञो की परिषद का सम्मान किया और विरोध नही किया।[३७] प्रणाली के प्रति मुंतज़री का रुख और सय्यद महदी हाशमी को उनके घर मे नियुक्ति इमाम ख़ुमैनी के ओर से उनके लिए खतरे का एहसास और चेतावनी बनी।[३८] मुंतज़री के रूख का निरंतर रहने के कारण अप्रैल 1989 ई मे इमाम ख़ुमैनी ने एक पत्र मे मुंतज़री को नेतृत्व के लिए शरई रूप से अयोग्य घोषित कर दिया और मुंतज़री ने भी पत्र के उत्तर मे प्रतिनिधित्व से त्यागपत्र दे दिया।[३९] उसके बाद प्रतिनिधि का पद समाप्त कर दिया गया।[४०]

फ़ुटनोट

  1. ↑ क़ानून ए असासी जम्हूरे इस्लामी ए ईरान, असल 5
  2. ↑ अमीद ज़नजानी, कुल्लियात हुक़ूक़ असासी, पृष्ठ 276; नौरोज़ी और बाक़री, «بررسی و تحلیل جایگاه رهبری در نظام جمهوری اسلامی ایران», इंक़ेलाब ए इस्लामी त्रैमासिक शोध पत्रिका।
  3. ↑ जवान आरासते, हुक़ूक़ ए असासी जम्हूरे इस्लामी ए ईरान,पृष्ठ 90।
  4. ↑ नौरोज़ी व बाक़री, «بررسی و تحلیل جایگاه رهبری در نظام جمهوری اسلامی ایران», इंक़ेलाब ए इस्लामी त्रैमासिक शोध पत्रिका।
  5. ↑ अमीद ज़नजानी, कुल्लियात हुक़ूक़ असासी, पृष्ठ 194।
  6. ↑ नौरोज़ी व बाक़री, «بررسی و تحلیل جایگاه رهبری در نظام جمهوری اسلامی ایران», इंक़ेलाब ए इस्लामी त्रैमासिक शोध पत्रिका।
  7. ↑ क़ानून ए असासी जम्हूरे इस्लामी ए ईरान, असल 107
  8. ↑ «روایت یک انتخاب»,आयतुल्लाह ख़ामेनेई के कार्यों के संरक्षण और प्रकाशन का कार्यालय।
  9. ↑ «رهبر جدید انقلاب اسلامی توسط مجلس خبرگان رهبری تعیین و معرفی شد», नेतृत्व विशेषज्ञों की सभा का सचिवालय।
  10. ↑ अमीद ज़नजानी, कुल्लियात हुक़ूक़ असासी, पृष्ठ 276।
  11. ↑ अमीद ज़नजानी, कुल्लियात हुक़ूक़ असासी, पृष्ठ 277-280।
  12. ↑ देखें: शेख अंसारी, मकासिब, भाग 3, पृष्ठ 545; मुन्तज़री, देरासात फ़ी विलायत ए फ़क़ीह, भाग 1, पृष्ठ 11; जवादी आमोली, विलायत ए फ़क़ीह विलायत ए फ़ुक़ाहत व अदालत, पृष्ठ 129।
  13. ↑ जवान आरासते, हुक़ूक़ ए असासी जम्हूरे इस्लामी ए ईरान, पृष्ठ 96।
  14. ↑ जवान आरासते, हुक़ूक़ ए असासी जम्हूरे इस्लामी ए ईरान, पृष्ठ 95।
  15. ↑ जवान आरासते, हुक़ूक़ ए असासी जम्हूरे इस्लामी ए ईरान, पृष्ठ 99।
  16. ↑ हुक़ूक़ ए असासी जम्हूरे इस्लामी ए ईरान, पृष्ठ 57।
  17. ↑ क़ानून असासी जम्हूरी इस्लामी ईरान, असल 109।
  18. ↑ क़ानून असासी जम्हूरी इस्लामी ईरान, असल 107।
  19. ↑ हाशमी, हुक़ूक़ असासी जम्हूरी इस्लामी ईरान, भाग 2, पृष्ठ 35।
  20. ↑ «قانون اساسی جمهوری اسلامی ایران», ईरान की इस्लामी सलाहकार सभा के शोध केंद्र की वेबसाइट।
  21. ↑ इमाम ख़ुमैनी, सहीफ़ा नूर, भाग 21, पृष्ठ 371।
  22. ↑ हाशमी, हुक़ूक़ असासी जम्हूरी इस्लामी ईरान, भाग 2, पृष्ठ 46।
  23. ↑ «بازنگری قانون اساسی», इमाम ख़ुमैनी पोर्टल।
  24. ↑ क़ानून असासी जम्हूरी इस्लामी ईरान, असल 110।
  25. ↑ मत्न कामिल क़ानून असासी, पृष्ठ 64, असल 112; मजीदी, आशनाई बा क़ानून असासी, पृष्ठ278।
  26. ↑ अमीद ज़नजानी, कुल्लियात हुक़ूक़ असासी, पृष्ठ 279।
  27. ↑ क़ानून असासी जम्हूरी इस्लामी ईरान, असल 5, 7 और 110।
  28. ↑ क़ानून असासी जम्हूरी इस्लामी ईरान, असल 110।
  29. ↑ क़ानून असासी जम्हूरी इस्लामी ईरान, असल 107 और 110।
  30. ↑ हाशमी, हुक़ूक असासी जम्हूरी इस्लामी ईरान, भाग 2, पृष्ठ 73।
  31. ↑ क़ानून असासी जम्हूरी इस्लामी ईरान, असल 107।
  32. ↑ क़ानून असासी जम्हूरी इस्लामी ईरान, असल 107।
  33. ↑ क़ानून असासी जम्हूरी इस्लामी ईरान, असल 111।
  34. ↑ क़ानून असासी जम्हूरी इस्लामी ईरान, असल 111।
  35. ↑ हाशमी रफ़संजानी, उम्मीद व दिलवापसी, पृष्ठ 318।
  36. ↑ इमाम ख़ुमैनी, सहीफ़ा नूर, भाग 21, पृष्ठ 334।
  37. ↑ इमाम खुमैनी, सहीफ़ा नूर, भाग 21, पृष्ठ 231 और 234।
  38. ↑ इमाम ख़ुमैनी, सहीफ़ा नूर, भाग 20, पृष्ठ 136-138 मुहम्मदी रय शहरी, खातेरेहा, भाग 4, पृष्ठ 89।
  39. ↑ इमाम ख़ुमैनी, सहीफ़ा नूर, भाग 21, पृष्ठ 333 और 334।
  40. ↑ हाशमी रफ़संजानी, उम्मीद व दिलवापसी, पृष्ठ 325।

स्रोत

  • «بازنگری قانون اساسی», (मूल क़ानून की जांच पड़ताल), इमाम ख़ुमैनी पोर्टल, देखे जाने की तारीख 20 फ़रवरी 2026 ई।
  • «روایت یک انتخاب», (चुनाव की एक रिवायत), आयतुल्लाह ख़ामेनई के कार्यो के संपादन एवं प्रकाशन कार्यालय, प्रविष्ट की तारीख 5 जून 2009 ई , देखे जाने की तारीख 20 फ़रवरी 2026 ई।
  • «قانون اساسی جمهوری اسلامی ایران», (इस्लामी गणतंत्र ईरान का संविधान), ईरान की इस्लामी सलाहकार सभा के शोध केंद्र की वेबसाइट, देखे जाने की तारीख़ 25 जुलाई 2026 ईस्वी।
  • अमीद ज़ंजानी, अब्बास अली, कुल्लियात हुक़ूक़ असासी, तेहरान, तेहरान विश्वविद्य़ालय प्रकाशन, 1385 शम्सी।
  • इमाम ख़ुमैनी, सय्यद रुहुल्लाह, सहीफ़ा नूर, तेहरान, इमाम ख़ुमैनी के कार्यो के संपादन एवं प्रकाशन संस्थान 1389 शम्सी।
  • क़ानून असासी जम्हूरी इस्लामी ईरान, तेहरान, संवैधानिक संरक्षक परिषद अनुसंधान केंद्र, 1397 शम्सी।
  • जवादी आमोली, अब्दुल्लाह, विलायत फ़क़ीह, विलायत फ़क़ाहत व अदालत, क़ुम, इस्रा प्रकाशन केंद्र, 1378 शम्सी।
  • जवान आरास्ते, हुसैन, हुक़ूक़ असासी जम्हूरी इस्लामी ईरान, क़ुम, दार अल हदीस, 1399 शम्सी।
  • नौरोज़ी, मुहम्मद जवाद व बाक़री, अली अकबर, «بررسی و تحلیل جایگاه رهبری در نظام جمهوری اسلامی ایران», (ईरान के इस्लामी गणतंत्र की शासन व्यवस्था में नेतृत्व (रहबर) का स्थान: एक विश्लेषण), इंक़ेलाब इस्लामी शोध पत्रिका, क्रमांक 3, शीत ऋतु 2012-2013 ईस्वी।
  • मुंतज़री, हुसैन अली, देरासात फ़ी विलायत अल फ़क़ीह व फ़िक़्ह अल दुवल अल इस्लामीया, क़ुम, इस्लामी सूचना एवं प्रकाशन कार्यालय, 1408 हिजरी।
  • मुहम्मदी रय शहरी, मुहम्मद, खातेरेहा, तेहरान, इंक़ेलाब इस्लामी दस्तावेज़ केंद्र, 1388 शम्सी।
  • शेख अंसारी, मुर्तज़ा, मकासिब, क़ुम, शेख आज़म अंसारी कांफ़्रेंस, 1415 हिजरी।
  • हाशमी रफ़संजानी, अकबर, कारनामे व ख़ातेरात, साल 1364, उम्मीद व दिलवापसी (सारा लाहूती के देख रेख मे) तेहरान, मआरिफ़ इंक़ेलाब प्रकाशन कार्यालय, 1387 शम्सी।
  • हाशमी, सय्यद मुहम्मद, हुक़ूक़ असासी जम्हूरी इस्लामी ईरान, तेहरान, मीज़ान प्रकाशन, 1385 शम्सी।
  • «رهبر جدید انقلاب اسلامی توسط مجلس خبرگان رهبری تعیین و معرفی شد», (इस्लामी क्रांति के नए नेता को नेतृत्व विशेषज्ञों की सभा द्वारा निर्धारित और पेश किया गया।), नेतृत्व विशेषज्ञों की सभा का सचिवालय, प्रविष्टि की तारीख: 9 मार्च 2026 ईस्वी, देखे जाने की तारीख़: 1 अप्रैल 2026 ईस्वी।