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ग़िना (किताब)

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ग़िना
अन्य नामदर्सनामे ग़िना व मौसीक़ी, किताब ग़िना व मौसीक़ी
लेखकसय्यद अली हुसैनी ख़ामेनेई
विषयग़िना और मौसीक़ी
शैलीउच्च न्यायशास्त्र पाठ
भाषाफ़ारसी
खंड संख्याएक खंड में
प्रकाशकइंक़ेलाबे इस्लामी प्रकाशन
प्रकाशन स्थानतेहरान
प्रकाशन तिथिवसंत 2019 ईस्वी
संस्करणपहला
प्रकाशन संख्या3000


अन्य उपयोगो के लिए, ग़िना (अस्पषटीकरण) देखे।

ग़िना या दर्सनामे ग़िना व मौसीक़ी के विषय पर आयतुल्लाह सय्यद अली ख़ामेनई द्वारा इस्लामी न्याशास्त्र के उच्च पाठयक्रम मे पढ़ाई गई कक्षाओ का पाठ है। इस किताब का पाठ 24 नवम्बर वर्ष 2008 ई से लेकर 26 जनवरी वर्ष 2010 ई तक पढ़ाया गया है। इस किताब मे ग़िना से संबंधित हदीसों को मुख्य बिंदु बनाकर, ग़िना और हराम संगीत की अवधारणा को स्पष्ट किया गया है, और उक्त हदीसों और न्यायविदों के विचारो की समीक्षा की गई है। इसके अलावा इस विषय से संबंधित 48 प्रश्नो का उत्तर दिया गया है।

आयतुल्लाह सय्यद अली ख़ामेनई के दृष्टिकोण के अनुसार इस किताब मे, ग़िना अपने आप मे हराम नही है; बल्कि इसके हराम होने की कसौटी इसका लह्वी (व्यर्थ) होना, गमुराह करना और अल्लाह के मार्ग से भटकाना है। हराम संगीत का मानदंड भी माहौल को धर्म मे लापरवाही और पाप की ओर ले जाना है।

यह किताब पहली बार 2020 ई मे फ़ारसी भाषा मे इंक़ेलाब इस्लामी संस्कृति अनुसंधान संस्था द्वारा प्रकाशित हुई थी।

लेखक

आयतुल्लाह सय्यद अली ख़ामेनई इस्लामी गणराज्य ईरान के सर्वोच्च नेता और शिया मरजा ए तक़लीद है।[] उन्होने वर्ष 1990 ई मे इस्लामी न्यायशास्त्र पर उच्च पाठयक्रम का शिक्षण आरम्भ किया और जेहाद, क़िसास, मकासिब ए मोहर्रमा तथा मुसाफ़िर की नमाज़ के अध्यायो को पढ़ाया।[]

किताब की सामग्री

ग़िना और संगीत पर पाठयपुस्तक यह आयतुल्लाह ख़ामेनई के इस्लामी न्यायशास्त्र के उच्च पाठयक्रम मे पढ़ाए गई 75 कक्षाओ की संरचित पाठय सामग्री है जो 24 नम्बर वर्ष 2008 ई से 26 जनवरी वर्ष 2010 ई तक पढ़ाई गई थी।[] यह किताब ग़िना और हराम संगीत की अवधारणा और इसके विभिन्न पहलुओ की पड़ताल करती है।[] हदीसों की समीक्षा के साथ साथ शिया न्यायविदों की किताबो और विचारो का भी हवाला दिया गया है।[] किताब के अंत मे नृत्य के मुद्दे की भी पड़ताल की गई है।[]

रज़ा मुख़्तारी के अनुसार, इस पाठयपुस्तक के स्रोतो मे से एक, मोहसिन सादेक़ी और रज़ा मुख्तारी द्वारा लिखित चार खंडो वाला ग्रंथ (ग़िना, संगीत) है। आयतुल्लाह ख़ामेनई के इस्लामी न्यायशास्त्र के उच्च पाठयक्रम का केंद्र शेख अंसारी की किताब मकासिब थी; लेकिन जब ग़िना पर चर्चा का समय आया, तो शेख़ अंसारी की मकासिब को एक तरफ़ रख दिया और (ग़िना, संगीत) किताब को अपने व्याख्यान का केंद्र बिंदु बनाया। उन्होने इस किताब की सभी रिवायतो की सनद और पाठ दोनो के लिहाज़ से विश्लेषण किया, और साथ ही, उन्होने दूसरे भागो मे उपस्थित न्यायविदो के शोधो पर भी, मौक़े के लिहाज़ से चर्चा की।[] रिवायतो की दलालत और सनद तथा न्यायविदों के विचारो के विश्लेषण के अलावा, ग़िना और संगीत के मुद्दे के ऐतिहासिक कारणो पर भी ध्यान दिया गया है, जो रिवायतों की सही समझ मे मदद करता है।[]

विषयो को प्रस्तुत करने की विधि

ग़िना किताब मे, ग़िना, संगीत और नृत्य के विषयो पर चर्चा की गई है। आयतुल्लाह ख़ामेनई ने ग़िना पर दिए गए न्यायशास्त्र के उच्च पाठयक्रम मे ग़िना से संबंधित हदीसों को पांच वर्गो मे विभाजित किया फिर उसके बाद लगभग 100 हदीसों का सनदी और दलाली दृष्टिकोण से विशेलेषण किया। यह पांच वर्ग निम्नलिखित हैः

  1. निम्नलिखित आयतों से संबंधि रिवायतें, वो रिवायतें जो आयतो की तफ़सीर से संबंधित है[] (وَاجْتَنِبُوا قَوْلَ الزُّورِ वज्तनेबू क़ूलज़ ज़ूरे[१०] - لَا يَشْهَدُونَ الزُّورَ ला यशहदूनज़ ज़ूरा[११]- لَهْوَ الْحَدِيثِ लह्वल हदीसे[१२]- وَإِذَا مَرُّوا بِاللَّغْوِ مَرُّوا كِرَامًا व इज़ा मर्रूबिल लग़्वे मर्रू केरामा[१३]) और वो रिवायतेंं जो गवाही देने से संबंधित है।[१४]
  2. आयतों से असंबंधित रिवायतें (ग़िना के हराम होने से संबंधित रिवायतें)[१५]
  3. ध्यान लगाकर ग़िना सुनने से संबंधित आयतें[१६]
  4. गायिका द्वारा आय अर्जित करना[१७]
  5. क़ुरआन मे ग़िना से संबंधित रिवायतें[१८]

विशेषताएँ

टेलीवीजन पर संगीत वाद्ययंत्र दिखाना

टेलीवीजन पर इन वाद्ययंत्रो को दिखाना बढ़ावा देना और सामान्य बनाना है। मनोरंजक उद्देश्यो के लिए इन वाद्ययंत्रो का उपयोग ग़ैर-मनोरंजक उपयोग पर हावी है। अर्थात इसका हराम पहलू इसके हलाल पहलू से अधिक है। हम जितना इसको बढ़ावा देंते है, हमने हराम और लहव (फ़ुज़ूल) को बढ़ावा दिया है।[१९]

ग़िना किताब के लिए ऐसी विशेषताएँ बताई गई है, जो इस प्रकार हैः

  • ग़िना से संबंधित रिवायतों (100 रिवायत)[२०], का केंद्र बिंदु कहा गया है कि ग़िना और उससे संबंधित सभी हदीसों की सनद और पाठ दोने का विस्तार से विश्लेषण किया गया है।[२१]
  • हराम संगीत और ग़िना के विभिन्न मानदंडो का परिचय[२२]
  • प्रारंभिक (मुतक़द्दिम) और उत्तरवर्ती (मुताआखिर) शिया न्यायविदों[२३] की राय और विचारो की व्यापक, ग़िना से संबंधित सभी पांडुलिपियो का संदर्भ लेना, इस किताब की विशेषताओ मे गिना जाता है।[२४]
  • हराम संगीत और ग़िना से संबंधित 48 प्रश्नो का उत्तर[२५]
  • पाठयक्रम की संरचना मे किताब को व्यवस्थित करना[२६]

ग़िना पर इस्लामी न्यायशास्त्र के उच्च पाठयक्रम को हौज़ा ए इल्मिया मे ग़िना के विशेष विषय पर सबसे विस्तृत पाठ माना गया है।[२७]

दृष्टिकोण

इस किताब मे आयतुल्लाह ख़ामेनई के कुछ दृष्टिकोण इस प्रकार हैः

ग़िना

  • ग़िना अपने आप मे हराम नही है। इसके हराम होने का मानदंड उसेक लह्व (व्यर्थ) और इंसान को अल्लाह के मार्ग से भटकाना है।[२८]
  • लह्व होने और अल्लाह के मार्ग से भटकाने की पहचान किसी तरीके से वास्ना के उत्तेजित करना, हराम काम की ओर आकर्षित करना, वाजेबात को अंजाम देने से रोकना और धर्म के प्रति लापरवाही पैदा करना, जाना जाता है।[२९]
  • संग्दिध मुद्दे हराम नही है और उनमे असल बराअत जारी की जाएगी।[३०]
हराम संगीत के लिए आम नियम

हर संगीत और आवाज़ – जिस माहौल मे यह प्रसारित हो रही हो- जो धर्म मे लापरवाही, पाप की ओर, वाजिब और शरई तकलीफ़ की अनदेखी करने की ओर ले जाए हराम है।[३१]

संगीत

  • हराम संगीत का मानदंड, माहौल को धर्म मे लापरवाही और पाप की ओर ले जाना है।[३२] संगीत अपने आप मे हराम नही है और जब तक (धर्म मे लापरवाही और पाप की ओर ले जाना) सिद्ध न हो, तो उसके हराम होने पर फ़तवा नही दिया जा सकता।[३३]
  • ग़िना और संगीत के हराम होने का मानदंड उर्फ है।[३४] अगर मुकल्लफ़ शक करे कि उर्फ़ की नज़र मे संगीत (अल्लाह के मार्ग से भटकाने का सबब है) हराम है या नही, असले हिल्लियत के आधार पर उसके हलाल होने का हुक्म है।[३५]

नृत्य

  • नृत्य हराम है और इसके हराम होने का मानदंड उसका फ़ुज़ूल होना है, उस नृत्य के खिलाफ जो महिला अपने पति के लिए करती है और फ़ुज़ूल नही है।[३६]

प्रकाशन

ग़िना किताब वर्ष 2020 ई मे इस्लामी इंक़ेलाब संस्कृति अनुसंधान संस्थान द्वारा 560 पृष्ठों पर आधारित ग़िना किताब वर्ष 2020 ई मे प्रकाशित हुई। इस संस्थान द्वारा प्रकाशित होने वाली आयतुल्लाह ख़ामेनई के न्यायशास्त्र पर उच्च पाठक्रम की पहली रचना है।[३७]

संबंधित लेख

फ़ुटनोट

  1. बहबूदी, शरह इस्म, पृष्ठ 78।
  2. «نگاهی گذرا به زندگینامه‌ی حضرت آیت‌الله‌العظمی سید علی حسینی خامنه‌ای», आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई के कार्यों के संरक्षण और प्रकाशन का कार्यालय।
  3. ख़ामेनई, ग़िना, मुकद्दमा किताब, पृष्ठ ग़ैन (غ)।
  4. ख़ामेनई, ग़िना, मुकद्दमा किताब, पृष्ठ ज़ाद (ض)।
  5. ख़ामेनई, ग़िना, मुकद्दमा किताब, पृष्ठ ज़ाद (ض)।
  6. ख़ामेनई, ग़िना, पृष्ठ 511।
  7. «تلاش بی‌نظیر آیت‌الله خامنه‌ای برای فقه موسیقی مفصل‌ترین درس خارج فقه در موضوع غناء», ऑनलाइन खबर समाचार एजेंसी।
  8. «تلاش بی‌نظیر آیت‌الله خامنه‌ای برای فقه موسیقی مفصل‌ترین درس خارج فقه در موضوع غناء», ऑनलाइन खबर समाचार एजेंसी।
  9. ख़ामेनई, ग़िना, पृष्ठ 8।
  10. सूर ए हज, आयत 30।
  11. सूर ए फ़ुरक़ान, आयत 72।
  12. सूर ए लुक़मान, आयत 6।
  13. सूर ए फ़ुरक़ान, आयत 72।
  14. ख़ामेनई, ग़िना, पृष्ठ 85।
  15. ख़ामेनई, ग़िना, पृष्ठ 99।
  16. ख़ामेनई, ग़िना, पृष्ठ 110।
  17. ख़ामेनई, ग़िना, पृष्ठ 139।
  18. ख़ामेनई, ग़िना, पृष्ठ 155।
  19. ख़ामेनई, ग़िना, पृष्ठ 444।
  20. ख़ामेनई, ग़िना, पृष्ठ 5।
  21. «غنا و موسیقی», इस्लामी इंक़ेलाब प्रकाशन की वेबसाइट।
  22. ख़ामेनई, ग़िना, पृष्ठ 252, पृष्ठ 444।
  23. ख़ामेनई, ग़िना, पृष्ठ ग़ैन (غ)।
  24. «غنا و موسیقی», इस्लामी इंक़ेलाब प्रकाशन की वेबसाइट।
  25. ख़ामेनई, ग़िना, पृष्ठ 444-510।
  26. ख़ामेनई, ग़िना, मुक़द्दमा किताब, पृष्ठ ग़ैन (غ)।
  27. «غنا و موسیقی», इस्लामी इंक़ेलाब प्रकाशन की वेबसाइट।
  28. ख़ामेनई, ग़िना, पृष्ठ 452।
  29. ख़ामेनई, ग़िना, पृष्ठ 444।
  30. ख़ामेनई, ग़िना, पृष्ठ 337।
  31. ख़ामेनई, ग़िना, पृष्ठ 444।
  32. ख़ामेनई, ग़िना, पृष्ठ 444।
  33. ख़ामेनई, ग़िना, पृष्ठ 444।
  34. ख़ामेनई, ग़िना, पृष्ठ 465।
  35. ख़ामेनई, ग़िना, पृष्ठ 466।
  36. ख़ामेनई, ग़िना, पृष्ठ 525।
  37. ख़ामेनई, ग़िना, मुकद्दमा।

स्रोत

  • ख़ामेनई, सय्यद अली, ग़िना, तेहरान, इंक़ेलाब इस्लामी प्रकाशन, पहला संस्करण, 1398 ई।
  • बहबूदी, हिदायतुल्लाह, शरह इस्मी ज़िदगी नामा आयतुल्लाह सय्यद अली ख़ामेनई (1318-1357), तेहरान, राजनीतिक अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान, 1391 शम्सी।
  • «نگاهی گذرا به زندگینامه‌ی حضرت آیت‌الله‌العظمی سید علی حسینی خامنه‌ای» (हज़रत आयतुल्लाहिल उज्मा सय्यद अली हुसैनी ख़ामेनई की जीवनी पर एक नज़र), आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई के कार्यों के संरक्षण और प्रकाशन का कार्यालय, प्रविष्ट की तारीख 21 मार्च 2014 ई, देखे जाने की तारीख 3 जून 2021 ई।
  • «غنا و موسیقی» (गायन और संगीत), इस्लामी इंक़ेलाब प्रकाशन की वेबसाइट, देखे जाने की तारीख 6 जनवरी 2026 ई।
  • «تلاش بی‌نظیر آیت‌الله خامنه‌ای برای فقه موسیقی مفصل‌ترین درس خارج فقه در موضوع غناء», (न्यायशास्त्रीय संगीत के लिए आयतुल्लाह ख़ामेनई का अदित्तीय प्रयास / ग़िना के विषय पर सबसे विस्तृत न्यायशास्त्र पर ख़ारिज पाठयक्रम), ऑनलाइन खबर समाचार एजेंसी, प्रविष्ट की तारीख 23 जुलाई 2019 ई, देखे जाने की तारीख 2 जून 2021 ई।