प्रारूप:पैदल तीर्थयात्रा

पैदल तीर्थयात्रा, को तीर्थयात्रा के मुस्तहब्बात मे माना जाता है, और रिवायतो में अल्लाह के घर और मासूमीन (अ) की दरगाहो, विशेषकर इमाम हुसैन (अ) के हरम तक पैदल जाने पर ज़ोर दिया गया है। शिया विद्वान, उन इमामों के जीवन का ज़िक्र करते हैं जिन्होंने कई बार पैदल हज और तीर्थयात्रा की है, और फ़ुक़्हा इसको अलग सवाब का काम मानते हैं।
तीर्थयात्री अलग-अलग धार्मिक अवसरो पर पैदल चलने की रस्म निभाते हैं; जिसमें इमाम हुसैन (अ) के हरम तक अरबईन वॉक और अर्ध शाबान वॉक में मस्जिद जमकरान तक, इसके अलावा, हर साल इमाम काज़िम (अ), इमाम रज़ा (अ) की शहादत दिवस पर, और सफ़र की 28 तारीख़ को, तीर्थयात्री इमाम अली (अ) के हरम तक पैदल जाते हैं। इमाम रज़ा (अ) की शहादत दिवस पर पैदल यात्रा भी एक और धार्मिक रस्म है जो हर साल ईरान में उनकी शहादत के दिनों में ही होती है।
सवारी से तीर्थयात्रा के बजाय पैदल तीर्थयात्रा के बेहतर होने के कई कारण बताए गए हैं, जिनमें सूर ए तौबा की आयत 120, इमाम हुसैन (अ) की पैदल तीर्थयात्रा की फ़ज़ीलत के बारे में बयान, तीर्थयात्रा के दौरान नंगे पैर रहने की ज़रूरत, पैगंबरों के मक्का के लिए ज़ी तुवा रास्ते पर नंगे पैर चलने की रिपोर्ट, पैदल हज की फ़ज़ीलत के बारे में बयान, और अफ़ज़लुल आमाल आहमज़ोहा का नियम है ।
स्थान और महत्व
पैदल तीर्थयात्रा का मतलब है तीर्थ स्थलों पर पैदल जाना और इसे तीर्थयात्रा के मुस्तहब्बात में से एक माना जाता है।[१] रिवायतों में, अल्लाह के घर[२] और मासूमीन को हरम,[३] विशेषकर ज़ियारते इमाम हुसैन[४] के लिए पैदल जाने पर ज़ोर दिया गया है। कुछ शिया विद्वान भी पैदल तीर्थयात्रा पर जाते थे।[५] कुछ लोग पैदल चलने को ज़ायर के प्रति ज़्यादा विनम्रता और नरमी की निशानी मानते हैं।[६]
शिया न्यायविदो ने इमामों के जीवन का ज़िक्र करते हुए, जो सवारी की संभावना के बावजूद अक्सर हज के लिए पैदल जाते थे,[७] पैदल चलने को एक अलग सवाब वाला काम मानते हैं।[८] हालांकि, यह कहा गया है कि असली फ़ज़ीलत खुद तीर्थयात्रा मे ही निहित है[९] और तीर्थयात्री के लिए बेहतर है कि वह अपना समय तीर्थयात्रा पर ही बिताए।[१०]
कुछ शिया इमामों की दरगाहों तक कई अवसरो पर पैदल तीर्थयात्रा की जाती है। उनमें से, शिया हर साल अरबईन[११] और अर्ध शाबान[१२] पर इमाम हुसैन (अ) के हरम तक पैदल जाते हैं। वे इमाम काज़िम (अ)[१३] और इमाम रज़ा (अ)[१४] के हरम तक भी पैदल जाते हैं। वे 28 सफ़र जोकि पैग़म्बर (स) की वफ़ात के दिन जोकि इमाम अली (अ) की विलायत[१५] के आरम्भ का दिन है इस दिन इमाम अली (अ) के हरम तक पैदल जाते है।[१६]
सवारी के बजाय पैदल तीर्थयात्रा ज़्यादा बेहतर है
सवारी के बजाय पैदल तीर्थयात्रा करना ज़्यादा बेहतर है, इसके कई तर्क बताए गए हैं। उनमें से कुछ ये हैं:
- कर्म की कठिनाई: पैदल तीर्थयात्रा करने में होने वाली कठिनाईयो को देखते हुए, कुछ लोगों ने सूर ए तौबा की आयत न 120 का हवाला देते हुए पैदल तीर्थयात्रा को अधिक पुण्यकारी माना है।[१७] उन्होंने इस अमल को “अफ़ज़लुल-आमाल अह़मज़ोहा” (सबसे श्रेष्ठ कर्म वही हैं जो सबसे अधिक कठिन हों) के सिद्धांत के अंतर्गत माना है।,[१८] जिसका उल्लेख हदीसों में भी किया गया है।[१९]
- इमामो (अ) की तीर्थयात्रा के लिए पैदल जाने के फ़ज़ीलत पर रिवायतें,[२०] विशेषकर इमाम हुसैन (अ) की ज़ियारत से संबंधित रिवायतें।[२१] इनमें से एक रिवायत में इमाम सादिक़ (अ) से वर्णित है कि जो व्यक्ति इमाम हुसैन (अ) की क़ब्र तक पैदल जाता है, उसके हर कदम के बदले उसके लिए हज़ार नेकियां लिखी जाती हैं, उसके हज़ार गुनाह मिटा दिए जाते हैं और उसका दर्जे मे हज़ार गुना वृद्धि की जाती है।[२२]
- हज के लिए पैदल जाने की फ़ज़ीलत पर रिवायतें।[२३] पैग़म्बर (स) की हदीसों में, घोड़े पर सवार लोगों की तुलना में पैदल हाजियों की तुलना चौदहवी के चांद की बेहतरी की तुलना सितारों से की गई है।[२४]
- तीर्थयात्रा पर इमामों (अ) के नंगे पैर होने के इस्तेहबाब पर रिवायतें[२५] और मक्का के हरम में दाखिल होते समय और परिक्रमा के दौरान भी।[२६] इसके अलावा, सत्तर पैग़म्बरों के मक्का के लिए ज़ी तुवा के रास्ते पर नंगे पैर चलने की भी ख़बर है।[२७]
- पैदल हज में इमामों और विद्वानों का जीवन शैली: रिपोर्टों के अनुसार, इमाम हसन (अ) ने 20 से 25 बार हज किया और इमाम हुसैन (अ) ने कई बार पैदल हज किया, कभी-कभी नंगे पैर।[२८] यह भी बताया गया है कि इमाम सज्जाद (अ) ने मक्का और मदीना के बीच का मार्ग बीस दिनों में तय किया था।[२९] यह बताया गया है कि इमाम सादिक़ (अ) ने अपने साथियों के लिए दुआ की जो पैदल मक्का जा रहे थे।[३०] कुछ रिवायतों के अनुसार, इमाम महदी (अ) ने भी लघुप्तकाल के दौरान हर साल पैदल हज किया।[३१] कुछ विद्वानों के पैदल हज करने की भी सूचना मिली है।
अरबईन पर चलने के फ़ज़ीलत को साबित करने के लिए, अनुष्ठानों का सम्मान, इमाम हुसैन (अ) के लिए शोक और धर्म के प्रचार जैसे कारणों का उल्लेख किया गया है।[३२]
संबंधित लेख
फ़ुटनोट
- ↑ देखेः नजफ़ी, जवाहिर अल कलाम, 1404 हिजरी, भाग 17, पेज 313; शाहरूदी, किताब अल हज, 1402 हिजरी, भाग 1, पेज 414; जमई अज़ नवीसंदेगान, रसाइल अल शआइर अल हुसैनीया, 1441 हिजरी, भाग 3, पेज 110; सनद, अल शआइर अल हुसैनीया, 2014 ई, भाग 3, पेज 163-164।
- ↑ सदूक़, मन ला यहज़ुर अल फ़कीह, 1413 हिजरी, भाग 2, पेज 218; बरक़ी, अल महासिन, 1371 हिजरी, भाग 1, पेज 70।
- ↑ तूसी, तहज़ीब अल अहकाम, 1407 हिजरी, भाग 6, पेज 21; हुर्रे आमोली, वसाइल अल शिया, 1409 हिजरी, भाग 14, पेज 380।
- ↑ इब्ने क़ूलवैह, कामिल अल ज़ियारात, 1398 हिजरी, पेज 132-135; हुर्रे आमोली, वसाइल अल शिया, 1409 हिजरी, भाग 14, पेज439-441।
- ↑ अमीन, मुस्तदरकात आयान अल शिया, 1408 हिजरी, भाग 3, पेज 68; सुबहानी, मौसूआ तबक़ात अल फ़ुक़्हा, 1418 हिजरी, भाग 3, पेज 84।
- ↑ जवादी आमोली, जुरऐई अज़ सहबाए हज, 1386 शम्सी, पेज 43।
- ↑ तूसी, तहज़ीब अल अहकाम, 1407 हिजरी, भाग 5, पेज 13।
- ↑ इब्ने फ़हद हिल्ली, अल मोहज़्ज़ब अल बारेअ, 1407 हिजरी, भाग 2, पेज 127; अल्लामा हिल्ली, मुंतहा अल मतलब, 1412 हिजरी, भाग 10, पेज 30-31।
- ↑ देखेः ज़अफ़रानी, गूने शनासी व दलालत संजी, पेज 32-33।
- ↑ चरा दर अस्र सुरअत हनूज़ पाए प्यादे बे सूए सय्यद अल शोहदा (अ) मी रवीम? हौज़ा न्यूज़ एजेंसी।
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- ↑ इब्ने क़ूलवैह, कामिल अल ज़ियारात, 1398 हिजरी, पेज 133।
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- ↑ फ़ाकेही, अखबार मक्का, 1414 हिजरी, भाग 1, पेज 398।
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- ↑ बरक़ी, अल महासिन, 1371 हिजरी, भाग 1, पेज 68; कुलैनी, अल काफ़ी, 1407 हिजरी, भाग 4, पेज 398, 412।
- ↑ मरअशी, तलख़ीस अल जबीर, 1406 हिजरी, भाग 7, पेज 275।
- ↑ बरक़ी, अल महासिन, 1371 हिजरी, भाग 1, पेज 70; फ़ाकेही, अखबार मक्का, 1414 हिजरी, भाग 1, पेज 397; तबरानी, अल मोअजम अल कबीर, मकतब इब्ने तैमीया, भाग 3, पेज 115।
- ↑ मुफ़ीद, अल इरशाद, 1413 हिजरी, भाग 2, पेज 144; इब्ने शहर आशोब, अल मनाक़िब, अल्लामा, भाग 3, पेज 137।
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- ↑ कुलैनी, अल काफ़ी, 1407 हिजरी, भाग 1, पेज 332; सदूक़, कमालुद्दीन, 1395 हिजरी, भाग 2, पेज 472-473।
- ↑ अंदलीबी, ज़ियारत अरबईन अज़ दीदगाह फ़िक़्ह, फ़रहंग ज़ियारत, पेज 24-27।
स्रोत
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- अंदलीबी, रज़ा, ज़ियारत अरबईन अज़ मंज़र फ़िक़्ह, फ़रहंग ज़ियारत, क्रमांक 27, ताबिस्तान 1395 शम्सी।
- अमीन, हसन, मुस्तदरकात आयान अल शिया, बैरूत, दार अल तआरुफ प्रकाशन, 1408 हिजरी।
- अल्लामा मजलिसी, हसन बिन यूसुफ़, मुंतहा अल मतलिब फ़ी तहक़ीक़ अल मज़ाहिब, मशहद, मजमा अल बोहूस अल इस्लामीया, 1412 हिजरी।
- इब्ने कूलवैह, जाफ़र बिन मुहम्मद, कामिल अल ज़ियारात, नजफ़, दार अल मुर्तज़वी, 1398 हिजरी।
- इब्ने फ़हद हिल्ली, अहमद बिन मुहम्मद, अल मोहज़्ज़ब अल बारेअ फ़ी शरह अल मुख्तसर अल नाफ़ेअ, क़ुम, दफ़्तर इंतेशारात इस्लामी वाबस्ता बे जामेअ मुदर्रेसीन हौज़ा ए इल्मिया क़ुम, 1407 हिजरी।
- इब्ने शहर आशोब, मुहम्मद बिन अली, अल मनाक़िब, क़ुम, अल्लामा प्रकाशन, अप्रकाशित तिथि
- कुलैनी, मुहम्मद बिन याक़ूब, अल काफी, तेहरान, दार अल कुतुब अल इस्लामीया 1407 हिजरी।
- जम्ई अज़ नवीसंदेगान, रसाइल अल शआइर अल हुसैनीया (संकलनकर्ताः मुहम्मद हसून) कुम, दलील मा, 1441 हिजरी।
- जवादी आमोली, अब्दुल्लाह, जुरऐई अज़ सहबाए हज, तेहरान, मशअर, 1386 शम्सी।
- ज़अफ़रानी, हानी, रिवायात ज़ियारत इमाम हुसैन (अ) बा पाए प्यादे, गूने शनासी व दलालत संजी, फसलनामा दानिशहा व आमूज़ेहाए क़ुरआन व हदीस, क्रमांक 13, ताबिस्तान 1400 शम्सी।
- तबरानी, सुलेमान बिन अहमद, अल मोअजम अल कबीर, क़ाहिरा, मकतब इब्ने तैमीया, अप्रकाशित तिथि।
- तूसी, मुहम्मद बिन हसन, अल इस्तिबसार फ़ीमा इखतलफ़ा मिन अल अख़बार, तेहरान, दार अल कुतुब अल इस्लामिया, 1390 हिजरी।
- तूसी, मुहम्मद बिन हसन, तहज़ीब अल अहकाम, तेहरान, दार अल कुतुब अल इस्लामीया, 1407 हिजरी।
- नजफ़ी, मुहम्मद हसन, जवाहिर अल कलाम, बैरुत, दार एहया अल तुरास अल अरबी, 1404 हिजरी।
- फ़ाकेही, मुहम्मद बिन इस्हाक़, अख़बार मक्का फ़ी क़दीम अल दहर व हदीसेही, बैरूत, दार ख़िज़्र, 1414 हिजरी।
- बयहक़ी, अहमद बिन हुसैन, अल सुनन अल कुबरा, बैरूत, दार अल कुतुब अल इल्मिया, 1424 हिजरी।
- बरक़ी, अहमद बिन मुहम्मद बिन ख़ालिद, अल महासिन, क़ुम, दार अल कुतुब अल इस्लामीया, 1371 हिजरी।
- मजलिसी, मुहम्मद बाक़िर, बिहार उल अनवार, बैरूत, अल वफ़ा संस्थान, 1403 हिजरी।
- मरअशी, यूसुफ़, तलख़ीस अल जबीर, बैरुत, दार अल माअरफ़ा, 1406 हिजरी।
- मुफ़ीद, मुहम्मद बिन मुहम्मद, अल इरशाद, क़ुम, शेख मुफ़ीद कांफ़्रेस, 1413 हिजरी।
- शाहरूदी, सय्यद मुहम्मद, किताब अल हज, क़ुम, अंसारियान संस्थान, 1402 हिजरी।
- सदूक़, मुहम्मद बिन अली, कमालुद्दीन, तेहरान, इस्लामीया, 1395 हिजरी।
- सदूक़, मुहम्मद बिन अली, मन ला यहज़ुर अल फ़क़ीह, क़ुम, दफ़्तर इंतेशारात इस्लामी वाबसते बे जामेअ मुदर्रेसीन हौज़ा ए इल्मिया क़ुम, 1413 हिजरी।
- सनद, मुहम्मद, अल शआइर अल हुसैनीया, क़ुम, दार अल ग़दीर, 2014 ई।
- सय्यद रज़ी, नहजुल बलाग़ा, संशोधन अज़ीजुल्लाह अतारुदी, क़ुम, नहज़ुल बलाग़ा संस्थान, 1414 हिजरी।
- सुबहानी, जाफ़र, मोसूआ तबक़ात अल फ़ुक़्हा, क़ुम, इमाम सादिक (अ) संस्थान, 1418 हिजरी।
- हाकिम नेशाबूरी, मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह, अल मुस्तद्रक अला अल सहीहैन, बैरूत, दार अल कुतुब अल इल्मिया, 1411 हिजरी।
- हुर्रे आमोली, मुहम्मद बिन हसन, वसाइल अल शिया, क़ुम, मोअस्सेसा आले अल बैत (अ), 1409 हिजरी।