मुहम्मद जवाद बलाग़ी नजफ़ी

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मुहम्मद जवाद बलाग़ी
जन्म तिथिवर्ष 1282 हिजरी
मृत्यु तिथिवर्ष 1352 हिजरी
मृत्यु का शहरनजफ़
समाधि स्थलइमाम अली (अ) का रौज़ा
गुरूशेख़ मुहम्मद ताहा नजफ़, आग़ा रज़ा हमदानी नजफ़ी, आखुंद मुल्ला मुहम्मद काज़िम ख़ोरासानी, मिर्ज़ा मुहम्मद तक़ी शिराज़ी
शिष्यसय्यद मुहम्मद हादी मीलानी
संकलनआलाउर रहमान फ़ी तफ़सीर अल-क़ुरआन, अल रेहला अल मदरसिया या अल मदरसा अल सय्यारा, अल होदा एला दीन अल मुस्तफ़ा, अल तौहीद अल तस्लीस, अआजीब अल अकाज़ीब...
राजनीतिकइराक़ी स्वतंत्रता आंदोलन में भागीदारी


मोहम्मद जवाद बलाग़ी नजफ़ी (अरबी: محمد جواد البلاغي) (1282-1352 हिजरी) शिया विद्वानों में से एक हैं जिन्होंने यहूदियों, ईसाइयों, बहाईयों और वहाबियों के खिलाफ़ इस्लाम और शियों की रक्षा के उद्देश्य से कई रचनाएँ लिखीं हैं, क़ुरआन की व्याख्या और न्यायशास्त्र पर भी रचनाएँ लिखीं हैं। बलाग़ी ने मिर्जा मोहम्मद तक़ी शीराज़ी और आखुंद ख़ोरासानी के अधीन अध्ययन किया है।

बलाग़ी को नजफ़ में आधुनिक धर्मशास्त्र का संस्थापक माना जाता है। सय्यद मोहम्मद हादी मीलानी और सय्यद अबुल क़ासिम ख़ूई सहित नजफ़ और क़ुम के कुछ अन्य मराजेए तक़लीद को उनके धार्मिक स्कूल के छात्रों के रूप में पेश किया गया है।

बलाग़ी फ़ारसी, अरबी, अंग्रेजी और हिब्रू भाषाओं से परिचित हैं। अपनी वैज्ञानिक गतिविधि के अलावा, उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ़ इराक़ी लोगों के स्वतंत्रता संग्राम में भी भाग लिया है।

आलाउर रहमान, अल-तौहीद वल-तसलीस और अनवार अल-हुदा उनकी रचनाओं में से हैं।

जीवनी

मोहम्मद जवाद बिन हसन बिन तालिब बलाग़ी का जन्म 1282 हिजरी में नजफ़ में हुआ था।[१] बलाग़ी परिवार नजफ़ में सबसे पुराने शिया विद्वान परिवारों में से एक था, और तनक़ीह अल-मक़ाल पुस्तक के लेखक अब्दुल्लाह मामक़ानी इस परिवार के प्रसिद्ध सदस्यों में से एक हैं।[२]

बलाग़ी ने अपनी पढ़ाई नजफ़ में शुरू की और 24 साल की उम्र में, वह 1306 हिजरी में काज़मैन गए और 6 साल बाद नजफ़ लौट आए। 1326 हिजरी में, वह सामर्रा चले गए और दस वर्षों तक मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी शीराज़ी के अधीन अध्ययन किया। फिर वह काज़मैन गए और दो साल बाद नजफ़ लौट आए।[३]

बलाग़ी ने सैय्यद मूसा काज़ेमी जज़ायेरी की बेटी से शादी की।[४]

वफ़ात

बलाग़ी का देहांत, 22 शाबान 1352 हिजरी, रविवार की रात को नजफ़ में हुआ और उन्हें अमीरुल मोमिनीन (अ) के रौज़ा में दफ़्न किया गया।[५]

शिक्षा एवं कार्य

नजफ़ में, मोहम्मद जवाद बलाग़ी ने मिस्बाह अल-फ़कीह पुस्तक के लेखक हाज आग़ा रजा हमदानी और शवारेअ अल-इस्लाम फ़ी शरहे शरायेए अल इस्लाम पुस्तक के लेखक सैय्यद मोहम्मद हिंदी की न्यायशास्त्र कक्षाओं में भाग लिया करते थे। इसी तरह से वह आखुंद ख़ुरासानी और शेख़ मुहम्मद ताहा नजफ़, इतक़ान अल-मक़ाल फ़ि अहवाल अल-रिजाल पुस्तक के लेखक के छात्रों में से भी थे।[६] सामर्रा में प्रवास के बाद, बलाग़ी मिर्ज़ा शीराज़ी के साथ जुड़े रहे और मोहम्मद तक़ी शिराज़ी और सैय्यद मोहम्मद फ़ेशारकी की न्यायशास्त्र की कक्षाओं में भाग लिया करते थे। [७]

बलाग़ी को नजफ़ में आधुनिक धर्मशास्त्र (कलामे जदीद) के संस्थापक के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने ईसाई धर्म की प्रचार व प्रसार गतिविधियों के साथ-साथ धर्म के विरोधियों के प्रचारों के खिलाफ़ भी काम किया था। वह फ़ारसी, अरबी, अंग्रेजी और हिब्रू भाषाओं से परिचित थे। [८] सैय्यद मोहम्मद हादी मिलानी, सैय्यद अब्दुल हुसैन तैयब और नजफ़ और क़ुम[९] के कुछ अन्य मराजेए तक़लीद, जिसमें सय्यद अबुल क़ासिम ख़ूई भी शामिल थे, [१०] को उनके धार्मिक स्कूल के छात्रों में से परिचित दिया गया है। सामर्रा में अपने निवास के वर्षों के दौरान, बलाग़ी उन विद्वानों में से एक थे जो इंग्लैंड के खिलाफ़ इराकी लोगों के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सक्रिय थे।[११] इन संघर्षों की स्थापना मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी शीराज़ी के फ़तवे द्वारा की गई थी।[१२] मोहम्मद जवाद बलाग़ी को मुजाहिद के उपनाम से भी जाना जाता है।[१३]

मौसूआ अल अल्लामा अल बलाग़ी

कार्य एवं रचनाएँ

मुख्य लेख: मोहम्मद जवाद बलाग़ी की रचनाएँ

बलाग़ी ने विभिन्न विषयों पर बहुत सी किताबें लिखी हैं, जिनमें से अधिकांश धर्म शास्त्र के विषय पर और इस्लाम और क़ुरआन की रक्षा में और यहूदी धर्म, ईसाई धर्म, बहाईवाद और वहाबीवाद की मान्यताओं का खंडन करने में लिखी गई हैं। तफ़सीर की किताब आलाउर रहमान फ़ी तफ़सीर अल-क़ुरआन, उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियों में से एक है।[१४] "अल्लामा अल-बलाग़ी इनसाइक्लोपीडिया" नामक उनकी रचनाओं का संग्रह मरकज़े इहयाए तुरासे इस्लामी के शोधकर्ताओं के एक समूह के प्रयासों से 9 खंडों में प्रकाशित हुआ है।[१५] रेज़ा उस्तादी, ने उनकी 60 किताबों की सूची तैयार की है, जिनमें से केवल 22 प्रकाशित हुई हैं; [१६] जिनमें निम्न लिखित किताबें शामिल हैं:

  • आलाउर रहमान, सबसे मूल्यवान शिया तफ़सीरों में से एक है, जिसके परिचय में लेखक ने क़ुरआन के चमत्कारों और पवित्र कुरआन के गैर-विरूपण (तहरीफ़ न होने) के बारे में बयान किया है। बलाग़ी ने यह पुस्तक अपने जीवन के अंतिम वर्षों में लिखी थी और इसलिए इसमें केवल सूरह निसा की आयत 57 तक की व्याख्या की गई है। [१७]
  • अल-तौहीद वल-तसलीस, सीरिया के एक ईसाई के ग्रंथ के जवाब में 56 पेज का एक ग्रंथ।[१८]
  • अआजीब अल-अकाज़ीब, यह किताब इस्लाम धर्म की सच्चाई को साबित करने और ईसाई मिशनरियों के संदेहों का उत्तर देने के उद्देश्य से लिखी गई थी।[१९]
  • अनवार अल-हुदा, इस किताब को ईश्वर के अस्तित्व को साबित करने और भौतिकवादियों को अस्वीकार करने के लिए लिखा गया है। अल-बलाग़ अल-मुबीन किताब भी इसी विषय पर लिखी गई थी। [२०]
  • नसायेह अल-हुदा वल-दीन इला-मन काना मुस्लिमन व सारा बाबियन, यह किताब बहाई संप्रदाय के खिलाफ़ लिखी गई थी।[२१]
  • कविताओं का दीवान, जिसमें बहुत सी कविताएँ और क़सीदे शामिल हैं; जैसे, अबू अली सीना के क़सीदा ऐनिया के जवाब में एक क़सीदा, साथ ही एक सुन्नी विद्वान द्वारा इमाम ज़माना (अ.स.) के अस्तित्व को नकारने के जवाब में एक क़सीदा।[२२] उन्होंने अहले बैत (अ) की प्रशंसा में भी कविताएँ लिखीं हैं।[२३] उन्होंने इमाम हुसैन (अ) के लिए एक शोकगीत लिखा है,[२४] जो निम्नलिखित पक्ति से शुरू होता है:

یا تریب الخدّ فی رمض الطفوف ... لیتنی دونک نهبا للسیوف

ऐ वह कर्बला की गर्म ज़मीन पर जिसका चेहरा मिट्टी से आलूदा हो गया, काश आपकी जगह मैं तलवारों के वारों की जगह पर होता।[२५]

फ़ुटनोट

  1. आग़ा बुज़ुर्ग, तबक़ात आलाम अल-शिया, 1404 हिजरी, खंड 1, पृष्ठ 323।
  2. आग़ा बुज़ुर्ग, तबक़ात आलाम अल-शिया, 1404 हिजरी, खंड 1, पृष्ठ 323।
  3. आग़ा बुज़ुर्ग, तबक़ात आलाम अल-शिया, 1404 हिजरी, खंड 1, पृष्ठ 323।
  4. आग़ा बुज़ुर्ग, तबक़ात आलाम अल-शिया, 1404 हिजरी, खंड 1, पृष्ठ 323।
  5. आग़ा बुज़ुर्ग, तबक़ात आलाम अल-शिया, 1404 हिजरी, खंड 1, पृष्ठ 324।
  6. अक़ीक़ी बख्शाइशी, "शेख़ मोहम्मद जवाद बलाग़ी", पेज 25-26।
  7. अक़ीक़ी बख्शाइशी, "शेख़ मोहम्मद जवाद बलाग़ी", पेज 26।
  8. अक़ीक़ी बख्शाइशी, "शेख़ मोहम्मद जवाद बलाग़ी", पेज 26।
  9. अक़ीक़ी बख्शाइशी, "शेख़ मोहम्मद जवाद बलाग़ी", पेज 27।
  10. याद नामा हज़रत आयतुल्लाह हाज सैय्यद अबुल कासिम ख़ूई, 1372, पृष्ठ 58 और 59।
  11. बलाग़ी, इस्लाम आईने बर्गुज़ीदेह, 1360, पृष्ठ 14।
  12. बलाग़ी, इस्लाम आईने बर्गुज़ीदेह, 1360, पृष्ठ 14।
  13. बलाग़ी, इस्लाम आईने बर्गुज़ीदेह, 1360, पृष्ठ 14।
  14. अंसारी क़ुम्मी, नुजूमे उम्मत (आयतुल्लाहिल उज़मा अल्लामेा हाज शेख़ मोहम्मद जवाद बलाग़ी), 1370, पृष्ठ 51।
  15. शोधकर्ताओं का एक समूह, अल्लामा अल-बलाग़ी इनसाइक्लोपीडिया, ज़ेरे नज़र अली अवसत नातेक़ी और मरकज़े एहयाए आसारे इस्लामी, क़ोम, रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ इस्लामिक साइंसेज एंड कल्चर, 2008।
  16. उस्तादी, "गोशाहाई अज़ ज़िन्दगानी मरहूम शेख़ मोहम्मद जवाद बलाग़ी", पेज 111-118।
  17. उस्तादी, "गोशाहाई अज़ ज़िन्दगानी मरहूम शेख़ मोहम्मद जवाद बलाग़ी", पेज 111।
  18. उस्तादी, "गोशाहाई अज़ ज़िन्दगानी मरहूम शेख़ मोहम्मद जवाद बलाग़ी", पृष्ठ 112।
  19. उस्तादी, "गोशाहाई अज़ ज़िन्दगानी मरहूम शेख़ मोहम्मद जवाद बलाग़ी", पृष्ठ 112।
  20. उस्तादी, "गोशाहाई अज़ ज़िन्दगानी मरहूम शेख़ मोहम्मद जवाद बलाग़ी", पृष्ठ 112।
  21. उस्तादी, "गोशाहाई अज़ ज़िन्दगानी मरहूम शेख़ मोहम्मद जवाद बलाग़ी", पृष्ठ 112।
  22. उस्तादी, "गोशाहाई अज़ ज़िन्दगानी मरहूम शेख़ मोहम्मद जवाद बलाग़ी", पृष्ठ 118।
  23. आग़ा बुज़ुर्ग, तबक़ात आलाम अल-शिया, 1404 एएच, खंड 1, पृष्ठ 324।
  24. गुलशने अबरार, 1385, खंड 2, पृष्ठ 554।
  25. शोधकर्ताओं का एक समूह, अल्लामा अल-बलाग़ी विश्वकोश, 2008, खंड 8, पृष्ठ 102।

स्रोत

  • आग़ा बुज़ुर्ग तेहरानी, ​​तबक़ात आलाम अल शिया क़िस्मिल अव्वल मिनल-जुज़इल-अव्वल (नुक़बा अल बशर फ़ी क़र्निर राबेअ अशर) का पहला अध्याय, तालीक़ा अब्दुल-अज़ीज़ तबताबाई, मशहद, दार अल-मुर्तज़ा, दूसरा संस्करण, 1404 हिजरी।
  • उस्तादी, रेज़ा, "स्वर्गीय शेख़ मोहम्मद जवाद बलाग़ी के जीवन के गोशे", मिशकात पत्रिका में, 261, शरद ऋतु 1361 शम्सी।
  • अंसारी क़ुम्मी, नासीरुद्दीन, नुजूमे उम्मत: आयतुल्लाहिल उज़मा अल्लामा हाज शेख़ मोहम्मद जवाद बलाग़ी, नूर इल्म, नंबर 41, 1370 शम्सी।
  • बलाग़ी नजफ़ी, मोहम्मद जवाद, इस्लाम आईने बर्गुज़ीदा, सैय्यद अहमद सफ़ाई द्वारा अनुवादित, तेहरान, अफ़ाक प्रकाशन, [1360 शम्सी]।
  • शोधकर्ताओं का एक समूह, अल्लामा अल-बलाग़ी इनसाइक्लोपीडिया, ज़ेरे नज़र: अली अवताज़ नातेक़ी| मरकज़े एहयाए आसारे इस्लामी, इस्लामिक विज्ञान और संस्कृति अनुसंधान संस्थान, 2008।
  • अक़ीक़ी बख्शायशी, अब्दुर रहीम, "शेख़ मोहम्मद जवाद बलाग़ी: नजफ़ सेमिनरी में आधुनिक धर्मशास्त्र के संस्थापक", इस्लामिक स्कूल मंथली, नंबर 7, मेहर 1362 शम्सी।
  • क़ुम सेमिनरी के शोधकर्ताओं का एक समूह, गोलशने अबरार, खंड 2, क़ुम, मारूफ़ प्रकाशन, दूसरा संस्करण, 2005।
  • याद नामए हज़रत आयातल्लाहिल उज़मा हाज सैयद अबुल क़ासिम खूई, 1372 शम्सी (अल-ख़ूई इस्लामिक इंस्टीट्यूट की वेबसाइट पर इलेक्ट्रॉनिक संस्करण पर आधारित)।