प्रारूप:दूर से ज़ियारत

दूर से ज़ियारत या ग़ैर-हाज़िरी में ज़ियारत, से आशय मासूमीन (अ) की ज़ियारत से है, जिसमें उनके हरम या मज़ार पर शारीरिक रूप से उपस्थित हुए बिना ज़ियारत की जाती है। शिया रिवायतों में उन लोगों के लिए, जो तक़य्या या यात्रा की कठिनाई के कारण प्रत्यक्ष रूप से ज़ियारत नहीं कर सकते, इसकी सिफ़ारिश की गई है। कुछ ज़ियारतनामे, जैसे ज़ियारत-ए आशूरा, पास से भी और दूर से भी पढ़े जाते हैं, जबकि कुछ, जैसे ज़ियारत-ए हज़रत रसूल (स) अज़ बईद, विशेष रूप से ग़ैर-हाज़िरी में ज़ियारत के लिए उल्लेख किए गए हैं।
दूर से ज़ियारत के लिए कुछ आदाब (शिष्टाचार) बताए गए हैं, जैसे क़ब्र की ओर मुँह करके खड़ा होना, ग़ुस्ल या वुज़ू करना और दो रकअत नमाज़ पढ़ना। इस प्रकार की ज़ियारत के सवाब के बावजूद, प्रत्यक्ष रूप से की जाने वाली ज़ियारत को श्रेष्ठ माना गया है। शिया धार्मिक स्थलों पर कुछ ज़ियारतनामे सामूहिक रूप से और दूर से भी पढ़े जाते हैं। इसके अलावा, कुछ इमामों की ऑनलाइन ज़ियारत की सुविधा भी उपलब्ध है।
स्थान और महत्व
शिया रिवायतों में उन लोगों के लिए, जो तक़य्या या यात्रा की कठिनाई के कारण प्रत्यक्ष रूप से ज़ियारत नहीं कर सकते, दूर से ज़ियारत की सिफ़ारिश की गई है।[१] इसके लिए सवाब भी बताया गया है।[२] कुछ रिवायतों में कुछ मासूमीन (अ) की दूर से की जाने वाली ज़ियारत का सवाब प्रत्यक्ष ज़ियारत के बराबर बताया गया है,[३] हालाँकि प्रत्यक्ष ज़ियारत, जिसमें यात्रा की कठिनाइयों को सहन करना और अल्लाह की धार्मिक निशानियों का सम्मान करना शामिल है, उसका सवाब अधिक बताया गया है।[४]
मस्जिदों और शिया ज़ियारतगाहों में विशेष अवसरों पर कुछ ज़ियारतनामे सामूहिक रूप से और दूर से पढ़े जाते हैं। उदाहरण के रूप में, 28 सफ़र के दिन हज़रत रसूल (स) की दूर से ज़ियारत,[५] आशूरा के दिन ज़ियारत-ए नाहिया मुक़द्दसा[६] और मुहर्रम व सफ़र में ज़ियारत-ए आशूरा पढ़ी जाती है।[७]
कुछ मासूमीन (अ) के पवित्र रौज़ों की ऑनलाइन ज़ियारत की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जो दूर से की जाने वाली ज़ियारत का एक प्रकार है।[८]
दूर से ज़ियारत के शिष्टाचार
इस्लामी रिवायतों में दूर से ज़ियारत के लिए कुछ आदाब और शर्तें बयान हुई हैं। इनमें से कुछ यह हैं कि किसी ऊँची जगह या खुले स्थान पर खड़े होकर मासूम की क़ब्र की ओर मुँह किया जाए,[९] ज़ियारत से पहले ग़ुस्ल या वुज़ू किया जाए,[१०] और ज़ियारत से पहले दो रकअत नमाज़ पढ़ी जाए।[११] अल्लामा मजलिसी ने इन आदाब को जीवित इमाम की ज़ियारत, विशेष रूप से इमाम महदी (अ) की ज़ियारत के लिए भी माना है।[१२] मकारिम शीराज़ी भी दूर से इमामों (अ) की ज़ियारत को किसी भी वाक्य के माध्यम से जायज़ मानते हैं।[१३] इसी तरह कुछ रिवायतों में कुछ मासूमीन के लिए क़ब्र के प्रतीक के रूप में एक नमूना बनाने और उसकी ओर मुँह करके ज़ियारत करने की सिफ़ारिश की गई है।[१४]
दूर से ज़ियारत के ज़ियारतनामे
कुछ रिवायतों के अनुसार, कुछ ज़ियारतनामे विशेष रूप से दूर से ज़ियारत के लिए उल्लेख किए गए हैं, जैसे ज़ियारत-ए हज़रत रसूल (स) अज़ बईद।[१५] कुछ अन्य ज़ियारतनामे ऐसे हैं जिन्हें हरम में भी और दूर से भी पढ़ा जा सकता है।[१६] इनमें शामिल हैं:
- हर नमाज़ के बाद पैग़म्बर ए अकरम (स) की ज़ियारत;[१७]
- सप्ताह के दिनों में आइम्मा (अ) की ज़ियारत;[१८]
- शुक्रवार के दिन मासूमीन (अ) की ज़ियारत;[१९]
- ज़ियारत-ए अमीनुल्लाह;[२०]
- ज़ियारत-ए जामेआ कबीरा;[२१]
- ईद-ए ग़दीर के दिन इमाम अली (अ) की विशेष ज़ियारतें;[२२]
- ज़ियारत-ए आशूरा;[२३]
- शुक्रवार की रातों में इमाम हुसैन (अ) की ज़ियारत;[२४]
- शबे क़द्र की रातों में इमाम हुसैन (अ) की ज़ियारत।[२५]
फ़ुटनोट
- ↑ सदूक़, मन ला यहज़ुरुहुल फ़क़ीह, खंड 2, पृष्ठ 599; मजलिसी, बिहारुल अनवार, खंड 97, पृष्ठ 183।
- ↑ मकारिम शीराज़ी, मफ़ातीह-ए नवीन, पृष्ठ 431।
- ↑ इब्ने क़ूलवैयह, कामिलुज़-ज़ियारात, पृष्ठ 175; मजलिसी, बिहारुल अनवार, खंड 97, पृष्ठ 194।
- ↑ «زیارت از راه دور اهل بیت(ع)», धार्मिक प्रश्नों के उत्तर देने का राष्ट्रीय केंद्र।
- ↑ «قرائت زیارت پیامبر(ص) در روز ۲۸ صفر در سراسر کشور», मेहर समाचार एजेंसी; «قرائت زیارت حضرت رسول(ص) از بعید در حرم بانوی کرامت», हज़रत मासूमा (स) के पवित्र रौज़े का समाचार केंद्र।
- ↑ «قرائت همگانی زیارت ناحیه مقدسه در سراسر کشور», रेडियो एवं टेलीविज़न समाचार एजेंसी।
- ↑ «قرائت زیارت عاشورا با «صد لعن و صد سلام» در حرم مطهر رضوی», मेहर समाचार एजेंसी।
- ↑ «زیارت مجازی حرم امام علی(ع)», अल इमाम अली (अ) वेबसाइट; «فراهم شدن امکان زیارت مجازی حرم مطهر حضرت امام حسین (علیه السّلام) در پایگاه اینترنتی حرم مطهر», अल-अतबतुल हुसैनिया अल-मुक़द्दसा वेबसाइट; «پخش زنده حرم امام رضا(ع)», रज़वी टीवी।
- ↑ हुर्रे आमिली, वसाइलुश शिया, खंड 14, पृष्ठ 577-578।
- ↑ मजलिसी, बिहारुल अनवार, खंड 98, पृष्ठ 366।
- ↑ हुर्रे आमिली, वसाइलुश शिया, खंड 14, पृष्ठ 577-578।
- ↑ मजलिसी, बिहारुल अनवार, खंड 98, पृष्ठ 366।
- ↑ मकारिम शीराज़ी, मफ़ातीह-ए नवीन, पृष्ठ 243।
- ↑ मजलिसी, बिहारुल अनवार, खंड 97, पृष्ठ 183।
- ↑ मजलिसी, बिहारुल अनवार, खंड 97, पृष्ठ 183; मकारिम शीराज़ी, मफ़ातीह-ए नवीन, पृष्ठ 229।
- ↑ सदूक़, मन ला यहज़ुरुहुल फ़क़ीह, खंड 2, पृष्ठ 599; शेख़ अब्बास क़ुम्मी, मफ़ातीहुल जिनान, पृष्ठ 559 और 644-646 और 109 और 645 और 891; मकारिम शीराज़ी, मफ़ातीह-ए नवीन, पृष्ठ 209-260।
- ↑ हुर्रे आमिली, वसाइलुश शिया, खंड 6, पृष्ठ 474।
- ↑ शेख़ अब्बास क़ुम्मी, मफ़ातीहुल जिनान, पृष्ठ 109-121।
- ↑ शेख़ अब्बास क़ुम्मी, मफ़ातीहुल जिनान, पृष्ठ 644-646।
- ↑ शेख़ अब्बास क़ुम्मी, मफ़ातीहुल जिनान, पृष्ठ 559; मकारिम शीराज़ी, मफ़ातीह-ए नवीन, पृष्ठ 260।
- ↑ शेख़ अब्बास क़ुम्मी, मफ़ातीहुल जिनान, पृष्ठ 1075।
- ↑ शेख़ अब्बास क़ुम्मी, मफ़ातीहुल जिनान, पृष्ठ 559।
- ↑ शेख़ अब्बास क़ुम्मी, मफ़ातीहुल जिनान, पृष्ठ 891।
- ↑ सदूक़, मन ला यहज़ुरुहुल फ़क़ीह, खंड 2, पृष्ठ 599।
- ↑ मकारिम शीराज़ी, मफ़ातीह-ए नवीन, पृष्ठ 785।
स्रोत
- «فراهم شدن امکان زیارت مجازی حرم مطهر حضرت امام حسین (علیه السّلام) در پایگاه اینترنتی حرم مطهر», (पवित्र इमाम हुसैन (अ) के रौज़े की ऑनलाइन ज़ियारत की सुविधा), अल-अतबतुल हुसैनिया अल-मुक़द्दसा वेबसाइट, लेख देखने की तारीख़: 2 अक्टूबर 2026 ईस्वी।
- «زیارت مجازی حرم امام علی(ع)», (इमाम अली (अ) के रौज़े की ऑनलाइन ज़ियारत), अल इमाम अली (अ) वेबसाइट, लेख देखने की तारीख़: 2 अक्टूबर 2026 ईस्वी।
- «قرائت زیارت حضرت رسول(ص) از بعید در حرم بانوی کرامت», हज़रत मासूमा (स) के पवित्र रौज़े का समाचार केंद्र, लेख प्रकाशित होने की तारीख़: 27 अक्टूबर 2019 ईस्वी, लेख देखने की तारीख़: 2 अक्टूबर 2026 ईस्वी।
- «پخش زنده حرم امام رضا(ع)», (इमाम रज़ा (अ) के रौज़े का सीधा प्रसारण), रज़वी टीवी, लेख देखने की तारीख़: 2 अक्टूबर 2026 ईस्वी।
- «قرائت همگانی زیارت ناحیه مقدسه در سراسر کشور», रेडियो एवं टेलीविज़न समाचार एजेंसी, लेख प्रकाशित होने की तारीख़: 6 जुलाई 2025 ईस्वी, लेख देखने की तारीख़: 2 अक्टूबर 2026 ईस्वी।
- «قرائت زیارت پیامبر(ص) در روز ۲۸ صفر در سراسر کشور», मेहर समाचार एजेंसी, लेख प्रकाशित होने की तारीख़: 13 सितम्बर 2023 ईस्वी, लेख देखने की तारीख़: 2 अक्टूबर 2026 ईस्वी।
- «قرائت زیارت عاشورا با «صد لعن و صد سلام» در حرم مطهر رضوی», मेहर समाचार एजेंसी, लेख प्रकाशित होने की तारीख़: 5 जुलाई 2025 ईस्वी, लेख देखने की तारीख़: 2 अक्टूबर 2026 ईस्वी।
- «زیارت از راه دور اهل بیت(ع)», (अहले बैत (अ) की दूर से ज़ियारत), धार्मिक प्रश्नों के उत्तर देने का राष्ट्रीय केंद्र, लेख प्रकाशित होने की तारीख़: 18 जून 2012 ईस्वी, लेख देखने की तारीख़: 2 अक्टूबर 2026 ईस्वी।
- इब्ने क़ूलवैयह, जाफ़र बिन मुहम्मद, कामिलुज़-ज़ियारात, नजफ़, दारुल-मुर्तज़विय्या प्रकाशन, 1356 शम्सी।
- क़ुम्मी, अब्बास, मफ़ातीहुल जिनान, क़ुम, शाकिर प्रकाशन, 1384 शम्सी।
- मकारिम शीराज़ी, नासिर, मफ़ातीह-ए नवीन, क़ुम, इमाम अली बिन अबी तालिब (अ) मदरसा, 1390 शम्सी।
- मजलिसी, मुहम्मद बाक़िर, बिहारुल अनवार, अल तबअ व अल नश्र प्रकाशन संस्था, बेरूत, 1410 हिजरी।
- सदूक़, मुहम्मद बिन अली बिन बाबवैयह, किताब मन ला यहज़ुरुहुल फ़क़ीह, क़ुम, क़ुम के धार्मिक विद्वानों की परिषद से संबद्ध इस्लामी प्रकाशन कार्यालय, 1413 हिजरी।
- हुर्रे आमिली, मुहम्मद बिन हसन, वसाइलुश शिया, क़ुम, आले बैत (अ) संस्था, 1409 हिजरी।