गंजीना अल अस्रार
| लेखक | नूरुल्लाह बिन अब्दुल्लाह, 'अम्मान सामानी' के नाम से प्रसिद्ध |
|---|---|
| रचना काल | 1305 हिजरी लगभग 1887-1888 ईस्वी |
| विषय | आशूरा की आध्यात्मिक कविताएँ (इरफ़ानी अशआर) |
| शैली | मसनवी (दोहा/छंदबद्ध काव्य) |
| भाषा | फ़ारसी |
| संशोधन | सय्यद मुहम्मद सआदत-अख़वी, मुहम्मद अली मुजाहेदी, मसऊद नमाज़ी बोरूजर्दी और अन्य। |
| प्रकाशक | इस्लामिया बुकस्टोर, उम्मान सामानी, सोरोश, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रण एवं प्रकाशन कंपनी, मीसम, मौलाना और अन्य। |
| प्रकाशन स्थान | तेहरान, क़ुम, इस्फ़हान, तबरेज़ |
| प्रकाशन तिथि | 14वींं शताब्दी हिजरी के बाद |
गंजीना अल अस्रार, कर्बला की घटना के बारे में मसनवी (दोहा/छंदबद्ध काव्य) के रूप में कविताओं का एक संग्रह है, जिसे अम्मान सामानी (मृत्यु 1322 हिजरी) ने लिखा था। उनकी कविताएँ इमाम हुसैन (अ), हज़रत ज़ैनब (स), और कर्बला के शहीदों जैसे हज़रत अब्बास (अ), अली अकबर (अ), क़ासिम, और हुर्र इब्न यज़ीद रियाही की भूमिका से संबंधित हैं।
अपनी कविताओं में, अम्मान सामानी क़ुरआन की आयतों, अहले बैत (अ) की रिवायतो, रहस्यमयी शब्दों और हाफ़िज़ शिराज़ी, सादी और मौलवी जैसे दूसरे कवियों की कविताओं का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने तरसीअ (संतुलन, शब्दों का वज़नी मिलान), तुलना (समान लय या वज़न) और एहाम (एक शब्द के दो अर्थ) जैसे साहित्यिक तरीकों का प्रयोग किया है।
ऐसा कहा गया है कि गंजीना अल अस्रार में कुछ कमियां हैं, जैसे अरबी शब्दों का अत्यधिक इस्तेमाल और हज़रत क़ासिम (अ) का विवाह और कर्बला में ज़ाफ़र जिन्न की मौजूदगी जैसी घटनाओं को तोड़-मरोड़कर बताया गया है।
गंजीना अल अस्रार ईरान और दूसरे देशों में कई बार प्रकाशित हो चुकी है, और इसका कंटेंट कई किताबों, लेख, थीसिस, थिएटर और सेमिनार का केंद्र और विषय रहा है।
परिचय और महत्व
गंजीना अल अस्रार इमाम हुसैन (अ) और कर्बला की घटना के बारे में कविताओं का एक संग्रह है[१] जिसे जो वर्ष 1305 हिजरी (लगभग 1887- 1888 ईस्वी) मेंं अम्मान समानी द्वारा लिखित और नासेरुद्दीन शाह क़ाजार के दरबार के खाजा सरान के प्रमुख आग़ा सुलेमान ख़ान के प्रोत्साहन से छापा और प्रकाशित किया गया।[२] उनकी कविताएँ मसनवी कविता के रूप में हैं।[३] अम्मान समानी ने अपनी कविताओं के संग्रह का नाम गंजीना अल अस्रार रखा।[४]
एक धार्मिक कवि मुहम्मद अली मुजाहेदी के अनुसार, समानी की कविताएँ सफ़ी अली शाह की ज़ुब्दा अल अस्रार के पैरामीटर और शैली पर आधारित हैं।[५] गंजीना अल अस्रार के संशोधक सादात अख़्वी के अनुसार, पवित्र दरगाहों की तीर्थ यात्रा के दौरान अपनी कविताएँ लिखने के बाद अम्मान समानी से मिर्ज़ा शिराज़ी ने मुलाकात की और उनका सम्मान किया।[६]
गंजीना अल अस्रार के अलग-अलग पहलू, जैसे रहस्यवाद, साहित्य और बलाग़त, कई कॉन्फ्रेंस और सेमिनार का केंद्र रहे हैं; फ़ारसी संस्कृति और साहित्य की तीसरी नेशनल कांफ़्रेंस में, गंजीना अल अस्रार में विचारधारा और बलागत पर दो लेख प्रस्तुत किए गए थे।[७] इस काम के बारे में कई आर्टिकल और थीसिस भी लिखी गई हैं।[८] गंजीना अल अस्रार पर आधारित "बर फ़रस तुंदरू" नामक एक नाटक लिखा गया था और तेहरान के मीलाद टॉवर में दिखाया गया था।[९] इसके अलावा, इस्लामी गणतंत्र ईरान रेडियो और टेलीविज़न पर सय्यद मुस्तफ़ा मूसवी (मृत्यु 2019 ई) ने गंजीना अल अस्रार से मक़तल के कुछ हिस्सों को पढ़ा और दिखाया था।[१०]
ऐसा कहा गया है कि अरबी शब्दों का अत्यधिक उपयोग, हज़रत क़ासिम (अ) का विवाह जैसे विकृत घटनाओं का वर्णन,[११] और अतिरंजित बातें गंजीना अल अस्रार की कमजोरियों में से हैं।[१२]
सामाग्री और बनावट
गंजीना अल अस्रार में अम्मान समानी की लिखी एक प्रस्तावना, 41 खंड[१३] और 830 कविताएँ हैं।[१४] इसकी प्रस्तावना में अल्लाह के बारे में बताया गया है, पैग़म्बर मुहम्मद (स), इमाम अली (अ) और अहले बैत (अ) के गुणों का वर्णन किया गया है, और अम्मान समानी की संक्षिप्त जीवनी और किताब लिखने का कारण का उल्लेख किया गया है।[१५] प्रत्येक खंड के आरम्भ में, इसके विषयों का सारांश गद्य में दिया किया गया है।[१६]
अम्मान समानी की कविताओं की सामग्री में अल्लाह की प्रशंसा, महिमा और गौरवगान,[१७] अल्लाह की सुंदरता और महिमा के लिए प्रेम,[१८] मनुष्य के लिए प्रेम का भरोसा प्रस्तुत करना, मनुष्य की बुद्धि और वासना का पहलू,[१९] मानव स्वभाव और शराफ़त, पूर्ण इंसान और अल्लाह का वली,[२०] इमाम हुसैन (अ) का ईश्वर के प्रति प्रेम,[२१] कर्बला की घटना और उसके कार्यक्रमों का वर्णन,[२२] मनुष्यों के सुख और दुख की व्याख्या करना और उनके उदाहरणों का उल्लेख करना, विशेष रूप से कर्बला की घटना में, जैसे शिम्र,[२३] आदम, नूह, अय्यूब, इब्राहीम, यूनुस, यूसुफ़, याक़ूब, मूसा, ईसा और पैग़म्बर मुहम्मद (स) जैसे पैग़म्बरों और अहले बैत (अ) जैसे इमाम अली (अ), इमाम हसन (अ),[२४] और इमाम हुसैन (अ) की ईश्वरीय परीक्षा,[२५] अम्मान सामानी का इमाम हुसैन (अ) के प्रति प्रेम और समर्पण,[२६] आशूरा की रात को इमाम हुसैन (अ) द्वारा साथियों की परीक्षा लेना,[२७] कर्बला में हुर्र इब्न यज़ीद रियाही की कहानी,[२८] हज़रत अब्बास (अ) की स्थिति और प्रतिष्ठा[२९] और फ़रात नदी से पानी लाने की कहानी,[३०] क़ासिम (अ) की स्थिति और प्रतिष्ठा,[३१] अली अकबर (अ) की स्थिति और प्रतिष्ठा[३२] और उनके जिहाद की कहानी,[३३] इमाम हुसैन (अ) का युद्ध के मैदान में जाना,[३४] हज़रत ज़ैनब (स) की स्थिति और प्रतिष्ठा और कर्बला में उनकी कहानी,[३५] इमाम हुसैन (अ) द्वारा हज़रत ज़ैनब (स) को इमाम सज्जाद (अ) के बारे में सिफ़ारिश,[३६] कर्बला में अली असगर (अ) की कहानी,[३७] ज़ाफ़र जिन्न की कहानी और इमाम हुसैन (अ) से उनकी मदद के लिए अनुमति माँगना,[३८] इमाम हुसैन (अ) का मार्गदर्शन और कर्बला में दुश्मनों को उपदेश,[३९] और दुश्मनों के साथ इमाम हुसैन (अ) की लड़ाई और उनकी शहादत का तरीका[४०] शामिल है।
विशेषताएँ
गंजीना अल अस्रार की बहुत सी विशेषताए बताई गई है; जिनमें शामिल हैं:
- आयतों और रिवायतों का इस्तेमाल: अपनी कविताओं में, उन्होंने क़ुरआन की आयतों[४१] और अलग-अलग अवसरों पर अहले बैत (अ) की रिवायतों का इस्तेमाल किया[४२] और पैग़म्बर मुहम्मद (स) और इमाम अली (अ) के कुछ चमत्कारों और करामात का भी उल्लेख किया, जैसे कि चाँद का दो हिस्सों में बँट जाना और सूरज का वापस पलटना।[४३]
- रहस्यमय कविताओं का वर्णन: अम्मान सामानी अपनी कविताओं को रहस्यमयी अंदाज़ में पेश करते हैं, इसलिए गंजीना अल अस्रार की 830 कविताओ में लगभग 300 रहस्यमयी शब्दों का उल्लेख है।[४४] अस्तित्व की एकता को गंजीना अल अस्रार का मुख्य आधार माना जाता है, जिस पर अम्मान सामानी ने अपनी कविताएँ लिखीं।[४५] मुर्तज़ा मुतह्हरी के अनुसार, अम्मान सामानी ने अपनी कविताओं में कर्बला की घटना की एक रहस्यमय व्याख्या की है।[४६]
- अन्य कवियों की कविताओं का उपयोग: गंजीना अल अस्रार के संशोधक मुहम्मद सादात अख़्वी के अनुसार, अम्मान सामानी ने अपनी कविताओं में अब्दुर रहमान जामी,[४७] वहशी बाफ़क़ी,[४८] हाफ़िज़ शिराज़ी,[४९] सादी,[५०] हिलाली जोगताई,[५१] ख़ाक़ानी,[५२] और मौलवी[५३] जैसी कवियो की कविताओं का इस्तेमाल किया है।
- साहित्यिक उपकरणों का उपयोग: बरात मुहम्मदी का कहना हैं कि सामानी अपनी कविताओं में समरूपता, संतुलन, विभिन्न वाक्य, ध्वनिविज्ञान, पुनरावृत्ति, प्रतिबिंब और संकेत जैसे विभिन्न साहित्यिक उपकरणों का उपयोग करते हैं, और यही वह चीज है जिसने उनके काम को अलग बनाया है।[५४]
- मुनाज़रा प्रारूप का उपयोग: अली रज़ा क़ुरबानपुर का मानना है कि अपनी कविताओं में, अम्मान समानी कर्बला की घटना के लोगों के बीच मुनाज़रा और बातचीत को दर्शाते हैं;[५५] जैसे कि इमाम हुसैन (अ) और हज़रत ज़ैनब (स) के बीच बातचीत,[५६] ज़ाफ़र जिन्न,[५७] और जिब्राईल[५८] के साथ इमाम का मुनाज़रा।
मुद्रण और प्रकाशन की स्थिति

किताब के रूप में प्रकाशित होने के बाद, अम्मान सामानी गंजीना अल अस्रार की मसनवी को कई बार विभिन्न प्रकाशकों द्वारा पुनर्मुद्रित किया गया, जिसमें स्वयं कवि,[५९] अदीब फ़िक़्ह जवाहेरी संस्थान[६०] अंर्तराष्ट्रीय मुद्रण और प्रकाशन,[६१] सरौश,[६२] जम्हूरी,[६३] और उस्वा,[६४] विभिन्न शीर्षकों जैसे गंजीना अल अस्रार, गंजीना अल अस्रार वा कसाइद, और गंजीना अल अस्रार दर मसाइब आले अहमद मुख़्तार (अ) नई प्रकाशित हुई है।
फ़ुटनोट
- ↑ सादात अख़्वी, मुक़द्दमा, गंजीना अल अस्रार मेंं, पृष्ठ 5।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 41-42।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, 1393 शम्सी, पेज 41-42।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, 1393 शम्सी, पेज 42।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार व ग़ज़लयात ए वहदत किरमानशाही, पृष्ठ 18।
- ↑ सादात अख़्वी, मुकद्दमा, दर गंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 7।
- ↑ «مجموعه مقالات سومین گنگره ملی فرهنگ و ادبیات فارسی», सीविलीका साइट।
- ↑ «گنجینه الاسرار», ईरानी वैज्ञानिक सूचना आधार: गंज
- ↑ «اجرای نمایش ”بر فرس تندرو” در برج میلاد تهران», तेहरान की बुर्जे मीलाद की साइट।
- ↑ सादात अख़्वी, मुकद्दमा, दर गंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 13।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 187।
- ↑ मुहम्मदी व क़ुरबानपुर, «تحلیل سبکشناسی و آسیبشناسی دو اثر عرفانی-عاشورایی (آتشکده نیّر تبریزی و گنجینة الاسرار عمان سامانی)», पृष्ठ 194-195।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 35 से 44 तक।
- ↑ मुहम्मदी व क़ुरबानपुर, «تحلیل سبکشناسی و آسیبشناسی دو اثر عرفانی-عاشورایی (آتشکده نیّر تبریزی و گنجینة الاسرار عمان سامانی)», पृष्ठ 186-190।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 35 से 44 तक।
- ↑ मुहम्मदी व क़ुरबानपुर, «تحلیل سبکشناسی و آسیبشناسی دو اثر عرفانی-عاشورایی (آتشکده نیّر تبریزی و گنجینة الاسرار عمان سامانی)», पृष्ठ 186-190।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 35।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 47।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 55।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 63।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 73।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 91-131।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 97।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 107।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 113।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 123।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 131।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 155-161।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 181।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 169-175-183।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 187-195।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 201।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार,पृष्ठ 209-215-225।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 235।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 243-251-259-264।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 271।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 279।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 295-299।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 311।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 319।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 39-55-63-97-211-264।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 36-37-48-85-132-195-289।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 39।
- ↑ मुहम्मदी व क़ुरबानपुर, «تحلیل سبکشناسی و آسیبشناسی دو اثر عرفانی-عاشورایی (آتشکده نیّر تبریزی و گنجینة الاسرار عمان سامانی)», पृष्ठ 186-190।
- ↑ ख़ुदादादी व कहदूई, «تجلّی نظریه وحدت وجود در اشعار عمان سامانی با نگاهی به آرای شمس تبریزی و مولوی», पृष्ठ 112।
- ↑ मुतह्हरी, मज्मूआ आसार शहीद मुताहरी, पृष्ठ 17 और 382।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 37।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 39।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 56-69-73।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 41-43-56-63।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 39।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 161।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 232-272।
- ↑ मुहम्मदी व क़ुरबानपुर, «تحلیل سبکشناسی و آسیبشناسی دو اثر عرفانی-عاشورایی (آتشکده نیّر تبریزی و گنجینة الاسرار عمان سامانی)», पृष्ठ 191।
- ↑ मुहम्मदी व क़ुरबानपुर, «تحلیل سبکشناسی و آسیبشناسی دو اثر عرفانی-عاشورایی (آتشکده نیّر تبریزی و گنجینة الاسرار عمان سامانی)», पृष्ठ 191।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 251।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 299।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, पृष्ठ 319।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, 1393 शम्सी।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार व क़साइद अम्मान सामानी, 1399 शम्सी।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रारः गंजीना अल अस्रार जान, 1393 शम्सी।
- ↑ अम्मान सामानी, कंजीना अल अस्रार, 1375 शम्सी।
- ↑ अम्मान सामानी, दीवान अम्मान सामानी शामिलः गंजीना अल अस्रार, मेराज नामा, क़सीदेहा, गज़लहा, 1378 शम्सी।
- ↑ अम्मान सामानी, गंजीना अल अस्रार व ग़ज़लयात वहदत किरमानशाही, 1383 शम्सी।
स्रोत
- «مجموعه مقالات سومین گنگره ملی فرهنگ و ادبیات فارسی», (तीसरी नेशनल कांग्रेस मे फ़ारसी साहित्य और संस्कृति के लेखो का संग्रह), सिविलीका वेबसाइट, प्रविष्ट की तारीख 26 दिसम्बर 2020 ई, देखे जाने की तारीख 21 फ़रवरी 2024 ई।
- «گنجینه الاسرار», (गंजीना अल अस्रार), ईरानी वैज्ञानिक सूचना डेटाबेस: गंज, देखे जाने की तारीख 21 फ़रवरी 2024 ई। ।
- «اجرای نمایش ”بر فرس تندرو” در برج میلاد تهران», (बुर्जे मीलाड तेहरान मे “बर फर्से तुंदरू” प्रदर्शनी का उद्घाटन), बुर्ज ए मीलाद की साइट तेहरान, प्रविष्ट की तारीख 23 नवम्बर 2013 ई, देखे जाने की तारीख 21 फ़रवरी 2026 ई।
- अम्मान सामानी, नूरुल्लाह, «گنجینة الاسرار», (गंजीना अल अस्रार), तेहरान, सरोश प्रकाशन, 1375 शम्सी।
- अम्मान सामानी, नूरुल्लाह, «دیوان عمان سامانی شامل: گنجینة الاسرار، معراج نامه، قصیدهها، غزلها», (गंजीना अल अस्रार, मेराज नामा, कसीदे और गज़लो पर आधारित अम्मान सामानी की कविताओ का संग्रह), तेहरान, जम्हूरी, 1378 शम्सी।
- अम्मान सामानी, नूरुल्लाह, «گنجینة الاسرار», (गंजीना अल अस्रार), सामान, अम्मान सामानी, 1372 शम्सी।
- अम्मान सामानी, नूरुल्लाह, «گنجینة الاسرار: گنجینه اسرار جان», (गंजीना अल अस्रार: गंजीना अल अस्रार जान), सय्यद मुहम्मद सादात अखवी द्वारा संशोधित और व्याखित, इस्लामी प्रचार संगठन – अंतर्राष्ट्रीय मुद्रण एवं प्रकाशन कंपनी, 1393 शम्सी।
- अम्मान सामानी, नूरुल्लाह, «گنجینة الاسرار و غزلیات وحدت کرمانشاهی», (वहदत किरमानशाही की गंजीना अल अस्रार और गज़ले), मुहम्मद अली मुजाहेदी द्वारा संशोधित, तेहरान, 1383 शम्सी।
- अम्मान सामानी, नूरुल्लाह, «گنجینة الاسرار و قصائد عمان سامانی», (अम्मान सामानी की गंजीना अल अस्रार और क़सीदे), हबीबुल्लाह फ़ज़ाएली द्वारा संशोधित, क़ुम, अदीब फ़िक़्ह जवाहरी संस्थान, 1399 शम्सी।
- अम्मान सामानी, नूरुल्लाह, गंजीना अल अस्रार व ग़ज़लयात ए किरमानशाही, मुहम्मद अली मुजाहेदी द्वारा संशोधित, (परवानेह), तेहरान, उसवा, दूसरा संस्करण, 1383 शम्सी।
- क़ुरबानपूर, मुहम्मद, «جلوههای عاشورایی (گنجینة الاسرار عمان سامانی و دوازده بند محتشم کاشانی)», (आशूराई जलवे (अम्मान सामानी की गंजीना अल अस्रार और मोहतशिम काशानी के बारह बैत), क़ुम, तूबाई मुहब्बत प्रकाशन, 1386 शम्सी।
- ख़ुदादादी, मुहम्मद व मुहम्मद काज़िम कहदूही, «تجلّی نظریه وحدت وجود در اشعار عمان سامانی با نگاهی به آرای شمس تبریزی و مولوی», (शम्स तबरेज़ी और मौलवी की द्ष्टि के साथ अम्मान सामानी की कविता मे अस्तित्व की एकता के सिद्धांत की तजल्ली), रहस्यवादी अध्ययन पत्रिका, क्रमांक 16, 2013 ई।
- मुतह्हरी, मुर्तज़ा, मज्मूआ आसार उस्ताद शहीद मुताहरी, तेहरान-क़ुम, सद्रा, छटा संस्करण, 1382 शम्सी।
- मुहम्मदी बरात और अली रज़ा क़ुरबानपुर, «تحلیل سبکشناسی و آسیبشناسی دو اثر عرفانی-عاشورایی (آتشکده نیّر تبریزی و گنجینة الاسرار عمان سامانی)», (अम्मान सामानी की गंजीना अल अस्रार और आतिशकदे नय्यर तबरेज़ी, आशूराई और रहस्यमय दो रचनाओ का विशलेषण), फ़ारसी साहित्य की शैली-विज्ञान पत्रिका, क्रमांक 8, 2024 ई।
- सादात अख़वी, सय्यद मुहम्मद (मुकद्दमा), दर गंजीना अल अस्रारः गंजीना अस्रार जान, संशोधन और व्याख्या सय्यद मुहम्मद सादात अख़वी, इस्लामी प्रचार संगठन – अंतर्राष्ट्रीय मुद्रण एवं प्रकाशन कंपनी, 1393 शम्सी।