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सूर्यग्रहण

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सूर्यग्रहण या कुसूफ़ एक प्राकृतिक घटना है, जिसे इस्लाम धर्म में ईश्वर की शक्ति की निशानियों में से बताया गया है। इस्लामी न्यायशास्त्र में सूर्यग्रहण होने के साथ ही नमाज़-ए-आयात पढ़ना अनिवार्य है और कुछ न्यायशास्त्रीय स्रोतों में उसकी क़ज़ा के लिए ग़ुस्ल को भी मुस्तहब माना गया है।

सूर्यग्रहण उस समय होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और उसकी छाया पृथ्वी के किसी भाग को ढक लेती है। जाहिलियत के दौर में सूर्यग्रहण को महान व्यक्तियों की मृत्यु या जन्म से जोड़ा जाता था; लेकिन इस्लामी स्रोतों में इस विश्वास को अंधविश्वास में से माना गया है। रिवायतों के अनुसार, इस्लाम के पैग़म्बर (स) के पुत्र इब्राहीम की मृत्यु के साथ सूर्यग्रहण हुआ था। इसके बाद इस्लाम के पैग़म्बर (स) ने इस धारणा को गलत बताया।

धार्मिक मान्यताओं में सूर्यग्रहण

वर्ष 2024 ईस्वी में सूर्यग्रहण।[१]

सूर्यग्रहण या कुसूफ़ एक खगोलीय घटना है, जिसमें चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और उसकी छाया पृथ्वी के किसी भाग को ढक लेती है।[२] सूर्यग्रहण पूर्ण या आंशिक रूप से होता है। पूर्ण सूर्यग्रहण में सूर्य का चक्र पूरी तरह चंद्रमा द्वारा ढक जाता है।[३]

सूर्यग्रहण, ईश्वर की निशानियों में से एक निशानी

शिया की तफ़्सीरी पुस्तकों[४] और अहले-सुन्नत के स्रोतों[५] में सूर्यग्रहण जैसी घटनाओं को ईश्वरीय निशानियों में से माना गया है।

इमाम सज्जाद (अ) ने एक रिवायत में बताया है कि शिया लोग सूर्यग्रहण जैसी घटनाओं के समय अल्लाह की शरण लेते हैं।[६] शेख़ मुफ़ीद ने इमाम मुहम्मद बाक़िर (अ) और इमाम सादिक़ (अ) से एक रिवायत वर्णित की है, जिसके अनुसार सूर्यग्रहण उन घटनाओं में से है जो मनुष्यों को भयभीत करने और उन्हें याद दिलाने का कारण बनती हैं।[७] इस रिवायत में सूर्यग्रहण के समय दुआ और नमाज़ की सिफ़ारिश की गई है।[८]

इमाम बाक़िर (अ.) से वर्णित एक रिवायत में सूर्यग्रहण जैसी प्राकृतिक घटनाओं को क़यामत की निशानियों में गिना गया है और सिफ़ारिश की गई है कि मनुष्य इन्हें देखकर क़यामत को याद करे।[९] इसी आधार पर, कुछ धार्मिक स्रोतों में सूर्यग्रहण को अल्लाह की याद, दुआ और ईश्वरीय शक्ति के सामने मनुष्य की असमर्थता पर ध्यान देने का समय बताया गया है।[१०]

नमाज़-ए-आयात और कुसूफ़ का ग़ुस्ल

इस्लामी न्यायशास्त्र में सूर्यग्रहण के समय नमाज़े आयात पढ़ना अनिवार्य है और न्यायविदों इसके अनिवार्य होने पर सहमत हैं।[११] कुछ रिवायतों में सूर्यग्रहण के समय नमाज़ को अल्लाह की शरण लेने के एक प्रकार के रूप में बताया गया है।[१२]

सूर्यग्रहण की नमाज़-ए-आयात का समय सूर्य के चक्र के ग्रहण होने की शुरुआत से लेकर उसके खुलना शुरू होने[१३] या पूरी तरह खुल जाने[१४] तक है। यदि कुसूफ़ और ख़ुसूफ़ की नमाज़-ए-आयात अपने निर्धारित समय में न पढ़ी जाए, तो उसकी क़ज़ा करना अनिवार्य हो जाता है।[१५] उयून अख़बार अल-रज़ा नामक पुस्तक में इमाम रज़ा (अ) से वर्णित एक रिवायत में सूर्यग्रहण की नमाज़ पढ़ने के कारणों में से एक यह बताया गया है कि पैग़म्बर (स) चाहते थे कि मुसलमान सूर्यग्रहण होने पर अल्लाह की शरण लें।[१६]

कुछ हदीसों में उस व्यक्ति के लिए, जिसने सूर्यग्रहण की नमाज़-ए-आयात अदा न की हो, ग़ुस्ल करने की भी सिफ़ारिश की गई है।[१७] कुछ न्यायविदों ने इन रिवायतों को सहीह माना है।[१८] शिया न्यायविदों के बीच इस ग़ुस्ल के वाजिब या मुस्तहब होने के बारे में मतभेद पाया जाता है।[१९] चौदहवीं शताब्दी के कुछ न्यायविदों ने इस ग़ुस्ल को एहतियाते वाजिब[२०] माना है, जबकि कुछ अन्य ने इसे क़स्दे रजा[२१] के साथ करने की सिफ़ारिश की है।

पैग़म्बर (स.) के पुत्र इब्राहीम की मृत्यु के समय सूर्यग्रहण

शिया की हदीस की पुस्तकों में इमाम मूसा काज़िम (अ)[२२] और अहले-सुन्नत के स्रोतों की कुछ रिपोर्टों में भी, इस्लाम के पैग़म्बर (स) के कम उम्र के पुत्र इब्राहीम की मृत्यु के दिन सूर्यग्रहण होने का उल्लेख मिलता है।[२३] जाहेलीयत के दौर में सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण को महान व्यक्तियों की मृत्यु या जन्म से जोड़ा जाता था।[२४] इन रिपोर्टों के अनुसार, इब्राहीम की मृत्यु के बाद कुछ लोगों ने सूर्यग्रहण को उनकी मृत्यु से संबंधित माना। इस्लाम के पैग़म्बर (स) ने घोषणा की कि सूर्य और चंद्रमा अल्लाह की निशानियों में से हैं और उनके ग्रहण का लोगों की मृत्यु या जीवन से कोई संबंध नहीं है। साथ ही उन्होंने मुसलमानों को सूर्यग्रहण के समय नमाज़ पढ़ने का आह्वान किया।[२५] यह रिपोर्ट कुछ अंतर के साथ अहले-सुन्नत के स्रोतों में भी वर्णित हुई है।[२६]

कुछ मुस्लिम विचारकों, जिनमें जाफ़र सुब्हानी[२७] और मुर्तज़ा मुतह्हरी[२८] शामिल हैं, ने पैग़म्बर (स) के इस रुख़ को अंधविश्वासी मान्यताओं का विरोध करने और लोगों की आम मान्यताओं का लाभ उठाने से बचने का उदाहरण माना है।

फ़ुटनोट

  1. ↑ «بهترین عکس ها از کسوف», मशरिक़ समाचार।
  2. ↑ «خورشیدگرفتگی یا کسوف چیست؟», एस्पाश (ईरान का सबसे बड़ा अंतरिक्ष समाचार केंद्र)।
  3. ↑ «خورشیدگرفتگی یا کسوف چیست؟», एस्पाश (ईरान का सबसे बड़ा अंतरिक्ष समाचार केंद्र)।
  4. ↑ शरीफ़ लाहीजी, तफ़्सीरे शरीफ़ लाहीजी, खंड 2, पृष्ठ 566; क़ुम्मी, तफ़्सीर अल-क़ुम्मी, खंड 1, पृष्ठ 358।
  5. ↑ तबारानी, अल-तफ़्सीर अल-कबीर, खंड 3, पृष्ठ 8।
  6. ↑ शेख़ सदूक़, मन ला यहज़रोहुल-फ़क़ीह, खंड 1, पृष्ठ 540।
  7. ↑ शेख़ मुफ़ीद, अल-मुक़्निआ, पृष्ठ 208।
  8. ↑ शेख़ मुफ़ीद, अल-मुक़्निआ, पृष्ठ 208।
  9. ↑ फ़त्ताल नैशापूरी, रौज़ा अल-वाइज़ीन, खंड 2, पृष्ठ 484।
  10. ↑ «آیات الهی: کسوف و خسوف: خورشید گرفتگی و ماه گرفتگی؛ کیفیت خواندن», पोर्टल अनहार।
  11. ↑ बनी फ़ज़्ल, मदारिके तहरीर अल-वसीला, खंड 2, पृष्ठ 97।
  12. ↑ शेख़ मुफ़ीद, अल-मुक़्निआ, पृष्ठ 208।
  13. ↑ इमाम ख़ुमैनी, तहरीर अल-वसीला, खंड 1, पृष्ठ 192।
  14. ↑ नजफ़ी, जवाहिर अल-कलाम, खंड 11, पृष्ठ 409।
  15. ↑ अल्लामा हिल्ली, तब्सिरा अल-मुतअल्लिमीन, पृष्ठ 48।
  16. ↑ शेख़ सदूक़, उयून अख़बार अर-रज़ा (अ.), खंड 2, पृष्ठ 115।
  17. ↑ इब्ने अबी जम्हूर, अवाली अल-लआली, खंड 2, पृष्ठ 174।
  18. ↑ ख़ूई, मूसूआ अल-इमाम अल-ख़ूई, खंड 10, पृष्ठ 63।
  19. ↑ अल्लामा हिल्ली, मुख़्तलिफ़ अल शिया, खंड 1, पृष्ठ 317।
  20. ↑ «غسل / غسل‌های واجب», आयतुल्लाह सीस्तानी की आधिकारिक वेबसाइट।
  21. ↑ «حکم انجام غسل برای قضا شدن نماز آیات به علت ماه گرفتگی», आयतुल्लाह मकारिम शीराज़ी के कार्यालय की सूचना वेबसाइट।
  22. ↑ कुलैनी, अल-काफ़ी, खंड 3, पृष्ठ 208; बर्क़ी, अल-महासिन, खंड 2, पृष्ठ 313।
  23. ↑ मुहम्मदी, «مطالعه تطبیقی گزارش‌های موجود از کسوف درباره زمان درگذشت فرزند پیامبر», पृष्ठ 110।
  24. ↑ क़ुर्तुबी, अल-जामेअ अल-अहकाम अल-क़ुरआन, खंड 15, पृष्ठ 364।
  25. ↑ कुलैनी, अल-काफ़ी, खंड 3, पृष्ठ 208; बर्क़ी, अल-महासिन, खंड 2, पृष्ठ 313।
  26. ↑ बुख़ारी, सहीह बुख़ारी, खंड 2, पृष्ठ 23; बलाज़ोरी, अनसाब अल-अशराफ़, खंड 1, पृष्ठ 452।
  27. ↑ सुब्हानी, फ़ुरूग़े अबदियत, पृष्ठ 52।
  28. ↑ मुतह्हरी, सैरी दर सीरते नबवी, पृष्ठ 121-122; मुतह्हरी, वह़्य व नबूवत, पृष्ठ 138।

स्रोत

  • «آیات الهی: کسوف و خسوف: خورشید گرفتگی و ماه گرفتگی؛ کیفیت خواندن», (आयाते इलाही: कुसूफ़ और ख़ुसूफ़: सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण; नमाज़-ए-आयात पढ़ने की विधि), पोर्टल अनहार, देखने की तारीख़: 11 सितम्बर 2026 ईस्वी।
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  • इमाम ख़ुमैनी, सय्यद रूहुल्लाह, तहरीर अल-वसीला, क़ुम, मतबूआत दारुल-इल्म प्रकाशन, प्रकाशन तारीख़ उपलब्ध नहीं।
  • बुख़ारी, मुहम्मद बिन इस्माईल, अल-जामेअ अल-मुस्नद अस-सहीह अल-मुख़्तसर मिन उमूर अल रसूलिल्लाह(स.) व सुननेही व अय्यामेही (सहीह बुख़ारी), शोधकर्ता: मुहम्मद ज़ुहैर बिन नासिर, बैरूत, दार तौक़ अल नेजात प्रकाशन, पहला संस्करण, 1422 हिजरी।
  • बर्क़ी, अहमद बिन मुहम्मद, अल-महासिन, शोधकर्ता एवं संपादक: जलालुद्दीन मुहद्दिस, क़ुम, दारुल-कुतुबिल-इस्लामिय्या प्रकाशन, दूसरा संस्करण, 1371 शम्सी।
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  • «بهترین عکس ها از کسوف», (कुसूफ़ की बेहतरीन तस्वीरें), मशरिक़ समाचार, लेख प्रकाशित होने की तारीख़: 13 अप्रैल 2024 ईस्वी, देखने की तारीख़: 11 सितम्बर 2026 ईस्वी।
  • «حکم انجام غسل برای قضا شدن نماز آیات به علت ماه گرفتگی», (चंद्रग्रहण के कारण नमाज़-ए-आयात की क़ज़ा होने पर ग़ुस्ल करने का हुक्म), आयतुल्लाह मकारिम शीराज़ी के कार्यालय की सूचना वेबसाइट, देखने की तारीख़: 11 सितम्बर 2026 ईस्वी।
  • «خورشیدگرفتگی یا کسوف چیست؟», (सूर्यग्रहण या कुसूफ़ क्या है?), एस्पाश (ईरान का सबसे बड़ा अंतरिक्ष समाचार केंद्र), लेख प्रकाशित होने की तारीख़: 20 जून 2022 ईस्वी, देखने की तारीख़: 11 सितम्बर 2026 ईस्वी।
  • ख़ूई, सय्यद अबुल क़ासिम, मौसूआ अल-इमाम अल-ख़ूई, क़ुम, इमाम ख़ूई की कृतियों के पुनर्जीवन का संस्थान, 1418 हिजरी।
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  • शरीफ़ लाहीजी, मुहम्मद बिन अली, तफ़्सीरे शरीफ़ लाहीजी, शोध: मीर जलालुद्दीन हुसैनी उरमवी (मुहद्दिस), तेहरान, दाद प्रकाशन केंद्र, पहला संस्करण, 1373 शम्सी।
  • शेख़ सदूक़, मुहम्मद बिन अली, उयून अख़बार रज़ा (अ.), शोधकर्ता एवं संपादक: मेहदी लाजवर्दी, तेहरान, जहान प्रकाशन केंद्र, पहला संस्करण, 1378 शम्सी।
  • शेख़ सदूक़, मुहम्मद बिन अली, मन ला यहज़रोहुल फ़क़ीह, शोधकर्ता एवं संपादक: अली अकबर ग़फ़्फ़ारी, क़ुम, इस्लामी प्रकाशन केंद्र, दूसरा संस्करण, 1413 हिजरी।
  • शेख़ मुफ़ीद, मुहम्मद बिन मुहम्मद बिन नोमान, अल-मुक़्निआ, क़ुम, शेख़ मुफ़ीद की सहस्राब्दी का विश्व सम्मेलन, पहला संस्करण, 1413 हिजरी।
  • तबरानी, सुलेमान बिन अहमद, अल-तफ़्सीर अल-कबीर, उर्दुन, दारुल-किताब अस-सक़ाफ़ी प्रकाशन, 2008 ईस्वी।
  • अल्लामा हिल्ली, हसन बिन यूसुफ़, तब्सिरा अल-मुतअल्लिमीन फ़ी अहकाम अल दीन, सुधार: मुहम्मद हादी यूसुफ़ी ग़रवी, तेहरान, मुद्रण और प्रकाशन संस्थान, 1411 हिजरी।
  • अल्लामा हिल्ली, हसन बिन यूसुफ़, मुख़्तलिफ़ अल शिया फ़ी अहकाम अल शरिया, क़ुम, क़ुम के हौज़े इल्मिय्या के मुदर्रिसीन सोसाइटी से संबद्ध इस्लामी प्रकाशन कार्यालय, 1413 हिजरी।
  • «غسل / غسل‌های واجب», (ग़ुस्ल / वाजिब ग़ुस्ल), आयतुल्लाह सीस्तानी की आधिकारिक वेबसाइट, देखने की तारीख़: 11 सितम्बर 2026 ईस्वी।
  • फ़त्ताल नैशापूरी, मुहम्मद बिन अहमद, रौज़ा अल-वाइज़ीन व बसीरत अल-मुतअज़्ज़ीन, क़ुम, रज़ी प्रकाशन संस्थान, पहला संस्करण, 1375 शम्सी।
  • क़ुर्तुबी, मुहम्मद बिन अहमद, अल-जामेअ ले-अहकाम अल-क़ुरआन, तेहरान, नासिर ख़ुस्रो प्रकाशन, पहला संस्करण, 1364 शम्सी।
  • क़ुम्मी, अली बिन इब्राहीम, तफ़्सीर अल-क़ुम्मी, शोधकर्ता एवं संपादक: सय्यद तय्यिब मूसवी जज़ाएरी, क़ुम, दारुल-किताब प्रकाशन, तीसरा संस्करण, 1404 हिजरी।
  • कुलैनी, मुहम्मद बिन याक़ूब, अल-काफ़ी, शोधकर्ता एवं संपादक: अली अकबर ग़फ़्फ़ारी, मुहम्मद आख़ूंदी, तेहरान, दारुल-कुतुब अल-इस्लामिय्या प्रकाशन, चौथा संस्करण, 1407 हिजरी।
  • मुहम्मदी, अर्दशीर, «مطالعه تطبیقی گزارش‌های موجود از کسوف درباره زمان درگذشت فرزند پیامبر», (पैग़म्बर के पुत्र की मृत्यु के समय कुसूफ़ से संबंधित मौजूद रिपोर्टों का तुलनात्मक अध्ययन), तारीख़-ए-तशय्यो शोध पत्रिका, संख्या 10, बहार 1404 शम्सी।
  • मुतह्हरी, मुर्तज़ा, सैरी दर सीरते नबवी, तेहरान, सदरा, 1390 शम्सी।
  • मुतह्हरी, मुर्तज़ा, वह़्य व नबूवत, तेहरान, सदरा, 1389 शम्सी।
  • नजफ़ी, मुहम्मद हसन, जवाहिर अल-कलाम फ़ी शरहे शराए अल-इस्लाम, सुधार: अब्बास क़ूचानी और अली आख़ूंदी, तेहरान, दार इह्याए अल तुरास अल-अरबी प्रकाशन, 1404 हिजरी।
  • याक़ूबी, अहमद बिन अबी याक़ूब, तारीख़ अल-याक़ूबी, बैरूत, दार सादिर प्रकाशन, पहला संस्करण, प्रकाशन तारीख़ उपलब्ध नहीं।