उम्मे अली अल हस्सून

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उम्म अली अल-हस्सून, बिन्तुल हुदा सद्र की शिक्षिका थीं और धार्मिक शिक्षा और हदीस का वर्णन करने की अनुमति रखने वाली (इजाज़ ए रिवायत) महिलाओं में से एक थीं।

ज़हरा, मुहम्मद अली हस्सून की बेटी और शेख़ ज़ुहैर हस्सून की पत्नी, का जन्म नजफ़ में हुआ। अपने पिता की मृत्यु के बाद, वह अपने भाई हाज फ़ाज़िल हस्सून के घर (कूफ़ा, मुहल्ला कंदा) चली गईं। उम्म अली ने अपने भाई के घर में बहुत सी महिलाओं को इस्लामी मान्यताओं का पाठ दिया। उनके पति और चचेरे भाई, शेख़ ज़ुहैर अल-हस्सून ने उनकी शिक्षा पर पूरा ध्यान दिया और उम्म अली ने उनसे न्यायशास्त्र, उसूल, वाक्यविन्यास (अरबी भाषा), बलाग़त (अरबी भाषा), हदीस और दिराया का ज्ञान प्राप्त किया।

ईरानी इस्लामी क्रांति के बाद, शेख ज़ुहैर अल-हस्सून और उम्म अली ईरान में आकर बस गए, और ईरान में उम्म अली की धार्मिक बैठकें अभी भी उनके घर में महिलाओं के लिए आयोजित की जाती थीं। [१]

आयतुल्लाह मरअशी नजफ़ी ने शेख़ ज़ुहैर अल-हस्सून के घर में उम्म अली से एक परीक्षा ली और फिर उन्हें हदीस के वर्णन करने की अनुमति (इजाज़ ए रिवायत) दी। शहीदा बिन्तुल-हुदा सद्र, उम्म अली के छात्रों में से एक थीं, लेकिन उम्म अली बिन्तुल-हुदा के रुतबे के कारण इस ख़बर को प्रकाशित नहीं करना चाहती थी। [२]

फ़ुटनोट

  1. ग़रवी नायिनी, मुहद्देसाने शिया, 2006, पृष्ठ 92; अल-हस्सून, आलाम अल नेसा अल मोमिनात, 1411 हिजरी, पृष्ठ 172।
  2. ग़रवी नायिनी, मुहद्देसाने शिया, 2006, पृष्ठ 92; अल-हस्सून, आलाम अल नेसा अल मोमिनात, 1411 हिजरी, पृष्ठ 172।

स्रोत

  • अल-हस्सून, मोहम्मद और मशकूर, उम्म अली, आलाम अल नेसा अल मोमिनात, तेहरान, उस्वा प्रकाशन, 1411 हिजरी।
  • ग़रवी नायिनी, नहला, मुहद्देसाने शिया, तेहरान, तरबियते मुदर्रिस विश्वविद्यालय, दूसरा संस्करण, 2006।