अब्दुल्लाह बिन आमिर

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अब्दुल्लाह बिन आमिर बिन कुरैज़
जन्मदिनवर्ष 4 हिजरी
जन्म स्थानमक्का
जनजातिक़ुरैश जनजाति
प्रसिद्ध रिश्तेदारउस्मान बिन अफ़्फ़ान
मृत्यु की तिथि और स्थानवर्ष 59 हिजरी, मक्का
दफ़्न स्थानअरफ़ात
युद्धों में भागीदारीजमल की लड़ाई, सिफ़्फ़ीन की लड़ाई में इमाम अली (अ) के ख़िलाफ़, ईरान के क्षेत्रों पर विजय
अन्य गतिविधियांबसरा का गवर्नर, मुआविया के सेना का कमांडर

अब्दुल्लाह बिन आमिर बिन कुरैज़ (अरबी: عبد الله بن عامر بن كُرَيز) (59-4 हिजरी) इमाम अली (अ) के विरोधियों में से एक था जिसने तल्हा और ज़ुबैर के मार्गदर्शन में जमल की लड़ाई में इमाम अली (अ) के विरुद्ध लड़ाई लड़ी थी। इसी तरह वह सफ़्फ़ीन की लड़ाई में मुआविया की सेना में भी मौजूद था।

इब्ने आमिर क़ुरैश जनजाति से था और उस्मान बिन अफ़्फ़ान (तीसरे ख़लीफ़ा) का ममेरा भाई था। वर्ष 29 हिजरी में उस्मान ने उसे बसरा का गवर्नर बना दिया। इब्ने आमिर ने इस शहर में निर्माण कार्य किए और उस्मान के आदेश पर ईरान पर हमला किया। इमाम हसन (अ) और मुआविया के बीच टकराव के दौरान वह मुआविया की सेना के कमांडरों में से एक था। मुआविया ने ख़िलाफ़त पर पहुँचने के बाद उसे फिर से बसरा की हुकूमत दे दी। अब्दुल्लाह की मृत्यु वर्ष 59 हिजरी में मक्का में हुई और उसे अरफ़ात में दफ़नाया गया।

वंश और जन्म

अब्दुल्लाह बिन आमिर बिन कुरैज़ कुरैश जनजाति से था और उस्मान बिन अफ़्फ़ान का ममेरा भाई था।[१] उसकी मां दजाजा थी, जो उस्मा सलमा की बेटी थी, और उसके पिता का नाम आमिर था, जो इस्लाम के पैग़म्बर (स) के चचेरे भाई थे, जो मक्का की विजय में मुसलमान बन गए।[२]

इब्ने आमिर का जन्म हिजरी के चौथे वर्ष में मक्का में हुआ था। जब पैग़म्बर (स) उमरा के लिए मक्का गए, तो वह तीन साल के थे, और पैग़म्बर (स) ने उसके होंठों पर अपना हाथ रखा[३] और उसके लिए दुआ की: إنّی لَأرجو أن یَکون مَسقِیّاً "इन्नी ल अर्जू अन यकूना मस्कियन"; मुझे आशा है कि सैराब हो गया होगा।[४] इब्ने क़ुतैबा ने पैग़म्बर की दुआ को इस प्रकार उद्धृत किया है: إنّی لَأرجو أن یَکون مَسقِیّاً "इन्नी ल अर्जू अन यकूना मस्कियन"; मुझे आशा है कि वह परहीज़गार हो।[५]

इब्ने आमिर के बारह बेटे और छह बेटियाँ थीं।[६] उसका अब्दुर्रहमान नाम का एक बेटा था। इसलिए, उसकी उपाधि अबू अब्दुर्रहमान था।[७]

बसरा की गवर्नरी

तीसरे ख़लीफ़ा उस्मान बिन अफ्फान ने वर्ष 29 हिजरी में अबू मूसा अशअरी को बसरा के गवर्नर पद से हटा दिया और 25 साल की उम्र में अब्दुल्लाह बिन आमिर को बसरा का गवर्नर बना दिया।[८] उस्मान ने अबू मूसा को लिखा: "मैंने आपको अक्षमता या विश्वासघात के कारण नहीं हटाया, और मैं आपके पक्ष से अवगत हूं, लेकिन मैं अब्दुल्लाह बिन आमिर के साथ अपने रिश्ते का सम्मान करना चाहता था, और मैंने उसे आपको तीस हज़ार दिरहम देने का आदेश दिया है"।[९]

निर्माण कार्य

अब्दुल्लाह बिन आमिर ने बसरा के एक हिस्से में कुछ घर खरीदे, उन्हें ध्वस्त कर दिया और उनके स्थान पर एक बाज़ार बनाया।[१०] इसके अलावा, बसरा के पूर्व में एक नदी जिसका नाम उसकी मां (उम्म अब्दुल्लाह) के नाम पर रखा गया[११] और दो नदियों जिसका नाम " नहर अल-अबला" और "नहर अल-असावरह" बसरा में एक जलधारा खोदी और बनाई।[१२] वह पहले व्यक्ति हैं जिसने अरफ़ात में एक तालाब और एक कुंड बनाया और वहां झरने का पानी प्रवाहित किया।[१३]

इब्ने आमिर की विजय

दूसरे ख़लीफ़ा के समय शुरू हुई विजय और विजय के बाद अब्दुल्लाह बिन आमिर सत्ता में आया, उसे उस्मान द्वारा ईरान पर हमले के लिए नियुक्त किया गया था।[१४] उस समय जब वह उस्मान और मुआविया के समय सत्ता में थे, उसने ईरान के कुछ हिस्सों पर विजय प्राप्त की, जिनमें से कुछ युद्ध द्वारा और कुछ शांति (सुलह) द्वारा किया गया था।[१५] उन क्षेत्रों में से, ईरान के मध्य क्षेत्रों में शापुर, फ़सा, दारअबगर्द, रफ़संजान, इस्तख़र के शहर और सजिस्तान, सिस्तान, ज़रंज, नैशापुर, तूस, काबुल, हेरात, मर्व, बल्ख़, तालेक़ान, जुवैन, फ़ारयाब, तख़ारिस्तान और सरखस के शहर ईरान के पूर्व में थे।[१६]

जमल की लड़ाई में भागीदारी

वर्ष 35 हिजरी में इमाम अली (अ) ने अपने शासनकाल की शुरुआत में, इब्ने आमिर को बसरा के गवर्नर पद से हटा दिया और उसकी जगह उस्मान बिन हनीफ़ को नियुक्त किया।[१७] इस समय, इब्ने आमिर ने बैतुल माल की संपत्ति ले ली और मक्का चला गया। जब तल्हा और ज़ुबैर अली (अ) के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए मक्का में आयशा के साथ एकत्र हुए, तो वे सीरिया जाना चाहते थे, लेकिन इब्ने आमिर ने उन्हें इस निर्णय से मना कर दिया, और उनके सुझाव पर कि बसरा में बहुत धन है, वे एक साथ बसरा चले गए।[१८] युद्ध की तैयारी के लिए, इब्ने आमिर ने उन्हें बहुत सारी संपत्ति दी।[१९] उसने जमल की लड़ाई में इमाम अली (अ) के विरुद्ध लड़ाई लड़ी।[२०] उसका बेटा अब्दुर्रहमान भी इस युद्ध में मारा गया।[२१] सेना की हार के बाद तल्हा और ज़ुबैर के मारे जाने के बाद, इब्ने आमिर दमिश्क़ चला गया और वहीं बस गया।[२२]

मुआविया के साथ संगति

इब्ने आमिर सिफ़्फ़ीन की लड़ाई में मुआविया की सेना में था।[२३] हालांकि कुछ लोगों ने सफ़्फ़ीन की लड़ाई में उसकी भूमिका का उल्लेख नहीं किया है।[२४] इमाम अली (अ) की शहादत और इमाम हसन (अ) के प्रति लोगों की निष्ठा के बाद, मुआविया ने, मदाएन में इमाम हसन (अ) का सामना करने के लिए अब्दुल्लाह बिन आमिर को एक सेना के साथ भेजा, लेकिन मामला शांति समझौते (सुलह नामे) पर हस्ताक्षर पर पहुंच चुका था।[२५]

जब मुआविया खिलाफ़त पर पहुंचा, तो उसने अपने अनुरोध पर इब्ने आमिर को तीन साल के लिए बसरा का गवर्नर बनाया[२६] और अपनी बेटी हिंद का विवाह भी उससे कराया।[२७] इब्ने आमिर की मृत्यु मुआविया से एक वर्ष पहले वर्ष 59 हिजरी में मक्का में हुई और अरफ़ात में उनको दफ़नाया गया।[२८] अपनी मृत्यु से पहले, उसने अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर को अपना निष्पादक नियुक्त किया था।[२९]

फ़ुटनोट

  1. इब्ने साद, तबक़ात अल-कुबरा, 1410 हिजरी, खंड 5, पृष्ठ 32; इब्ने अब्दुल बर्र, अल-इस्तियाब, 1412 हिजररी, खंड 3, पृष्ठ 932।
  2. इब्ने क़ुतैबा, अल-मआरिफ़, 1992, पृष्ठ 321-320।
  3. इब्ने साद, तबक़ात अल-कुबरा, 1410 हिजरी, खंड 5, पृष्ठ 33।
  4. बलाज़री, अंसाब अल-अशराफ़, 1417 हिजरी, खंड 9, पृष्ठ 356; इब्ने अब्दुल बर्र, अल-इस्तियाब, 1412 हिजरी, खंड 3, पृष्ठ 932।
  5. इब्ने क़ुतैबा, अल-मआरिफ़, 1992, पृष्ठ 321।
  6. इब्ने साद, तबक़ात अल-कुबरा, 1410 हिजरी, खंड 5, पृष्ठ 32।
  7. इब्ने साद, तबक़ात अल-कुबरा, 1410 हिजरी, खंड 5, पृष्ठ 36; बलाज़री, अंसाब अल-अशराफ़, 1417 हिजरी, खंड 9, पृष्ठ 358।
  8. तबरी, तारीख़ अल-उम्म व अल-मुलुक, 1387 हिजरी, खंड 4, पृष्ठ 264।
  9. इब्ने साद, तबक़ात अल-कुबरा, 1410 हिजरी, खंड 5, पृष्ठ 33।
  10. इब्ने क़ुतैबा, अल-मआरिफ़, 1992, पृष्ठ 321।
  11. इब्ने कुतैबा, अल-मआरिफ़, 1992, पृष्ठ 321।
  12. बलाज़री, फ़ुतूह अल-बुलदान, 1988, पृष्ठ 348-349।
  13. इब्ने साद, तबक़ात अल-कुबरा, 1410 हिजरी, खंड 5, पृष्ठ 35।
  14. याक़ूबी, तारीख़ याकूबी, बेरूत, खंड 2, पृष्ठ 166।
  15. इब्ने साद, तबक़ात अल-कुबरा, 1410 हिजरी, खंड 5, पृष्ठ 34।
  16. याकूबी, तारीख़ याकूबी, बेरूत, खंड 2, पृ. 166-167; इब्ने साद, तबक़ात अल-कुबरा, 1410 हिजरी, खंड 5, पृष्ठ 34।
  17. मुक़द्दसी, अल बदा व अल-तारीख़, मकतब अल सक़ाफ़ा अल दीनिया, खंड 5, पृष्ठ 210।
  18. सक़्फ़ी, अल-ग़ारात, 1353 शम्सी, खंड 2, पृष्ठ 646।
  19. तबरी, तारीख़ अल-उम्म व अल-मुलूक, 1387 हिजरी, खंड 4, पृष्ठ 452।
  20. सक़फ़ी, अल-ग़ारात, 1353 शम्सी, खंड 2, पृष्ठ 646
  21. इब्ने साद, तबक़ात अल-कुबरा, 1410 हिजरी, खंड 5, पृष्ठ 36; बलाज़री, अंसाब अल-अशराफ़, 1417 हिजरी, खंड 9, पृष्ठ 358।
  22. तबरी, तारीख़ अल-उम्म व अल-मुलूक, 1387 हिजरी, खंड 4, पृष्ठ 536; इब्ने असाकर, तारीख़े मदीना दमिश्क, 1415 हिजरी, खंड 29, पृष्ठ 261।
  23. मनक़री, वक़्आ अल-सिफ़्फ़ीन, 1382 हिजरी, पृष्ठ 246 और 417।
  24. इब्ने साद, तबक़ात अल-कुबरा, 1410 हिजरी, खंड 5, पृष्ठ 36।
  25. दीनवरी, अल-अख़्बार अल-तेवाल, 1368 शम्सी, पृष्ठ 216।
  26. इब्ने साद, तबक़ात अल-कुबरा, 1410 हिजरी, खंड 5, पृष्ठ 36।
  27. बलाज़री, अंसाब अल-अशराफ़, 1417 हिजरी, खंड 9, पृष्ठ 358।
  28. इब्ने क़ुतैबा, अल-मआरिफ़, 1992, पृष्ठ 321।
  29. इब्ने अब्दुल बर्र, अल-इस्तियाब, 1412 हिजरी, खंड 3, पृष्ठ 932।

स्रोत

  • इब्ने साद, कातिब वाक़ेदी, तबक़ात अल-कुबरा, बेरूत, दार अल-कुतुब अल-इल्मिया, पहला संस्करण, 1410 हिजरी।
  • इब्ने अब्दुल बर्र, यूसुफ़ बिन अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद, अल-इस्तियाब, बेरूत, दार अल-जील, 1412 हिजरी।
  • इब्ने असाकर, अली इब्ने हसन, तारीख़े मदीना दमिश्क़, बेरूत, दार अल-फ़िक्र, 1415 हिजरी।
  • इब्ने कुतैबा, अब्दुल्लाह बिन मुस्लिम, अल-मआरिफ़, क़ाहिरा, नशरे अल-मआरिफ़, दूसरा संस्करण, 1992 ईस्वी।
  • बलाज़री, अहमद बिन याह्या, अंसाब अल-अशराफ़, बेरूत, दार अल-फ़िक्र, पहला संस्करण, 1417 हिजरी।
  • बलाज़री, अहमद बिन याह्या, फ़ुतूह अल-बुलदान, बेरूत, मकतब अल-हिलाल, 1988 ईस्वी।
  • सक़फ़ी कूफ़ी, इब्राहीम बिन मुहम्मद, अल-ग़ारात, बेरूत, अंजुमन आसारे मिल्ली, 1353 शम्सी।
  • दीनवरी, अहमद बिन दाऊद, अल-अख़्बार अल-तेवाल, क़ुम, मंशूरात अल-रज़ी, 1368 शम्सी।
  • तबरी, मुहम्मद बिन जरीर, तारीख़ अल उम्म व अल-मुलूक, बेरूत, दार अल-तोरास, द्वितीय, 1387 हिजरी।
  • मुक़द्दसी, मुतह्हिर बिन ताहिर, अल बदा व अल-तारीख, बूर सईद, मकतबा अल सक़ाफ़ अल दीनिया, बी ता।
  • मनक़री, नस्र बिन मुज़ाहम, वक़्आ सिफ़्फ़ीन, काहिरा, अल मोअस्सास अल-अरबिया अल-हदीसिया, दूसरा संस्करण, 1382 हिजरी।
  • याक़ूबी, अहमद बिन अबी याकूब, तारीख़ याकूबी, बेरुत, दार सादिर, बी ता।