प्रारूप:शतरंज
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शतरंज दो लोगों के बीच खेला जाने वाला दिमागी खेल है। न्यायशास्त्र में इसे क़िमार के साधनों और हराम माना गया है। लेकिन सय्यद अहमद ख़ांसारी और इमाम ख़ुमैनी ने इसकी मनाही को शर्त लगाने पर ही सीमित किया। कुछ तफ़सीरी रिवायतों में सूर ए बक़रा की आयत २१९ और सूर ए माएदा की आयतें ९०-९१ को शतरंज की मनाही (हराम होने) का सबूत माना गया है। साथ ही, मासूमीन अहैलेमुस्सलाम से शतरंज के हराम होने पर अलग-अलग हदीसें मौजूद हैं, और हदीसी किताबों में नर्द (पचीसी जैसा खेल) और शतरंज से जुड़ी हदीसों का अलग अध्याय है।
साहिब जवाहिर के अनुसार, शिया न्यायविद इस बात पर सहमत हैं कि शतरंज का खेल, क्योंकि यह जुआ का साधन है, हराम है। लेकिन सय्यद अहमद ख़ांसारी ने शतरंज को शर्त लगाने के मामले में हराम माना, और इमाम खुमैनी ने एक इस्तिफ़्ता के जवाब मे इज्तिहाद मे समय और स्थान की भूमिका को ध्यान में रखते हुए कहा कि अगर शतरंज को जुआ का साधन न मानकर खेल या व्यायाम के रूप में जाना जाए, तो उसका खेलना, ख़रीदना-बेचना जायज़ है।
विषय परिचय
शतरंज सबसे पुराने दिमागी खेलों में से एक है। यह दो लोगों के बीच खेला जाता है, जिसमें ३२ मोहरे (१६ सफ़ेद और १६ काले) एक चौकोर तख़्ते पर होते हैं। यह दुनिया के कई इलाक़ों में बहुत लोकप्रिय है।[१]
कहा जाता है कि शतरंज का आविष्कार भारतीयों ने किया था, और यह भारत से ईरान, और वहाँ से इस्लामी दुनिया, और फिर यूरोप पहुँचा।[२] उन्नीसवीं शताब्दी के दूसरे अर्धशतक में, दुनिया भर में शतरंज की विश्व चैंपियनशिप शुरू हुई, और बीसवीं शताब्दी में, इसे एक खेल के तौर पर पहचान मिली और इसका वर्ल्ड फेडरेशन बनाया गया।[३]
महत्व
सूर ए बक़रा की आयत 219 और सूर ए माएदा की आयत 90 और 91 में, “मैसिर” अर्थात जुआ से साफ़ मनाही की गई है,[४] और कुछ रिवायतों में, शतरंज को इसका उदाहरण माना गया है।[५] इस विषय से जुड़ी शिया रिवायती किताबो में “नर्ड और शतरंज” नाम के एक अलग अध्याय में इन हदीसों को जमा किया गया हैं।[६] कई मुस्तफ़ीज़ रिवायतों[७] में कहा गया है कि शतरंज खेलना हराम है,[८] और इनमें से कुछ रिवायतों में शतरंज खेलना साफ़ तौर पर मना है।[९]
कुछ रिवायतों में शतरंज की कड़ी निंदा की गई है; उदाहरण के लिए, एक रिवायत में, शतरंज खेलना शिर्क (बहुदेववाद) माना जाता है, इसके खिलाड़ी को सलाम करना बहुत बड़ा पाप (गुनाह कबीरा) है जो नर्क मे हमेशा के लिए डाल देता है, इसे छूना सूअर के मांस को छूने जैसा बताया गया है, और यह भी कहा गया है कि इसे खेलने वाले का स्थान नरक में है।[१०]
फ़िक़्ही हुक्म
शिया न्यायविदों ने मासूमीन अलैहेमुस्सलाम की हदीसों के आधार पर शतरंज खेलने और इसके खरीदने-बेचने के शरई हुक्म के बारे मे अपनी राय ज़ाहिर की हैः
शतरंज खेलना
तेरहवीं शताब्दी के शिया न्यायविद साहिब जवाहिर (1202-1266 हिजरी) ने कहा कि शिया न्यायविद इस बात पर सहमत हैं कि कि शतरंज, क्योंकि यह जुए के साधनों में गिना जाता है, हराम है।[११] हालांकि, चौदहवीं शताब्दी के शिया न्यायविद सय्यद अहमद ख़ांसारी (1309-1405 हिजरी) का मानना है कि शतरंज खेलना तभी हराम है जब इसमें जीत-हार शामिल हो और यह पैसे या प्रॉपर्टी से जुड़ा हो, अन्यथा यह जायज़ है।[१२]
इस्लामी गणतंत्र ईरान के संस्थापक इमाम खुमैनी (1281-1368 हिजरी) ने शुरू में दूसरे शिया न्यायविदों की तरह अपनी किताब अल-मकासिब अल-मोहर्रमा में शतरंज खेलने और उसे खरीदने-बेचने को हराम कहा था,[१३] लेकिन अपने जीवन के अंतिम दिनों में[१४] इज्तिहाद मे समय और स्थान की भूमिका पर ज़ोर देते हुए,[१५] एक इस्तिफ़्ता के जवाब में लिखा कि अगर आजकल शतरंज को दिमागी खेल या व्यायाम माना जाए और पैसे पर दांव न लगे, तो यह जायज़ है।[१६]
इसी तरह पंद्रहवी शताब्दी हिजरी के शिया न्यायविद सय्यद अली ख़ामेनेई और नासिर मकारिम शिराज़ी का मानना है कि अगर शतरंज को आम उपयोग में जुए का साधन न माना जाए और इसे एक तरह का दिमागी खेल माना जाए, तो बिना शर्त के इसे खेलना जायज़ है।[१७] हालाँकि, सय्यद अली सिस्तानी शतरंज खेलने को, चाहे शर्त के साथ हो या बिना शर्त के हो, हराम मानते हैं।[१८]
शतरंज खरीदना और बेचना
शिया न्यायविद जुआ खेलने के उपकरण खरीदने और बेचने के हराम मानने पर सहमत है[१९] और शतरंज को जुआ खेलने का एक उपकरण मानते है।[२०] शतरंज खरीदने और बेचने को हराम साबित करने के लिए, उन्होंने उन रिवायतों का हवाला दिया है जिनमें शतरंज को जुआ खेलने का उपकरण माना गया है;[२१] साथ ही ऐसी रिवायतें भी हैं जिनमें शतरंज खरीदना और बेचना साफ़ तौर पर मना किया गया है।[२२] रिवायतों के अलावा, शिया न्यायविदों ने शतरंज खरीदने और बेचने पर हराम होने को साबित करने के लिए आम सहमति (इज्माअ) और मुसलमानो की सीरत जैसे सबूतों का हवाला दिया है।[२३]
फ़ुटनोट
- ↑ मूसवी सादाती व रुस्तमी, दर्सनामा शतरंज दानिशगाह, 1393 शम्सी, पेज 8।
- ↑ मूसवी सादाती व रुस्तमी, दर्सनामा शतरंज दानिशगाह, 1393 शम्सी, पेज 8।
- ↑ मूसवी सादाती व रुस्तमी, दर्सनामा शतरंज दानिशगाह, 1393 शम्सी, पेज 8।
- ↑ सूर ए बक़रा, आयत 219 सूर ए माएदा, आयत 90-91।
- ↑ कुलैनी, अल काफ़ी, 1407 हिजरी, भाग 6, पेज 435।
- ↑ कुलैनी, अल काफ़ी, 1407 हिजरी, भाग 6, पेज 435; सब्ज़वारी, जामेअ उल अख़बार, 1413 हिजरी, पेज 431-432।
- ↑ रजाई, अल मसाइल अल फ़िक़्हीया, 1421 हिजरी, पेज 239।
- ↑ तबातबाई, रियाज़ अल मसाइल, 1422 हिजरी, भाग 13, पेज 262।
- ↑ हुर्रे आमोली, वसाइल अल शिया, 1409 हिजरी, भाग 17, पेज 321-323; तबातबाई, रियाज़ अल मसाइल, 1422 हिजरी, भाग 13, पेज 262; नजफ़ी, जवाहिर उल कलाम, 1362 शम्सी, भाग 41, पेज 43-44; नजफ़ी, जवाहिर उल कलाम, 1362 शम्सी, भाग 41, पेज 43।
- ↑ हुर्रे आमोली, वसाइल अल शिया, 1409 हिजरी, भाग 17, पेज 323।
- ↑ नजफ़ी, जवाहिर उल कलाम, 1362 शम्सी, भाग 41, पेज 43।
- ↑ ख़ांसारी, जामेअ अल मदारिक, 1355 शम्सी, भाग 3, पेज 27।
- ↑ इमाम ख़ुमैनी, अल मकासिब अल मोहर्रेमा, 1415 हिजरी, भाग 1, पेज 362 और भाग 2, पेज 18।
- ↑ क़ाज़ी ज़ादेह, इमाम ख़ुमैनी व फ़क़ाहत मबतनी बर उंसुर ज़मान व मकान, पेज 168-169।
- ↑ इमाम ख़ुमैनी, सहीफ़ा इमाम, 1389 शम्सी, भाग 21, पेज 15-151; क़ाज़ी ज़ादेह, इमाम ख़ुमैनी व फ़क़ाहत मबतनी बर उंसुर ज़मान व मकान, पेज 147-169।
- ↑ इमाम ख़ुमैनी, तौज़ीह अल मसाइल ( इमाम व मराजेअ), 1381 शम्सी, भाग 2, पेज 932-960।
- ↑ ख़ामेनई (शतरंज) पाएगाह इत्तेला रसानी दफ़्तर मक़ाम मोअज़्ज़म रहबरी; मकारिम शिराज़ी, इस्तिफ़्तेआत जदीद, 1427 हिजरी, भाग 1, पेज 157।
- ↑ सिस्तानी, तौज़ीह अल मसाइल जामेअः शतरंज व साइर वसाइल क़ुमार, मरजा ए आली क़द्र आक़ा सय्यद अली सिस्तानी की आधिकारिक साइट।
- ↑ शेख अंसारी, किताब अल मकासिब, अप्रकाशित तारीख, भाग 1, पेज 116; सुबहानी, अल मवाहिब फ़ी तहरीर अहकाम अल मकासिब, 1416 हिजरी, पेज 254।
- ↑ शेख अंसारी, किताब अल मकासिब, अप्रकाशित तारीख, भाग 1, पेज 116; सुबहानी, अल मवाहिब फ़ी तहरीर अहकाम अल मकासिब, 1416 हिजरी, पेज 254।
- ↑ हुर्रे आमोली, वसाइल अल शिया, 1409 हिजरी, भाग 17, पेज 321; सुबहानी, अल मवाहिब फ़ी तहरीर अहकाम अल मकासिब, 1416 हिजरी, पेज 255।
- ↑ हुर्रे आमोली, वसाइल अल शिया, 1409 हिजरी, भाग 17, पेज 323; सुबहानी, अल मवाहिब फ़ी तहरीर अहकाम अल मकासिब, 1416 हिजरी, पेज 255।
- ↑ सुबहानी, अल मवाहिब फ़ी तहरीर अहकाम अल मकासिब, 1416 हिजरी, पेज 254।
स्रोत
- इमाम ख़ुमैनी, सय्यद रुहुल्लाह, सहीफ़ा इमाम, तेहरान, इमाम ख़ुमैनी के कार्यों के संपादन एवं प्रकाशन संस्थान, 1389 शम्सी।
- इमाम ख़ुमैनी, सय्यद रूहुल्लाह, अल मकासिब अल मोहर्रेमा, तेहरान, इमाम ख़ुमैनी के कार्यों के संपादन एवं प्रकाशन संस्थान, 1415 हिजरी।
- इमाम ख़ुमैनी, सय्यद रूहुल्लाह, तौज़ीह अल मसाइल (इमाम व मराजेअ), क़ुम, क़ुम धार्मिक शिक्षा केंद्र के शिक्षक समुदाय, 1381 शम्सी।
- क़ाज़ी ज़ादेह, काज़िम, इमाम ख़ुमैनी व फ़क़ाहत मबतनी पर उंसुर ज़मान व मकान, नक़द व नज़र प्रकाशन, क्रमांक 5, ज़मिस्तान, 1374 शम्सी।
- क़ुरआन करीम।
- कुलैनी, मुहम्मद बिन याक़ूब, अल काफ़ी, संशोधनः मुहम्मद आख़ूंदी व अली अकबर ग़फ़्फ़ारी, तेहरान, दार अल कुतुब अल इस्लामिया, चौथा संस्करण, 1407 हिजरी।
- ख़ांसारी, सय्यद अहमद, जामेअ अल मदारिक, संशोधन: अली अकबर ग़फ़्फ़ारी, तेहरान, सदूक पुस्तकालय, दूसरा संस्करण, 1355 शम्सी।
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- नजफ़ी, मुहम्मद हसन, जवाहिर अल कलाम, बैरूत, दार एहया अल तुरास अल अरबी संस्थान, 1362 शम्सी।
- मकारिम शिराज़ी, नासिर, इस्तिफ़्तेआत जदीद, क़ुम, अल इमाम अली इब्न अबि तालिब (अ) मदरसा, 1427 हिजरी।
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- सीस्तानी, सय्यद अली, توضیح المسائل جامع: شطرنج و سایر وسایل قمار (व्यापक प्रश्नोत्तरी (फतवा): शतरंज और अन्य जुआ के साधन), माननीय मरज-ए-तक़लीद सय्यद अली हुसैनी सिस्तानी के कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट, देखे जाने की तारीख़ 10 अक्टूबर 2025।
- सुबहानी, जाफ़र, अल मवाहिब फ़ी तहरीर अहकाम अल मकासिब, क़ुम, इमाम अल सादिक़ (अ) संस्थान, 1416 हिजरी।
- हुर्रे आमोली, मुहम्मद बिन हसन, तफ़सील वसाइल अल शिया एला तहसील मसाइल अल शरीया, क़ुम, आले अल बैत अलैहेमुस सलाम संस्थान, पहला संस्करण, 1409 हिजरी।