हाबील का क़त्ल

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हाबील का क़त्ल (फ़ारसी: قتل هابیل) क़ुरआन की कहानियों में से एक है जो आदम के दो बेटों में से एक की उसके दूसरे बेटे द्वारा हत्या करने का उल्लेख करती है। धार्मिक स्रोतों में, इस हत्या को पृथ्वी पर किसी इंसान की पहली हत्या माना जाता है और कहा गया है कि क़ाबील ने आदम (अ) के उत्तराधिकारी के रूप में हाबील के उत्तराधिकार पर आपत्ति जताई थी और इस लड़ाई को समाप्त करने के लिए परमेश्वर की ओर से एक रहस्योद्घाटन हुआ, कि उन में से हर एक परमेश्वर के लिये बलिदान (क़ुर्बानी) चढ़ाए। हदीसों के अनुसार, क़ाबील के बलिदान को भगवान ने स्वीकार नहीं किया। इसलिए, आदम के उत्तराधिकारी की नियुक्ति के दौरान, क़ाबील को हाबील से ईर्ष्या हुई और उसने हाबील की हत्या कर डाली। सूर ए मायदा की आयत 31 के अनुसार, ईश्वर ने क़ाबील को एक कौए के माध्यम से हाबील को दफ़नाने की विधि सिखाई।

नैशापूरी द्वारा लिखित किताब क़ेसस अल अम्बिया की पांडुलिपि (लिखित: 10वीं शताब्दी हिजरी) में, हाबील के शरीर को छिपाने के लिए क़ाबील के भटकने की एक लघु तस्वीर।[१]

पृथ्वी पर पहली हत्या

हाबील की हत्या को पृथ्वी पर पहली हत्या माना गया है।[२] सूर ए मायदा की आयत 27 से 31 तक हाबील की हत्या की कहानी से संबंधित हैं। ईश्वर इन आयतों में कहता है कि हज़रत आदम के दोनों बेटों ने ईश्वर के समीप (तक़र्रुब) जाने के लिए एक कार्य किया उनमें से एक का स्वीकार किया गया और दूसरे का स्वीकार नहीं किया गया। जिस भाई का कार्य स्वीकार नहीं हुआ, उसने दूसरे को जान से मारने की धमकी दी और उसे मारने की क़सम खाई और अंत में उसकी हत्या कर डाली।[३] टीकाकारों के अनुसार, हत्या करने वाले भाई का नाम क़ाबील था और जिसकी हत्या हुई उसका नाम हाबील था।[४]

हत्या का उद्देश्य और कारण

हदीसों में, हाबील की हत्या का कारण हज़रत आदम (अ) के उत्तराधिकारी की नियुक्ति के मामले में उनके भाई की उनसे ईर्ष्या बताई गई है।[५] कुछ शोधकर्ताओं के अनुसार जब ईश्वर ने हज़रत आदम (अ) पर रहस्योद्घाटन किया कि अगले उत्तराधिकार (वसी) के रूप में हाबील को इस्मे आज़म को बताए, क़ाबील ने विरोध किया; क्योंकि वह सबसे बड़ी संतान था और मानता था कि उत्तराधिकार और संरक्षकता उसके लिए होनी चाहिए; दूसरी ओर, उसने हाबील में आदम की व्यक्तिगत रुचि और प्रेम को उनकी पसंद का कारण माना, न कि ईश्वर के आदेश को; इस कारण से, इस विवाद को समाप्त करने के लिए, एक रहस्योद्घाटन हुआ कि हर किसी को भगवान के लिए बलिदान देना चाहिए।[६]

हाबील और क़ाबील के बलिदान का विवरण

हदीसों के अनुसार, क़ाबील एक किसान था और उसने बलिदान के लिए अपनी फसल में से कुछ ख़राब फसल ली, क़ाबील जिसके पास पशुधन था, उसने बलिदान के लिए सबसे अच्छी भेड़ों में से एक ली; बलिदान को जलना ईश्वर द्वारा उसकी स्वीकृति का संकेत था, और इस प्रकार, हाबील का बलिदान स्वीकार कर लिया गया, लेकिन क़ाबील का बलिदान स्वीकार नहीं किया गया।[७]

ईर्ष्या, हाबिल की हत्या का कारण

इस्लामिक हदीसों के अनुसार, हाबील का बलिदान स्वीकार किए जाने के बाद, क़ाबील उनसे ईर्ष्या करने लगा और उसने क़सम खाई कि वह हाबील को मार डालेगा।[८] क़ुरआन की आयतों के अनुसार, हाबील ने तक़वा ए एलाही को बयान करते हुए कहा कि भगवान पवित्र लोगों के बलिदान को स्वीकार करता है, उन्होंने क़ाबील को संबोधित करते हुए कहा, “यदि तुम मेरी हत्या करने का इरादा रखते हो, तो मैं तुम्हारी हत्या का प्रयत्न कभी नहीं करूँगा और यह पाप भी नहीं करूँगा; उन्होंने क़ाबील को यह भी चेतावनी दी कि यदि वह हत्या करेगा, तो वह ज़ालिमों में से एक होगा और नर्क का पात्र होगा।[९] तारीख़े तबरी के (लिखित: वर्ष 303 हिजरी) के अनुसार, जब हाबील अपनी भेड़ें चराने के लिए एक पहाड़ पर गए, जब वह आराम कर रहे थे, क़ाबील ने उन पर हमला किया और उनके सिर पर पत्थर से वार करके उसकी हत्या कर दी।[१०]

कुछ लोगों ने कहा है कि ईर्ष्या और ईश्वर के प्रति बलिदान का कारण दो भाइयों के लिए पत्नी का चुनाव है और उन्होंने कहा है कि ईश्वर द्वारा आदम (अ) को क़ाबील की जुड़वां बहन से हाबील का विवाह करने का आदेश दिया गया था; क़ाबील भी हाबील की जुड़वां बहन से शादी करने के लिए बाध्य था। क़ाबील ने अपने पिता के आदेश का विरोध किया क्योंकि उसकी बहन हाबील की बहन से अधिक सुंदर थी; इसके बाद, भगवान ने दो भाइयों को बलिदान देने का आदेश दिया ताकि जिसका बलिदान स्वीकार किया जाए वह क़ाबील की बहन से विवाह करे, और जब हाबील का बलिदान स्वीकार कर लिया गया, तो क़ाबील, हाबील से ईर्ष्या करने लगा और हाबील की पत्थर से हत्या कर दी।[११]

हाबील और क़ाबील के बलिदान को ईश्वर को अर्पित करने और हाबील की हत्या की कहानी का उल्लेख तौरेत[१२] में भी किया गया है।

हाबील का दफ़न

तीसरी शताब्दी हिजरी के इतिहासकार मुहम्मद बिन जरीर तबरी के अनुसार, हाबील के शरीर को छिपाने के तरीक़े में क़ाबील की लाचारी और मानव शरीर को दफ़नाने के तरीक़े की अज्ञानता के कारण, जंगली जानवरों द्वारा शरीर को फाड़े जाने का खतरा था।[१३]

सूर ए मायदा की आयत 31 के अनुसार, क़ाबील को यह सीखने के लिए कि शरीर को कैसे दफ़नाया जाए, भगवान ने कौआ भेजा ताकि ज़मीन से मिट्टी को हटाए और दूसरे कौवे के निर्जीव शरीर को छिपाए या अपने शिकार के कुछ हिस्से को छिपाकर क़ाबील को यह दिखाए कि अपने भाई के शव को कैसे दफ़नाए।[१४]

फ़ुटनोट

  1. निशापुरी, क़ेसस अल अम्बिया, पांडुलिपि।
  2. मकारिम शिराज़ी, तफ़सीरे नमूना, 1371 शम्सी, खंड 4, पृष्ठ 345।
  3. सूर ए माएदा, आयत 27-31।
  4. शेख़ तूसी, अल तिब्यान, बी ता, खंड 3, पृष्ठ 492; तबातबाई, अल मीज़ान, 1390 हिजरी, खंड 5, पृष्ठ 315; मकारिम शिराज़ी, तफ़सीरे नमूना, 1371 शम्सी, खंड 4, पृष्ठ 348।
  5. अय्याशी, तफ़सीर अल अय्याशी, 1380 हिजरी, खंड 1, पृष्ठ 312।
  6. सादेक़ी फ़ेदकी, इरतेदाद; बाज़गश्त बे तारीकी, 1388 शम्सी, पृष्ठ 270।
  7. कुलैनी, अल-काफ़ी, 1407 हिजरी, खंड 8, पृष्ठ 113।
  8. अय्याशी, तफ़सीरे अल-अय्याशी, 1380 हिजरी, खंड 1, पृष्ठ 312।
  9. सूर ए माएदा, आयत 29।
  10. अल तबारी, तारीख़ अल उम्म व अल मुलूक, 1387 हिजरी, खंड 1, पृष्ठ 138।
  11. तूसी, अल तिब्यान, बी ता, खंड 3, पृष्ठ 493; अल तबरी, तारीख़ अल उम्म व अल मुलूक, 1387 हिजरी, खंड 1, पृष्ठ 138।
  12. तौरेत, किताबे तकवीन, अध्याय 4, छंद 3-8।
  13. अल तबरी, तारीख़ अल उम्म व अल मुलूक, 1387 हिजरी, खंड 1, पृष्ठ 86।
  14. मकारिम शिराज़ी, तफ़सीरे नमूना, 1371 शम्सी, खंड 4, पृष्ठ 351।


स्रोत

  • सादेक़ी फ़ेदकी, जाफ़र, इरतेदाद, बाज़गश्त बे तारीकी; निगरिशी बे मौज़ूअ इरतेदाद अज़ निगाहे अज़ निगाहे क़ुरआने करीम, पहला संस्करण, क़ुम, पेज़ोहिशगाहे उलूम व फ़र्हंगे इस्लामी, 1388 शम्सी।
  • तबातबाई, सय्यद मुहम्मद हुसैन, अल मीज़ान फ़ी तफ़सीर अल कुरआन, दूसरा संस्करण, बेरूत, मोअस्सास ए अल आलमी लिल मतबूआत, 1390 हिजरी।
  • तबरी, मुहम्मद बिन जरीर, तारीख़े अल उम्म व अल मुलूक, मुहम्मद अबुल फ़ज़्ल इब्राहीम द्वारा शोध, दूसरा संस्करण, बेरूत, दार अल-तोरास, 1387 हिजरी।
  • तूसी, मुहम्मद बिन हसन, अल तिब्यान फ़ी तफ़सीर अल-कुरआन, बेरूत, दारुल एहिया अल तोरास अल-अरबी, बी ता।
  • अय्याशी, मुहम्मद बिन मसऊद, अल-तफ़सीर (तफ़सीर अल-अय्याशी), शोध: हाशिम रसूली, पहला संस्करण, तेहरान, मकतबा अल इल्मिया अल इस्लामिया, 1380 हिजरी।
  • कुलैनी, मुहम्मद बिन याक़ूब, अल-काफ़ी, तेहरान, दार अल कुतुब अल-इस्लामी, 1407 हिजरी।
  • मकारिम शिराज़ी, नासिर, तफ़सीरे नमूना, तेहरान, दार अल कुतुब अल इस्लामिया, 1371 शम्सी।
  • निशापुरी, अबू इसहाक़, क़ेसस अल अम्बिया (पांडुलिपि)।